छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ (20571)

 (ईश्वर दुबे) प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल के शपथ ग्रहण लेते ही प्रदेश की बागडोर उनके हाथों में है। भूपेश बघेल की पहचान एक तेज तर्रार नेता के रुप में है परंतु उनके व्यक्तित्व के कुछ अनछुये पहलू हैं जो बहुत ही कम लोगों को मालूम है। माननीय भूपेश बघेल को आध्यात्म में गहरी आस्था है तथा वे इस क्षेत्र में उच्च कोटि के साधक भी हैं भूपेश की धर्मपत्नी भी आध्यात्मिक एवं पूजा पाठ में रुचि रखती हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बूघेल को ऊर्जावान नेता के रुप में ख्याति मिली हुई है अब प्रदेश की जनता के विकास हेतु उनकी ऊर्जा का सदुपयोग होगा यह जनता के लिए बेहद शुभ संकेत है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के निवास में धर्ममय वातावरण रहता है तथा वे अपने ईष्टदेव माता भुवनेश्वरी (दुर्गा) के परम भक्त भी हैं। नवरात्रि में निवास में ही ज्योत की स्थापना प्रतिवर्ष की जाती है तथा उनके पूरे परिवार में धर्ममय वातावरण है। भूपेश बघेल के आध्यात्मिक गुरु के रुप में भिलाई-3 सिरसागेट के गायत्री दुर्गा मंदिर के पुजारी स्वर्गारुढ स्व.कैलाशचंद्र तिवारी का उनके निवास में आना जाना लगा रहता था। उक्त समय मैं भी उनके शिष्य के रुप में पूजा पाठ का ज्ञान अर्जित कर रहा था। उनकी भविष्यवाणी भी मुझे अब एकाएक याद आती है जब भूपेश बघेल पाटन से चुनाव में विजय बघेल से हार गए थे। उनका कथन था कि एक कार्यकाल हार जाने के बाद भूपेश का राजयोग जागृत होगा और वे सत्ता के शीर्ष स्थान पर विराजमान होंगे। फिर वे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष बनें तथा वर्तमान में तमाम झंझावातों को पार करके सत्ता के शीर्ष पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में विराजमान हैं। माता भुवनेश्वरी की भक्ति के प्रसाद के रुप में उन्हे शीर्ष पर की प्राप्ति हुई है जिसकी भविष्यवाणी पूर्व से ही कर दी गई थी,यही कारण है कि भूपेश बघेल के सामने कोई टिक नहीं पाये, भाजपा को 15 सीट में सीमित करते हुए इस ऊर्जावान नेता नें प्रदेश में इतिहास रच दिया। गृह ग्राम भिलाई-3 और पाटन विधानसभा क्षेत्र का हर बाशिन्दा आज गौरवान्वित है कि हमारे गृहग्राम का कोई व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पद पर आसीन है जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। भूपेश बघेल की सबसे बड़ी पहचान उनकी स्पष्टवादिता एवं सहृदयता है, प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जान फूंककर उनमें ऊर्जा का संचार करने में भूपेश की महती भूमिका रही है। उनकी ऊर्जा के केंद्र बिंदु के रुप में उनकी आध्यात्म के क्षेत्र में गहरी रुचि है। दुर्गा सप्तशती के पाठ में गहरी आस्था रखने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दिनचर्या में पूजा पाठ शामिल है। प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के पश्चात यदि वे रायपुर मुख्यमंत्री निवास में रहते हैं तो निसंदेह मुख्यमंत्री निवास रायपुर में भी उनकी आध्यात्मिक साधना का क्रम जारी रहेगा। गुरुदेव कैलाशचंद्र तिवारी के शिष्य के रुप में भूपेश बघेल ने सर्वत्र अपने माता पिता गुरुजनों का नाम रोशन किया है। अपने पिता को मुख्यमंत्री बनने के वचन को उन्होनें पूरा किया। राजनीति में ऊंची सोच रखने वाले प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संघर्षों की गाथा किसी से छुपी नहीं है। उनका विशाल व्यक्तित्व है कि वे तमाम झंझावातों के बीच भी कदापि विचलित नहीं हुए। उनके जैसे जीवट व्यक्तित्व नें हमेशा ही संघर्ष करने की परंपरा को आत्मसात किया है। भिलाई-3 की जनता उनके संघर्षों की कहानी बयाँ करती है। चाहे वह भिलाई-3 सोमनी में राखड़ बांध का मामला हो या अन्य समस्या उन्होनें सदैव छत्तीसगढसासियों के लिए सड़क की लडाई लड़ी है। मुख्यमंत्री के रुप में उनके शपथ ग्रहण के पश्चात छत्तीसगढ सहित खासकर भिलाई-3 एवं पाटन क्षेत्र की जनता में अपने लाडले नेता के लिए सर्वत्र खुशियाँ मनाई गई। प्रदेश में खुशियों के संचार करने के लिए मुखिया भूपेश बघेल के लिए बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिए और युवाओं ने उनके कंधा से कंधा मिलाकर कार्य करने का संकल्प लिया। प्रदेश के विकास के लिए उनकी ऊर्जा निश्चित ही नये सोपान तय करेगी एैसी आशा प्रदेश के हर नागरिक को है। ( लेखक- इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष हैं)

छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम साफ हो चुके हैं । इस बार राज्य में जहां भाजपा ने अपना जनाधार खोया तो वहीं कांग्रेस ने 68 सीटों के साथ जीत का विजय पताका फहराया। कांग्रेस की इस ऐतिहासिक जीत ने 15 साल से चल रहे रमन सिंह के शासन का अंत कर दिया है। भाजपा की झोली में महज 15, बीएसपी को 2 और जनता कांग्रेस को 5 सीटों में संतोष करना पड़ा। चुनाव रुझानों में भाजपा की हार देखने के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया और उन्होंने कहा कि वह भाजपा के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। उन्होंने रायपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम (पार्टी) बैठेंगे और आत्ममंथन करेंगे।’’ 

  
किसी प्रकार की कोई गड़बड़ न हो इसके लिए कांग्रेस ने विधायक दल के नेता के चुनाव की निगरानी के लिये लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को छत्तीसगढ़ में पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा। गृह मंत्री रामसेवक पैकरा को कांग्रेस के प्रेमसाई सिंह टेकाम ने 44 हजार 105 मतों से पराजित किया। अन्य हारने वाले मंत्रियों में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री भैयालाल रजवाड़े, बस्तर क्षेत्र के दो प्रमुख मंत्री महेश गगडा और केदार कश्यप शामिल हैं। सहकारिता मंत्री दयालदास बघेल को भी हार का सामना करना पड़ा। निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक अंबिकापुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी और विपक्ष के नेता टी.एस. सिंहदेव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के अनुराग सिंह देव को 39624 मतों से पराजित किया है।

 वहीं, कुरूद विधानसभा सीट से मंत्री अजय चन्द्राकर ने निर्दलीय नीलम चन्द्राकर को 12317 मतों से पराजित किया है। कोंटा विधानसभा सीट से विधानसभा में विपक्ष के उप नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कवासी लखमा ने भाजपा के धनीराम बारसे को 6709 मतों के अंतर से पराजित किया है। वहीं नारायणपुर सीट से कांग्रेस के चंदन कश्यप ने मंत्री केदार कश्यप को 2647 मतों से पराजित किया है। बीजापुर सीट में कांग्रेस के विक्रम मंडावी ने मंत्री महेश गागड़ा को 21584 मतों से पराजित किया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार दुर्ग ग्रामीण सीट से कांग्रेस सांसद ताम्रध्वज साहू ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के जागेश्वर साहू को 27112 मतों से पराजित किया है।

 
वहीं, नवागढ़ सीट से कांग्रेस के गुरुदयाल सिंह बंजारे ने मंत्री दयालदास बघेल को 33200 मतों से हराया है। प्रतापपुर से कांग्रेस के प्रेमसाय सिंह टेकाम ने मंत्री रामसेवक पैकरा को 44105 मतों से हराया है। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर से कांग्रेस की अम्बिका सिंह देव ने मंत्री भईयालाल राजवाड़े को 5339 मतों से पराजित किया है। वहीं भिलाई नगर सीट से कांग्रेस के देवेन्द्र यादव ने मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय को 2849 मतों से पराजित किया है। मरवाही सीट से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रमुख अजीत जोगी ने भाजपा की अर्चना पोर्ते को 46462 मतों से पराजित किया है।

 वहीं, खरसिया सीट से कांग्रेस के उमेश पटेल ने भाजपा के ओपी चौधरी को 16967 मतों से पराजित किया है। चौधरी ने रायपुर कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया था। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार कोटा से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की रेणू अजीत जोगी ने भाजपा के काशी राम साहू को 3026 मतों से पराजित किया है। पाटन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भाजपा के मोतीलाल साहू को 27477 मतों से हराया है। बिलासपुर सीट से कांग्रेस के शैलेश पांडे ने मंत्री अमर अग्रवाल को 11221 मतों से पराजित किया है।

  रायपुर नगर दक्षिण सीट से मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस के कन्हैया अग्रवाल को 17496 मतों से पराजित किया है। वहीं, कांग्रेस के विकास उपाध्याय ने मंत्री राजेश मूणत को 12212 मतों से पराजित किया है।  अधिकारियों ने बताया कि सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों की वोटों की गिनती के लिए 5184 गणनाकर्मी और 1500 माईक्रोऑब्जर्वर नियुक्त किये गये थे। छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को मतदान कराया गया था। जिसमें राज्य के 76.60 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। 
 

 डॉ. रमन सिंह के लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। 90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में 46 सीटों पर बहुमत हासिल करने वाला ही सूबे का सरदार बनेगा। सबसे पहले सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों की गिनती शुरू हो चुकी है, उसके बाद 8.30 बजे से ईवीएम के मतों की गिनती होगी।  

 छत्तीसगढ़ में चला कांग्रेस का किसान दांव

छत्तीसगढ़ में किसानों की ऋण माफी समेत फसलों के उचित मूल्य के कांग्रेस के वादे का दांव सफल रहा। यहां भाजपा को राज्य की 90 में से 17 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस पहली बार दो तिहाई बहुमत से जीती। इस राज्य में अब तक हुए तीन चुनावों में दोनों दलों के बीच हार-जीत का अंतर एक फीसदी से कम रहा है। राज्य में मतदाताओं का गुस्सा इस कदर था कि रमन सिंह सरकार के पांच मंत्री ब्रजमोहन अग्रवाल, केदार कश्यप, महेश गगडा, दयालदास बघेल और अमर अग्रवाल चुनाव हार गए। राज्य में भाजपा की बड़ी हार का कारण अजित जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी रही। पहली बार चुनाव में उतरी पार्टी को हालांकि खास कामयाबी तो नहीं मिली, लेकिन जोगी के अनुसार उनकी पार्टी भाजपा के वोट काटने में सफल रही।

 मैं हार की नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं-रमन सिंह 


छत्तीसगढ़ में अप्रत्याशित हार से निराश रमन सिंह ने चुनाव के हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि मैं जनादेश का सम्मान करता हूं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को जीत की बधाई भी दी और कहा कि उम्मीद करता हूं कांग्रेस अपने वादे निभाएगी।  मैं छत्तीसगढ़ की जनता का आभार मानता हूं कि उन्होंने भाजपा को 15 साल उनकी सेवा करने का मौका दिया। जानकारी के मुताबिक रमन सिंह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने गवर्नर को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

 

पीएल पूनिया बोले- हम जनता के विश्वास को जिम्मेदारी से पूरा करेंगे

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रभारी पी एल पूनिया ने कहा कि हम नम्रता से लोगों द्वारा जनादेश स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने हमें अधिकार नहीं दिया है बल्कि जिम्मेदारी दी है। राज्य की जनता ने हमारे घोषणापत्र में किए गए वादे पर विश्वास किया और अब हम उसे पूरी जिम्मेदारी से पूरा करेंगे। पूनिया बोले लोगों ने राहुल गांधी के शब्दों पर भरोसा किया और हमें एक एजेंडा दिया है। 
 ( ईश्वर दुबे). रायपुर। छतीसगढ़ में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के महानायक हैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल। न डरे न झुके सिर्फ लड़ाई लड़ते रहे। प्रदेश की रमन सरकार ने उन्हें जमीन विवाद और सीडी कांड में फंसाया जबकि सर्वविदित है कि सीडी भाजपा के नेता ने ही बनवाया और सीबीआई जांच में उजागर भी हुआ। भूपेश बघेल ने जेल जाकर जनता को अपनी ओर आकर्षित किये और रमन सरकार के दमन को जनता ने नापसंद कर दिया। प्रदेश कांग्रेस की बागडोर वे जब से सम्हाले तभी से उन्होंने प्रदेश में जीत के लिए सबसे पहले अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया जो कांग्रेस की जीत के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। श्री जोगी की प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में लोकप्रियता है मसलन बहुल क्षेत्रों में उनके प्रति जनता में नकारात्मक सोच है तथापि जनता ने कांग्रेस को भरपूर साथ दिया। कांग्रेस के घोषणा पत्र में सभी वर्गों के लिए घोषणाएं की गई तथा इसके लिए नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव सभी तबकों के लोगों से स्वयं बातचीत करके मुद्दों हेतु सलाह मशवरा किया गया जिससे कांग्रेस का घोषणा पत्र वस्तुतः जनता द्वारा प्रतिपादित घोषणा पत्र बन गया। जनता ने बीजेपी के अहंकार को तोड़ने का मन बना लिया क्योंकि जनता के हर वर्ग को राहत देने की बात चुनाव में कांग्रेस ने की और भाजपा अति आत्म विश्वास में रही कि सीडी कांड से कांग्रेस के मुखिया को बदनाम कर दिए अब उनकी जीत सुनिश्चित है जनता को मूर्ख समझने की भूल बीजेपी को भुगतना पड़ा। जेल जाने से भूपेश बघेल और भी बड़े नेता बनकर हीरो बन गए तथा संदेश गया कि जनता के लिए लड़ने वाला और डॉ रमन सिंह को टक्कर देने वाला कोई है तो वह है भूपेश बघेल। अपने पूरे कार्यकाल में वे सरकार के दमन के बावजूद सरकार के खिलाफ तीखा हमला करते रहे, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ और सुनामी का रूप लेकर भाजपा की धज्जियां उड़ा दी और उनकी हार को शर्मनाक हार में बदल दिया। जनता ने मोबाइल, टिफिन, पैसा सबको नकारकर निःस्वार्थ भाव से कांग्रेस को मतदान किया। पूर्ण शराबबंदी, किसानों की कर्जमाफी, पुलिस के लिए घोषणा, सरकारी कर्मचारी, पत्रकार सभी प्रकार के लोगों को अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करने का लाभ निःसंदेह जीत के रूप में मिला। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश के नेतृत्व में टीम भावना भी सामने आई तथा भितरघात करने वाले को पूर्व से ही बाहर जा राश्ता दिखा दिया गया। एक स्वच्छ और सशक्त नेतृत्व किसी ने कांग्रेस को प्रदान किया तो इसके लिए भूपेश को महानायक के रूप में स्वीकार करना ही होगा। मध्यप्रदेश में कमलनाथ जीत के महानायक हैं तो छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की कुशल रणनीति के बल पर ही कांग्रेस की सरकार बन रही है। कांग्रेस आलाकमान भी भली भांति परिचित है कि झीरम कांड के बाद और अजीत जोगी के बाद शून्य से शिखर तक कांग्रेस को ले जाने वाले भुपेश बघेल ही हैं उनके कार्यकाल में ही राजीव भवन के रूप में कांग्रेस को हाईटेक कार्यालय मिला। एक ऊंची सोच रखने वाले सर्वमान्य नेता ने इतिहास रच दिया इसमें कोई दो मत नहीं होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस ने जबरदस्त बढ़त बनाई हुई है, जबकि भाजपा इस बार अपना किला बचाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है। 'चाउर वाले बाबा' के नाम से मशहूर प्रदेश के मुख्यमंत्री का भी जादू इस बार फेल हो गया और भाजपा पूरे प्रदेश में धराशायी हो गई।  
 
अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्या कारण हैं कि जो शख्स लगातार 15 सालों तक प्रदेश का मुख्यमंत्री रहा, लोग उसे 'चाउर वाले बाबा' के नाम से जानते हैं, अचानक उसका जादू कैसे खत्म हो गया? इस सवाल का जवाब जानने से पहले ये जान लेते हैं कि रमन सिंह को आखिर 'चाउर वाले बाबा' क्यों कहा जाता है? 

दरअसल, साल 2003 में रमन सिंह अपने बेहतरीन काम और साफ छवि के चलते चुनाव जीतकर पहली बार प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे। इसके बाद भी उनके विकास कार्य जारी रहे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के बुनियादी ढांचे पर काम किया, जैसे कि सड़क और बिजली।

इसके अलावा इंसान की जो बुनियादी जरूरत होती है- खाना, उसपर ध्यान दिया और पूरे प्रदेश में एक योजना शुरू की, जिसके तहत गरीबों को 2-3 रुपये किलो चावल बांटा गया। बस यहीं से रमन सिंह का एक नया नाम पड़ा- चाउर वाले बाबा यानी चावल वाले बाबा। चलिए अब जान लेते हैं कि 'चाउर वाले बाबा' यानी रमन सिंह का जादू इस बार प्रदेश में क्यों नहीं चला? 

इसके कई कारण हैं। पहला ये कि साल 2003 से लगातार सत्ता में रही भाजपा को इस बार विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए इस बार जीतोड़ मेहनत की और डॉ. रमन सिंह के खिलाफ खूब प्रचार-प्रसार किया, जिसका फायदा भी उन्हें मिला और भाजपा का मजबूत गढ़ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में उसका का सूपड़ा साफ हो गया।   

दूसरा कारण है राज्य के किसानों की सरकार के प्रति नाराजगी। राज्य में भले ही रमन सिंह को 'चाउर वाले बाबा' के नाम से जाना जाता हो, लेकिन इस बार की हकीकत कुछ और ही थी। इस बार किसानों की नाराजगी उनपर भारी पड़ी है और किसानों का ये गुस्सा इस बार सरकार के खिलाफ वोट के रूप में निकल कर आया। दरअसल, पिछले कुछ महीनों की बात करें तो पूरे देश के किसानों ने इस बार एकजुट होकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और निश्चित तौर पर इस प्रदर्शन का असर राज्यों पर भी पड़ा। 

सरकार बनाने की चाबी आदिवासियों के हाथ 

छत्तीसगढ़ की सियासत में यह माना जाता है कि चुनाव में जिसके साथ यहां का आदिवासी समुदाय होता है, उसकी सरकार बननी तय है, क्योंकि प्रदेश में आदिवासियों का एक बड़ा वोट बैंक है। बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों में से 29 सीटें आदिवासियों के लिए रिजर्व हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो राज्य में भले ही भाजपा ने सरकार बना ली, लेकिन आदिवासी सीटों पर वो अपनी मजबूत पकड़ नहीं बना पाए। साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने कुल 29 आदिवासी सीटों में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को महज 11 सीटें मिली थीं। 

इस बार भी आदिवासी इलाकों में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। भाजपा सिर्फ शहरी इलाकों में ही अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही है, जबकि आदिवासी बहुल इलाकों में इस बार भी भाजपा पिछड़ती हुई नजर आ रही है। 

नक्सलवाद पर लगाम लगाने में नाकाम रही सरकार 

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पूरी तरह से हावी है। यहां भाजपा 15 सालों से सत्ता में है, इसके अलावा केंद्र में भी भाजपा की ही सरकार है, लेकिन इसके बावजूद रमन सरकार नक्सलवाद पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई। इस बार भी नक्सलवादी क्षेत्रों में लगातार नक्सली हमले होते रहे, लेकिन सबसे खास बात ये रही है कि इस बार इन क्षेत्रों में भारी मतदान भी हुआ। नतीजों से इतना तो साफ जाहिर हो रहा है कि इस बार यहां की जनता रमन सिंह की सरकार के खिलाफ ही थी। 

काम आया कांग्रेस का वादा 

चूंकि सूबे के किसान पहले से ही भाजपा सरकार से नाराज थे, इसका फायदा कांग्रेस ने खूब उठाया। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि किसानों के सभी कर्ज माफ कर दिए जाएंगे। उनका यह वादा उनके लिए वरदान साबित हुआ और राज्य में रमन सिंह की सरकार का पत्ता साफ हो गया। 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सबको चौकाते हुए विधानसभा चुनावों में जीत की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल यही है कि आखिर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों की मानें CM की रेस में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। यही सवाल पर प्रदेश प्रभारी पी एल पुनीया से पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया। 

उधर राज्य में कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता इस जीत के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भूपेश बघेल का धन्यवाद कर रहे हैं। भूपेश बघेल पर चुनाव से पहले कई आरोप भी लगे थे और उन्हें CD कांड में जेल भी जाना पड़ा था। 

एफसीआई गोदाम में 11 दिसंबर को होने वाले मतगणना कार्य के दौरान गणना के सुपरवाइजर की सामान्य केलकुलेटर अपने साथ ले जा सकेंगे, राजनीतिक दलों के अभिकर्ताओं को इसकी अनुमति नहीं होगी। वहीं गणना में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों को अंग्रेजी के अंकों का इस्तेमाल करते हुए गणना करने की समझाइश दी गई है ताकि असुविधा न हो। दूसरे चरण के प्रशिक्षण में रविवार को जिला निर्वाचन अधिकारी भीम सिंह ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को गणना कार्य में जरा भी लापरवाही नहीं बरतने की सीख देते हुए गलती होने पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।

कलेक्टोरेट सभाकक्ष राजनांदगांव में मतगणना कार्य के संबंध में लगे अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, गणना पर्यवेक्षक, गणना सहायक, माइक्रो ऑब्जर्वर आदि अधिकारी-कर्मचारियों को पूरे मतगणना प्रक्रिया के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। विधानसभा क्षेत्र डोंगरगढ़ के सामान्य प्रेक्षक वी संपत, उप जिला निर्वाचन अधिकारी ओंकार यदु, एडीएम एके वाजपेयी, आयुक्त नगर निगम अश्वनी देवांगन सहित अधिकारी उपस्थित थे।

पान, गुटखा भीतर नहीं ले सकते : मतगणना स्थल में किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा पान, गुटका, धूम्रपान पूर्णत: वर्जित होगा।

कोई भी बख्शे नहीं जाएंगे

कलेक्टर ने निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को मतगणना के दौरान अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सजगता एवं सावधानी के साथ करने को कहा। उन्होंने कहा कि मतगणना कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही एवं गलती बिल्कुल भी क्षम्य नहीं होगा। उन्होंने अधिकारी-कर्मचारियों को मतगणना के संबंध में निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देशों के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी।

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ टेक्नीकल एजुकेशन (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 2002 के तहत तीन साल की संविदा पर नियुक्त होने के बाद से प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में सालों से कार्यरत 79 सहायक प्राध्यापकों को नियमित करने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी प्रस्तुत करने के तीन माह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनाया फैसला  राज्य सरकार ने नई नियुक्ति करने के लिए विज्ञापन जारी किया था, इसके खिलाफ याचिकाएं सिंगल बेंच ने खारिज कर दी थी। चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने अपील मंजूर करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त कर दिया है। 
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    राज्य सरकार ने प्रदेश में संचालित इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्नीक कॉलेजों में रिक्त पदों पर नियुक्ति करने के लिए 8 जुलाई 2002 को छत्तीसगढ़ टेक्नीकल एजुकेशन तीन वर्षीय संविदा सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 2002 जारी किया। इस नियम के तहत नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया।

     

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    पूरी प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों और पॉलीटेक्नीक कॉलेजों में व्याख्याता के पदों पर तीन वर्ष के लिए संविदा पर नियुक्तियां की गई, इसमें गोपी साव, बीएस कंवर, डॉ. रानी पुष्पा बघेल, संजीव कुमार सिंह सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों का चयन किया गया। 

     

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    तीन वर्ष के लिए संविदा पर नियुक्त होने से बाद से वे लगातार कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने इन पदों पर नियमित भर्ती करने के लिए 2015 में विज्ञापन जारी किया। हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिकाएं प्रस्तुत की गईं। कुछ याचिकाओं में जहां 2015 में जारी विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की गई थी, वहीं अन्य याचिकाकर्ताओं ने सालों से संविदा पर कार्यरत होने का हवाला देते हुए नियमित करने का निर्देश देने की मांग की थी। 

     

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    सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने जनवरी 2017 में याचिकाएं खारिज कर दी थीं, इसके खिलाफ 79 अपील प्रस्तुत की गई थी। अपीलों पर चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए अपील प्रस्तुत करने वाले 79 अभ्यर्थियों को नियमित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने आदेश की कॉपी प्रस्तुत करने के तीन माह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

     

  6. कोर्ट उनके साथ जिनकी आजीविका संकट में 

     

    हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति अधिसूचना के तहत विज्ञापन जारी करने के बाद सभी नियम, प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए की गई थी। याचिकाकर्ता किराए पर कार्य नहीं कर रहे थे। कोर्ट की जिम्मेदारी है कि उनके पक्ष में रहे जिनके जीवन और आजीविका पर संकट है। 

रायपुर . राज्य में पहली बार 1.07 लाख पोस्टल व सर्विस वोटों की गिनती की जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार इतनी संख्या में सरकारी कर्मचारियों ने डाक मतपत्रों व ईटीपीबीएस के जरिए मतदान किया है। 

 

यही वजह है कि 11 दिसंबर को  सुबह 7 बजे तक  मतगणना स्थल तक डाक मतपत्रों को   पहुंचाने के लिए सभी जिलों में डाकियों को स्पेशल पास भी दिए गए हैं।  प्रदेश के बाहर सरकारी ड्यूटी में तैनात राज्य के मतदाताओं को पहली बार ईटीपीबीएस के तहत ऑनलाइन भेजे गए थे। राज्य के बाहर से इसके जरिए वोट देने वाले कर्मचारियों की तादाद 14,720 है। ईटीबीएस ऑनलाइन जारी करते वक्त ऐसे कर्मचारियों को एक पिन नंबर भी जारी किया गया था।

 वहीं ऑनलाइन भेजे गए सर्विस वोटों के लिए एक बार कोड भी दिया गया है, जबकि चुनाव ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मचारियों में से 88,141 कर्मचारियों को डाक मतपत्र जारी किए थे। पिछले चुनाव में करीब 56 हजार कर्मचारियों को डाक मतपत्र जारी किए गए थे। इस बार 1.15 लाख आवेदन आए थे। इनमें से जानकारी अपूर्ण होने की वजह से करीब 8 हजार आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। कर्मचारी के डाक के जरिए दिए गए  पोस्टल बैलेट की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित की जाती है। आम लोगों की तरह सरकारी कर्मचारी का वोट भी गोपनीय रहता है। इसके लिए काउंटिंग के दिन जब पोस्टल वोट गिने जाते हैं तो सबसे पहले घोषणा पत्र यानी सरकारी कर्मचारी के सर्टिफिकेट को एक बार देखकर सुनिश्चित करने के बाद उसे अलग रख दिया जाता है और वोटों को मिक्स करके गिना जाता है।

रायपुर . सीडी कांड मामले में मतगणना के दूसरे ही दिन बुधवार को सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सुनवाई है। इसमें सीडी कांड के आरोपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, कारोबारी विजय भाटिया, पत्रकार विनोद वर्मा और भाजपा से निष्कासित कैलाश मुरारका पेश होंगे।

 

 इस मामले में आरोपी विजय पांड्या की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। कोर्ट ने उसके खिलाफ एक महीना पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। सीबीआई उसकी तलाश कर रही है। आरोपी मामला फूटने के बाद से फरार है। 

सीबीआई ने उसकी तलाश में रायपुर से लेकर मुंबई तक छापेमारी की है, पर कहीं भी वह नहीं मिला है। पांड्या पूरे मामले में मुख्य भूमिका है। उसने ही सीडी टेंपर करने के लिए स्टूडियो संचालक मानस साहू से मुलाकात कराई थी। जब पोर्न वीडियो को टेंपर किया जा रहा था, तो वह भी स्टूडियो में बैठा हुआ था। वह मृत कारोबारी रिंकू खनूजा का दोस्त है।

 

सभी आरोपियों को हर सुनवाई में उपस्थित होने और देश नहीं छोड़ने की शर्त पर कोर्ट ने जमानत दी है। इसलिए उन्हें हर पेशी में उपस्थित होना जरूरी है। अगर पेशी में उपस्थित नहीं हो पाए तो उसका पर्याप्त आधार कोर्ट में बताना होगा। आरोपी पांड्या की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण कोर्ट ने भी चार्जशीट पर बहस शुरू नहीं की है।

 

 आरोपी के पकड़े जाने पर ही सीबीआई के द्वारा पेश किए गए फाइनल चार्जशीट पर बहस होगी। सीबीआई और बचाव पक्ष के वकील आरोप पत्र पर बहस करेंगे। उसके बाद गवाही शुरू होगी। इस मामले में सौ लोगों को गवाह बनाया गया है। सभी को बारी-बारी कोर्ट बुलाया जाएगा। सीडी कांड में सीबीआई की जांच अभी भी जारी है। इसमें नया साक्ष्य मिलने पर सीबीआई पूरक चालान पेश कर सकती है। सबूत के आधार पर गवाहों को भी आरोपी बनाया जा सकता है।  हालांकि रायपुर से सीबीआई के सभी अधिकारी और कर्मचारी लौट गए हैं। जांच टीम का कोई भी सदस्य यहां नहीं है।

 

ढाई माह पहले पेश हुई थी फाइनल चार्जशीट : सीबीआई ने 24 सितंबर को सीडी कांड की फाइनल चार्जशीट पेश की थी। सीबीआई ने अपनी पड़ताल के आधार पर पांच आरोपी बनाए हैं, जिनके खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है। छठवें आरोपी की मौत के कारण उसके खिलाफ चार्जशीट पेश नहीं की गई। इसमें कैलाश मुरारका को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिसने पोर्न वीडियो में मंत्री राजेश मूणत का चेहरा लगाने के लिए पैसा दिया।

 

सीडी बनाने वह खुद मुंबई गया था। मृत कारोबारी रिंकू और फरार आरोपी पांड्या ने मिलकर सीडी बनाया था। पत्रकार विनोद वर्मा ने टेंपर सीडी की दिल्ली में एक हजार कॉपी कराई। उसमें से पांच सौ सीडी विजय भाटिया को दी गई, जिसे लेकर वे रायपुर आ गए। इसी सीडी को वायरल करने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर है। सीडी कांड में सभी ने मिलकर साजिश रची थी। दिल्ली के होटल में उनकी बैठक भी हुई थी। सभी के फुटेज सीबीआई ने कोर्ट में जमा किए है।

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे मंगलवार हो आ जाएंगे। यदि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सत्ता गई तो उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी। दरअसल कांग्रेस इस ताक में है कि उसकी सरकार बनी तो राज्य के चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो, आर्थिक अपराध शाखा और सीबीआई से कराएगी।
 
 
इस मामले में सामने आई एक डायरी ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। पार्टी के मुताबिक डायरी में मुख्यमंत्री और उनके परिजन सहित कई मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम कोड वर्ड में अंकित हैं। इस मामले में कई महीने बाद खासकर चुनाव के दौरान जांच एजेंसियां कुछ बड़े नौकरशाह के खिलाफ सक्रिय हुईं। इससे पहले छोटे कर्मचारी और अधिकारी ही जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे। 

‘छोटी मछलियों का शिकार कर बड़ों को बचा रहीं जांच एजेंसी’

जांच एजेंसियों को पिछले साल तब बिलासपुर हाईकोर्ट से झटका लगा, जब उनकी ओर से पेश किए गए तीन सरकारी गवाहों को अदालत ने आरोपी बनाने का आदेश दिया था। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस घोटाले का संज्ञान लिया था। 

घोटाले से जुड़ी डायरी सामने लाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे के मुताबिक यह हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है और इसमें सरकार के शीर्ष पर बैठे नेता, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां बड़े लोगों के बदले छोटी मछलियों का शिकार कर मामले पर पर्दा डाल रही हैं। आरोपों के घेरे में रहे शीर्ष नेता व नौकरशाहों से पूछताछ तक नहीं हुई है।

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