ईश्वर दुबे
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Bhilai
भगवान श्रीकृष्ण से प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना
रायपुर, सितंबर 2026/ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कवर्धा स्थित श्री राधा-कृष्ण बड़े मंदिर पहुंचकर भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आनंद का संचार हो। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हमें भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों, उनके जीवन संदेश और धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, उमंग और खुशियां लेकर आए तथा प्रदेश निरंतर विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
गुरुजनों से मिले संस्कार और ज्ञान को बताया आज भी प्रासंगिक और उपयोगी
मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह 2026 में जिले के 108 शिक्षकों को शिक्षा दूत एवं ज्ञानदीप पुरस्कार से किया सम्मानित
शॉल, श्रीफल, मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र भेंटकर शिक्षकों का बढ़ाया मान
अपने गुरुजनों को सम्मानित कर उप मुख्यमंत्री ने लिया आशीर्वाद
रायपुर, सितंबर 2026/ हमारे राष्ट्र निर्माता शिक्षकों का समाज में स्थान सदैव आदरणीय एवं अग्रणी हैं उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आज स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, कवर्धा में आयोजित मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण, शिक्षा सत्र 2026-27, शिक्षा दूत एवं ज्ञानदीप पुरस्कार सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के 108 शिक्षकों को शिक्षा दूत एवं ज्ञानदीप पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मानित शिक्षकों में सेवानिवृत्त शिक्षक भी शामिल रहे। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया और उनके योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्य विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने गुरुजनों से मिले संस्कार और ज्ञान को आज भी प्रासंगिक और उपयोगी बताया। उन्होने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के नव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक केवल कक्षा में पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके जीवन को सही दिशा देने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी के जीवन पर लंबे समय तक बना रहता है। कक्षा में दिया गया ज्ञान और गुरुजनों द्वारा सिखाए गए संस्कार जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर काम आते हैं। कार्यक्रम में इस अवसर पर पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, श्री मोतीराम चंद्रवंशी, कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्रप्रकाश चंद्रवंशी, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री पवन जायसवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष पटेल, श्री लोकचन्द साहू, श्री मनीराम साहू, श्री राजा टाटिया, श्रीमती विजय लक्ष्मी तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण विद्यार्थी उपस्थित रहे।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वामी करपात्री जी विद्यालय में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में गुरुजनों ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी बहुत कुछ सिखाया। गुरुजनों द्वारा उस समय पढ़ाया और सिखाया गया ज्ञान आज भी उनके जीवन में उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बचपन में गुरुजनों के साथ बिताए गए वे पल आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं चीरस्मरणीय बनकर उनका मार्गदर्शन कर रहें हैं।
उप मुख्यमंत्री ने अपने गुरुजनों का किया सम्मान, चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण भी देखने को मिला, जब उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने अपने विद्यार्थी जीवन के गुरुजनों श्री जी.आर. चंदेल, श्री पी.पी. दुबे, श्री एम.आर. महोबिया, श्री विजेंद्र श्रीवास्तव एवं श्री एम.के. गुप्ता का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने अपने गुरुजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लिया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु का स्थान जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होता है। गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला नहीं, बल्कि पीढ़ी का निर्माता- रामविचार नेताम
रायपुर, सितंबर 2026/ कृषि विकास एवं कल्याण, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि राष्ट्र के भविष्य निर्माण में गुरुजनों का योगदान अमूल्य है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के चरित्र और सोच का निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप जिले में युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयास विद्यालय तथा नर्सिंग महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। शिक्षक ही समाज और राष्ट्र की भावी पीढ़ी के सच्चे निर्माता होते हैं, जो ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय बलरामपुर-रामानुजगंज स्थित ऑडिटोरियम भवन में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं कल्याण, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम रहे। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, अनुशासन और अच्छे संस्कार भी विकसित करते हैं । वे बच्चों में स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता और कुछ नया सीखने की जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन इस प्रकार करने का आह्वान किया कि वे समाज के लिए मिसाल बन सकें।
21 उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान
समारोह में जिले के 21 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। ज्ञानदीप पुरस्कार से श्री श्याम सुंदर चौरगे (शिक्षक, शासकीय माध्यमिक शाला कोरवापारा, राजपुर), श्रीमती नीलीमा एक्का (शिक्षिका, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डौरा), श्री जवाहर लाल पैकरा (प्रधान पाठक, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चिरई, शंकरगढ़) को सम्मानित किया गया। इसी प्रकार शिक्षादूत पुरस्कार जिले के विभिन्न विकासखंडों के 18 शिक्षकों को उत्कृष्ट शैक्षणिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती बबली देवी, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री दिलीप सोनी, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
रायगढ़ के किसान ने ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती से कमाए 4.25 लाख
रायपुर, सितंबर 2026/ ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती (जिसमें नीचे जंगली बैंगन यानी रूटस्टॉक और ऊपर टमाटर या हाइब्रिड बैंगन यानी सायन होता है) पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक फायदेमंद और रोग-प्रतिरोधी है। यह पौधा अधिक पानी या लंबे समय तक सूखा और भारी बारिश को आसानी से सहन कर लेता है।
ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती 4.25 लाख की आमदनी भी अर्जित की
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम झारआमा के किसान श्री एतवार साय पैकरा ने आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से खेती में सफलता की नई मिसाल कायम की है। कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी रहने वाली जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती कर उन्होंने न केवल 187 क्विंटल का बंपर उत्पादन हासिल किया, बल्कि कुल 4.25 लाख की आमदनी भी अर्जित की।
तकनीक और सही मार्गदर्शन से मिली सफलता
किसान की जमीन गांव से दूर जंगल के समीप स्थित होने और सिंचाई साधनों के अभाव के कारण वहां खेती करना आसान नहीं था। उद्यानिकी विभाग की सलाह पर उन्होंने भूमि का समतलीकरण कराया और सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक एवं मल्चिंग पद्धतियों को अपनाया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड सब्जियों की बुआई की।
उत्पादन और आय का गणित
टमाटर फसल 87 क्विंटल उत्पादन कर 1 लाख 75 हजार रूपए की बिक्री की। इसी प्रकार बैंगन फसल 100 क्विंटल उत्पादन कर 2 लाख 50 हजार रूपए की बिक्री की। कुल उत्पादन व बिक्री 187 क्विंटल 4 लाख 2 5 हजार रूपए की बिक्री की। किसान को कुल लागत 1 लाख 45 हजार रूपए लगा जबकि शुद्ध लाभ 2 लाख 80 हजार रूपए का हुआ।
अतिरिक्त उत्पादन और आय की उम्मीद
वर्तमान में ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से उत्पादन निरंतर जारी है। आने वाले समय में 150 से 200 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है, जिससे 4 से 5 लाख की अतिरिक्त आय होने का अनुमान जताया जा रहा है। एतवार साय पैकरा की इस सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी आधुनिक और ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
शिकायतों के समयबद्ध निराकरण और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन की सतत निगरानी
जब्त वाहनों पर खनिज अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
रायपुर, सितंबर 2026। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध रेत एवं गिट्टी परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 8 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है। यह कार्रवाई जिले में अवैध खनन, उत्खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण तथा नागरिकों से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की दिशा में की गई है।
खनिज विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच एवं मैदानी निगरानी के दौरान इन वाहनों को अवैध रूप से खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा। कार्रवाई के तहत ग्राम खंता से रेत परिवहन करते 2 ट्रैक्टर, रूमगा से 2, चिचगोहना से 1, कोरजा से 1 तथा लालपुर से 1 ट्रैक्टर जब्त किया गया। इसके अलावा कोटमी से गिट्टी का अवैध परिवहन करते 1 ट्रैक्टर भी जब्त किया गया।
पुलिस थानों और चौकी में सुरक्षित रखे गए जब्त वाहन
खनिज विभाग द्वारा जब्त किए गए वाहनों को नियमानुसार सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें से 4 ट्रैक्टर गौरेला थाना, 3 ट्रैक्टर कोटमी चौकी तथा 1 ट्रैक्टर मरवाही थाना में सुरक्षित रखा गया है।
जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा प्रकरणों की जांच एवं आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर
जिले में अवैध खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण के साथ-साथ नागरिकों की शिकायतों के त्वरित और संतोषजनक निराकरण को प्रशासन द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का गंभीरता से परीक्षण करते हुए उनका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
इसी क्रम में खनिज विभाग द्वारा शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मैदानी स्तर पर जांच की गई और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल वाहनों को जब्त किया गया।
मैदानी अमले की सतत निगरानी से अवैध परिवहन पर शिकंजा
कार्रवाई में आदित्य मानकर, सहायक खनि अधिकारी, सुजीत कंवर, खनि निरीक्षक, शिवकुमार लहरे, साहिब गनी एवं सतीश साहू, नगर सैनिक शामिल रहे।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन, उत्खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। प्रशासन ने खनिज नियमों का पालन करने तथा वैध दस्तावेजों के साथ ही खनिजों के परिवहन की अपील की है।
शिकायत से कार्रवाई तक—प्रशासनिक तंत्र की सक्रियता
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत पर जांच कर नागरिकों द्वारा उठाए गए मामलों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनका परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था को मैदानी स्तर पर लागू किया जा रहा है। अवैध खनिज परिवहन जैसे मामलों में ऐसी कार्रवाई से राजस्व संरक्षण के साथ-साथ खनिज संसाधनों के नियमानुसार उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी, करमा, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।
लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी।
भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी।
वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा।
लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत
‘लोकरंग पर्व’ केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी।
आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।
मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा।
‘लोकरंग पर्व’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।
जिज्ञासा से हुनर तक, युवाओं के कौशल विकास से ही संभव है प्रगति -श्री विश्व विजय सिंह तोमर
विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प से जुड़ेगा युवा, नारायणपुर में ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन
मेधावी विद्यार्थियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों व मलखंभ विजेताओं को खेल एवं शिक्षा सम्मान से नवाजा गया
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य गठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रदेश के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से नारायणपुर स्थित ए.जी. ऑडिटोरियम में ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों, राष्ट्रीय- राज्य स्तरीय खिलाड़ियों, दिव्यांगजनों, कौशल विकास प्रशिक्षणार्थियों और आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली युवाओं की व्यापक सहभागिता रही।
युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के इस रजत जयंती वर्ष में प्रदेश की युवा शक्ति ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को साकार करेगी। बस्तर क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों और कौशल विकास से जुड़ रहे युवाओं की सक्रिय भागीदारी राज्य की प्रगति की नई दिशा तय कर रही है। राज्य सरकार युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देकर उन्हें आत्मविश्वास के साथ राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हर संभव अवसर प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हुनर और जिज्ञासा से बनेगी युवाओं की पहचान- श्री तोमर
राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है; युवाओं को अपने हुनर, कौशल, जिज्ञासा और रचनात्मकता को लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को सही दिशा और मंच देना ही श्युवा उड़ानश् का मुख्य ध्येय है, जिससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की सोच विकसित हो सके। उन्होंने पंजीयन के लिए युवा आयोग की वेबसाइट और क्यूआर कोड/गूगल फॉर्म की जानकारी भी साझा की।
विशेषज्ञों ने साझा किए राष्ट्र निर्माण के मंत्र
कार्यक्रम के बौद्धिक सत्रों में विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। युवा शक्ति-राष्ट्र शक्ति पर केंद्रित डॉ. मीनाक्षी ठाकुर ने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया में युवाओं की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. विश्वजीत ने विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय विषय के संवैधानिक व व्यावहारिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया तथा एक देश-एक चुनाव की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसी तरह डॉ. सतीश पाण्डेय ने प्रेरक कहानियों के माध्यम से सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की ललक बनाए रखने का आह्वान किया।
प्रतिभावान विद्यार्थियों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों का किया गया सम्मान
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। शिक्षा क्षेत्र में कक्षा 10वीं में 94.33 प्रतिशत अंक लाकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा भाविका देवांगन तथा 94ः अंकों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कोविता कोर्राम को सम्मानित किया गया। खेल क्षेत्र में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के मलखंभ विजेता संताय पोटाई व मोनिका पोटाई, खेलो इंडिया फुटबॉल उपविजेता शशिकांत कुमेटी व मनीष कोवाची; ऑल इंडिया खो-खो क्वालीफायर अमृता गोटा, नेशनल स्कूल गेम्स खो-खो विजेता शामुएल कल्लो व किशोर कावड़ो तथा राष्ट्रीय खिलाड़ी दिव्या कांगे को खेल पुरस्कार से नवाजा गया।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और युवा उपस्थित रहे।
रायपुर, सितंबर 2026/ शिक्षक दिवस के अवसर पर नारायणपुर के ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप और राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर उपस्थित रहे।
अनुशासन और संस्कारों से ही मिलती है सफलतारू केदार कश्यप
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनुशासन, संस्कार, धैर्य और संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने परिवार को पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने मोबाइल फोन का उपयोग केवल पढ़ाई और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए करने तथा इसके दुरुपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ सेल्फी भी ली।
पुस्तक विमोचन और शिक्षकों का सम्मान
समारोह के दौरान लेखक श्री शिव कुमार पाण्डेय द्वारा अबूझमाड़ की संस्कृति पर आधारित लिखित पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों (श्री सुमेर सिंह मंडावी, श्रीमती उषा किरण बैस, श्री धनसिंह बघेल आदि) को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। विकासखंड स्तर पर 6 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार और जिला स्तर पर 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से नवाजा गया।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रस्थ बघेल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पिंकी उसेंडी, कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार पटेल, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एमजी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।
कार्यों में गति लाने, विभागीय कसावट और कड़ी निगरानी के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा पीडब्ल्यूडी
पुल-पुलियों के निर्माण में भी आएगी तेजी, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, बालोद, सारंगढ़ और बैकुंठपुर जैसे दूरवर्ती जिलों में प्रारंभ होंगे सेतु उप संभागीय कार्यालय
रायपुर. 5 सितम्बर 2026. सड़कों, भवनों और पुल-पुलियों के कार्यों में गति लाने तथा इनके निर्माण कार्यों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने लोक निर्माण विभाग दूरस्थ क्षेत्रों में भी कार्यालय शुरू कर रहा है। राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के 16 उप संभागीय, दो संभागीय और एक सेतु मंडल कार्यालय के साथ ही इन कार्यालयों के लिए सेट-अप की मंजूरी दे दी है। इनमें से ज्यादातर कार्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में खोले जा रहे हैं। इनकी स्थापना से निर्माण कार्यों में तेजी के साथ ही विभागीय कामकाज में कसावट आएगी।
राज्य शासन ने लोक निर्माण विभाग के सेतु परिक्षेत्र के अंतर्गत 9 नए कार्यालयों की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें जगदलपुर में अधीक्षण अभियंता कार्यालय, रायपुर में कार्यपालन अभियंता कार्यालय सेतु संभाग क्रमांक-2, तथा बीजापुर, सुकमा, कोण्डागांव, बालोद, मुंगेली, सारंगढ़ और बैकुंठपुर में अनुविभागीय अधिकारी (सेतु उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं।
राज्य शासन ने भवन एवं सड़क निर्माण के लिए 10 नवीन कार्यालय भी मंजूर किए हैं। इनमें बैकुंठपुर में कार्यपालन अभियंता (कोरिया संभाग) कार्यालय तथा फरसगांव, ओरछा, डोंगरगांव, डौंडी, धमधा, आरंग, खड़गवां, सोनहत और बलौदाबाजार में अनुविभागीय अधिकारी (उप संभाग) कार्यालय शामिल हैं।
शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री श्री साय
लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन
प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार
युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर 5 सितंबर 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल श्री डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आरयूएमएसएल और एडीबी के मध्य हुआ एमओयू
महिला बंदियों के लिये भी किया जायेगा खुली जेल का प्रबंध
केन्द्रीय जेल में खुलेगा मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र
साहसिक कार्य करने वाले जेल कर्मी हुए पुरस्कृत
जन्माष्टमी पर मुख्यमंत्री ने दी सभी को बधाई और शुभकामनाएँ
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर हुई प्रभावशाली नाटिका की प्रस्तुति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस्कॉन मंदिर भोपाल में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म उत्सव में हुए शामिल
भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर मुख्यमंत्री ने किया शंख अभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, भक्तों के साथ किया हरे कृष्ण महामंत्र का घोष
रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा की अभिलाषा हो रही पूरी
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों को भव्य स्वरूप देने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य
रायपुर सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्री श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।
इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री श्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।