ईश्वर दुबे
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Bhilai
हरेली प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पशुधन के सम्मान और खेती-किसानी के गौरव का पर्व - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से कार्यक्रम स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह
पौधरोपण से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लगाया पारिजात का पौधा
लोकगीत-लोकनृत्य, गेड़ी-बिल्लस जैसे पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से मुख्यमंत्री निवास में उतरा गांव का रंग
ड्रोन दीदी से किया संवाद: किसान को हार्वेस्टर सब्सिडी का 16 लाख रुपए का चेक सौंपा
रायपुर 12 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू - प्रदेश के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार पर आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक इस उत्सव के साक्षी बने।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।
पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री
हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री श्री साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक श्रीमती संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।
गौमाता को खिलाई पारंपरिक लोंदी, पशुधन संरक्षण का दिया संदेश
मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
छगन लाल लोन्हारे
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, 12 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ आज औद्योगिक विकास के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां विकास का उद्देश्य केवल नए उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और क्षेत्रीय संतुलन के माध्यम से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए पारदर्शी, निवेश-अनुकूल और रोजगारोन्मुख वातावरण तैयार किया है। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में नई औद्योगिक नीतियों ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।
25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का किया भूमिपूजन
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड 235 करोड़ रुपए के निवेश से यहां गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है। इस यूनिट से 4650 लोगों को रोजगार मिलेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने यह अहम कदम है।
प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
बीते ढाई वर्षों में राज्य को 264 औद्योगिक परियोजनाओं से लगभग 8.22 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 1.72 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है। इनमें से 154 परियोजनाएं निर्माण, भूमि आवंटन अथवा उत्पादन के चरण तक पहुंच चुकी हैं, जबकि कई इकाइयां पहले ही उत्पादन प्रारंभ कर चुकी हैं। इसी अवधि में प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह दर्शाता है कि सरकार की औद्योगिक नीतियां केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर परिणाम दे रही हैं।
विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन
राज्य सरकार द्वारा लागू औद्योगिक विकास नीति 2024-30 ने उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन, एमएसएमई और सेवा उद्योगों को पहली बार विशेष लाभ, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फार्मा जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज तथा स्थानीय युवाओं के रोजगार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान इस नीति की प्रमुख विशेषताएं हैं। यही कारण है कि नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर एसईजेड और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश जैसी बड़ी पहलें आकार ले रही हैं।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। 150 से अधिक सेवाओं वाला नया सिंगल विंडो सिस्टम, निवेशकों के लिए एआई आधारित वाणी प्रणाली, 500 से अधिक प्रशासनिक सुधार तथा प्रक्रियाओं का सरलीकरण निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रहा है। औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे, इसके लिए राज्य में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए तथा 15 जिलों में 26 नए औद्योगिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सरोरा में प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क जैसे प्रयास औद्योगिक आधार को और मजबूत बना रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना
हाल ही में विजन 2047 औद्योगिक विकास की संभावनाएं विषयक चर्चा में उद्योगमंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अधिकतम अवसर मिल सकें। आने वाले वर्षों के लिए सरकार निर्यात नीति, स्टार्टअप एवं नवाचार नीति, कौशल विकास, इंटर्नशिप, एमएसएमई सशक्तिकरण और बस्तर-सरगुजा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, प्रदेश के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है।
छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे
राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का वादा मिला है, जिससे अलग-अलग सेक्टर में 1.6 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर पैदा होने की संभावना है। टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा, राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना
राज्य में वस्त्र एवं परिधान उद्योग को प्रोत्साहित करने नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके 81 एकड़ क्षेत्र में 2758 वर्गमीटर से लेकर 38 हजार 180 वर्गमीटर आकार के भूखंड उपलब्ध हैं। टेक्सटाइल, गारमेंट एवं परिधान उद्योग, तकनीकी वस्त्र (ज्मबीदपबंस ज्मगजपसमे) तथा इनके सहायक एवं पूरक उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को यहां सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार
विजन 2047 की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह औद्योगिक अभियान केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण है जहां निवेश, नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास मिलकर आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
रायपुर , अगस्त 2026/ प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से बिलासपुर जिले के पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बिलासपुर के ग्राम रहंगी (बिल्हा) में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 100 करोड़ से ज्यादा की यह स्वास्थ्य परियोजना है।
श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुलभ
बिलासपुर जिले में लंबे समय से पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के उपचार के लिए ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना की मांग की जा रही थी। श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
श्रम मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों को सफलता मिली। 30 जून 2026 को आयोजित ईएसआईसी कॉरपोरेशन की 198 वीं बोर्ड बैठक में बिलासपुर के रहंगी ग्राम में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान की गई। अस्पताल के स्थापित होने से बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में ईएसआईसी से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारजनों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे श्रमिक परिवारों को उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भरता भी कम होगी।
पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मिलेगा लाभ
श्रमिक हितों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिलासपुर में ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना से जिले के हजारों पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री निवास नया रायपुर में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा छत्तीसगढ़ का पहला लोकपर्व हरेली
खेती-किसानी, लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की दिखेगी जीवंत झलक
गेड़ी, पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर होगा मुख्यमंत्री निवास
रायपुर अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जनजीवन की पहचान हरेली तिहार के अवसर पर 12 अगस्त को मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हरेली का यह लोकपर्व पूरे पारंपरिक उल्लास और छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया जाएगा। संस्कृति विभाग एवं कृषि विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा।
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख और पहला लोकपर्व माना जाता है। खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल की कामना और ग्रामीण जीवन के सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला हरेली तिहार प्रदेश की कृषि प्रधान संस्कृति और प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ के आत्मीय संबंध को अभिव्यक्त करता है।
हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों और हल-नांगर की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। खेती में उपयोग होने वाले औजारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। गांवों में घरों और चौपालों में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हरेली की खुशियां साझा की जाती हैं। गेड़ी चढ़ने की परंपरा और विभिन्न छत्तीसगढ़ी खेल इस पर्व के उत्साह को और बढ़ाते हैं।
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ की इन्हीं लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। आयोजन स्थल को हरेली की भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में सजाया जाएगा। खेती-किसानी से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं, कृषि उपकरणों और लोक संस्कृति के विविध प्रतीकों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।
कार्यक्रम में हरेली से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति के विविध रंगों के साथ उत्सव का वातावरण निर्मित होगा। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन की समृद्ध विरासत से जोड़ना भी है।
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की उस जीवन पद्धति का प्रतीक है जिसमें प्रकृति, कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। यह पर्व किसान और खेती के सम्मान के साथ सामूहिकता, प्रकृति संरक्षण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, तीज-त्योहारों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार का आयोजन इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ की माटी, महतारी, खेती-किसानी और लोकजीवन के गौरव का उत्सव बनेगा।
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि मिनीमाता जी ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में समाज से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता जी के नाम पर राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी व्यक्तित्व हम सभी को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
मंत्री श्री रामविचार नेताम ने केंद्रीय परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी से दिल्ली में की सौजन्य मुलाकात
केन्द्रीय मंत्री ने डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को दिए निर्देश
बायपास बनने से यातायात सुगम होने के साथ दुर्घटनाओं पर लगेगा अंकुश
अंतर्राज्यीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर, अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास मंत्री एवं रामानुजगंज विधायक श्री रामविचार नेताम ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मंत्री श्री गडकरी से इस दौरान बलरामपुर एवं रामानुजगंज शहरों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 पर बायपास मार्गों की स्वीकृति का आग्रह किया। श्री नेताम ने दोनों शहरों में बढ़ते यातायात दबाव, दुर्घटनाओं की आशंका तथा अंतर्राज्यीय वाणिज्यिक गतिविधियों को देखते हुए 4-लेन बायपास निर्माण को अत्यंत आवश्यक बताया। केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने दोनों मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वीकृति की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मंत्री श्री नेताम की मांग पर शीघ्र डीपीआर तैयार करने अधिकारियों को निर्देशित किया।
छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग
मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि अम्बिकापुर-रामानुजगंज-गढ़वा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-343 छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय मार्ग है। इस मार्ग से यात्री बसों, छोटे-बड़े व्यावसायिक वाहनों, भारी मालवाहकों तथा आम नागरिकों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है। प्रशासनिक एवं विशिष्टजनों का आवागमन भी इसी मार्ग से होता है। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि बलरामपुर जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग-343 के शहरी हिस्से में स्थित है। शहर के दोनों ओर घनी व्यावसायिक एवं आवासीय बसाहट होने के कारण छोटे वाहनों से लेकर भारी मालवाहकों तक का आवागमन शहर के भीतर से होता है। इससे आए दिन यातायात जाम की स्थिति निर्मित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की मिलेगी सुविधा
केंद्रीय मंत्री से बलरामपुर शहरी क्षेत्र के लिए लगभग ’’10 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। प्रस्तावित बायपास बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसी प्रकार रामानुजगंज शहर के लिए लगभग ’’8 किलोमीटर लंबाई के 4-लेन बायपास’’ की मांग भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि रामानुजगंज अंतर्राज्यीय आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। शहर के भीतर ही स्कूली बच्चों, स्थानीय नागरिकों, शासकीय एवं निजी वाहनों के साथ-साथ भारी व्यावसायिक एवं मालवाहक वाहनों का आवागमन होने से यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को मिलेगी गति
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण एवं यातायात में संभावित वृद्धि के साथ आने वाले समय में शहरी क्षेत्र में यातायात संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे में समय रहते बायपास का निर्माण शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और नगरीय विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि बलरामपुर और रामानुजगंज में बायपास मार्गों का निर्माण केवल यातायात सुगमता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन को गति मिलेगी। भारी वाहनों को शहरों के बाहर से सुगम मार्ग उपलब्ध होने से परिवहन समय और यातायात दबाव में कमी आएगी। इसके साथ ही दोनों शहरों में व्यवस्थित नगरीय विकास, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और राजस्व वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
मंत्री श्री नेताम ने केंद्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि एनएच-343 के कॉरिडोर योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य के लिए क्रमशः 397.44 करोड़ रुपये और 199.05 करोड़ रुपये की स्वीकृति पूर्व में प्रदान की जा चुकी है तथा संबंधित निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इसी क्रम में बलरामपुर एवं रामानुजगंज के शहरी हिस्सों में बायपास निर्माण को भी प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
घर-घर आन-बान और शान से फहराएं तिरंगा- मंत्री टंक राम वर्मा
स्वामित्व योजना से बदलेगी गांवों की तस्वीर: मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने
हरेली तिहार पर किसानों को बड़ा उपहार: औषधि पौधों की खेती के लिए 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित
रायपुर, अगस्त 2026/ पारंपरिक फसलों की तुलना में औषधीय पौधों की खेती में कम लागत, कम पानी और कम रासायनिक खादों की आवश्यकता होती है, जबकि राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उच्च मांग के कारण किसानों को कई गुना अधिक मुनाफा मिलता है। अश्वगंधा, शतावर, एलोवेरा, तुलसी और लेमनग्रास जैसी फसलें कम जोस और खर्च में किसानों की आय बढ़ाने का बेहतरीन विकल्प हैं।
हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया। वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी जिले के किसानों तथा स्व-सहायता समूहों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की गई।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप आज राजधानी स्थित राज्य वन अनुसंधान भवन जीरो पॉइंट में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा विधायक श्री अनुज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
किसानों को औषधि पौधों की खेती के लिए अग्रिम राशि देना हरेली तिहार का उपहार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधि पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इसमें पानी की आवश्यकता कम होती है, कीटनाशकों पर खर्च नहीं के बराबर होता है और खेत की मेड़ों पर औषधीय पौधे लगाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन और कृषि संस्कृति से जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर किसानों को औषधि पौधों की खेती के लिए अग्रिम राशि देना वास्तव में हरेली तिहार का उपहार है, जो किसानों को नई आर्थिक ताकत देगा। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप का स्वागत बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार खुमरी की माला और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।
दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य
कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बोर्ड वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, वैद्यों के क्षमता विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी लगभग 50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है।
हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का आधार वनौषधि
बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा कि वनौषधियों का महत्व हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का आधार है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग प्राकृतिक औषधीय पौधों का उपयोग करते हैं और यही हमारी स्वास्थ्य परंपरा की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड औषधीय पौधों की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दे रहा है। किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं और उपज की खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है, जिससे उन्हें खेती में किसी प्रकार की विपणन कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) के 25 किसान, धमतरी जिले के 18 किसान और 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि बोर्ड द्वारा अनुबंधित संस्थाओं मेसर्स स्टीविया और इंस्टा हर्ब्स के माध्यम से दी गई, ताकि किसान बिना आर्थिक कठिनाई के औषधीय पौधों की खेती शुरू कर सकें। यह पहल न केवल औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपराओं को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व में निभाई जाएंगी पारंपरिक रस्में, दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में होगा आयोजन
रायपुर, अगस्त 2026/ बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण में कल बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के पावन अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आगाज होने जा रहा है। इस दौरान पारंपरिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार बनाने की श्ठुरलू खोटलाश् रस्म अदा करेंगे। बस्तर दशहरा समिति ने सभी सेवादारों, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों को इस पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया है।
75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा का मुख्य कार्यक्रम जारी किया गया है, जिसके तहत 12 अगस्त बुधवार से पाट जात्रा पूजा विधान दशहरा पर्व का शुभारंभ, 24 सितम्बर गुरूवार को डेरी गड़ाई पूजा विधान, 10 अक्टूबर शनिवार को काछनगादी पूजा विधान, 11 अक्टूबर रविवार को कलश स्थापना पूजा विधान, 12 अक्टूबर सोमवार को जोगी बिठाई पूजा विधान के रस्म का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार 13 अक्टूबर से 18 अक्टूबर को प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, 18 अक्टूबर रविवार को सुबह 11 बजे बेल पूजा विधान, 19 अक्टूबर सोमवार को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, 20 अक्टूबर मंगलवार को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव का आयोजन किया जाएगा।
21 अक्टूबर बुधवार को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा, 22 अक्टूबर गुरूवार को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा, 23 अक्टूबर शुक्रवार को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान, दोपहर में ऐतिहासिक मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। 24 अक्टूबर शनिवार कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई, 27 अक्टूबर मंगलवार मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ पर्व का औपचारिक समापन किया जाएगा। मां दंतेश्वरी को समर्पित यह 75 दिवसीय दशहरा पर्व अपनी अनूठी लोक-परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और भव्य रस्मों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
नाम में त्रुटि सुधरने से बैंक खाता खुलने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की राह हुई आसान
रायपुर, अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और सुविधाजनक बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम लोगों को मिल रहा है। सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से दस्तावेज संबंधी समस्याओं के निराकरण सहित विभिन्न शासकीय सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में आ रही कठिनाइयों का स्थानीय स्तर पर समाधान मिल रहा है।
इसी क्रम में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी सुश्री डॉली गंधर के आधार कार्ड में दर्ज नाम की त्रुटि का निराकरण सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से किया गया। आधार कार्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण उन्हें बैंक खाता खुलवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। बैंक खाता नहीं होने से छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी।
अपनी समस्या के समाधान के लिए डॉली गंधर ने सेवा सेतु केंद्र में आवेदन प्रस्तुत किया। आवश्यक दस्तावेजों एवं निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर उनके आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि को सुधारा गया। नाम में सुधार होने के बाद अब उनके लिए बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया आसान हो गई है। साथ ही छात्रवृत्ति प्राप्त करने में आ रही दस्तावेज संबंधी बाधा भी दूर हो गई है।
डॉली गंधर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आधार कार्ड में नाम की त्रुटि के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। बैंक खाता नहीं खुल पाने के कारण छात्रवृत्ति का लाभ लेने में भी दिक्कत आ रही थी। सेवा सेतु केंद्र में आवेदन देने के बाद उनकी समस्या का समाधान हो गया है। अब वे आसानी से बैंक खाता खुलवा सकेंगी और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकेंगी। उन्होंने सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से समस्या का समाधान होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा से नागरिकों को दस्तावेज संबंधी समस्याओं के निराकरण में काफी मदद मिल रही है। उन्होंने सेवा सेतु केंद्र की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
दस्तावेज संबंधी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका
सेवा सेतु केंद्र नागरिकों के लिए विभिन्न शासकीय सेवाओं तक आसान पहुंच का माध्यम बन रहे हैं। दस्तावेजों में त्रुटि के कारण बैंकिंग, छात्रवृत्ति और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में आने वाली कठिनाइयों के समाधान में इन केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉली गंधर का मामला इसका उदाहरण है, जहां आधार कार्ड में नाम की त्रुटि सुधरने के बाद उनके लिए बैंक खाता और छात्रवृत्ति से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने का मार्ग सुगम हुआ है।
छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप सेवा सेतु केंद्र नागरिकों को सुविधाजनक, पारदर्शी और सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। डिजिटल और नागरिक-केंद्रित सेवा व्यवस्था के विस्तार से आमजन को शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में समय और परेशानी दोनों से राहत मिल रही है।
उन्नत मक्का बीज और कृषि सहायता से संवरी कृषक शुभम दुबे की राह
रायपुर, अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।
मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।
सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद
कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार
कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।
रायपुर, अगस्त 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित की जा रही केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लाभार्थियों और विभिन्न वेंडर्स को समय पर भुगतान हो इसके लिए सभी जरूरी कार्य करें। योजनाओं के अंतर्गत सभी जरूरी स्वीकृतियां निर्धारित समयावधि में लेना चाहिए, इसके लिए सिस्टमैटिक सिस्टम होना चाहिए। योजनाओं का इंपलिमेंनटेशन हो इसकी मॉनिटरिंग अधिकारी करें।
बैठक में विभिन्न विभागों के अंतर्गत केंद्र प्रयोजित योजनाओं (सीएसएस) के लिए एस. एन. ए. स्पर्श ऑन बोर्डिंग स्थिति की समीक्षा की गई। एस. एन. ए. एक डिजिटल प्रणाली है जो केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में संचालित की जा रही है, जिसमें मनरेगा समेत कई केंद्रीय योजनाओं के तहत फंड ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रणाली फंड के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसी तरह से योजनाओं की मातृ स्वीकृतियों और लंबित परिचालन की समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को योजनाओं की ऑन बोर्डिंग करने के लिए निर्धारित कार्यवाही पूर्ण करने एवं योजनाओं के अंतर्गत सभी भुगतानों प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सभी विभागों को कार्ययोजना बनाने कहा है। वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के संबंध में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, उद्योग एवं वाणिज्य एवं सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भूवनेश यादव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, विशेष सचिव वित्त श्री चंदन कुमार सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
गलियों में पानी के बर्तनों का सफर थमा, अब हर सुबह नल की धार से शुरू होती है कहानी
रायपुर. अगस्त 2026. सुबह के वक्त अब सेवैयाकला की गलियों में पानी का बर्तन लिए महिलाओं की कतारें दिखाई नहीं देतीं। घरों के आंगन में लगे नल खुलते हैं और साफ पानी की धार बहने लगती है। बच्चों के हाथों में अब पानी से भरी बाल्टियां नहीं, स्कूल का बस्ता है। यह बदलाव अचानक नहीं आया। यह उस योजना का परिणाम है, जिसने पानी को सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और राहत से जोड़ दिया है।
महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत टेका के आश्रित गांव सेवैयाकला ने इस साल जून में 'हर घर जल' का लक्ष्य हासिल कर लिया। जल जीवन मिशन के तहत अब गांव के सभी 185 घरों तक नियमित रूप से नल से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। गांववालों के लिए यह केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आया ऐसा बदलाव है, जिसे वे हर सुबह महसूस करते हैं।
गांव की देविका साहू मुस्कराते हुए कहती हैं, "पहले पानी लाना ही सबसे बड़ा काम था। गर्मी में तो कई बार आधा दिन इसी में निकल जाता था। अब नल खोलते ही पानी मिल जाता है। समय भी बचता है और चिंता भी खत्म हो गई है।" उनकी बात सुनते हुए आसपास खड़ी महिलाएं भी सहमति में सिर हिलाती हैं। गांव में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो, जिसकी दिनचर्या इस बदलाव से अछूती रही हो।
दरअसल, पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं होता। गांवों में यह महिलाओं के श्रम, बच्चों के समय और पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। सेवैयाकला में नल से जल पहुंचने के बाद यही बदलाव सबसे स्पष्ट दिखाई देता है। सुबह के जिन घंटों में पहले पानी की जद्दोजहद होती थी, अब वही समय बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी और घरेलू कामों में लग रहा है।
इस बदलाव के पीछे जल जीवन मिशन के तहत 81 लाख 52 हजार रुपए की लागत से तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था है। गांव में 40 किलोलीटर क्षमता की ऊंची पानी टंकी बनाई गई है। 3825 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों को भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
सरपंच श्रीमती कमली बसंत और सचिव श्रीमती हेमलता साहू के नेतृत्व में योजना को समय पर पूरा किया गया। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि गांव ने इसे केवल सरकारी योजना मानकर नहीं छोड़ा। इसके संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति बनाई गई है। जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन-संधारण के लिए हर परिवार 60 रुपए प्रतिमाह दे रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में भी निर्बाध पानी मिलता रहे। गांव के मिथिलेश बसंत प्रतिदिन तय समय पर पंप संचालन कर पूरे गांव तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सेवैयाकला की कहानी बताती है कि विकास केवल आंकड़ों में नहीं दिखता, वह लोगों की बदली हुई दिनचर्या में दिखाई देता है। जब किसी महिला को पानी के लिए कई किलोमीटर नहीं चलना पड़ता, जब बच्चे पानी ढोने की जगह समय पर स्कूल पहुंचते हैं और जब हर घर में बिना चिंता के स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है, तभी किसी योजना की असली सफलता दिखाई देती है।
आज सेवैयाकला में बहता पानी केवल नलों से नहीं आ रहा, बल्कि वह ग्रामीण जीवन में सुविधा, स्वास्थ्य और सम्मान का नया भरोसा भी लेकर आया है। जल जीवन मिशन की यह सफलता केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलाव की जीवंत मिसाल है।