ईश्वर दुबे
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रायपुर, सितंबर 2026/भारत रत्न एवं प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार और फिल्मकार डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर आज लोक भवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. हजारिका के कला, संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण किया गया तथा उनकी कालजयी रचनाओं और जीवन-यात्रा को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि उसमें समाज, संस्कृति, प्रकृति, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता की गहरी अभिव्यक्ति थी। उन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।
सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों ने डॉ. भूपेन हजारिका के जीवन एवं रचनाओं पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। नृत्य के माध्यम से उनकी रचनाओं और जीवन-यात्रा को प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया। महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, पंडरी, रायपुर के कलाकारों ने डॉ. हजारिका द्वारा गाए प्रसिद्ध गीतों की भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति दी।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
पहली बार लोकरंग पर्व में दिखी सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक, पंथी और नाचा-गम्मत ने भी मोहा दर्शकों का मन
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया।
कार्यक्रम में श्री विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया।
इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। श्री नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुश्री आरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुश्री रमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।
लोककलाओं को मंच देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी : डॉ. कन्नौजे
लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है।
लोकविरासत के विविध रंगों का संगम बना लोकरंग
तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है।
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।
सहकारिता मंत्री ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा
मंत्री श्री कश्यप ने सहकारी सप्ताह 2026 पर आधारित काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन
रायपुर, सितंबर 2026/सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। मंत्री श्री केदार कश्यप ने बैठक में सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है।
को-ऑपरेटिव सेक्टर पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन
बैठक में मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा। उन्होंने को-आपरेटिव बैंको में रिक्त पदों की समीक्षा की। उन्होंने रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री ने सहकारी सप्ताह 29 जून से 06 जूलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ में को-ऑपरेटिव सेक्टर में आयोजित विविध कार्यक्रम पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का विमोचन किया गया।
पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने दिए निर्देश
बैठक में मंत्री श्री कश्यप ने अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।
16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित
मंत्री श्री कश्यप ने अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 90 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री श्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया। ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया।
718 गोदामों का निर्माण पूर्ण
मंत्री श्री कश्यप ने 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व त्प्क्थ् योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत आबंटित 725 गोदामों में 718 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 7 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया।
अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों को दिलाने निर्देश
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए। धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए। बैठक के अंत में मंत्री श्री कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।
इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं श्री रमेश शर्मा, अपेक्स बैंक महाप्रबंधक एवं प्रभारी प्रबंध संचालक श्री युगल किशोर, अपर पंजीयक श्री यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित थे।
दुर्ग में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे मुद्दों पर सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने दिए सुझाव
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार, 08 सितंबर को दुर्ग में यूसीसी प्रारूप समिति द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती (डॉ.) ज्योति रानी सिंह की उपस्थिति में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
पारंपरिक मान्यताओं और कानूनी सुधारों पर चर्चा
बैठक के दौरान विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संघों के पदाधिकारियों ने यूसीसी के पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपने विचार रखे। इस दौरान पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन कर संहिता का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
विविध संगठनों की रही सक्रिय सहभागिता
इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से साहू समाज, मनवा कुर्मी समाज, कंवर समाज, चंद्रनाहू कुर्मी समाज, गोंडवाना सेवा समिति, आंध्र समाज, हलवा समाज, ताम्रकार समाज, यादव समाज, कंडरा आदिवासी समाज एवं मुस्लिम समाज युवा प्रभाग के पदाधिकारी, सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना गोंड महासभा, बीएसपी एसटी कर्मचारी संघ, भारतीय बौद्ध महासभा और राम मंदिर ट्रस्ट बेमेतरा के प्रतिनिधि शामिल थे। इसी प्रकार नागरिक एवं व्यावसायिक मंच से वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंच, प्रज्ञा वरिष्ठ नागरिक संघ, पेंशनर्स संघ, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सदस्य सुझाव देने वालों में शामिल थे।
डिजिटल माध्यम से भी आमंत्रित किए गए सुझाव
बैठक में एडवोकेट प्रांजल शर्मा ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (च्च्ज्) के माध्यम से समान नागरिक संहिता के स्वरूप और प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। समिति ने आम जनता और संगठनों से सुझाव प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाईट http://ucc.cgstate.gov.in एवं ई-मेल This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. भी साझा की है।
बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सचिव एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्याम धावड़े, दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, एडीएम वीरेंद्र सिंह और एसडीएम प्रफुल्ल गुप्ता सहित दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
250 हेक्टेयर खेतों को मिला संजीवनी जल
नारायणपुर के 6 गांवों में रबी फसलों की लहराएगी बहार
रायपुर, सितंबर 2026/ जल संसाधन विभाग के समयबद्ध प्रयासों और बिंजली जलाशय की नहरों के जीर्णाेद्धार अभियान ने बस्तर अंचल के कृषि परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। विभाग द्वारा जल संसाधन संभाग, नारायणपुर के माध्यम से नहरों की मरम्मत और गाद सफाई का वृहद कार्य कराया गया है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। इस व्यवस्था के सुचारू होने से नारायणपुर विकासखंड के खैराभाट, पालकी, तेलसी, करलखा, गुरिया और सुलेंगा गांवों की लगभग 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा प्राप्त हुई है।
समय के साथ बिंजली जलाशय की नहरों में जमा हुई गाद और अवरोधों के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था, जिससे खेतों तक पानी पहुँचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य के बाद अब नहरों में पानी का प्रवाह निर्बाध रूप से हो रहा है, जिससे किसानों की मानसून पर निर्भरता काफी कम हुई है। इस जल सुरक्षा से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता में भी भारी सुधार की संभावना बढ़ गई है। जिन खेतों में पहले पानी की कमी के कारण खेती सीमित रहती थी, वहाँ अब किसान दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई गति मिली है और किसानों के जीवन में एक सुखद व सकारात्मक बदलाव आया है।
रायपुर, सितंबर 2026/ राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा आज नेवरा स्थित पी. एम श्री कन्या शाला में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व व कृतित्व को नमन करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी गढ़ते हैं। मस्तिष्क और बुद्धि के सर्वांगीण विकास के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक युग तक, जब भी समाज या राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां आई हैं, गुरुजनों ने ही सही दिशा दिखाने का कार्य किया है। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शेड, बाउंड्रीवॉल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं।
गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार
शिक्षक सम्मान समारोह और अपने गुरुजनों से मुलाकात का स्मरण करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का मूल आधार है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवादों के निपटारे और सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका होती थी। वर्तमान तकनीकी युग में व्यस्तता भले ही बढ़ी है, लेकिन समाज को समय देकर ग्रामीण व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू
इस दौरानमंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग की छवि सुधारने के लिए किए गए क्रांतिकारी फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मैन्युअल से ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करते समय हुई त्रुटियों के जल्द निपटारे हेतु अधिकारों का विस्तार कर तहसीलदारों को भी शक्तियां दी गई हैं। इसके अलावा द्वितीय अपील की सुनवाई का अधिकार अब कमिश्नर के स्थान पर सीधे जिला कलेक्टर को सौंपा गया है। अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए 5 डिसमिल से कम जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, जबकि फर्जी रजिस्ट्री रोकने हेतु तहसील कार्यालयों को पंजीयन कार्यालय से ऑनलाइन जोड़कर रजिस्ट्री के समय ओटीपी अनिवार्य किया गया है। अब रजिस्ट्री के तुरंत बाद ऑटोमैटिक नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी और किसानों को किसान पुस्तिका के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटकर इसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। भू-स्वामी अपने जीवनकाल में ही भूमि का बंटवारा कर सकते हैं। वहीं, भारतमाला जैसी बड़ी परियोजनाओं में भू-माफियाओं के अनुचित लाभ को रोकने के लिए अधिसूचना जारी होते ही संबंधित क्षेत्र की खरीद-बिक्री पर रोक का प्रावधान किया गया है, ताकि वास्तविक किसानों को पारदर्शी मुआवजा मिल सके।
उच्च शिक्षा विभाग के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू कर शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था हेतु 40 गांवों के लिए 2 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। साथ ही 100 गांवों के तालाबों में पक्के चबूतरों का निर्माण, 40 गांवों में महतारी सदन का निर्माण और सरस्वती शिशु मंदिर जैसी संस्थाओं के लिए भवन निर्माण स्वीकृत कराए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि जनसेवा के इन कार्यों में वरिष्ठों और गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव सर्वाेपरि रहेगा।
अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें
800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे सीबीजी प्लांट
रायपुर सितंबर 2026/ शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की।
सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर
मुख्यमंत्री श्री साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं।
किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर
धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।
सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।
महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।
बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। ‘नियद नेल्ला नार 2.0‘ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान‘ के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना‘ तैयार की गई है।
बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है।
लोकरंग पर्व के दूसरे दिन मुक्ताकाशी मंच पर जीवंत हुईं लोकगाथाएं और लोकपरंपराएं
कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोकजीवन की सहज संवेदनाएं और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के रंगों से ‘लोकरंग पर्व’ का दूसरा दिन सराबोर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी जैसी पारंपरिक लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। श्री व्यासनाथ योगी एवं साथियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा की कथात्मकता, भाव और गायन परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान लोकसंगीत और पारंपरिक गायन शैली ने वातावरण को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।
इसके बाद श्री विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के लोकजीवन से गहरे जुड़ी ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं श्री बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, लोकभावनाओं और सामाजिक सरोकारों की सहज झलक दिखाई दी।
लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन पर जोर
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और प्रोत्साहन पाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।
उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इनकी प्रस्तुति और संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ‘लोकरंग पर्व’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।
सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पूर्व संचालक श्री अनिल कुमार साहू, उपसंचालक श्री उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
लोकविधाओं को एक मंच पर ला रहा लोकरंग पर्व
‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोकपरंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है।
मुक्ताकाशी मंच पर गूंजे लोकसुरों और कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के भावपूर्ण सुरों ने लोकरंग पर्व के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।
75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष
रायपुर, सितंबर 2026। ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने की।
बैठक में बस्तर राजपरिवार के श्री कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ श्री तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष
बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के श्री बीरो मांझी ने श्री अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के श्री समुन्द मांझी ने श्री बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर श्री बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।
नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष श्री बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।
केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत
बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही।
उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प
बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया।
उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया।
श्री भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा।
1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
रायपुर सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
दंतेवाड़ा के शिक्षक कैलाश देवांगन का बिजली बिल हुआ शून्य, पा रहे स्वच्छ ऊर्जा का लाभ
रायपुर, सितंबर 2026/ केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से लोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपना रहे हैं, बल्कि अपने बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय बचत कर रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के बड़े तुमनार निवासी और मोफलनार माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक श्री कैलाश कुमार देवांगन इसके प्रेरक उदाहरण बने हैं।
गाँव के पहले हितग्राही बने कैलाश, मासिक खर्च में भारी बचत
कैलाश कुमार देवांगन अपने गाँव के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने मार्च 2026 में इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। उन्होंने बताया कि पहले उनके 4 सदस्यीय परिवार का मासिक बिजली बिल करीब 1,000 से 1,200 (लगभग 200 यूनिट खपत) आता था। लेकिन सोलर प्लांट लगने के बाद से उनका बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है।
सरकारी सब्सिडी से आसान हुई राह
श्री देवांगन को मार्च माह में आयोजित शिक्षकों की एक बैठक के दौरान इस योजना की विस्तृत जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे आम परिवारों के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना बेहद आसान हो गया है। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने बिजली बिल को कम करने की अपील की है।
आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण भी
शिक्षक कैलाश देवांगन का मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक बचत का ज़रिया नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान देती है। भविष्य में बिजली की बढ़ती माँग और दरों को देखते हुए सौर ऊर्जा एक टिकाऊ विकल्प है। जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग ने भी जिले के नागरिकों से ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से जुड़कर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया है।
मुर्गी पालन से दंतेवाड़ा की रामबती ने कमाए 25 हजार रुपये
रायपुर, सितंबर 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक प्रभावी जरिया बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।
हिम्मत और मेहनत की मिसाल बनीं रामबती
दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन की शुरुआत की। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो जाने से रामबती को झटका ज़रूर लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करके उन्होंने अब तक करीब ₹25,000 की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। रामबती अपने तैयार मुर्गों को ₹500 प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है।
ब्रुडिंग केंद्रों से महिला उद्यमियों को दोहरा लाभ
योजना के अंतर्गत एक विशेष पहल भी शुरू की गई है, जिसमें क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के ज़ीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है, जिससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है।
450 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार
जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि रामबती जैसी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा किया है।
प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से जरूरत के समय मिल रहा संबल, प्रधानमंत्री आवास और महतारी वंदन योजना का भी मिला लाभ
रायपुर, 08 सितंबर 2026/ शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और स्थायित्व का आधार बन रही हैं। योजनाओं का प्रभाव तब और अधिक सार्थक दिखाई देता है, जब एक परिवार को आजीविका के साथ आवास और सामाजिक सुरक्षा का लाभ एक साथ मिलता है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पतरापारा निवासी शंभू बारी का परिवार इसका उदाहरण है।
भूमिहीन कृषि मजदूर शंभू बारी को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। सीमित आय और अनिश्चित रोजगार के बीच मिलने वाली यह सहायता परिवार के लिए जरूरत के समय महत्वपूर्ण सहारा बनी है। शंभू बारी बताते हैं कि इस राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों, बीमारी के समय उपचार और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में करते हैं।
भूमिहीन परिवार को मिला पक्के आवास का सहारा
शंभू बारी का परिवार लंबे समय तक स्वयं के पक्के मकान के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करता रहा। शासन की पहल से उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का आवास भी मिला। अब उनका परिवार अपने सुरक्षित और पक्के घर में रह रहा है। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे सुरक्षित आशियाने के सपने का साकार रूप है।
महतारी वंदन योजना से परिवार की महिलाओं को आर्थिक संबल
परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महतारी वंदन योजना भी सहायक बन रही है। शंभू बारी की पत्नी को योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि घरेलू जरूरतों और छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।
कई योजनाओं का लाभ बना मजबूत जीवन का आधार
शंभू बारी कहते हैं कि अलग-अलग योजनाओं से मिले लाभ ने उनके परिवार की परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाया है। भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में मिलने वाली वार्षिक आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर और पत्नी को मिल रही महतारी वंदन योजना की राशि ने परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है।
शंभू बारी ने कहा, “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से हमें साल में 10 हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि हमारे जरूरी कामों में बहुत मदद करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से हमें पक्का घर मिला है और मेरी पत्नी को महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं। इन योजनाओं से हमारे परिवार को बहुत सहारा मिला है।”
शंभू बारी ने इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके जैसे जरूरतमंद परिवारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि पक्के आवास और सम्मानजनक जीवन की मजबूत नींव भी प्रदान की है।
शंभू बारी के परिवार की कहानी यह दर्शाती है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की राह खुलती है। भूमिहीन परिवार को आर्थिक सहायता के साथ पक्का आवास और महिला सदस्य को नियमित आर्थिक सहयोग मिलना, समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था की सार्थक तस्वीर प्रस्तुत करता है।