संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम

रायपुर,  सितंबर 2026/संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम आज राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं का राज्यपाल ने सम्मान भी किया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह अध्याय उन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में कदम रखते ही छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा की उत्तराधिकारी बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश प्रदान किया है।

श्री डेका ने महिलाओं की तुलना पानी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज भी अधूरा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने पास जो कुछ है, उससे संतुष्ट रहें, लेकिन अपने भविष्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहें। जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर और क्षेत्र हैं। यदि किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है तो निराश होने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ उठाकर कर आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि जीवन सतत सीखने की प्रक्रिया है और हम जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं , तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोले हैं, लेकिन तकनीक पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। इंटरनेट से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम समाज, अपने पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। जीवन अनमोल है, इसलिए इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कठोर परिश्रम करना चाहिए। निरंतर प्रयासों से भविष्य निश्चित रूप से बेहतर बनेगा।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है, जिसे पैसों में नहीं मापा जा सकता। शिक्षकों को भी अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे वे उनसे प्रेरणा ले सकें।

उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक योगदान करें। उनके ये छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कुशाग्रता से महाविद्यालय का नाम रोशन किया।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।

सेक्टर-18 में 40 एकड़ में आकार लेगा राष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान, मुख्यमंत्री की उपस्थिति में लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी

छत्तीसगढ़ के युवाओं को अपने ही प्रदेश में प्रबंधन, कौशल विकास और आधुनिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा के मिलेंगे राष्ट्रीय स्तर के अवसर

दो से तीन वर्षों में शुरू होगा पहला बैच, पूर्ण विकसित होने पर लगभग 10 हजार विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

नवा रायपुर को एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

रायपुर, 1 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को उच्च शिक्षा, कौशल और ज्ञान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भूमि की रजिस्ट्री भी पूर्ण कर ली गई। इसके साथ ही नवा रायपुर में NMIMS की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर न जाना पड़े तथा उन्हें अपने ही प्रदेश में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के समान अवसर मिलें, इस दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार उपस्थित थे।

40 एकड़ में विकसित होगा अत्याधुनिक कैंपस

नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर NMIMS का आधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई थी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हुए आज लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि प्रदेश के विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे पहले ही मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्थान के पूर्ण रूप से विकसित होने पर यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

युवाओं के लिए खुलेंगे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए द्वार

NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रदेश के युवाओं को प्रबंधन, कौशल विकास तथा आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही राज्य में प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध होंगे।

इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए देश के बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे नवा रायपुर में विविधतापूर्ण और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।

शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल और उद्यमिता को भी मिलेगी गति

NMIMS की स्थापना का प्रभाव केवल उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित होंगे। विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय से उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक और औद्योगिक क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी विस्तार मिलेगा। विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए कुशल युवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

नवा रायपुर की राष्ट्रीय स्तर के एजुकेशन हब के रूप में मजबूत होगी पहचान

राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी से युक्त शहर के साथ ही एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का यहां स्थापित होना इस परिकल्पना को नई गति देगा।

देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के आने से नवा रायपुर के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवेश का विस्तार होगा। इसके साथ ही शिक्षा से जुड़ी सहायक गतिविधियों, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। इससे नवा रायपुर की पहचान देश के उभरते हुए प्रमुख शिक्षा केंद्रों में और मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान न केवल प्रदेश के हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा, बल्कि नवा रायपुर को राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, कौशल और ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योग की अधिक भागीदारी का किया आह्वान

छत्तीसगढ़ के पांच खनिज ब्लॉक महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला में शामिल

रायपुर  अगस्त 2026/खान मंत्रालय ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला पर रोड शो का आयोजन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में तथा कोयला एवं खान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे उपस्थित रहे। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों तथा भारत के खनन एवं औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अधिक निवेश, खनिज संसाधनों के त्वरित विकास तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की खनिज क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हितधारकों को राज्य सरकार की ओर से निवेश को सुगम बनाने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने भारत के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन संसाधनों की खोज और विकास में तेजी लाने तथा उद्योग एवं निवेशकों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भारत की खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार तथा नई खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के विकास की राज्य की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, सतत अवसंरचना मजबूत हो सकती है और स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की अवसंरचना, कुशल कार्यबल और संस्थागत सहयोग दीर्घकालिक निवेश के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज क्षमता का पता लगाने का आह्वान किया तथा तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेज परिचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है तथा अब तक प्रस्तुत 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 8वीं श्रृंखला में नौ राज्यों में फैले 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 17 समग्र लाइसेंस और 3 खनन पट्टा ब्लॉक हैं तथा ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे खनिज सम्मिलित हैं, जिनमें से पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।

हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर

रायपुर  अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की, उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं ।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़

सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

नियद नेल्लानार से गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

बस्तर में पर्यटन, रोजगार और आजीविका के खुल रहे नए द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर,  अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ

TIN पोर्टल से टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को मिलेगा पारदर्शी और उचित मूल्य

LME आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार भाव के अनुरूप भुगतान, DBT से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि

डिजिटल रजिस्ट्रेशन, क्यूआर आधारित सत्यापन, एसएमएस अलर्ट और रियल टाइम मॉनिटरिंग से पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी

रायपुर,  अगस्त 2026// प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन श्री सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।

यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।

टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी

TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।

06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित

सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा

कोरंडम से बस्तर को मिलेगी नई पहचान, खनन से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन

25 वर्षों बाद बीजापुर के कुचनूर में फिर शुरू हुआ कोरंडम खनन, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

रायपुर,  अगस्त 2026/ नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन

प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।

खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार

कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।

कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन

कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।

‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार

कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।

नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी

बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

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