ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय करेंगे 'अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना' के अंतर्गत राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का शुभारंभ
18 श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के तहत 1.45 लाख से अधिक श्रमिकों को 39.67 करोड़ रुपये की सहायता राशि होगी डीबीटी से अंतरित
रायपुर, अगस्त 2026/ श्रम विभाग के छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित 'अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना' के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों का राज्य स्तरीय सम्मान समारोह 24 अगस्त को दोपहर 12 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, साइंस कॉलेज परिसर के पास, जी.ई. रोड, रायपुर में आयोजित किया जाएगा। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन अतिविशिष्ट अतिथि तथा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, श्रमिक परिवारों तथा प्रदेशभर से आए हितग्राहियों की सहभागिता रहेगी।
समारोह में वर्ष 2025-26 में अध्ययनरत उन मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने खेलकूद एवं शैक्षणिक प्रावीण्य के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 में कक्षा 6वीं में नवप्रवेशित 200 प्रतिभावान विद्यार्थियों का भी सम्मान किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का उद्देश्य पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित कर उन्हें बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण श्रमिक हितों से जुड़ा होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय इस अवसर पर श्रम विभाग की 18 श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 पंजीकृत श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये की सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित करेंगे। इससे श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य श्रमिकों एवं उनके परिवारों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। यह राज्य स्तरीय सम्मान समारोह श्रमिक कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
मुख्यमंत्री ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का किया विमोचन
हर घर में हो छोटी-सी लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति को दें बढ़ावा : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।
नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को भी सामने लाएं रचनाकार
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने श्री करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।
निजी भूमि पर तालाब बनाकर शुरू किया मत्स्य पालन, विभिन्न आजीविका गतिविधियों से बनीं लखपति दीदी
बहनों की तरक्की, परिवार की शान—विष्णु भैया का यही अभियान
रायपुर, अगस्त 2026/ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों का आधार बन रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगराखुर्द की रहने वाली श्रीमती जय कुमारी भी बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की सदस्य जय कुमारी ने अपनी निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कर मत्स्य पालन को आजीविका का माध्यम बनाया है। विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
निजी जमीन पर तालाब, अब मछलियों से बढ़ेगी आमदनी
जय कुमारी ने बताया कि उन्होंने अपनी निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कराया और इसके बाद उसमें मत्स्य पालन शुरू किया। ‘बिहान’ योजना के माध्यम से उन्हें मछली बीज की सहायता मिल रही है। मत्स्य विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध होने से उन्हें मत्स्य पालन गतिविधि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।
वे बताती हैं कि वे पहले भी मत्स्य पालन कर चुकी हैं। पूर्व में इस गतिविधि से अच्छी आमदनी होने से उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने इसे दोबारा व्यवस्थित रूप से शुरू करने का निर्णय लिया। अब निजी भूमि पर उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए वे मत्स्य पालन को अपनी नियमित आजीविका का हिस्सा बना रही हैं।
पुराने अनुभव ने दिखाई नई राह
जय कुमारी के लिए मत्स्य पालन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है। पहले के अनुभव से उन्हें मत्स्य पालन की प्रक्रिया की समझ है। इसी अनुभव का लाभ लेते हुए वे अपने तालाब में मछली पालन को बेहतर तरीके से संचालित कर रही हैं।
योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता ने उनके प्रयासों को मजबूती दी है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध भूमि और पानी के संसाधन का उपयोग कर वे अपने परिवार की आय में अतिरिक्त योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
बिहान से महिलाओं को मिल रहे आजीविका के नए अवसर
‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाएं स्वयं रोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
जय कुमारी की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधन, महिला की मेहनत और सरकारी सहयोग मिलकर स्थायी आजीविका का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। निजी भूमि पर तालाब निर्माण और मत्स्य पालन के माध्यम से उन्होंने आय का अतिरिक्त साधन विकसित किया है, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता की उनकी राह और मजबूत हुई है।
“बहनों की तरक्की, परिवार की शान—विष्णु भैया का यही अभियान”
अपनी सफलता और शासन से मिले सहयोग के लिए जय कुमारी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें मत्स्य पालन के लिए मछली बीज की सहायता मिल रही है, जिससे अपनी आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से उन्हें पहले भी अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है और वे आगे भी इस गतिविधि को निरंतर बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़ने वाली योजनाओं के लिए शासन के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।
जय कुमारी की कहानी इस विश्वास को मजबूत करती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों को आजीविका में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं। निजी भूमि के एक तालाब से शुरू हुआ उनका यह प्रयास अब परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की उम्मीद बन रहा है।
महतारी वंदन से मिली राशि से सालू खरीदेंगी भाई के लिए राखी और मिठाई
30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली, नियमित आर्थिक सहायता से परिवार को मिला संबल
रायपुर, अगस्त 2026/ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी दैनिक जरूरतों में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के साथ परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सकलो की निवासी श्रीमती सालू सिंह भी महतारी वंदन योजना की लाभार्थी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना के तहत हर माह 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होती है। रक्षाबंधन से पहले योजना की 30वीं किस्त उनके खाते में पहुंची है, जिससे इस बार त्योहार की तैयारियों के लिए उन्हें विशेष आर्थिक सहारा मिला है।
महतारी वंदन की राशि से भाई के लिए खरीदेंगी राखी और मिठाई
सालू सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर वे महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने में करेंगी। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने भाई के साथ प्रेम और स्नेह का पर्व पूरे उत्साह से मनाने का माध्यम भी बनी है।
उन्होंने कहा कि समय पर राशि मिलने से त्योहार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है। अपने खाते में राशि आने से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मविश्वास मिलता है और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च का निर्णय स्वयं ले पाती हैं।
सीधे खाते में राशि मिलने से बढ़ा आर्थिक आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना के तहत सहायता राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों के अनुसार राशि का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिल रही है। घरेलू आवश्यकताओं से लेकर बच्चों, परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों तक, महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर रही हैं।
सालू सिंह बताती हैं कि हर माह मिलने वाली सहायता परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा है। इससे उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ विशेष अवसरों और त्योहारों की तैयारियां करने में भी सुविधा मिलती है।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार, भाई के साथ विष्णु भैया को भी राखी भेजने की इच्छा
महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ के लिए सालू सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी धन्यवाद दिया।
रक्षाबंधन से पहले 30वीं किस्त मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने भाई को राखी बांधकर यह पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाएंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भी राखी भेजने की भावना जाहिर की।
आर्थिक संबल से त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनी
सालू सिंह की कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। महतारी वंदन योजना से मिली राशि ने उनके लिए रक्षाबंधन की तैयारियों को आसान बनाया है और त्योहार को लेकर उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह बढ़ाया है।
महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें अपनी जरूरतों और खुशियों के लिए निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दे रही है। रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की सालू सिंह की खुशी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की इसी बदलती तस्वीर को सामने लाती है।
पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट में प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और जनसरोकार के विविध रंगों ने खींचा ध्यान
रायपुर अगस्त 2026/ तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।
प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री श्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।
प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
तस्वीरों में दिखे प्रकृति, संस्कृति और जनसरोकार के विविध रंग
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया
सौर ऊर्जा के विस्तार से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से अब तक लगभग 95 हजार घर हुए सौर ऊर्जा से रोशन
4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य, कार्बन न्यूट्रल भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देगा छत्तीसगढ़
महिला स्व-सहायता समूहों के लिए सौर ऊर्जा बन रही रोजगार और स्वरोजगार का नया माध्यम
ऊर्जा क्षेत्र में ₹3.50 लाख करोड़ के एमओयू, लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता होगी विकसित
मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह में हुए शामिल
मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन, उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को किया सम्मानित
रायपुर अगस्त 2026/ सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।
स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।
किसानों की मेहनत, बहनों की उद्यमशीलता और सुगंधित विष्णुभोग चावल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को दिलाई नई पहचान
रायपुर, अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के कारण भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। मनमोहक सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और पारंपरिक खेती की विशेषताओं के कारण विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है। विष्णुभोग की महक अब खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की सीमाओं को पार कर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।
पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान करीब 600 एकड़ भूमि में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों की मेहनत, सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस विशिष्ट धान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। विष्णुभोग की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
विष्णु भैया सरकार में बहनों की मेहनत को मिल रहा बाजार
विष्णुभोग चावल की खेती से लेकर उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक महिलाओं की भागीदारी इसे आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बना रही है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान की खरीदी की जाती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान का प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस कार्य से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 2 टन विष्णुभोग चावल की सफलतापूर्वक बिक्री की जा चुकी है, जिससे उन्हें करीब 1 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है।
बहनों का सम्मान और आत्मनिर्भरता, विकास की मजबूत पहचान
विष्णुभोग की सफलता यह बताती है कि जब स्थानीय संसाधनों को किसानों की मेहनत और महिला शक्ति का साथ मिलता है, तो पारंपरिक उत्पाद भी व्यापक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। विष्णुभोग चावल आज जीपीएम जिले के किसानों की समृद्धि, बहनों के स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है।
विष्णुभोग की सुगंध से राष्ट्रीय पहचान की ओर जीपीएम
एक जिला-एक उत्पाद योजना के माध्यम से विष्णुभोग चावल को उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का बेहतर मंच मिल रहा है। इसकी बढ़ती मांग स्थानीय किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
आने वाले समय में विष्णुभोग के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और अधिक प्रोत्साहन मिलने से यह चावल छत्तीसगढ़ की विशिष्ट कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है। जीपीएम की धरती पर उगने वाला विष्णुभोग आज किसानों की मेहनत, बहनों के स्वावलंबन और विष्णु भैया के सुशासन में आगे बढ़ते आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुगंध को दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।
नियमित आर्थिक संबल से छोटे व्यवसाय को मिली मजबूती, आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की ज्ञानवती बैगा
रायपुर, अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का नया संबल बन रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम तवाडबरा की श्रीमती ज्ञानवती बैगा के जीवन में भी इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वे अमलेश्वर महादेव मंदिर के सामने नारियल की छोटी दुकान संचालित करती हैं। अपने छोटे से व्यवसाय के माध्यम से वे परिवार की आवश्यकताओं में योगदान देने के साथ स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।
श्रीमती ज्ञानवती बैगा बताती हैं कि विष्णु भैया की सरकार की महतारी वंदन योजना उनके परिवार के लिए नियमित आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के तहत उन्हें 30वीं किस्त की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने नारियल व्यवसाय के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने में किया। इससे उनके छोटे व्यवसाय को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिली और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी सहूलियत हुई।
महतारी वंदन से मिला आत्मनिर्भरता का भरोसा
श्रीमती ज्ञानवती बैगा कहती हैं कि पहले छोटे व्यवसाय को चलाने के लिए आवश्यक सामग्री जुटाना कई बार चुनौतीपूर्ण होता था। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय में जरूरत के अनुसार राशि लगाने का अवसर दिया। इससे न केवल उनके काम को निरंतरता मिली, बल्कि उनके भीतर आत्मनिर्भर बनने का विश्वास भी मजबूत हुआ।
आज वे अपने व्यवसाय के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से संभाल रही हैं। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने का माध्यम बन गई है।
छोटे व्यवसाय को मिला सहारा, बढ़ा आत्मविश्वास
ज्ञानवती बैगा का कहना है कि नारियल की दुकान उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण साधन है। मंदिर के सामने दुकान होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं और लोगों को नारियल उपलब्ध कराने से उन्हें आय प्राप्त होती है। महतारी वंदन योजना से मिली राशि का उपयोग उन्होंने व्यवसाय से संबंधित आवश्यक सामग्री की व्यवस्था में किया, जिससे दुकान को लगातार संचालित करने में मदद मिली।
इस तरह महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने से वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के साथ-साथ आय के साधनों को भी मजबूत कर सकती हैं। इससे परिवार की आर्थिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है और उनमें निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी विकसित होता है।
बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में विष्णु भैया सरकार
महतारी वंदन योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में योगदान देने का अवसर प्रदान कर रही है।
श्रीमती ज्ञानवती बैगा जैसी महिलाओं की सफलता की कहानियां इस बात का उदाहरण हैं कि जब महिलाओं को आर्थिक संबल और अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ स्वयं के भविष्य को भी बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ती हैं।
बहनों को खुशहाली का उपहार, विष्णु भैया की सरकार
श्रीमती ज्ञानवती बैगा ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली नियमित सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल रही है। उनके अनुसार, महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ परिवार की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
पर्यटन बोर्ड की पर्यटकों से अपील—फर्जी वेबसाइट, बुकिंग लिंक, मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया से रहें सतर्क
रायपुर, 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और पर्यटन सुविधाओं की बुकिंग के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतों को देखते हुए छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने पर्यटकों को सतर्क रहने की अपील की है। बोर्ड को ऐसी अनधिकृत वेबसाइटों और माध्यमों की जानकारी मिली है, जो छत्तीसगढ़ पर्यटन के नाम पर फर्जी बुकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। ऐसे माध्यमों के जरिए पर्यटकों से ऑनलाइन भुगतान कराकर ठगी किए जाने की आशंका है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पर्यटक पर्यटन स्थलों, आवासीय सुविधाओं तथा अन्य पर्यटन सेवाओं की बुकिंग के लिए केवल छत्तीसगढ़ पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट tourism.cgstate.gov.in का ही उपयोग करें। किसी अन्य वेबसाइट, अनधिकृत बुकिंग लिंक, संदिग्ध मोबाइल नंबर, विज्ञापन अथवा सोशल मीडिया के ऐसे पेज पर भरोसा नहीं करें, जो छत्तीसगढ़ पर्यटन की बुकिंग उपलब्ध कराने का दावा करते हों।
बोर्ड के अनुसार, साइबर ठगी करने वाले तत्व छत्तीसगढ़ पर्यटन के नाम, प्रतीक चिन्ह, पर्यटन स्थलों की तस्वीरों और अन्य प्रचार सामग्री का दुरुपयोग कर पर्यटकों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे तत्व आकर्षक दरों पर कमरे, पर्यटन आवास, भ्रमण पैकेज अथवा अन्य सुविधाओं की बुकिंग का झांसा देकर पर्यटकों से ऑनलाइन भुगतान कराने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित वेबसाइट और बुकिंग प्रक्रिया की प्रामाणिकता की जांच करना आवश्यक है।
पर्यटन बोर्ड ने पर्यटकों से अपील की है कि बुकिंग के लिए केवल अधिकृत पर्यटन प्रक्रिया का पालन करें और भुगतान भी उसी अधिकृत प्रक्रिया के माध्यम से करें। किसी व्यक्ति के निजी खाते, संदिग्ध भुगतान माध्यम अथवा अनजान मोबाइल नंबर पर राशि भेजने से बचें। विशेष रूप से कम कीमत में बुकिंग, तत्काल भुगतान का दबाव या आकर्षक पर्यटन पैकेज का प्रस्ताव मिलने पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
आधिकारिक माध्यम से ही करें बुकिंग
पर्यटक छत्तीसगढ़ पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट tourism.cgstate.gov.in के माध्यम से ही बुकिंग करें। पर्यटन संबंधी जानकारी और बुकिंग के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के गढ़ कलेवा, रायपुर स्थित सूचना केंद्र तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित सूचना केंद्रों से भी संपर्क किया जा सकता है। इन अधिकृत केंद्रों के माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन संबंधी जानकारी के साथ उपलब्धता के अनुसार पर्यटन आवासों की बुकिंग की सुविधा भी प्राप्त की जा सकती है।
संदेह होने पर हेल्पलाइन से करें पुष्टि
पर्यटकों को किसी वेबसाइट, बुकिंग लिंक, मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया के पेज की प्रामाणिकता को लेकर संदेह होने पर भुगतान करने से पहले छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की हेल्पलाइन से जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन हेल्पलाइन नंबर:
+91-7714224600
18001026415
बोर्ड ने पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। फर्जी वेबसाइटों, संदिग्ध बुकिंग प्रस्तावों और अनधिकृत भुगतान माध्यमों से सतर्क रहकर पर्यटक अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकते हैं।
प्रथम कैबिनेट में 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास निर्माण का लिया गया था संकल्प
रायपुर, 23 अगस्त 2026/ प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास निर्माण का कार्य निरंतर गति से जारी है। उपमुख्यमंत्री एवं पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नई सरकार के गठन के बाद से अब तक 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के मकान पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य सरकार गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ लगातार कार्य कर रही है।
प्रथम कैबिनेट में 18 लाख से अधिक आवासों का संकल्प
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद प्रथम कैबिनेट बैठक में ही प्रदेश के पात्र परिवारों के लिए 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने एवं निर्माण का संकल्प लिया गया था। इसी संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा आवास निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया है। पुराने एवं नए वित्तीय वर्षों के स्वीकृत आवासों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कराया जा रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष में 5.92 लाख से अधिक आवास पूर्ण
श्री शर्मा ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 5 लाख 92 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए। यह उपलब्धि पूरे देश में सर्वाधिक है। राज्य सरकार द्वारा आवास निर्माण की गति को बनाए रखते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
2011 और 2018 की पात्रता सूची के सभी पात्र आवास स्वीकृत
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2011 एवं 2018 की पात्रता सूची के अंतर्गत पात्र पाए गए सभी आवासों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। कुल स्वीकृत आवासों में से अब तक 20 लाख 40 हजार मकानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वहीं, वर्तमान में लगभग 4 लाख आवासों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आवास स्वीकृत करना नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को शीघ्रता से उनके पक्के मकान का लाभ दिलाना है। इसी उद्देश्य से निर्माणाधीन आवासों को जल्द से जल्द पूर्ण कराने के लिए विभागीय स्तर पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
पुराने वित्तीय वर्षों के आवास भी वर्तमान सरकार में हुए पूर्ण
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पूर्ण किए गए 11 लाख से अधिक आवासों में पिछले वित्तीय वर्षों में स्वीकृत आवास भी शामिल हैं। पुराने समय में स्वीकृत ऐसे आवास, जो विभिन्न कारणों से लंबित थे, उन्हें भी आवश्यक राशि उपलब्ध कराकर वर्तमान सरकार द्वारा पूर्ण कराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने लंबित आवासों को भी प्राथमिकता देते हुए हितग्राहियों को आवास का लाभ दिलाने का कार्य किया है। इस प्रकार पिछले ढाई वर्षों के अल्प समय में पुराने एवं नए वित्तीय वर्षों के आवासों को मिलाकर 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री आवास योजना और विशेष योजनाओं के आवास भी शामिल
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पूर्ण किए गए आवासों में विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत आवास भी शामिल हैं। इनमें
मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत 48 हजार आवासों में से लगभग 20 हजार आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत लगभग 23 हजार आवास शामिल हैं। इसके अतिरिक्त विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत आवास भी आवास निर्माण की उपलब्धि में शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से विशेष रूप से जरूरतमंद, गरीब एवं वंचित परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता के माध्यम से दिखाई वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता
रायपुर, 23 अगस्त 2026/ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर रायपुर में विद्यार्थियों और युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को भारत की अंतरिक्ष यात्रा, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों तथा भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराना और उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।
वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से साझा किए अंतरिक्ष विज्ञान के अनुभव
कार्यक्रम में इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, रीजनल साइंस सेंटर नागपुर के वैज्ञानिक श्री मिमलिंद चाडोकऱ तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक-ई श्री एम.के. बेग सहित छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर शामिल हुए। वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए तथा अंतरिक्ष विज्ञान और उससे जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में महानिदेशक, छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद श्री प्रशांत कविश्वर द्वारा विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने, जिज्ञासु बने रहने तथा विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने चंद्रयान मिशन सहित भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों की जानकारी देते हुए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
भारत के अंतरिक्ष अभियानों पर दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान श्री चाडोकर ने 'इंडियाज स्पेस प्रोग्राम: पास्ट, प्रजेंट, फ्यूचर' विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विकास यात्रा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों तथा भविष्य की अंतरिक्ष संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों को समझने तथा भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिली।
छत्तीसगढ़ के विकास में उपग्रह तकनीक की संभावनाओं पर चर्चा
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक-ई श्री एम.के. बेग ने 'एप्लीकेशन ऑफ सेटेलाइट टेक्नोलॉजी फ़ॉर द डेवलोपमेन्ट ऑफ छत्तीसगढ़' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने उपग्रह प्रौद्योगिकी के विभिन्न उपयोगों तथा छत्तीसगढ़ के विकास में इसकी संभावित भूमिका पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को बताया गया कि अंतरिक्ष एवं उपग्रह तकनीक का उपयोग कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण तथा विकास संबंधी गतिविधियों में किस प्रकार किया जा सकता है।
‘थुम्बा से चंद्रमा और उससे आगे’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए 'इंडियाज़ स्पेस जर्नी: थुम्बा से चंद्रमा और उससे आगे' विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा, भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों तथा सतत विकास के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के महत्व से संबंधित अपने विचारों और रचनात्मक प्रस्तुतियों को पोस्टर के माध्यम से प्रदर्शित किया। प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के डॉ. त्रिभुवन सिंह, श्री अमित कुमार मेश्राम, डॉ. अमित राम शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों के पोस्टरों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया।
रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त, मिलापा की त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनी
रायपुर, 23 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए नियमित आर्थिक संबल का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत हर माह मिलने वाली सहायता राशि से महिलाएं अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ अपनी जरूरतों के लिए भी आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले योजना की 30वीं किस्त की राशि मिलने से प्रदेशभर की महिलाओं के बीच विशेष खुशी का माहौल है।
इसी खुशी की झलक मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी अंतर्गत ग्राम जोरातराई निवासी श्रीमती मिलापा नदेश्वर के चेहरे पर भी दिखाई दी। महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और स्नेहपूर्वक उन्हें ‘विष्णु भैया’ कहकर संबोधित किया।
राखी से पहले मिली राशि, त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनी
श्रीमती मिलापा नदेश्वर ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की राशि मिलना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। इस राशि से वे त्योहार की तैयारियों के साथ घर की जरूरी आवश्यकताओं को भी पूरा कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बार राखी का पर्व उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि समय पर मिली आर्थिक सहायता ने त्योहार की तैयारियों का अतिरिक्त बोझ कम कर दिया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जब वे रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की कलाइयों पर स्नेह का धागा बांधेंगी, तो उसमें ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार और स्नेह की भावना भी जुड़ी होगी।
बच्चों और घर-गृहस्थी की जरूरतों में मिल रहा सहारा
मिलापा नदेश्वर बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली राशि उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों की जरूरतों, घर-गृहस्थी के खर्च और आवश्यक सामानों की खरीदी में यह राशि आर्थिक सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार के बजट को ध्यान में रखकर खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब नियमित सहायता राशि मिलने से वे अपने स्तर पर कई जरूरी खर्च पूरे कर पा रही हैं।
आर्थिक सहायता के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
मिलापा नदेश्वर के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने का जरिया भी बनी है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि ने उन्हें परिवार की जरूरतों में अपनी भूमिका मजबूत करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। रक्षाबंधन के अवसर पर मिली 30वीं किस्त उन्हें ‘विष्णु भैया’ की ओर से बहनों के लिए स्नेह और सहयोग जैसी महसूस हो रही है।
महतारी वंदन योजना की राशि से त्योहार की तैयारियां हुईं आसान, आर्थिक संबल से बढ़ा उत्साह
रायपुर, 23 अगस्त 2026/ रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का पर्व है। इस वर्ष रायगढ़ शहर के इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक 7 की निवासी श्रीमती तारागिरी गोस्वामी के लिए यह पर्व और भी खास बन गया है। महतारी वंदन योजना के तहत प्राप्त इस माह की राशि से उन्होंने अपने भाई के लिए राखी खरीदी और त्योहार की तैयारियां कीं। आर्थिक सहयोग मिलने से उनके परिवार में रक्षाबंधन की खुशियां और बढ़ गई हैं।
त्योहार की जरूरतों में काम आई योजना की राशि
तारागिरी गोस्वामी बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। इस बार उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग राखी खरीदने में किया। अब वे अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि त्योहार के अवसर पर अपनी जरूरत के अनुसार खर्च करने के लिए राशि उपलब्ध होना उनके लिए खुशी की बात है। इससे उन्हें रक्षाबंधन की तैयारियों के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
आर्थिक आत्मनिर्भरता से बढ़ा आत्मविश्वास
तारागिरी गोस्वामी ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल प्रदान कर रही है। योजना की राशि महिलाएं अपनी आवश्यकताओं, परिवार की जरूरतों और त्योहारों की तैयारियों में अपनी सुविधा के अनुसार उपयोग कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हो रही हैं।
उनके लिए इस बार रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर प्रेम और विश्वास का धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि आर्थिक संबल से मिली आत्मनिर्भरता और खुशी का अवसर भी है।
मुख्यमंत्री विष्णु भैया का जताया आभार
तारागिरी गोस्वामी ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विष्णु भैया द्वारा संचालित इस योजना से मिलने वाली नियमित राशि महिलाओं के लिए उपयोगी सहारा बन रही है।उन्होंने कहा कि योजना की राशि से राखी खरीदने और त्योहार की तैयारी करने से उनके चेहरे पर खुशी है। वे इस रक्षाबंधन को अपने परिवार के साथ पूरे उत्साह और उल्लास से मनाएंगी।
महतारी वंदन योजना की नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को केवल आर्थिक संबल ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें अपनी जरूरतों और खुशियों के लिए स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दे रही है। इस रक्षाबंधन पर तारागिरी के हाथों में राखी और चेहरे पर मुस्कान, महिला सशक्तिकरण की एक सुखद तस्वीर प्रस्तुत कर रही है।
कम लागत में राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बिहान की महिलाएं
घरेलू और स्थानीय संसाधनों का रचनात्मक उपयोग, सीजनल गतिविधियों से बढ़ा आजीविका का आधार
रायपुर, 23 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं समूह के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाते हुए आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। समूह की महिलाएं मौसम और त्योहारों के अनुरूप सीजनल गतिविधियों का चयन कर अपनी आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं।
रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए इन दिनों समूह की महिलाएं घर में उपलब्ध सामग्री और स्थानीय संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीज सहित अन्य सामग्री को रंगकर और सजाकर सुंदर राखियां बनाई जा रही हैं। वहीं रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री आवश्यकतानुसार बाजार से खरीदी जाती है। इससे राखियों की उत्पादन लागत कम रहती है और महिलाओं को बेहतर आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
12 महिलाओं ने मिलकर संवारी आजीविका
समूह की सदस्य सुश्री सोनाली सिंह ने बताया कि जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह में कुल 12 महिलाएं हैं। सभी सदस्य मिलकर अलग-अलग मौसम और त्योहारों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों का संचालन करती हैं। वर्तमान में राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। तैयार राखियों को विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर तथा घर से भी बेचा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने से पहले महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, योजनाओं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने लगीं।
घरेलू सामग्री से तैयार हो रहीं आकर्षक राखियां
समूह की सदस्य सुश्री दीप्ति चौधरी बताती हैं कि राखी निर्माण में घरेलू सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। पुराने बीज, चावल, गेहूं और मक्के के दानों को आकर्षक रंग देकर उनसे अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसके साथ रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री का उपयोग कर राखियों को आकर्षक रूप दिया जाता है।
समूह की महिलाएं अपने खाली समय में एक साथ बैठकर राखियां तैयार करती हैं। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन भी बढ़ा दिया जाता है। तैयार राखियों की बिक्री बाजार में लगाए गए छोटे-छोटे स्टॉल और घर से की जा रही है। इस तरह महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं।
तीन वर्षों से सीजनल गतिविधियों से जुड़ी महिलाएं
समूह की सदस्य सुश्री आशा रवि ने बताया कि समूह की महिलाएं पिछले लगभग तीन वर्षों से कम लागत में घरेलू सामग्री से राखियां तैयार कर रही हैं। समूह की सभी महिलाएं मिलकर इस कार्य में भागीदारी करती हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और आजीविका की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला है।
उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से महिलाओं को नई गतिविधियां सीखने, घर से बाहर निकलकर आर्थिक कार्यों में भागीदारी करने और अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिला है। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।
सीजन के अनुसार बदलती गतिविधियां, बढ़ते आय के अवसर
जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वर्षभर मौसम और त्योहारों के अनुरूप अलग-अलग गतिविधियों का चयन करती हैं। इससे उन्हें एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय आय के अनेक अवसर मिलते हैं। समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करने से उत्पादन, प्रशिक्षण, बाजार और बिक्री में भी एक-दूसरे का सहयोग मिलता है।
राखी निर्माण जैसी गतिविधियों ने महिलाओं को यह अवसर दिया है कि वे घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में उत्पाद तैयार करें और उन्हें बाजार तक पहुंचाकर आय अर्जित करें। यह पहल स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रही है।