दुर्ग का केवल विनाश किया वोरा परिवार नें, सरोज पांडेय ने किया विकास Featured

  दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा पिछले पांच साल से विधायक हैं इसके पूर्व दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वर्तमान में सांसद के पद पर सुशोभित हैं लेकिन दुर्ग शहर के विकास में वोरा परिवार की कोई भूमिका नहीं दिखाई देता है। एक भी एैसा बड़ा विकास कार्य वोरा परिवार गिना दें जिसे वोरा परिवार नें दुर्ग में करवाया हो। कांग्रेस के पचास साल के शासन में दुर्ग शहर का कोई भी विकास नहींहो सका और यह सच्चाई है कि भाजपा शासनकाल में दुर्ग शहर में अभूतपूर्व विकास कार्य संपन्न हुए। तात्कालीन महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में तथा मंत्री हेमचंद यादव के समय बड़ी तेजी के साथ दुर्ग शहर का स्वरुप परिवर्तित हुआ। वर्तमान में वोरा परिवार के प्रत्याशी अरुण वोरा को जनता को बताना होगा कि उनके कार्यकाल में क्या क्या बड़े विकास कार्यों को उन्होने करवाया है या करवाने का प्रयास किया है। मोतीलाल वोरा चाहते तो पूर्व में ही दुर्ग का कायाकल्प करने की ताकत रखते थे परंतु उन्होनें दुर्ग के लिए तो दूर की बात छत्तीसगढ के लिए भी कुछ नहीं किया। छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद अजीत जोगी के शासन में युवा आयोग के अध्यक्ष रहते हुए भी अरुण नें कोई कार्य नहीं करवाया जिसे वे अपनी उपलब्धि बता सकें। दुर्ग में धमधानाका का पुल ही कांग्रेस की निशानी है। दुर्ग वायशेप ब्रिज, शिवनाथ पुल, दुर्ग की सड़कें, नालियां सभी विकास कार्य भाजपा और भाजपा विधायक, महापौर सांसद की देन है। कांग्रेस के प्रत्याशी दुर्ग में किस विकास कार्य के लिए वोट मांग रहे हैं समझ से परे है। विकास कार्य के लिए सोच की आवश्यकता होताी है जो वोरा परिवार में कहीं भी परिलक्षित नहीं होता है। अरुण वोरा के लिए बाबू जी के अलावा दुर्ग में कोई सहारा नहीं हैं। पिछले चुनाव में बाबूजी नें जनता के पास जाकर इज्जत बचा लेने की गुहार लगाई थी, हेमचंद यादव हारे फिर से इज्जत की खातिर बड़े नेता होने के बावजूद दुर्ग से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं एैसे में जनता कब तक एक वरिष्ठ नेता की इज्जत की खातिर अपने विकास को दांव पर लगाएगी? इधर अरुण वोरा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं जीतने की खुशी अभी से मना रहे हैं उन्हे जनता के बीच जाने की जरुरत है। जनता को नेता चाहिए किसी परिवार की इज्जत नहीं बचानी है लोग बोलना शुरु कर दिए हैं कि दुर्ग अब किसी पप्पू प्रत्याशी को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है जो बाबूजी की गोद में अभी भी पड़ा हुआ है बाबू जी से पूछे बगैर कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। पूरा चुनाव प्रचार में वोरा परिवार जुटा हुआ है। रायपुर से गोविंदलाल वोरा का परिवार चुनाव संचालन कर रहे हैं। जमीनी नेता असमंजस की स्थिति में हैं एैसे में जीत कैसे होगी। कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ अंडरकरंट यह है कि कांग्रेसियों का वोट भी जनता कांग्रेस जे के प्रत्याशी प्रताप मध्यानी के पक्ष में पड़ सकता है। भाजपा के कैडर वोट हैं जो दुर्ग में स्थायी है किसी का नुकसान हो रहा है तो वह हैं अरुण वोरा। त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा की हार होगी एैसा जनता जनार्दन का कहना है।

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