राज्य के 1428 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को पीपीई किट वितरित, 1374 के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए गए, 139 कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण

स्वच्छता कर्मियों हेतु आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए 47 ईआरएसयू और 14420 हेल्पलाइन का संचालन

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नगरीय निकायों और विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को दी बधाई, कहा स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य परिस्थितियां सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर.  सितम्बर 2026. सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (NAMASTE) योजना के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन की रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। छत्तीसगढ़ के साथ आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से देश में पहले स्थान पर हैं।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने इस उपलब्धि पर नगरीय निकायों, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों व 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर कार्य परिस्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देकर जोखिमपूर्ण कार्यों को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण कार्य का वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ का 'नमस्ते' योजना के क्रियान्वयन में संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करना स्वच्छता कर्मियों के सत्यापन, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण के लिए यहां किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि स्वच्छता कर्मियों के सम्मान, सुरक्षित स्वच्छता व्यवस्था और स्वच्छता कार्यों के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य करने की ओर छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक 1487 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण कर 1465 कर्मियों का सत्यापन किया गया है। 169 नगरीय निकायों में 1428 कर्मियों को पीपीई (PPE) किट वितरित किए गए हैं और 1374 कर्मियों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया गया है। वहीं 139 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण तथा 923 स्वच्छता कर्मियों को कार्यशाला आयोजित कर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल 14 जुलाई को राज्य के सभी नगरीय निकायों में 'नमस्ते' दिवस का आयोजन किया गया था, जिनमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की थी। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण (OST), कर्मचारियों का सम्मान तथा पीपीई किट एवं आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए थे।

'नमस्ते' योजना के अंतर्गत वेस्ट पिकर्स के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। राज्य में 8527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 6799 का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 991 वेस्ट पिकर्स को पीपीई किट भी दिए जा चुके हैं। वहीं 512 वेस्ट पिकर्स को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अभी 6287 और वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता कर्मियों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में 47 ईआरएसयू (Emergency Response Sanitation Units) स्थापित किए गए हैं। 14 नगर निगमों, 24 जिला मुख्यालयों तथा 9 द्वितीय सर्वाधिक जनसंख्या वाले निकायों में ये ईआरएसयू स्थापित किए गए हैं। इनमें से 39 ईआरएसयू को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ईआरएसयू एवं 14420 हेल्पलाइन के माध्यम से आपातकालीन स्वच्छता सेवाओं के लिए त्वरित और सुरक्षित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जा रही है।

जशपुर के रंजीता स्टेडियम में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब, गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति

श्रीकृष्ण के आदर्शों से प्रेरणा लेकर प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करें-श्री राजेश अग्रवाल

रायपुर, सितंबर 2026। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आस्था और उल्लास से सराबोर जशपुर के रंजीता स्टेडियम में आयोजित भव्य दही हांडी उत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सम्मिलित हुए। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों की मौजूदगी में उत्सव का उल्लास देखते ही बना। पूरे स्टेडियम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उत्सव में शामिल होकर श्रद्धालुओं और गोविंदाओं का उत्साहवर्धन किया तथा सभी को दही हांडी उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, करुणा, धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। दही हांडी जैसे पारंपरिक उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।

गोविंदाओं ने दिखाया साहस और सामूहिक शक्ति

उत्सव का मुख्य आकर्षण गोविंदा टोलियों द्वारा दही हांडी फोड़ने का रोमांचक प्रदर्शन रहा। एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर ऊंचाई तक पहुंचते गोविंदाओं ने साहस, विश्वास, अनुशासन और सामूहिक प्रयास का शानदार परिचय दिया। दही हांडी फूटते ही पूरा स्टेडियम ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव और मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति, सहयोग और विश्वास का प्रतीक है। जब समाज एकजुट होकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। गोविंदाओं की टोली का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे पर विश्वास करते हुए सामूहिक प्रयास करता है और यही एकजुटता समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और विविधतापूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से है। दही हांडी जैसे उत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इन परंपराओं को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।”

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश में समाज को सही दिशा देने की अद्भुत शक्ति है। प्रेम, सद्भाव, कर्तव्य और लोककल्याण के उनके आदर्श आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।

भक्ति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

रंजीता स्टेडियम में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्सव में शामिल हुए। गोविंदाओं की टोलियों के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों का उत्साह देखते ही बना।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा, “धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे अवसरों पर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ उत्सव मनाते हैं। इससे आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है। हमें भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर प्रेम, शांति और भाईचारे को आगे बढ़ाना चाहिए।”

आयोजकों, श्रद्धालुओं और गोविंदा टोलियों को दी शुभकामनाएं

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दही हांडी उत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, गोविंदा टोलियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

उन्होंने कहा कि जशपुर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं जिले की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन जशपुर की सांस्कृतिक जीवंतता को प्रदेश और देश के सामने प्रस्तुत करने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

दही हांडी उत्सव के दौरान कृष्ण भक्ति से जुड़े गीतों और भजनों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। “तेरे नैना हेरत हेरत, माखन चुराए नंदलाल…” जैसे भक्ति भाव से वातावरण गूंजता रहा। उमंग, उल्लास और कृष्ण भक्ति से सजे इस भव्य उत्सव ने जशपुर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री

प्रदेशभर 845 खिलाड़ियों और 150 से अधिक ऑफिशियल्स ने की भागीदारी

बिलासपुर संभाग बना ओवरऑल चैंपियन

रायपुर.  सितम्बर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान करने की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज बिलासपुर में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल के मैदान में संघर्ष करने और पसीना बहाने वाले खिलाड़ी ही सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते हैं। जो खेलेगा, वही खिलेगा। आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी खेल और खिलाड़ियों के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं। खेलो इंडिया के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का अवसर भी मिला है। राज्य सरकार ने बंद हो चुके खेल अलंकरण को पुनः प्रारंभ करने के साथ ही उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है।

श्री साव ने बताया कि हाल ही में 29 अगस्त को राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ 74 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष योजना के अंतर्गत इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से खेलों के विकास के साथ ही स्पोर्ट्स साइंस और खेल अधोसंरचना को भी मजबूत किया जाएगा।

3800 अंकों के साथ बिलासपुर बना ओवरऑल चैंपियन

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों के 845 खिलाड़ियों एवं 150 से अधिक ऑफिशियल्स ने भाग लिया। चार दिवसीय प्रतियोगिता में बेसबॉल, तैराकी और वाटर पोलो की स्पर्धाएं आयोजित की गईं। बिलासपुर संभाग ने सभी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3800 अंकों के साथ ओवरऑल चौंपियन का खिताब अपने नाम किया।

प्रतियोगिता का आयोजन बिलासपुर के संजय तरण पुष्कर एवं छत्तीसगढ़ स्कूल खेल मैदान में किया गया। समापन समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और अन्य अतिथियों ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया।

शिक्षा के साथ खेल भी जरूरी : विधायक श्री अमर अग्रवाल

बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि जीवन बहुआयामी है। शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहना भी आवश्यक है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के विकास के लिए बनाई गई नीतियों का परिणाम है कि आज भारतीय खिलाड़ी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने खेलों के लिए आधारभूत अधोसंरचना विकसित करने का कार्य किया है।

खेल की प्रतिस्पर्धा भविष्य को बनाती है उज्ज्वल : विधायक श्री धरमलाल कौशिक

बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि खेल के माध्यम से छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है और खेल के मैदान में होने वाली प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल के क्षेत्र में अपने परिवार, प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

समापन समारोह में मस्तुरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पाण्डेय, अपर कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर श्री अश्वनी कुमार भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती वर्षा शर्मा, सहायक संचालक क्रीड़ा श्री जी.डी. गर्ग, बीईओ बिल्हा श्री भूपेंद्र कौशिक, श्री मोहित जायसवाल और श्री दीपक सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं खेलप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

युवा किसान अंकित लकड़ा ने मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर तैयार किया एकीकृत कृषि मॉडल

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता, दो तालाबों में मछली पालन के साथ 1,000 से 1,200 मुर्गियों का कर रहे पालन

रायपुर, 6 सितंबर 2026/ खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इस बात को अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। कभी केवल बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित ने आज अपने खेत को मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के अवसर बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंकित को भी मिला है। योजनाओं से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक और बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां

अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।

तालाब बनने के बाद उनके खेत की तस्वीर ही बदल गई। तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा। इससे वे अब वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं। साथ ही खेत में आम और लीची सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में बागवानी भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगी।

एक ही संसाधन से मछली और मुर्गी पालन का नवाचार

अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। शेड की क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का तरीका अपनाया है।

मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दो गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं और किसान को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराती हैं।

तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे, दोहरा लाभ

अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। तालाब के पानी से इन पौधों की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और मेड़ के कटाव को रोकने में भी मदद मिलती है। वहीं आम और लीची जैसे फलदार पौधे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेंगे।

इस प्रकार अंकित ने खेत के प्रत्येक हिस्से का उपयोग उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए किया है। तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी गतिविधियों का आधार बन गया है।

8 लाख रुपये की अनुदान सहायता से मिला नवाचार को विस्तार

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए शासकीय सहायता मिली। मत्स्य विभाग से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।

शासकीय योजना से मिली सहायता ने उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता आसान किया। अंकित बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद मिली।

बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर

अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली पालन और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता ने उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर दिया है।

इस बहुआयामी मॉडल से उन्हें सालभर अपने खेत से उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उनके खेत में कृषि के साथ पशु एवं मत्स्य आधारित गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को भी दर्शाता है।

शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षक हुए सम्मानित

रायपुर, 06 सितंबर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका शिक्षक दिवस के अवसर पर एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग करते हुए युवा सही दिशा में आगे बढ़े

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि समय का सही उपयोग जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का दौर है तथा बच्चे तेजी से एक ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां ज्ञान और सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय का सदुपयोग करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक

राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से गुरु विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करते थे। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और आज आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए।

देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर

राज्यपाल ने वरिष्ठ नागरिकों से भी जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान में रहकर जीवन का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित होने से देश को जागरूक और राष्ट्रभक्त नागरिक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में परिवार और शिक्षकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित

इस अवसर पर आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ शिक्षकों के सम्मान, उनके अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम में संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसईसीएल के डायरेक्टर श्री बिरंची दास, श्री हिमांशु जैन, एसईसीएल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य और दायित्व को निभाने की देता है प्रेरणा - मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री विशाल दही हांडी उत्सव में हुए शामिल, गोविंदाओं की टोलियों का बढ़ाया उत्साह

रायपुर,  सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उत्सव में उमड़े जनसमूह के बीच मुख्यमंत्री ने गोविंदाओं की टोलियों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश भी देता है। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा की बाल लीलाएं आज भी हर मन में आनंद, प्रेम और भक्ति का भाव जगाती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिकता की शक्ति का सुंदर प्रतीक है। हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचता। उसके नीचे खड़े प्रत्येक साथी का विश्वास, सहयोग और सामर्थ्य उसे ऊपर तक पहुंचाता है। जब सभी एक लक्ष्य के लिए मिलकर प्रयास करते हैं, तभी कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। यही संदेश हमें समाज और प्रदेश के विकास के लिए भी प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन हमें जीवन जीने की कला और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण की सीख देता है। ग्वालबालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर पूरी मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन की प्रत्येक भूमिका को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनका जीवन हमें परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने वनवास का लंबा समय छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा पर बिताया। आज जिस अबूझमाड़ क्षेत्र को हम जानते हैं, वह रामायण काल के विशाल दंडकारण्य का हिस्सा रहा है। प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियां और स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विशेष गौरव प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक छत्तीसगढ़ के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्याधाम जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से राज्य के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गौमाता का विशेष स्थान है। राज्य सरकार सुरभि गोधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देवी-देवताओं की कृपा से समृद्ध पुण्यभूमि है। प्रदेश पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रही है। कबीरधाम में भोरमदेव और राजिम में कुलेश्वर महादेव जैसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध शिव मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। जशपुर का मधेश्वर पहाड़ अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के कारण विशेष पहचान रखता है और इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर मातृशक्ति के अनेक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और आस्था केंद्र भी विद्यमान हैं। डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया, दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के धाम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस गौरवशाली धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी अंचल बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही सरकार

सुरक्षा कैंप अब बन रहे ‘सेवा डेरा’, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रहीं अंतिम छोर तक

सवा आठ लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों से छत्तीसगढ़ में खुल रहे औद्योगिक विकास और रोजगार के नए द्वार

सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और AI के उपयोग से भविष्य के छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हो रही तैयार

मुख्यमंत्री श्री साय ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर  सितंबर 2026/ नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ अब विकास, सुशासन, निवेश और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। विकसित भारत@2047 की यात्रा में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाएगा। राज्य की प्राकृतिक संपदा, युवा शक्ति और विकास की अपार संभावनाओं को जनकल्याण और आर्थिक समृद्धि में बदलने के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित एक निजी होटल में समाचार चैनल लाइव टाइम्स द्वारा आयोजित ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम ‘एलटी एक्सचेंज’ में अपने विचार व्यक्त करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान से लेकर बस्तर के विकास, किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण, आवास, निवेश, सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कभी देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की चर्चा नक्सलवाद की समस्या को लेकर अधिक होती थी, लेकिन आज यह तस्वीर तेजी से बदली है। नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के साथ विकास की नई संभावनाओं ने छत्तीसगढ़ के प्रति धारणा में सकारात्मक बदलाव लाया है। जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का पूरे देश में शीर्ष स्थान हासिल करना इसी बदलते छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली निर्णायक सफलता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से नक्सलवाद की समस्या को देखते-सुनते आए हैं। उनका गृह संभाग सरगुजा भी कभी नक्सलवाद से प्रभावित था और वहां नक्सल हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में सरगुजा को नक्सलवाद से मुक्त कराने में सफलता मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर महत्वपूर्ण बैठक ली थी। उस समय देश में शेष नक्सलवाद का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ में केंद्रित था, जबकि शेष लगभग एक चौथाई हिस्सा पांच-छह अन्य राज्यों में था।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में नई रणनीति और बेहतर समन्वय के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान शुरू किया गया। संयुक्त सुरक्षा प्रयासों को मजबूत किया गया और हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस तथा वीरता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो सफलता मिली है, उसके पीछे हमारे जवानों का साहस, समर्पण और बलिदान है, जिसे छत्तीसगढ़ हमेशा याद रखेगा।

नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के साथ विकास को भी बनाया रणनीति का अभिन्न हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति शुरू से स्पष्ट थी कि नक्सलवाद का समाधान केवल सुरक्षा अभियानों से नहीं, बल्कि विकास और जनविश्वास से भी होगा। बस्तर की जनता लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रही। नक्सली नहीं चाहते थे कि अंदरूनी क्षेत्रों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी और शासन की योजनाएं पहुंचें।

इसी सोच के साथ सरकार ने ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की। सुरक्षा कैंप स्थापित होने के साथ ही उनके आसपास के गांवों में सड़क, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं और सुविधाओं को तेजी से पहुंचाया गया। दूरस्थ अंचलों में पहली बार अनेक लोगों के राशन कार्ड बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई ग्रामीणों को राशन लेने के लिए आने-जाने में पांच दिन तक लग जाते थे। अब शासन स्वयं उनके द्वार तक पहुंच रहा है।

 

रायपुर सितंबर 2026/ शिक्षक दिवस के अवसर पर वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत कोड़ातराई में पीएम श्री स्कूल भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। करीब 1.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस स्कूल भवन में विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भवन निर्माण पूर्ण होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के लिए बेहतर अधोसंरचना प्राप्त होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना जरूरी है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उनमें नई सोच, जिज्ञासा, सवाल पूछने और नवाचार की भावना विकसित करें।

उन्होंने कहा कि बच्चों में इनोवेशन और स्टार्टअप की सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक समाज में ज्ञान और जागरूकता के विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे बच्चों में सीखने और कुछ नया करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

सकरबोगा में ग्रामीणों से सीधा संवाद, सुनीं समस्याएं

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने शनिवार सुबह रायगढ़ जिले के सकरबोगा गांव पहुंचकर ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं और स्थानीय जरूरतें सुनीं। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकताओं की जानकारी ली और विकास कार्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, पेयजल, सिंचाई, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। गांवों के विकास की योजनाएं स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं और सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं, ताकि विकास का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे।

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष पुसौर श्रीमती हेमलता हरिशंकर चौहान, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती भाग्यवती डोलनारायण नायक, जनपद पंचायत सदस्य श्री गोपी चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप मेटागुड़ा में लगी चौपाल, ग्रामीणों की समस्याओं पर मौके पर हुई त्वरित कार्रवाई

जमीन पर बैठकर कलेक्टर श्री अमित कुमार ने सुनी ग्रामीणों की बात, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला भवन को मिली तत्काल स्वीकृति

सिंचाई, तालाब, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर भी आगे बढ़ी कार्रवाई

रायपुर,  सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रशासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित हो तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान उनके गांव में ही सुनिश्चित किया जाए। इसी मंशा के अनुरूप सुकमा जिले में प्रशासनिक अधिकारियों ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए मेटागुड़ा गांव पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।

मेटागुड़ा गांव के ग्रामीण दो दिन पहले स्कूल, आंगनबाड़ी भवन सहित विभिन्न मांगों को लेकर ट्रैक्टर से जिला मुख्यालय सुकमा पहुंचे थे। ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद कलेक्टर श्री अमित कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर सहित प्रशासनिक अमला शुक्रवार को किस्ताराम से करीब 20 किलोमीटर दूर पालाचलमा पंचायत के मेटागुड़ा गांव पहुंचा। कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने बाइक से गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं जानीं और मौके पर ही उनके समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की।

पेड़ की छांव में लगी चौपाल, जमीन पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की बात

गांव पहुंचने पर कलेक्टर श्री अमित कुमार एवं अधिकारियों ने पेड़ के नीचे ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई। कलेक्टर ने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और एक-एक कर उनकी मांगों की जानकारी ली। इस दौरान मेटागुड़ा में आंगनबाड़ी भवन तथा आमापेंटा में प्राथमिक शाला भवन के निर्माण के लिए तत्काल स्वीकृति आदेश जारी किए गए।

ग्रामीणों ने गांव में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपनी अपेक्षाओं से प्रशासन को अवगत कराया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सिंचाई और रोजगार के अवसरों को मिलेगा बढ़ावा

ग्रामीणों की सिंचाई सुविधा से जुड़ी मांगों को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव में नहर विकास कार्य के साथ वीबी-जी रामजी के अंतर्गत तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों से एक ओर जहां सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

दो माह में बिजली पहुंचाने का आश्वासन, सड़क के लिए डीपीआर तैयार

मेटागुड़ा में बिजली सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में अधिकारियों ने लगभग दो माह की अवधि में विद्युत सुविधा पहुंचाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया। वहीं सड़क निर्माण की मांग पर डीपीआर तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। इससे गांव को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

सोमवार को गांव में लगेगा शिविर, ग्रामीणों को मिलेंगी शासकीय सेवाएं

ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं और आवश्यक दस्तावेजों से जोड़ने के लिए सोमवार को मेटागुड़ा में विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में वोटर आईडी, आधार कार्ड, राशन कार्ड, श्रम कार्ड और आयुष्मान कार्ड से संबंधित कार्य किए जाएंगे। इससे ग्रामीणों को जरूरी दस्तावेज बनवाने और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी।

मेटागुड़ा में प्रशासनिक अमले के सीधे पहुंचने और ग्रामीणों के साथ संवाद करने से स्थानीय समस्याओं को मौके पर समझने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया को गति मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए गांव तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और तत्काल कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया।

नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से प्राथमिक शिक्षा को दी नई दिशा

छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली एकमात्र शिक्षिका

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से भी मिला संवाद का अवसर

रायपुर,  सितंबर 2026/शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ से वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित होने वाली सुनीता यादव एकमात्र शिक्षिका हैं l सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले के लिए आज गौरव का ऐतिहासिक क्षण रहा। जिले के बरमकेला विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका श्रीमती सुनीता यादव को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया।

देशभर के चयनित स्कूली शिक्षकों को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रदान किया गया। विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सुनीता यादव को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित शिक्षकों के अनुकरणीय कार्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किए गए।

खेल-खेल में शिक्षा तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया

सुनीता यादव ने सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों को शिक्षण का माध्यम बनाया। कक्षा के अंतिम पायदान पर रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किए और बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने के लिए खेल-खेल में शिक्षा तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया।

शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने की पहल

शिक्षिका सुनीता यादव बच्चों को कठिन विषयों को सहज ढंग से समझाने के लिए स्वयं और विद्यार्थियों के अभिनय वाली लघु फिल्में तैयार कर उनका उपयोग शिक्षण में करती हैं। इसके साथ ही वे दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसी तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक रोचक और प्रभावी बनाती हैं। उनके प्रयासों में शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने की पहल भी शामिल है।

आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाकर अध्यापन की

सुनीता की संवेदनशीलता केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे अपने व्यय से विद्यार्थियों को नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं तथा अधिक से अधिक न्योता भोजन कराने के लिए समुदाय को प्रेरित करती हैं। शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाकर अध्यापन भी किया।

विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उसके प्रभावों पर शोध पत्र तैयार करने वाली वे जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं। शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करने और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी निर्माण जैसे कार्यों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया है।

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