ईश्वर दुबे
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Bhilai
श्रमिक परिवारों के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना होगा पूरा
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
मुख्यमंत्री ने श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों का किया सम्मान, उनके साथ बैठकर किया भोजन और साझा किए अपने जीवन के अनुभव
मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा - बड़े सपने देखें, खूब मेहनत करें और देश-प्रदेश की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ें
1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के खातों में डीबीटी से अंतरित हुई 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि
श्रमिक कल्याण की 67 योजनाओं से मिल रही सामाजिक सुरक्षा, ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे श्रमिकों के खातों में
रायपुर अगस्त 2026/ श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।
श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।
तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट की समय पर पहचान कर करें नियंत्रण, अधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की सलाह
रायपुर, अगस्त 2026/ धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि कीटों के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग तथा लंबे समय तक अधिक जलभराव रहने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए किसान संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।
तना छेदक कीट से फसल को पहुंचता है नुकसान
तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में शामिल है। प्रारंभिक अवस्था में इसके प्रकोप की पहचान करना आसान है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई देते हैं तथा मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है।
बालियां सफेद पड़ना गंभीर प्रकोप का संकेत
तना छेदक का प्रकोप बढ़ने पर धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख जाती हैं। इससे पौधे में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए खेत में यदि कुछ पौधों की पत्तियां अचानक पीली पड़ती दिखाई दें या तने में छेद नजर आएं, तो किसान तुरंत फसल का निरीक्षण कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।
तना छेदक के नियंत्रण के लिए अनुशंसित छिड़काव
कृषि विभाग ने तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।
पत्ती मोड़क कीट की पहचान भी जरूरी
धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट भी नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कीट की हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे भाग को खाती है।
पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देना प्रमुख लक्षण
पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप के बाद पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। खेत में ऐसी पत्तियां दिखाई देने पर किसान फसल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें और शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।
पत्ती मोड़क के नियंत्रण के लिए ये विकल्प
कृषि विभाग ने पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।
अधिक उर्वरक और जलभराव से बचें
कृषि विभाग के अनुसार खेत में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग करने तथा लंबे समय तक अधिक पानी भरा रहने से कीटों के प्रकोप की स्थिति बन सकती है। किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और खेत में जलभराव की स्थिति न बनने दें। नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने से कीटों की शुरुआती पहचान और समय पर नियंत्रण संभव होगा।
समय पर पहचान और नियंत्रण से सुरक्षित रहेगी फसल
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खेतों में नियमित निगरानी रखें और पत्तियों के पीला पड़ने, तने में छेद होने, बालियां सफेद पड़ने अथवा पत्तियों पर सफेद-पारदर्शी धारियां दिखाई देने पर तत्काल उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर की गई कार्रवाई से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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देश का पहला राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठ
रायपुर, अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।
स्थानीय कला-संस्कृति को पाठ्य सामग्री से जोड़ने की पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।
100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।
विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश
आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।
स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है। पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।
पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे पाठ्य सामग्री का हिस्सा
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।
‘बिहान’ से मिला आर्थिक संबल, मक्का उत्पादन ने माया विश्वास को बनाया ‘लखपति दीदी’
स्व-सहायता समूह से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर शुरू की मक्का खेती, घर से ही बिक रही उपज, बढ़ा परिवार की आय का आधार
रायपुर, अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इन अवसरों का लाभ उठाकर महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपनी मेहनत को आय के स्थायी साधन में बदल रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की श्रीमती माया विश्वास ऐसी ही प्रेरणादायक महिला हैं, जिन्होंने मक्का उत्पादन को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है।
समूह से जुड़कर शुरू हुआ आर्थिक बदलाव
माया विश्वास ‘काली माई’ स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत और ऋण की व्यवस्था के साथ अपनी आजीविका गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने समूह से चरणबद्ध तरीके से ऋण लेकर कृषि कार्य में निवेश किया और वर्तमान में 70 हजार रुपये के ऋण का उपयोग मक्का उत्पादन के लिए कर रही हैं।
माया बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय के सीमित साधनों के कारण घरेलू जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग मिला। छोटे-छोटे ऋणों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया।
मक्का उत्पादन बना आय का मजबूत आधार
मक्का की खेती से माया को परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। उनकी उपज की बिक्री के लिए उन्हें हमेशा बाजार तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। कई बार खरीदार सीधे उनके घर पहुंचकर मक्का खरीद लेते हैं। इससे उन्हें परिवहन खर्च और समय की बचत होती है तथा उत्पाद की बिक्री भी आसानी से हो जाती है।
माया का कहना है कि मक्का उत्पादन से होने वाली आमदनी परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। कृषि को आय के साधन के रूप में विकसित करने से उनकी आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार आया है।
ऋण से बढ़ा भरोसा, मेहनत से मिली पहचान
माया विश्वास बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से मिलने वाला ऋण उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर साबित हुआ। पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं आज वे स्वयं आय अर्जित कर परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।
समूह की सामूहिक शक्ति और आर्थिक सहयोग से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। इसी आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि माया आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
माया विश्वास की सफलता यह दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और अवसर मिले तो वे अपनी परिस्थितियों को बदलने में सक्षम हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि गतिविधि को नया विस्तार दिया और अब अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि समूह के साथ मिलकर काम करने से एक-दूसरे से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। वे भविष्य में अपनी आजीविका गतिविधि को और विस्तार देने के लिए प्रयासरत हैं।
“बिहान ने हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया”
माया विश्वास ने कहा कि ‘बिहान’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिला। आज वे अपने परिवार की आय में योगदान दे रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य के लिए निर्णय ले रही हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
माया विश्वास की कहानी ग्रामीण महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत करती है। ‘बिहान’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार, आयवर्धन और आत्मनिर्भरता का मजबूत मंच बन रहे हैं। माया जैसी ‘लखपति दीदियां’ विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रेरक मिसाल बन रही हैं।
महतारी वंदन की 30वीं किस्त से बहनों के त्योहार में जुड़ी आत्मनिर्भरता और खुशियों की नई मिठास
राखी, मिठाई और उपहार खरीदने से लेकर बेटी के भविष्य के लिए बचत तक, महिलाओं के काम आ रही योजना की राशि
कृषि उत्पादों से राखियां तैयार कर आत्मनिर्भर बन रहीं समूह की दीदियां, 7,020 राखियों की बिक्री से 60 हजार रुपये की आय
रायपुर, अगस्त 2026/ रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले महिलाओं के खातों में पहुंची, तो बहनों की त्योहार की खुशियों में एक नया रंग जुड़ गया। किसी बहन ने इस राशि से भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी की, तो किसी ने उपहार लेने की योजना बनाई। वहीं कई महिलाएं नियमित मिलने वाली राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए भी कर रही हैं।
राखी से पहले मिली सौगात, बहनों ने कहा- धन्यवाद विष्णु भैया
बलरामपुर की श्रीमती ज्योति सोनी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली विशेष सौगात बन गई। खाते में एक हजार रुपये पहुंचने पर उन्होंने कहा कि “हमारे विष्णु भैया ने रक्षाबंधन से पहले हमारे खाते में एक हजार रुपये भेजकर हमारी खुशियां बढ़ा दी हैं।” वे इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और त्योहार की आवश्यक सामग्री खरीदने के साथ अपनी बेटी के भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। उन्होंने अपनी पुत्री का सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाकर उसमें नियमित रूप से राशि जमा करना शुरू किया है।
सूरजपुर की श्रीमती उषा पांडे भी इस बार रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने की तैयारी कर रही हैं। वे कहती हैं कि रक्षाबंधन से ठीक पहले महतारी वंदन की किस्त मिलने से उनकी खुशियां दोगुनी हो गई हैं। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने भाई के प्रति स्नेह और अपनत्व को अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्यक्त करने का अवसर भी है।
सूरजपुर की ही श्रीमती कुंती साहू के लिए भी योजना की किस्त रक्षाबंधन की खुशियों को सहज बनाने वाली सौगात बनी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच राखी, मिठाई और उपहार की व्यवस्था करना आसान नहीं होता, लेकिन योजना से मिली राशि से वे अपने भाई के लिए जरूरी सामान खरीद सकेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीयता से “विष्णु भैया” कहा।
आर्थिक संबल से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर निर्णय लेने का अवसर दे रही है। घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरतों, त्योहारों और परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों में महिलाओं की भागीदारी अब अपने स्वयं के आर्थिक संबल से और मजबूत हो रही है। योजना की राशि का उपयोग महिलाएं अपनी आवश्यकताओं के साथ शिक्षा, बचत और भविष्य की योजनाओं में भी कर रही हैं।
कृषि उत्पादों से राखियां, आत्मनिर्भरता की नई डोर
रक्षाबंधन के अवसर पर बलरामपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां भी आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने धान, गेहूं और मक्का जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों का रचनात्मक उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार की हैं।
समूह की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 7,020 राखियां तैयार की जा चुकी हैं। इनकी बिक्री से लगभग 60 हजार रुपये की आय हो चुकी है। इन राखियों की मांग रक्षाबंधन के अवसर पर लगातार बनी हुई है। राखियां सी-मार्ट में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं तथा अधिक से अधिक लोगों तक स्थानीय उत्पाद पहुंचाने के लिए संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में भी स्टॉल लगाया जा रहा है।
यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों को महिलाओं के हुनर और रचनात्मकता से जोड़कर किस तरह रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। राखी के हर धागे में ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन और आत्मनिर्भरता का संदेश जुड़ा हुआ है।
बिहान से मिला संबल, विष्णु भैया की योजनाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास
रायपुर, अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू हो रहे विष्णु के सुशासन का लाभ गांव-गांव तक पहुंच रहा है। शासन की योजनाओं और ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव ऐसी ही मेहनतकश महिला हैं, जिन्होंने विष्णु भैया की सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता में बदला है।
श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर कंप्यूटर खरीदा और अपने घर पर ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आय का साधन भी मिल गया। एक छोटे से प्रयास ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।
बबली यादव ने अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से उन्हें आय का एक और साधन मिला है और स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़े हैं।
श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे विभिन्न कार्यों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। उनका कहना है कि पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित साधन थे, वहीं अब मेहनत और समूह से मिले सहयोग के कारण उनके पास आय के कई साधन हैं।
बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। शासन की विभिन्न योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। वे कहती हैं कि विष्णु भैया की सरकार में गांव की महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर भी मिल रहे हैं।
श्रीमती बबली अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
बबली यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विष्णु के सुशासन में योजनाओं का लाभ जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगता है। आज बबली स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
विष्णु भैया की महतारी वंदन से बेटियों के सपनों को मिल रही उड़ान, उमा सिंह हर माह संवार रहीं बिटिया का भविष्य
रायपुर, अगस्त 2026/ रक्षाबंधन जैसे पर्व के पहले मिलने वाली छोटी-सी आर्थिक मदद भी परिवार के लिए बड़ी खुशी और संबल लेकर आती है। जांजगीर चांपा जिले अंतर्गत नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पेंड्री निवासी श्रीमती अनिता कश्यप के लिए इस बार रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त का उनके खाते में पहुंचना ऐसी ही खुशियों की सौगात बनकर आया। खाते में 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने इसे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी आर्थिक सहयोग बताया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के साथ-साथ परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दे रही है। इससे महिलाओं में आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ रहा है और परिवार के निर्णयों एवं जरूरतों में उनकी भूमिका और मजबूत हो रही है।
श्रीमती अनिता कश्यप बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए रोजमर्रा की कई जरूरतों में सहायक साबित होती है। बच्चों की पढ़ाई, घर की आवश्यक सामग्री और अचानक सामने आने वाले छोटे-बड़े खर्चों में यह राशि उपयोगी होती है। हर महीने खाते में राशि आने से उन्हें यह भरोसा रहता है कि जरूरत के समय उनके पास स्वयं की आर्थिक सहायता उपलब्ध है।
रक्षाबंधन से ठीक पहले 30वीं किस्त की राशि मिलने पर श्रीमती अनिता कश्यप ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त मिलने से मुझे बहुत खुशी हुई है। रक्षाबंधन से पहले राशि मिलने से त्योहार की खुशी और बढ़ गई है। मैं 30वीं किस्त मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु भैया के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।”
महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता के साथ सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर मिलने वाली यह किस्त प्रदेश की लाखों बहनों के लिए सरकार के भरोसे और सहयोग का संदेश लेकर पहुंची है। बहनों का मान बढ़ाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महतारी वंदन योजना निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रायपुर, अगस्त 2026/ रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।
बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।
नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं
कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश
इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।
निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए कैबिनेट ने दी है मंजूरी
कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन एवं गुणवत्ता की निगरानी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर
लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह - उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव
रायपुर. अगस्त 2026. लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क एण्ड अकाउंट्स मैनेजमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। 'वमिस' (WAMIS) से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। इस प्रणाली से निर्माण कार्यों की पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कार्यों की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी। इससे निर्माण परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और जवाबदेह होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत 5 अगस्त को हुई कैबिनेट की बैठक में लोक निर्माण विभाग में 'वमिस' को लागू करने की मंजूरी दी गई है। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। राज्य कैबिनेट का यह निर्णय उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव द्वारा विभाग में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर लगातार दिए जा रहे जोर की परिणति है। लोक निर्माण विभाग में डिजिटल कार्य-संस्कृति की दिशा में राज्य शासन की यह महत्वपूर्ण पहल है।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव लोक निर्माण विभाग में प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने निर्माण कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर पूर्णतः ऑनलाइन एवं अभिलेख-आधारित करने लगातार जोर दे रहे थे। राज्य कैबिनेट की मोहर के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में प्रचलित कार्य एवं लेखा प्रबंधन प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन तथा सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित एवं अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित 'वमिस' (WAMIS) को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। इसी आधार पर प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
क्या है 'वमिस'?
'वमिस' (Work & Accounts Management Integration System) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन संस्थान सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित एक एकीकृत प्रणाली है, जो किसी भी निर्माण कार्य के सम्पूर्ण जीवन-चक्र... प्रारंभिक प्रस्ताव से लेकर कार्य पूर्णता एवं अंतिम भुगतान तक को डिजिटल रूप में संचालित करती है। इस प्रणाली में कार्यों की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, ई-प्राक्कलन (e-Estimate) एवं अनुमानित लागत का ऑनलाइन निर्धारण, ई-प्रोक्योरमेंट (निविदा प्रक्रिया) से एकीकरण, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB) मापन पुस्तिका का डिजिटलीकरण, ठेकेदारों के देयकों (बिल) की ऑनलाइन तैयारी एवं भुगतान, मासिक लेखा, कैशबुक एवं बजट आबंटन के विरुद्ध व्यय का प्रबंधन, जियो-टैग्ड छायाचित्रों सहित कार्यों की गुणवत्ता एवं भौतिक प्रगति की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर समाहित हैं।
लोक निर्माण विभाग के कार्यों में आएंगे ये बदलाव
राज्य में 'वमिस' के लागू होने के बाद कार्य के सभी स्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसमें प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, निविदा, मापन एवं भुगतान का डिजिटल अभिलेख उपलब्ध रहेगा। इससे निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। वरिष्ठ अधिकारी एवं शासन स्तर पर कार्यों की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति की समवर्ती निगरानी संभव होगी।
'वमिस' से ठेकेदारों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। देयकों की ऑनलाइन प्रक्रिया से ठेकेदारों को भुगतान में विलंब कम होगा और परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। अधिकांश प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम होने तथा मापन एवं बिलिंग प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से त्रुटि तथा अनियमितता की संभावना घटेगी।
प्रोफेसर सहित 06 आरोपी गिरफ्तार, 36 घंटे के भीतर पुलिस का बड़ा खुलासा
रायपुर, 24 अगस्त 2026/ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV)) की बी.एस.सी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (एजीसीएच 221) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सुई और नुकीले औजार से छेदा लिफाफा, वीडियो बनाकर 11 हजार में बेचा
पुलिस खुलासे के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38 वर्ष) है। आरोपी प्रोफेसर पिछले एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र ले जाने का काम कर रहा था। 17 अगस्त को आरोपी ने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए। इसके बाद वह 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र का लिफाफा चुपके से अपने घर ले गया। वहां उसने सुई और नुकीले औजार से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरे से प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आरोपी ने यह लीक कंटेंट अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेचा, जिसके बाद यह प्रश्न पत्र अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।
100 से अधिक पुलिस टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य
20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) श्री तारकेश्वर पटेल की सतत मॉनिटरिंग में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के लिए 100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
जब्त सामग्री एवं कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी - प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.), हाल पता - चंदखुरी, दुर्ग, अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद, हाल पता - आनंद विहार, दुर्ग, नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर, हाल पता - पोटिया चौक, दुर्ग और आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग शामिल हैं।
राखी के त्योहार से पहले ‘विष्णु भैया’ का स्नेहिल उपहार
रायपुर, 24 अगस्त 2026। प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मविश्वास और सम्मान का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में भी सहयोग कर रही हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों से पहले मिलने वाली यह सहायता उनके लिए खुशी और राहत का माध्यम बन रही है।
गौरेला विकासखंड के ग्राम मेढूका निवासी बहन देवेंद्र कुमारी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विशेष खुशियां लेकर आई। त्योहार से पहले योजना की राशि उनके बैंक खाते में पहुंची, तो उनके चेहरे पर खुशी की मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बताया कि 30वीं किस्त की राशि मिलने से रक्षाबंधन की तैयारियों में उन्हें काफी सहूलियत मिली है। वह इस राशि का उपयोग राखी और त्योहार से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में करेंगी।
‘विष्णु भैया’ की पहल से बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल
बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहती हैं। महतारी वंदन योजना के माध्यम से नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए भाई के स्नेह, विश्वास और सहयोग की तरह है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व से ठीक पहले खाते में राशि पहुंचना उनके लिए ‘विष्णु भैया’ के उपहार से कम नहीं है।
उन्होंने बताया कि योजना की नियमित सहायता से अब महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को स्वयं पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं। पहले जिन आवश्यकताओं के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, उन्हें अब महिलाएं अपने स्तर पर पूरा कर पा रही हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार की खुशियों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।
राखी से पहले मिला ‘विष्णु भैया’ का उपहार
बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे में त्योहार से पहले आर्थिक सहायता मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है। महतारी वंदन योजना की राशि से वह अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा करेंगी और राखी की खरीदारी भी करेंगी।
उन्होंने कहा कि ‘विष्णु भैया’ ने प्रदेश की बहनों के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से आर्थिक संबल देने का काम किया है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता से महिलाओं में यह विश्वास बढ़ा है कि वे अपनी जरूरतों के लिए स्वयं भी आर्थिक निर्णय ले सकती हैं। यह सहायता उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का आधार भी बन रही है।
महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मिल रहा बल
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस सहायता का प्रभाव घरेलू जरूरतों से लेकर बच्चों की आवश्यकताओं, व्यक्तिगत खर्चों और त्योहारों की तैयारियों तक दिखाई दे रहा है।
बहन देवेंद्र कुमारी की खुशी इस बात का उदाहरण है कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकती है। खाते में राशि पहुंचने से उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने का भरोसा मिलता है और परिवार के भीतर आर्थिक निर्णयों में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है।
‘विष्णु भैया’ के भरोसे से बहनों के जीवन में नई खुशियां
महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने की पहल नहीं, बल्कि प्रदेश की माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम भी बन रही है। योजना से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारियों में अधिक प्रभावी ढंग से सहभागी बनने का अवसर दे रही है।
बहन देवेंद्र कुमारी ने ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को आर्थिक संबल दिया है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व से पहले मिली 30वीं किस्त ने उनकी खुशी को और बढ़ा दिया है।
बहन देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर रक्षाबंधन से पहले खिली मुस्कान महतारी वंदन योजना के सकारात्मक प्रभाव की भावपूर्ण तस्वीर है। ‘विष्णु भैया’ के स्नेह और भरोसे के साथ प्रदेश की माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल उनके जीवन में खुशियों, आत्मविश्वास और सम्मान की नई राह खोल रहा है।
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने जशपुर के प्रशासन, सुशासन, विकास, संस्कृति और प्राकृतिक वैभव पर किया व्यापक अध्ययन
आजादी के बाद प्रशासनिक बदलाव से लेकर वर्तमान विकास यात्रा तक का दस्तावेज है पुस्तक
प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बनेगी पुस्तक
जिले में बेहतर प्रशासन और भावी विकास के लिए भी प्रस्तुत किए गए हैं महत्वपूर्ण आयाम
रायपुर 24 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। यह पुस्तक जशपुर जिले के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन की व्यवस्थाओं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित एक व्यापक अध्ययन है। पुस्तक में आजादी के बाद से जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों के साथ वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया है। इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव श्री सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन भूतपूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को बधाई देते हुए कहा कि जशपुर छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जशपुर की पहचान उसके सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों से तो है ही, यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर की इन विशेषताओं के साथ जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में समेटना सराहनीय प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए वहां के इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समग्र अध्ययन आवश्यक है। ‘जशपुर : एक परिचय’ इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्तक केवल जशपुर की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए परिवर्तनों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
श्री साय ने कहा कि जशपुर का सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका के स्वरूप की अपनी विशिष्टताएं हैं। पीढ़ियों से यहां निवासरत जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही विविधता जशपुर को अध्ययन और विकास, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते वर्षों में जशपुर ने अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है। विकास की इस यात्रा में यह आवश्यक है कि स्थानीय विशेषताओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएं। इस प्रकार के अध्ययन प्रशासन को क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने और विकास की भावी प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार करते हुए स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जशपुर में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और महिला तथा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है।