ईश्वर दुबे
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नोनी सुरक्षा योजना से कौशिल्या रजवाड़े की बेटी के सुरक्षित भविष्य की बनी मजबूत नींव
आकांक्षा स्व-सहायता समूह को मिला एक लाख रुपये का ऋण, किराना-सिंगार दुकान से बढ़ी आमदनी
स्वरोजगार से मजबूत हुई महिलाओं की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में भी मिल रहा लाभ
रायपुर, सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से प्राप्त ऋण ने अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े और उनके स्व-सहायता समूह को आजीविका का नया आधार दिया है।
हरमनिया देवी आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाओं के सामने नियमित आय का साधन विकसित करने की चुनौती थी। समूह की बैठकों में सदस्यों से चर्चा के बाद ऐसी गतिविधि शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिलाओं को निरंतर आमदनी का अवसर मिल सके। इसी दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण प्राप्त करने की जानकारी मिली।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से मिली योजना की जानकारी
हरमनिया देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से मिलने वाले ऋण के बारे में जानकारी दी और आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने समूह की अन्य सदस्यों से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और ऋण के लिए आवेदन किया।
आवेदन स्वीकृत होने के बाद आकांक्षा स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने आपसी सहमति से इस राशि का उपयोग ऐसी आजीविका गतिविधि में करने का निर्णय लिया, जिससे नियमित आमदनी सुनिश्चित हो सके।
किराना और सिंगार दुकान बनी आय का नया जरिया
समूह ने ऋण राशि से किराना एवं सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सिंगार सामग्री की स्थानीय मांग को देखते हुए यह व्यवसाय समूह के लिए उपयोगी साबित हुआ। दुकान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ी और समूह की महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलने लगा।
हरमनिया देवी ने बताया कि पहले समूह की महिलाओं के पास स्थायी आजीविका गतिविधि का अभाव था। ऋण मिलने के बाद उन्हें सामूहिक रूप से व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। अब महिलाएं दुकान के संचालन में अपनी भूमिका निभाने के साथ मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। मांग के अनुसार दुकान में नई सामग्री भी जोड़ी जा रही है, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
आमदनी बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई भी हुई आसान
हरमनिया देवी ने बताया कि आजीविका गतिविधि से होने वाली अतिरिक्त आमदनी का सकारात्मक असर परिवारों पर पड़ा है। आय में सुधार होने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शैक्षणिक सामग्री और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हो रही है। पहले जिन छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब नियमित आमदनी के कारण उन्हें पूरा करना आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक जरूरतों में पहले की तुलना में अधिक योगदान दे पा रही हैं। समूह के माध्यम से सामूहिक निर्णय लेकर आर्थिक गतिविधि संचालित करने से उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।
“ऋण ने हमें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया”
हरमनिया देवी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण ने उनके समूह को केवल पूंजी ही नहीं दी, बल्कि अपने स्तर पर व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। उन्होंने कहा, “एक लाख रुपये की ऋण सहायता से शुरू की गई किराना और सिंगार दुकान आज हमारे समूह की आजीविका का आधार बन रही है। इससे महिलाओं को नियमित आमदनी का अवसर मिला है और परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।”
उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऋण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
योजना की सहायता राशि से पोषण संबंधी जरूरतें हुईं पूरी, मां और शिशु दोनों स्वस्थ
रायपुर, सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं को गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। अम्बिकापुर निवासी श्रीमती अन्नू तिवारी भी योजना से लाभान्वित होकर अपने मातृत्व काल को सुरक्षित और बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं।
अन्नू तिवारी ने बताया कि पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में उन्होंने आवश्यक प्रपत्र भरकर योजना का लाभ लिया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके बाद दो हजार रुपये की सहायता मिली। प्रसव के बाद शिशु को निर्धारित तीन टीके लगने के पश्चात उन्हें पुनः दो हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने गर्भावस्था और प्रसव के बाद अपने खान-पान तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया।
पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में मिली मदद
अन्नू तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने खान-पान और स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने में मदद की। प्रसव के बाद भी इस राशि से शिशु के पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली। उन्होंने कहा कि योजना से प्राप्त सहायता उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हुई। आर्थिक सहयोग मिलने से मातृत्व के दौरान जरूरी पोषण और देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना आसान हुआ। वर्तमान में वे और उनका शिशु दोनों स्वस्थ हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अन्नू तिवारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगी पहल है। मातृत्व के महत्वपूर्ण दौर में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को अतिरिक्त संबल मिलता है और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य तथा बच्चे के पोषण पर बेहतर ध्यान देने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि ने उनके मातृत्व अनुभव को और सुरक्षित बनाने में सहयोग दिया। अन्नू तिवारी ने अन्य पात्र महिलाओं से भी योजना का लाभ लेने और गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखने की अपील की।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठक
रायपुर, सितंबर 2026/ राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री श्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव श्री अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय
बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री श्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।
न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण
वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया।
वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर
मंत्री श्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।
सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल
छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर से यात्रियों को ले जाने की सुविधा से खासकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के बड़े अवसर मिलेंगे। इससे करीब 8 करोड़ लोगों को रोजगार मिल सकता है।
गडकरी ने बताया कि केंद्र ने बाइक टैक्सी की अनुमति दे दी है, लेकिन परिवहन राज्य का विषय होने के कारण कुछ राज्यों में अभी इसकी मंजूरी नहीं है। उन्होंने राज्यों से इसे मंजूरी देने की अपील की, ताकि लोगों को कमाई का नया जरिया मिल सके।
गडकरी ने कहा कि सरकार बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर सख्ती करेगी। इसके लिए मोटर व्हीकल ए
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4500 से अधिक हितग्राहियों को मिलेगा लाभ
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के उद्योग, वाणिज्य, श्रम व आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोरबा जिले के बालको क्षेत्र से लगे ग्राम पंचायत जामबहार में 3.40 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 33/11 के.वी. (05 एम.वी.ए. क्षमता) विद्युत सबस्टेशन का विधिवत भूमिपूजन किया। इस नए सबस्टेशन के निर्माण से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में गुणवत्ता आएगी और आसपास के अन्य सबस्टेशनों पर दबाव कम होगा।
शहरी व ग्रामीण बस्तियों में सुधरेगी बिजली आपूर्ति
सबस्टेशन निर्माण के लाभ रेखांकित करते हुए उद्योग मंत्री देवांगन ने बताया कि इससे कोरबा शहरी क्षेत्र के रूमगरा, बेलगिरी बस्ती, मदरसा मोहल्ला, हवाई पट्टी, खान मोहल्ला और जोगियाडेरा जैसी बस्तियों को बेहतर बिजली मिलेगी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के जामबहार, रोकबहरी, सोनपुरी, परसाबातेल और चुहिया में भी सुचारू विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित होगी। योजना से 4,500 से अधिक उपभोक्ता सीधे लाभान्वित होंगे।
सौर ऊर्जा और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा हर घर तक समुचित बिजली पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से 'प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' और 'बिजली बिल समाधान योजना' का लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया ने मंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि रफीक मेमन, निगम पार्षद नरेंद्र देवांगन, सीमा कंवर, जामबहार सरपंच उपन सिंह कंवर तथा बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालयों को भी किया गया सम्मानित
रायपुर, सितम्बर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को जुलाई माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को दूसरा तथा ग्रामोद्योग विभाग को तीसरे स्थान पर सम्मानित किया गया।
मुख्य सचिव ने सभी सम्मानित प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें यही अपेक्षा है। उन्होंने आई-गाट पर प्रत्येक माह कम से कम 3 से 4 कोर्स प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अपने विभाग की आवश्यकता के अनुसार अवश्य करें। मुख्य सचिव ने प्रदेश स्तर पर आई गाट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में ई-ऑफिस रैंकिंग के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन द्वितीय, आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव श्री दूरदेशी राम सोन्टापर विभाग प्रथम स्थान, श्रम विभाग के उप सचिव श्री विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-8) के उप सचिव श्रीमती ऋतु वर्मा तृृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। गृह विभाग के अवर सचिव श्री पूरन लाल साहू प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-1) के अवर सचिव श्री कैलाश कुमार नेताम द्वितीय स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अनुभाग अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार प्रथम स्थान, अनुभाग अधिकारी श्री जीवन लाल नेताम द्वितीय स्थान, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती प्रिया बागड़े द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-4) के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री जलेश राम तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान, अनुसूचित जाति विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री गौरव कुमार राय द्वितीय स्थान, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री प्रभु सिंह राठिया प्रथम स्थान, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री संदीप कुमार तारम द्वितीय स्थान, नगरीय प्रशासन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री उमेश यादव तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। आदिम जाति विकास विभाग के सहायक ग्रेड-2 श्री शेष नारायण साहू प्रथम स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की डाटा एन्ट्री ऑपरेटर श्रीमती माया देवांगन द्वितीय स्थान, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सहायक ग्रेड-श्री तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया।
प्रदेश में टेक्सटाईल तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के लिए कार्ययोजना बनायें
रायपुर, सितम्बर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत राज्य शासन के ग्रामोद्योग विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे राज्य में टेक्सटाईल उद्योग की संभावनाओं के लिए व्यापक कार्ययोजना बनायें। उन्होंने कहा कि तकनीकी वस्त्र उद्योग के लिए प्रदेश में शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के लिए शैक्षणिक एवं तकनीकी शिक्षण संस्थाओं से आवश्यक सहयोग लेकर कार्य करें।
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, बाजार विकास, अनुसंधान, नवाचार और विकास के संबंध में विस्तार से प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत किया। बैठक में एग्रो टेक्सटाईल, मेडिकल टेक्सटाईल, कंन्स्ट्रक्शन टेक्सटाईल, स्मार्ट टेक्सटाईल, स्पोर्टस होम एवं क्लाथ के संबंध में व्यापक चर्चा हुई।
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा सहित उद्योग एवं वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा, एनआईटी एवं कौशल विकास, उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
स्वसहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी, किराना और मुर्गी व्यवसाय से बढ़ी आमदनी
रायपुर, सितम्बर 2026/ मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सीता मरावी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। कभी सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करने वाली सीता मरावी ने वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह अपनाई और आज ‘लखपति दीदी’ बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद सीता मरावी ने बैंक लोन, सीआईएफ एवं आरएफ के माध्यम से प्राप्त 25 हजार रुपये की राशि से गांव में किराना दुकान शुरू की। इसके बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर उन्होंने मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।
दोनों व्यवसायों को मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाते हुए उनकी वार्षिक आय अब लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आमदनी से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उनमें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
सीता मरावी को महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिखी है।
अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए श्रीमती सीता मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।
समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल हुए शामिल
सैनिक स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका : मंत्री श्री अग्रवाल
रायपुर, सितम्बर 2026/ सैनिक स्कूल अंबिकापुर का 18वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों तथा कैडेटों की प्रतिभा को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल रहे। इस अवसर पर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुमार अग्रवाल सहित संभाग एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ। विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के उपलक्ष्य में अतिथियों ने केक काटकर स्थापना दिवस मनाया।
विद्यालय के प्राचार्य कर्नल राजेश बैंदा ने सत्र 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, खेलकूद गतिविधियों, सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों तथा कैडेटों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन की जानकारी दी।
समारोह में सैनिक स्कूल के कैडेटों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। स्वागत गीत, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य, प्रेरणादायक मूक अभिनय, देशभक्ति से ओतप्रोत समूहगान तथा भगवान श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर किया।
मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल ने सैनिक स्कूल अंबिकापुर की सत्र 2025-26 की विद्यालय पत्रिका का विमोचन किया। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षक श्री सौरभ कुमार जैन के मार्गदर्शन में कैडेटों द्वारा विकसित अभिनव ‘संस्कृत ऐप’ का भी अतिथियों ने अवलोकन किया। उन्होंने ऐप की उपयोगिता एवं विशेषताओं की सराहना की।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट एवं हाउस सम्मानित
समारोह में सत्र 2025-26 के दौरान शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले हाउस को ट्रॉफियां प्रदान की गईं।
सर्वश्रेष्ठ सह-पाठ्यक्रम हाउस का सम्मान कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को प्रदान किया गया। खेलकूद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को सम्मानित किया गया। वहीं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन सिंह हाउस एवं तेजस हाउस को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक हाउस की ट्रॉफी प्रदान की गई।
विद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, स्टाफ एवं जनरल कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण तथा सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए कमेंडेशन (प्रशस्ति/सराहना) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कैडेटों को अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के लिए किया प्रेरित
मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर की शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में हासिल उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कैडेटों को अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा निरंतर परिश्रम एवं समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सैनिक स्कूल जैसे संस्थान विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कैडेटों से इन मूल्यों को आत्मसात करते हुए जीवन में आगे बढ़ने और देश के गौरवशाली एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप-प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. पी. श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा और समृद्ध लोक संस्कृति की विद्यार्थियों ने छोड़ी अमिट छाप
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से संवाद के अनुभव विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ किए साझा
मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों को दी बधाई, कहा - आपकी उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय
राष्ट्रपति ने CWSN विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को बांधी राखी, छात्राओं की सुवा नृत्य प्रस्तुति को सराहा
रायपुर, सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है।
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज यूसीसी समिति के समक्ष बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिनिधियों की आवाज गूंजी। इस परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग और अध्यक्ष राज्य फिल्म विकास निगम ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इस दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को नए कानून में पूर्ण संरक्षण देने की बात कही। इसके साथ ही विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों का समर्थन किया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की आवश्यकता को रेखांकित किया। वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सुझाव देते हुए कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को नया आत्मविश्वास और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद चला रही है। प्रस्तावित संहिता का मूल उद्देश्य धर्म या समुदाय के भेदभाव से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत विवाह एवं तलाक,भरण - पोषण,उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव इन संबंध में विचार और सुझावों पर समिति मंथन करेगी। वर्तमान में समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम जनता, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों की राय जुटा रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में एक पारदर्शी, न्यायसंगत और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता लागू की जा सके।
रायपुर,सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज यूसीसी समिति के समक्ष बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिनिधियों की आवाज गूंजी। इस परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग, अध्यक्ष राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग और अध्यक्ष राज्य फिल्म विकास निगम ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इस दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को नए कानून में पूर्ण संरक्षण देने की बात कही। इसके साथ ही विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों का समर्थन किया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की आवश्यकता को रेखांकित किया। वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सुझाव देते हुए कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को नया आत्मविश्वास और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद चला रही है। प्रस्तावित संहिता का मूल उद्देश्य धर्म या समुदाय के भेदभाव से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत विवाह एवं तलाक,भरण - पोषण,उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव इन संबंध में विचार और सुझावों पर समिति मंथन करेगी। वर्तमान में समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम जनता, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों की राय जुटा रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में एक पारदर्शी, न्यायसंगत और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता लागू की जा सके।