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दुनिया

दुनिया (3537)

वॉशिंगटन. एक  महिला ने बुधवार को नवजात बेटी की मौत के बाद अमेरिका के शरणार्थी हिरासत केंद्रों की क्रूरता की निंदा की है. महिला ग्वाटेमाला की रहने वाली है, अमेरिकी प्रवासन अधिकारियों द्वारा पकड़े जाने के बाद महिला की बेटी की मौत हो गई थी. हिरासत में लिए गए शरणार्थियों की खराब स्थिति को लेकर हो रही अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में यजमिन जुआरेज ने कहा कि “बच्चों को पिंजरों में कैद कर रखा जाता है. मैं चाहती हूं कि दुनिया भी अमेरिका की बेदिली देखे”

जुआरेज ने क्या कहा

“अगर आज मैं कुछ बदल सकती हूं या यह बताकर कोई बदलाव ला सकती हूं कि आईसीई के कारावास में शरणार्थियों के साथ कितना बुरा व्यवहार होता है तो यह बिल्कुल अनुचित है”

आगे बताया “वह पिछले साल अपनी 19 माह की बेटी के साथ अमेरिका भाग गई थीं, क्योंकि ग्वाटेमाला में उन्हें जान का खतरा था. उन्होंने अमेरिकी सीमा पार कर शरण मांगी. लेकिन, आव्रजन अधिकारियों ने पकड़कर उन्हें बर्फीले ठण्ड में ही पिंजरे में डाल दिया. इसके बाद उन्हें आई.सी.ई. हिरासत केंद्र ले जाया गया. जहां उनकी बेटी बीमार हो गई. मैंने डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ से बेटी की देखरेख करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. बाद में हमें आई.सी.ई. ने छोड़ दिया. मैं बेटी मैरी को लेकर डॉक्टर के पास गई, उसे इमरजेंसी रूम में भर्ती किया गया. लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.”

The Guardian news में देखें,जुआरेज ने क्या कहा

जुआरेज कहतीं है कि “दुनियाभर के लोगों को यह जानना चाहिए कि आई.सी.ई. में बहुत सारे बच्चों के साथ क्या हो रहा है. मेरी बेटी तो दुनिया से जा चुकी है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि उसकी कहानी अमेरिकी सरकार को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी.”

ओवरसाइट एंड रिफॉर्म हाउस कमेटी की अध्यक्ष एलिजा कमिंग्स ने भी इसकी निंदा की है. वहीँ कांग्रेस के हिस्पैनिक कॉकस के अध्यक्ष प्रतिनिधि जोकिन कास्त्रो ने कहा- सरकार की जवाबदेही होनी चाहिए. सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग की प्रमुख मिशेल बैचलेट ने कहा था कि अप्रवासियों और शरणार्थियों को अमेरिकी के हिरासत केंद्रो में जिस प्रकार रखा जाता है, यह देखकर बेहद दुखी हूं.

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न्यूज़ डेस्क पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग नें एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. जिसमें जम्मू और कश्मीर के मसले पर कई सवाल थे. रिपोर्ट बनाने वाली कमीशन नें साफ़ तौर पर कहा था कि “पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान में हालात भारत से कहीं बदतर है जिसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र कमीशन का पहुंच पाना भी आसान नहीं.”

इसके बाद हाल में ही एक और रिपोर्ट जारी कर संयुक्त राष्ट्र नें कश्मीरी लीगों के हालातों पर चिंता व्यक्त की, 43 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में “बोलचाल से लेकर, मिलने-जुलने, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को शांत करने के लिए आतंकवाद-विरोधी क़ानूनों का इस्तेमाल किया जाता है,”

हुर्रियत कांफ्रेस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने रिपोर्ट को अहम बताया है और कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों को रिपोर्ट में सुझाए गए अनुशंसाओं को जल्द से जल्द लागू करना चाहिए.

कश्मीर घाटी में रिपोर्ट को लेकर हालांकि कुछ ख़ास प्रतिक्रिया अबतक नज़र नहीं आई है और सामान्यत: सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहने वाले उमर अब्दुल्लाह ने इसपर कुछ नहीं कहा है, न ही महबूबा मुफ़्ती ने.

इसके अलावा भारत शाशित कश्मीर के बारे में भी रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक मतभेद रखनेवालों और स्वंयसेवी संस्थाओं को मनमाना तौर पर नज़रबंद करने को भी मानवाधिकार उल्लंघन के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है और इसमें कश्मीरियों पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में हुए हमलों का भी ज़िक्र है.

रिपोर्ट में श्रीनगर के महाराजा हरि सिंह अस्पताल के हवाले से कहा गया है कि पैलेट-गन के इस्तेमाल से 2016-मध्य और 2018 के अंत तक 1253 लोग आंखों की रोशनी खो चुके हैं, और न जाने कितने ही लोगों की मौतों का पता भी नहीं चल सका है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने 'रिपोर्ट को भारत की संप्रभुता का उल्लंघन क़रार देते हुए कहा कि इसमें सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले की पूरी तरह अनदेखी की गई है.'

लाहौर: मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और जमात उद दावा के प्रमुख आतंकी हाफिज सईद जल्द दी पाकिस्तान में सलाखों के पीछे होगा. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. दरअसल, पाकिस्तान के पंजाब पुलिस के आतंकवाद विरोधी विभाग (सी.टी.डी.) ने बुधवार को कहा कि उसने "आतंकवाद के वित्तपोषण" के सिलसिले में जमात-उद-दावा के 13 नेताओं के खिलाफ 23 प्राथमिकियां दर्ज की हैं.

नकवी से जब यह पूछा गया कि प्राथमिकी में नामजद होने के बाद भी सईद और उसके सहयोगियों को क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया, इस पर उन्होंने कहा कि पहले संदिग्ध के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाती है और फिर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है. प्राथमिकी में नामजद सईद और अन्य लोगों को भी आगे गिरफ्तार किया जाएगा." उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पुलिस ने आतंकवाद को धन मुहैया करने के आरोप में कई प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों को गिरफ्तार किया है और बाद में उन्हें आतंकवाद रोधी अदालतों द्वारा जेल भेज दिया गया. उन्होंने कहा, "लिहाजा इन संदिग्धों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा."

इमरान खान सरकार के एक सूत्र ने बताया कि सईद फिलहाल लाहौर के जौहर टाउन स्थित अपने घर पर है। पुलिस उसके घर पर छापा मार कर उसे गिरफ्तार करने के लिए सरकार से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रही है। सूत्र ने बताया कि सईद को इस हफ्ते गिरफ्तार कर लिए जाने की संभावना है क्योंकि इमरान खान सरकार आतंकवाद को धन मुहैया किए जाने के विषय पर वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने की इच्छुक दिख रही है।

पाकिस्तान इस सिलसिले में अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में एफएटीएफ की पिछले साल जून की समयसीमा को पूरा करने में नाकाम रहा था। इसके बाद एफएटीएफ ने इस्लामाबाद को अक्टूबर की समय सीमा दी और इसे पूरा नहीं करने पर कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी थी। कार्रवाई के तहत देश को काली सूची में डाला जा सकता है। पेरिस स्थित वैश्विक संस्था एफएटीएफ ने पिछले साल जून में पाकिस्तान को उन देशों की सूची में डाल दिया था, जिनके घरेलू कानून धन शोधन और आतंकवाद को मुहैया होने वाले धन की चुनौतियों से निपटने में कमजोर माने जाते हैं.

हाल ही में, आतंकवाद रोधी अदालत ने जेयूडी और जैश के 12 सदस्यों को आतंकवाद को धन मुहैया करने के आरोप में पांच साल तक की कैद की सजा सुनाई थी. इस बीच, बुधवार को सीटीडी ने कहा कि उसने आतंकवाद को धन मुहैया करने के आरोपों को लेकर सईद और उसके 12 सहयोगियों के खिलाफ 23 मामले दर्ज किए हैं. उनके खिलाफ ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो अकाट्य हैं.

गौरतलब है कि जेयूडी लश्कर ए तैयबा का मुखौटा संगठन माना जाता है, जो 2008 के मुंबई हमलों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार है. अमेरिका ने लश्कर को जून 2014 में विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था. अमेरिका ने सईद को 2012 से वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है और उसे अदालत के कठघरे तक पहुंचाने में सहायक सूचना देने वाले के लिए एक करोड़ डॉलर के इनाम की भी घोषणा कर रखी है.

कनाडा : कनाडा के सिसौगा सेलिब्रेशन स्कवायर पर शनिवार को सिंध के रहने वाले हिंदुओं ने प्रदर्शन किया. इन सभी ने पाकिस्तान से नाबालिग हिंदू लड़कियों के होने वाले जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने और उन लड़कियों के लिए न्याय मांगा जिनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है.

इस प्रदर्शन का मकसद पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाना है ताकि कोई कारगर कानून बनाकर वैसे अपराधियों पर नकेल कसी जा सके जो धर्म को हथियार बनाकर निर्दोष लड़कियों को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन करते हैं और उनके साथ बलात्कार करते हैं.

एक प्रदर्शनकारी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, 'जैसा कि आपको पता है कि सिंधी हिंदू काफी पीड़ा में हैं क्योंकि पाकिस्तान में आजकल जबरन धर्म परिवर्तन की कई घटनाएं सामने आ रही हैं.'

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लिए विरोध मार्च निकाला और पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए. बैनर पर लिखा है-पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन बंद किया जाए. पोस्टर पर यह भी लिखे दिखे कि 'धार्मिक अल्पसंख्यकों को झूठे मुकदमों में फंसाना बंद हो.' लोग नारे लगाते सुने गए कि 'पाकिस्तान हिंदू लड़कियों का अपहरण बंद करो, हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन बंद करो.' ये नारे भी सुने गए कि 'हमें इंसाफ चाहिए.'

ये था सनसनी फ़ैलाने वाला मामला

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक 18 साल की हिंदू लड़की के अपहरण को लेकर जबर्दस्‍त प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लड़की के मुस्लिम शिक्षक ने यह अपहरण किया है.

अपहृत लड़की के माता-पिता का आरोप है कि उन्‍हें लड़की से मिलने नहीं दिया जा रहा है, लेकिन उसके टीचर कामरान सोमूर ने उसे एक 'मदरसे' में पेश कराकर उससे बयान दिलवाया है. इस बीच पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग (एन) के नैशनल असेंबली के मेंबर (एम.एन.ए.) खेलदास कोहिस्‍तानी ने इमरान की अगुआई वाली पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी से मांग की है कि वह अल्‍पसंख्‍यक समुदाय को सुरक्षा मुहैया कराए. कोहिस्‍तानी सिंघ के जमशोरो से एम.एन.ए. हैं.

कॉलेज जाते समय हुआ अपहरण
बताया जाता है कि 3 जुलाई को लड़की को उस समय अगवा कर लिया गया जब वह अपने कॉलेज गई थी. कोहिस्‍तानी ने कहा, 'मार्च से अब तक लगभग 30 हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया है.' अगवा लड़की के भाई राकेश से भी बात हुई जिसने कहा, 'हमें बताया गया है कि हमारी बहन और उसे अगवा करने वाला मदरसे में उपस्थित हुआ जहां बहन ने कोई बयान दिया है.' राकेश थट्टा में कीटनाशकों की एक दुकान चलाते हैं.

कामरान उसे ट्युइशन पढ़ाया करता था
राकेश ने बताया कि जब उनकी बहन 9वीं क्‍लास में थी उस समय कामरान उसे ट्युइशन पढ़ाया करता था. वह कॉलेज में उसका क्‍लास टीचर भी है. यह कहे जाने पर कि हो सकता है लड़की अपनी मर्जी से गई हो, राकेश का कहना था, 'अगर ऐसा होता तो वह अपने सोने के गहने और बचाए हुए पैसे भी साथ ले जाती. वह अपने कपड़े भी ले जाती. अगर ऐसा होता तो वे दोनों उसी दिन किसी कोर्ट के सामने पेश होते. लेकिन वह रोज के पहनने वाले कपड़े और चप्‍पल पहनकर घर से निकली थी.'

गौरतलब है कि लगभग साढ़े तीन महीने पहले सिंध प्रान्त के घोटकी जिले में इसी तरह दो पाकिस्‍तानी हिंदू लड़कियों रीना और रवीना को कथित तौर पर अगवा करके उनका धर्म परिवर्तन करवा दिया था. पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने इस्‍लामाबाद के इंडियान हाई कमिशन से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद सुषमा स्‍वराज और पाकिस्‍तान के तत्‍कालीन सूचना व प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन के बीच ट्विटर पर 'जंग' छिड़ गई थी.

हांगकांग में सरकार विरोधी हजारों प्रदर्शनकारी रविवार को एक रैली निकाल रहे हैं, जो शहर को चीन से जोड़ने वाले रेलवे स्टेशन तक जाएगी। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य विरोध प्रदर्शन के जरिए शहर में चीन समर्थक नेताओं पर दबाव बढ़ाना है। बता दें कि हांगकांग में सोमवार को बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुआ था। हजारों युवाओं, नकाब लगाए हुए प्रदर्शनकारियों ने संसद में घुसने का प्रयास किया था।
हांगकांग में पिछले एक महीने से प्रदर्शन चल रहा है। पुलिस के साथ लोगों की झड़पें भी हुई हैं। यह प्रदर्शन एक कानून के कारण किया जा रहा है जिसके जरिए लोगों को मुकदमे का सामना करने के लिए चीन भेजे जाने का प्रावधान है। सिम शा सूई में एक पार्क से रविवार की दोपहर रैली की शुरूआत हुई। चीनी पर्यटकों के बीच शहर का यह हिस्सा काफी लोकप्रिय है ।
आयोजकों का कहना है कि मार्च के जरिए वह शहर में आए चीन के लोगों को बताना चाहते हैं कि यह प्रदर्शन किसलिए चल रहा है। प्रदर्शनकारी विधेयक को पूरी तरह वापस लेने, पुलिस द्वारा आंसू गैस और रबड़ की गोलियों के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच कराने, गिरफ्तार लोगों के लिए माफी और शहर की गैर निर्वाचित नेता केरी लाम के पद से हटने की मांग कर रहे हैं।

बीजिंग, प्रेट्र। वैसे तो चीन का शंघाई शहर अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ-साथ खूबसूरत इमारतों, परिदृश्‍यों और सांस्कृतिक विविधता के लिए भी जाना जाता है, लेकिन हत्या के एक वारदात नें लोगो को दहशत में दल दिया, जब शुक्रवार को पत्‍नी की हत्‍या करके उसके शव को 100 दिनों तक फ्रीजर में रखने के मामले में शख्‍स को मृत्‍युदंड की सजा दी गई है.

कपड़े की दुकान में क्‍लर्क के तौर पर कार्यरत झू ने पत्‍नी की हत्‍या के बाद उसके शव को 106 दिनों तक फ्रीजर में छिपा कर रखा. इस दौरान उसने पत्‍नी के सोशल मीडिया अकाउंट पर लॉग इन कर दोस्‍तों व रिश्‍तेदारों को मैसेज भी भेजा. बता दें कि झू ने यह फ्रीजर ऑनलाइन खरीदा था. इस दौरान उसने अपनी पत्नी यांग लिपिंग के क्रेडिट कार्ड से लगभग 150,000 युआन (21,800 अमेरिकी डॉलर) खर्च किए. यांग (30 वर्ष) अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी. झू ने अगस्त में शंघाई नंबर - 2 ‘इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट’ द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी. खबर में कहा गया है कि शंघाई हायर पीपुल्स कोर्ट ने शुक्रवार को सजा बरकरार रखी.

झू ने मृत्‍यु दंड के खिलाफ कोर्ट में अपील दर्ज कराई जिसे शंघाई नंबर 2 इंटरमीडिएट पीपुल्‍स कोर्ट की अदालत ने अगस्‍त में खारिज कर दिया था. रिपोर्ट में कहा गया कि शंघाई हायर पीपुल्‍स कोर्ट ने शुक्रवार को मृत्‍युदंड की पुष्‍टि की. शादी के दस माह बाद 17 अक्‍टूबर 2016 को पत्‍नी यांग से बहस के दौरान झू ने उसकी हत्‍या कर दी.

30 वर्षीय झू शियाओडोंग ने हत्या के बारे में भूलने का प्रयास किया और इसके लिए एक अन्य महिला के साथ घूमता फिरता रहा. दूसरी महिला के साथ घूमने में अपनी पत्‍नी यांग पिंग के क्रेडिट कार्ड से 150,000 युआन यानि 21,800 डॉलर की रकम खर्च कर दी ताकि पत्‍नी की हत्‍या को वह दिमाग से निकाल सके. यांग अपने पिता की इकलौती संतान थी.

इस्लामाबाद। पाकिस्तान और भारत ने मंगलवार को करतारपुर गलियारे के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने तथा संबंधित तकनीकी मुद्दों के मसौदा समझौते पर चर्चा हेतु दूसरी बैठक करने का फैसला किया। गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को गुरदासपुर जिले में मौजूद डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से जोड़ेगा और भारतीय सिख श्रद्धालुओं के वीजा मुक्त आवागमन में मदद करेगा।  श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब जाने के लिए केवल परमिट लेना होगा। सिख धर्म की नींव रखने वाले गुरू नानक देव ने 1522 ईसवी में करतारपुर साहिब की स्थापना की थी।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने आज (मंगलवार) भारत को जानकारी दी कि करतारपुर गलियारे के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने और संबंधित तकनीकी मुद्दों के मसौदा समझौते पर चर्चा के लिए दूसरी बैठक वाघा पर 14 जुलाई 2019 को होगी। मंत्रालय ने संक्षिप्त बयान में कहा कि भारतीय पक्ष से अपने प्रतिनिधिमंडल के बारे में जानकारी देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मामले की शीघ्र प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित हो कि गलियारे से नवंबर 2019 में गुरू नानक देवजी के 550वीं जयन्ती समारोह के लिए उचित समय पर आवागमन शुरू हो।
भारत ने 11 से 14 जुलाई के बीच बातचीत का प्रस्ताव रखा था। नयी दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की कि भारत पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित तारीखों को स्वीकार करेगा क्योंकि यह उसकी योजना के अनुरूप है। अटारी पर ऐतिहासिक गलियारे के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की पहली बैठक पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर द्वारा 14 फरवरी को पुलवामा में किये गये आतंकी हमले के बाद मार्च में द्विपक्षीय तनाव के साये में हुई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बैठक ‘‘लाभदायक’’ रही और चर्चा‘‘सौहार्दपूर्ण माहौल’’ में हुई। भारत ने करतारपुर गलियारे पर पाकिस्तान द्वारा नियुक्त एक समिति में कई खालिस्तानी अलगाववादियों की मौजूदगी पर अपनी चिंता जताई थी।

लाहौर। सऊदी अरब से उमरा करके वापस लौटे दो पाकिस्तानियों की रंजिश के चलते लाहौर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गोली मार कर हत्या कर दी गई। घटना से हवाई अड्डे के लाउंज में मौजूद सैकड़ों लोगों में दशहत फैल गई। समाचार पत्र ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने पुलिस के हवाले से बताया कि इन लोगों की लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अंतरराष्ट्रीय आमद लाउंज में सुबह 10 बजे हत्या कर दी गई।

इस घटना में एक व्यक्ति घायल भी हो गया। खबर में बताया गया कि हवाई अड्डा सुरक्षा कर्मियों ने घटना के संदिग्धों अरशद और शान को हिरासत में ले लिया है। 

पुलिस का कहना है कि संदिग्ध एक टैक्सी से हवाई अड्डे पहुंचे थे। निजी रंजिश के कारण इस घटना को अंजाम दिया गया। खबर में कहा गया कि गोलियां चलने से लाउंज में मौजूद सैकड़ों लोगों में भय व्याप्त हो गया। परिसर की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल हवाई अड्डे पर पहुंच गया है। फॉरेंन्सिक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई हैं। हवाई अड्डे का प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिया गया है।

जिन संस्थाओं को शेयर मिलेंगे, उनमें बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी शामिल
2006 से अब तक बफे 2.35 लाख करोड़ रुपए के शेयर डोनेट कर चुके
बफे ने बर्कशायर हैथवे के अपने शेयर कभी नहीं बेचे, पूरे दान करेंगे
ओमाहा (यूएस). निवेशक और कारोबारी वॉरेन बफे बर्कशायर हैथवे के 3.6 अरब डॉलर (24840 करोड़ रुपए) की वैल्यू के 1.68 करोड़ शेयर दान में देंगे। ये शेयर 5 संस्थाओं- बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन, सुसान थॉम्पसन बफे फाउंडेशन, शेरवुड फाउंडेशन, हॉवर्ड जी बफे फाउंडेशन और नोवो फाउंडेशन को दिए जाएंगे। बफे की कंपनी बर्कशायर ने सोमवार को यह जानकारी दी।
बफे ने 2006 से अब तक अपने 45% शेयर दान किए
बफे ने 2006 में ऐलान किया था कि परोपकार के कामों के लिए हर साल शेयर दान करेंगे। उस साल बफे ने 1.5 अरब डॉलर के शेयर डोनेट किए थे। बर्कशायर हैथवे के मुताबिक बफे ने कंपनी में अपने शेयर कभी नहीं बेचे।
बर्कशायर में 2006 में बफे की जितनी शेयरहोल्डिंग थी उसका 45% पांच फाउंडेशंस को दान दे चुके हैं। अब तक डोनेट किए गए शेयरों की कुल वैल्यू 34 अरब डॉलर (2.35 लाख करोड़ रुपए) होती है।
पिछले हफ्ते वॉलमार्ट के उत्तराधिकारी जिम वॉल्टन ने 1.2 अरब डॉलर के शेयर दान करने के फैसले की जानकारी दी थी। होम डिपोट कंपनी के को-फाउंडर बर्नी मारकस ने भी बीते हफ्ते ऐलान किया कि 4.5 अरब डॉलर की पूरी संपत्ति दान करेंगे।
अमेरिका में इस बात पर बहस भी छिड़ी हुई है कि आय में असमानता और दूसरे आर्थिक असंतुलनों की समस्या के निपटारे में अमीरों को अपने धन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए। निवेशक-समाजसेवी जॉर्ज सोरोस और फेसबुक के को-फाउंडर क्रिस हग्स ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पिछले हफ्ते संपत्ति कर (वेल्थ टैक्स) लगाने का मुद्दा उठाया था।

जनवरी 2014 से लेकर 27 जून 2019 तक अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 2,075 लोग मरे
इस साल मई तक अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 6 लाख लोग सीमा पार करते हुए पकड़े गए
वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिण-पश्चिम (मैक्सिको) सीमा पर मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए 31 हजार 733 करोड़ रु. के बिल पर दस्तखत कर दिए। अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले हफ्ते ही सीमा पर सहायता के लिए बिल को मंजूरी दी थी। व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि देश के दक्षिण-पश्चिम सीमा पर प्रवासी संकट से निपटने, मानवीय सहायता और सुरक्षा के लिए आपातकालीन सीमा सहायता बिल को मंजूरी दे दी गई है।
बीते दिनों मैक्सिको से अमेरिका जा रहे ऑस्कर अलबर्टो मार्टिनेज रामिरेज अपनी बेटी वैलेरिया के साथ रियो ग्रांड नदी पार करते समय डूब गए। अलबर्टो 23 महीने की बेटी को अपनी टी-शर्ट में फंसाकर नदी पार कर रहे थे। अलबर्टो और उनकी बेटी की नदी किनारे डूबे हुई तस्वीर को देख पूरी दुनिया भावुक हो गई थी।
अब तक 32,182 माइग्रेंट्स की मौत हुई
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन के मुताबिक, जनवरी 2014 से लेकर 27 जून 2019 तक 32,182 माइग्रेंट्स की मौत हुई। जबकि, इसी दौरान अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर 2,075 लोग मरे। वहीं, अमेरिका के कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के आंकड़ों के मुताबिक, 2000 में जहां 16 लाख से ज्यादा लोगों को सीमा में घुसते हुए पकड़ा गया था, वहीं 2018 में चार लाख लोगों को पकड़ा गया। लेकिन, इस साल मई तक अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर छह लाख लोगों को सीमा पार करते हुए पकड़ा जा चुका है।

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