ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए प्रचार रविवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया. दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की 72 सीटों के लिए मंगलवार को मतदान होगा. दूसरे चरण के लिए होने वाले मतदान के लिए शनिवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त हो गया. अधिकारियों ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम गया. मतदान समाप्ति के 48 घंटे की समय अवधि में रैली तथा सभाओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों को मतदान समाप्ति के 48 घंटे पूर्व जिले से बाहर जाना होगा. अतः इस संबंध में अधिकारियों को व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. चुनाव आयोग ने राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान तय किया था.
पहले चरण में नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए 12 नवंबर को मतदान हुआ. पहले चरण में 76 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. दूसरे चरण में राज्य के 19 जिलों में मतदान होगा जिनमें गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम, जशपुर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित हैं.
राज्य में पिछले 15 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और इस बार के चुनाव में वह 65 सीटों पर जीत के लक्ष्य को लेकर चुनाव मैदान में है. वहीं, कांग्रेस को उम्मीद है कि इस चुनाव में सत्ता परिवर्तन होगा और उसकी सरकार बनेगी. दूसरे चरण के मतदान में मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा किया है.
छत्तीसगढ़: अजीत जोगी बोले- बहुमत नहीं मिला तो BJP से मिला सकते हैं हाथ
राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और अन्य दलों के नेताओं ने अपनी पार्टी के पक्ष में प्रचार किया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेताओं ने अपने भाषणों में गांधी परिवार पर तीखे हमले किए तथा केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं को गिनाया.
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर लगाया आरोप, कहा- राज्य में बुरी हालत में हैं किसान
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे और छत्तीसगढ़ में नान घोटाले को लेकर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री रमन सिंह को कठघरे में खड़ा किया. इसके साथ ही नेताओं ने किसानों के मुद्दे पर एक दूसरे पर हमला बोला. दूसरे चरण के मतदान में रमन मंत्रिमंडल के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर समेत अन्य मंत्रियों, कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव, पूर्व मुख्यंत्री अजीत जोगी और उनकी पत्नी रेणु जोगी समेत 1101 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य तय होगा.
राज्य में पिछले चुनावों में मुख्यत: भाजपा और कांग्रेस के मध्य ही मुकाबला होता रहा है. लेकिन इस बार के चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के कारण कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. दूसरे चरण में सबसे ज्यादा रायपुर शहर दक्षिण में 46 उम्मीदवार और सबसे कम बिंद्रानवागढ़ में छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
महासमुंद (छत्तीसगढ़)। कांग्रेस पर छत्तीसगढ़ के लोगों की आंखों में धूल झोंकने और झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि कांग्रेस के एक ही परिवार की चार पीढ़ियों ने देश पर शासन किया, जिसका उन्हें तो लाभ मिला लेकिन देश को कोई लाभ नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दे कर कहा, ‘‘ कांग्रेस छत्तीसगढ़ के भले लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है और झूठे वादे कर रही है।’’
राफेल डील को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा पर वार करती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी है। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी राफेल डील को खास तौर पर मुद्दा बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी को बहस की चुनौती दी। राहुल गांधी ने कहा, "मैं मोदी जी को चैलेंज करता हूं कि कहीं भी, किसी भी जगह, किसी भी प्रदेश में मेरे साथ स्टेज पर आकर 15 मिनट के लिए राफेल पर डिबेट कर लें।
मैं बोलूंगा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने साफ बताया कि नरेंद्र मोदी ने बोला कि किसको कॉन्ट्रेक्ट मिलना चाहिए।" राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी ने किसानों के पास कालाधन होने की बात कहकर अन्नदाताओं का अपमान किया है। गांधी ने प्रधानमंत्री के इस कथित बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘क्या आपने माल्या, ‘मेहुल भाई’, नीरव मोदी को गेहूं उगाते देखा है? मोदीजी किसान का अपमान मत करिए।
दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा पिछले पांच साल से विधायक हैं इसके पूर्व दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वर्तमान में सांसद के पद पर सुशोभित हैं लेकिन दुर्ग शहर के विकास में वोरा परिवार की कोई भूमिका नहीं दिखाई देता है। एक भी एैसा बड़ा विकास कार्य वोरा परिवार गिना दें जिसे वोरा परिवार नें दुर्ग में करवाया हो। कांग्रेस के पचास साल के शासन में दुर्ग शहर का कोई भी विकास नहींहो सका और यह सच्चाई है कि भाजपा शासनकाल में दुर्ग शहर में अभूतपूर्व विकास कार्य संपन्न हुए। तात्कालीन महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में तथा मंत्री हेमचंद यादव के समय बड़ी तेजी के साथ दुर्ग शहर का स्वरुप परिवर्तित हुआ। वर्तमान में वोरा परिवार के प्रत्याशी अरुण वोरा को जनता को बताना होगा कि उनके कार्यकाल में क्या क्या बड़े विकास कार्यों को उन्होने करवाया है या करवाने का प्रयास किया है। मोतीलाल वोरा चाहते तो पूर्व में ही दुर्ग का कायाकल्प करने की ताकत रखते थे परंतु उन्होनें दुर्ग के लिए तो दूर की बात छत्तीसगढ के लिए भी कुछ नहीं किया। छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद अजीत जोगी के शासन में युवा आयोग के अध्यक्ष रहते हुए भी अरुण नें कोई कार्य नहीं करवाया जिसे वे अपनी उपलब्धि बता सकें। दुर्ग में धमधानाका का पुल ही कांग्रेस की निशानी है। दुर्ग वायशेप ब्रिज, शिवनाथ पुल, दुर्ग की सड़कें, नालियां सभी विकास कार्य भाजपा और भाजपा विधायक, महापौर सांसद की देन है। कांग्रेस के प्रत्याशी दुर्ग में किस विकास कार्य के लिए वोट मांग रहे हैं समझ से परे है। विकास कार्य के लिए सोच की आवश्यकता होताी है जो वोरा परिवार में कहीं भी परिलक्षित नहीं होता है। अरुण वोरा के लिए बाबू जी के अलावा दुर्ग में कोई सहारा नहीं हैं। पिछले चुनाव में बाबूजी नें जनता के पास जाकर इज्जत बचा लेने की गुहार लगाई थी, हेमचंद यादव हारे फिर से इज्जत की खातिर बड़े नेता होने के बावजूद दुर्ग से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं एैसे में जनता कब तक एक वरिष्ठ नेता की इज्जत की खातिर अपने विकास को दांव पर लगाएगी? इधर अरुण वोरा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं जीतने की खुशी अभी से मना रहे हैं उन्हे जनता के बीच जाने की जरुरत है। जनता को नेता चाहिए किसी परिवार की इज्जत नहीं बचानी है लोग बोलना शुरु कर दिए हैं कि दुर्ग अब किसी पप्पू प्रत्याशी को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है जो बाबूजी की गोद में अभी भी पड़ा हुआ है बाबू जी से पूछे बगैर कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। पूरा चुनाव प्रचार में वोरा परिवार जुटा हुआ है। रायपुर से गोविंदलाल वोरा का परिवार चुनाव संचालन कर रहे हैं। जमीनी नेता असमंजस की स्थिति में हैं एैसे में जीत कैसे होगी। कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ अंडरकरंट यह है कि कांग्रेसियों का वोट भी जनता कांग्रेस जे के प्रत्याशी प्रताप मध्यानी के पक्ष में पड़ सकता है। भाजपा के कैडर वोट हैं जो दुर्ग में स्थायी है किसी का नुकसान हो रहा है तो वह हैं अरुण वोरा। त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा की हार होगी एैसा जनता जनार्दन का कहना है।
धुआंधार चुनाव प्रचार पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कांग्रेस और खास तौर पर गांधी परिवार को लेकर खासे हमलावर नजर आए।
उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने अंबिकापुर के छोटे-छोटे लोगों को लाल किले की प्रतिकृति बनाने मात्र से उन्हें नोंच लिया था, उनके खिलाफ अनाप-शनाप बातें कहीं थीं, अंबिकापुर के लोगों, ऐसे लोगों को सजा देने का मौका आया है। जिन्होंने अंबिकापुर को ऐसे बदनाम किया, उन्हें चुन-चुनकर घर भेजना होगा। जिस राजपरिवार को एक ही परिवार के गुण गाने का शौक लग गया है, उन्हें अंबिकापुर के लोग ही गहरी चोट पहुंचा सकते हैं।"
पीएम मोदी ने दिग्विजय सिंह पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिग्गी राजा अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त छत्तीसगढ़ सिर्फ खास वजहों से आते थे। उन दिनों में कांग्रेस के 60 फीसदी से भी ज्यादा वादे पूरे नहीं हो सके।
राहुल और सोनिया पर हल्ला बोलते हुए मोदी ने कहा, "लगता है कि अंग्रेज उनके परिवार का नाम लिख कर गए थे। 440 से 40 रह गए। उनके दिमाग में नहीं बैठता कि गरीब मां का बेटा अंग्रेजों से उन्हें जो विरासत में कुर्सी मिली थी, उस पर कैसे बैठ गया। हिंदुस्तान के लोकतंत्र ने एक परिवार को ठेका नहीं दिया है। पहली चारी पीढ़ी ने क्या काम किया, इसका हिसाब देना होगा।"
शशि थरूर ने हाल ही में कहा था कि पंडित नेहरू की वजह से ही मोदी, प्रधानमंत्री बन सके क्योंकि उन्होंने ऐसा संस्थागत ढांचा खड़ा किया था जिसमें कोई भी इस उच्च पद पर पहुंच सके। मोदी ने इसका जिक्र करते हुए कहा, "अगर आपके भीतर लोकतंत्र की इतनी ही परंपरा है तो एक बार बस पांच साल के लिए गांधी परिवार के बाहर किसी व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बना दें।"
मोदी ने पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग की तारीफ करते हुए कहा, "पहले चरण में बम, बंदूक का भय दिखाया गया लेकिन बस्तर की जनता ने वोटिंग मशीन पर उंगली दबाकर इसका जवाब दिया। देश के लोकतंत्र को समर्पित ऐसे नागरिकों को सलाम है।"
पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना का भी जिक्र अपने भाषण में किया।
आज के भाषण की खास बात ये भी रही कि पीएम मोदी न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि लोकसभा चुनाव के लिए भी माहौल बनाते दिखे। उन्होंने गांधी परिवार पर एक के बाद एक कई हमले बोले। बयानों का जवाब दिया। ये सीधी लड़ाई की जमीन तैयार करने का संकेत है।
सरगुजा संभाग में कुल 14 सीटें हैं। छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होना है। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी ने भाजपा को समर्थन की अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया। सियासी हलकों में चल रही खबरों पर उन्होंने कहा, "मैं सपने में भी नहीं सोच सकता कि भाजपा के साथ गठबंधन करूं, मैं उनको किसी शर्त पर समर्थन नहीं दूंगा और न ही उनसे समर्थन लूंगा।"
भिलाई ब्रेकिंग?
खुर्सीपार में पकड़ाई भाजपा की शराब, मंत्री के करीबी श्यामसुंदर राव ने अपने घर के बाजू सार्वजनिक कमरे में रखवाया था 55 पेटी शराब
फ्लाइंग स्क्वाड ने सूचना मिलने पर की कार्यवाही
कार्यवाही के दौरान मौके से बरामद हुवी भाजपा की प्रचार सामग्री
कल इसी वार्ड में चली थी श्याम सुन्दर ने करवाई थी मटन पार्टी, आज के कार्यक्रम में फिरा पानी
भिलाई। दुर्ग जिले की हाईप्रोफाईल सीट भिलाईनगर से भाजपा के प्रेमप्रकाश पांडेय और कांग्रेस के युवा प्रत्याशी देैवेंद्र यादव का मध्य कांटे की टक्कर है। इस सीट से युवा चेहरे को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने चुनाव को काफी रोचक और बना दिया है। सोशल मीडिया में एक दूसरे के उपर प्रहार जारी है तथा कई प्रकार के आरोप प्रत्यारोप निरंतर जारी है जिसे जनता देख समझ रही है तथा किस प्रत्याशी को मत देना है उसके लिए पूर्व आकल कर रही है। कांटे की टक्कर इसलिए क्योंकि भिलाईनगर विधानसभा क्षेत्र की जनता को प्रदेश में सबसे शिक्षित जनता के रुप में जाना जाता है। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों, अधिकारियों के अलावा खुर्सीपार तथा अन्य दीगर क्षेत्रों की जनता भी शामिल हैं जिन्हें अपना विकास पुरुष चुनना है। भिलाई विधायक के रुप में प्रेमप्रकाश के द्वारा किए गए विकास कार्यों को नकारा नहीं जा सकता है वहीं दूसरी ओर वे मंत्री के ओहदे पर काबिज रहके कार्यों को सरकार के बलबूते पर निष्पादित करवाने में सफल रहे। वहीं दूसरी ओर विपक्ष में रहने के बावजूद कांग्रेस के निर्वाचित महापौर के रुप में देवेंद्र यादव नें अल्प अधिकार रहने के बाद भी जनता के सुख दुख में सदैव सहभागी रहते हुए विकास कार्यों को निगम महापौर के रुप में आगे बढाया है। महापौर देवेंद्र यादव के प्रयासों के कारण ही डेंगू पर रोकथाम करने में प्रशासन सफल हुआ, भिलाई डेंगू से मुक्त हुआ। महामारी के दौर में भी देवेंद्र यादव एक एक अस्पताल में जाकर मरीजों का हाल जानते रहे तथा प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करके सहयोग की मांग कर डाली। महापौर देवेंद्र यादव में कुछ कर गुजरने का जज्बा जनता को समझ में आ चुका है। कुछ कर गुजरने का जज्बा प्रेमप्रकाश पांडेय में भी है वे जो ठान लेते हैं करके रहते हैं। भिलाई में प्रेमप्रकाश पांडेय को टक्कर देने के लिए युवा देवेंद्र यादव के सामने आने से उनकी जीत की राह में कांटे की टक्कर जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसे जनता जनार्दन भी स्वीकार कर रही है। बहरहाल प्रेमप्रकाश और देवेंद्र यादव दोनों को जनता का अपार जनसमर्थन चुनावी प्रचार के दौरान देखने को मिल रहा है। कहते हैं चुनाव में अंतिम समय में बाजी पलट जाती है देखते हैं कौन प्रत्याशी बाजी मार ले जाएगा और कौन हार का स्वाद चखेगा। इसी क्रम में देवेंद्र यादव के खिलाफ 9 आपराधिक मामलों की जानकारी सोशल मीडिया में डाली गई है तथा प्रेमप्रकाश को अफवाह वाले बाबा तथा दंभी नेता के रुप में चित्रित किया जा रहा है। वोट के लिए एक दूसरे के समर्थन सोशल मीडिया को हथियार बनाए हुए हैं। जबकि साफ तौर पर देवेंद्र के उपर दर्ज सभी मामले राजनीतिक जुलुस धरना के लिए दर्ज अपराध हैं जो कि विपक्ष में बैठे सक्रिय नेता के लिए आम बात है। दूसरी ओर प्रेमप्रकाश के बड़े विकास कार्यों को जनता सदैव याद रखी हुई है। वृहद पेयजल योजना, आई आई टी, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्व. सहित कई बड़े विकास कार्यों की लंबी फेहरिश्त है। एैसे में दोनों प्रत्याशियों को कमतर आंकना भूल होगी। भिलाईनगर में 40000 युवा वोटर्स हैं, जो कि चुनाव की दशा और दिशा बदलने की ताकत रखते हैं। प्रेमप्रकाश और देवेंद्र दोनों में युवाओं जैसा जोश है युवा वर्ग की पसंद पर चुनाव परिणाम निधारित होना तय हो जायेगा। देखना यह कि महिलाओं का किसको सपोर्ट है भिलाईनगर में महिलाओं का वोट भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की ताकत रखता है। शिक्षित क्षेत्र में चुनाव में बाजी पलटने के लिए किसी का वश नहीं चलता यह इतिहास गवाह है कि शिक्षित व्यक्तियों का वोट योग्यता, व्यवहार कुशलता, विकास कार्यों के प्रतिनिधि को ही जाएगा। परंपरागत रुप से प्रेमप्रकाश के खिलाफ चुनाव लडने वाले बी.डी. कुरैशी और प्रेमप्रकाश कभी दुबारा चुनाव नहीं जीत सके। पांच साल के बाद सदैव परिवर्तन हुआ है। भिलाई की जनता नें कभी किसी को दुबारा मौका नहीं दिया। लगातार चुनाव जीतने के लिए भिलाई में जनता का लाडला अभी तक उत्पन्न नहीं हो सका। इस बार देखना यह कि किसे जिताकर जनता अपना विधायक चुनती है?
(हमारे प्रतिनिधि) दुर्ग। दुर्ग की सीट में वर्तमान विधायक अरुण वोरा के लिए एक चुनौती के रुप में खड़े हुए जनता कांग्रेस जे के प्रत्याशी प्रताप मध्यानी अपने चुनाीव प्रचार में काफी आगे निकलते हुए कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी चंद्रिका चंद्राकर इस चुनावी रेस में पिछड़ती हुई नजर आ रही हैं। दुर्ग में अरुण वोरा की पहचान केवल बाबूजी (मोतीलाल वोरा) के नाम से होती है उनका हर कार्य बाबूजी से पूछकर बताता हूँ घिसा पिटा जवाब सुनकर मतदाता अब परिवर्तन करने के मूड में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में भीड़ तो अवश्य जुट रही है परंतु इस भीड़
को मत के रुप में परिवर्तित करना चुनाव में अरुण वोरा के के लिए टेढी खीर साबित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर पिछले महापौर चुनाव में प्रताप मध्यानी नें जनता के बीच जो पैठ बनाई है उन्हे उसका फायदा मिलने लगा है। अरुण वोरा और प्रताप मध्यानी के बीच कांटे की टक्कर है भाजपा की स्थिति तीसरे पायदान पर आ टिकी हुई है। भाजपा प्रत्याशी के लिए राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय पूरा जोर दुर्ग में लगा रही हैं परंतु मतदाता और कार्यकर्ता थोपे गए प्रत्याशी को बर्दाश्त नहीं कर रही है। विधानसभा में सक्रियता के मामले में प्रताप मध्यानी अन्य दोनों प्रत्याशियों से आगे हैं। अपनी क्षमता से निर्णय लेते हैं तथा वहीं दूसरी ओरर अरुण वोरा इसके विपरीत राजनीति में बाबूजी के अलावा किसी को तवज्जो नहीं देते शायद यही कारण है कि चुनावी मैनेजमेंट पूरी तरह से ध्वस्त होता दिखाई दे रहा है। मतदाता इस बार परिवर्तन करने के मूड में हैं।
छत्तीसगढ़ की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए डॉ. रमन सिंह को इस बार अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों पर पिछला प्रदर्शन दोहराना होगा। इसी समुदाय ने 2013 में भाजपा को सत्ता में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 10 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं और इन सीटों को लेकर कांग्रेस-भाजपा में जबरदस्त लड़ाई रहती है।
2013 चुनाव में भाजपा को अनुसूचित जनजाति यानि एसटी आरक्षित सीटों पर करारा झटका लगा था। उसे 29 सीटों में से महज 11 पर ही जीत मिली थी। इस झटके की भरपाई उसने एससी आरक्षित 10 में से 9 सीटें जीतकर कर ली थी। छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में एससी वर्ग 14 फीसदी है। ये आबादी मुख्य तौर पर आदिवासी बहुल उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में रहते हैं।
इनकी बड़ी आबादी सतनामी संप्रदाय को मानती है जो एक सुधारवादी आंदोलन की तरह चला था और इसकी स्थापना 19वीं सदी में गुरु घासीदास ने रखी थी।
2013 में रमन सिंह ने जबरदस्त रणनीति अख्तियार करते हुए 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने सतनाम संप्रदाय के बाबा बालदास के जरिए एससी बहुल सीटों पर 20 उम्मीदवार खड़े करवा दिए थे। बालदास को प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर भी मुहैया कराया गया था। हालांकि उनके उम्मीदवार को कोई भी सीट नहीं मिली, लेकिन इसने कांग्रेस का खेल जरूर बिगाड़ दिया।