ईश्वर दुबे
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Bhilai
हरियाणा की राजनीति में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोला है। दरअसल राज्यसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब चौटाला ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि हुड्डा की रणनीति पूरी तरह विफल रही, खासकर तब जब उनके ही 9 साथी उनका साथ छोड़ गए। चौटाला के मुताबिक, जब एक अनुभवी नेता, जो दस साल तक मुख्यमंत्री रहा हो, उसकी अपनी ही टीम के सदस्य साथ छोड़ दें, तो यह किसी भी बड़ी विफलता से कम नहीं है। यह सीधे तौर पर दिखाता है कि संगठन के अंदर भरोसे और एकजुटता की कितनी कमी है, और नेतृत्व कितना कमजोर पड़ गया है।
दरअसल दुष्यंत चौटाला ने भूपेंद्र हुड्डा की राज्यसभा चुनाव की रणनीति को विफल बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चार बार के राज्यसभा चुनावों में, जब हुड्डा के बेटे ने चुनाव लड़ा था, तब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। इस बार भी बीजेपी ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर उसे जीत के अंतिम चरण तक पहुंचाने का काम किया। चौटाला ने इशारों-इशारों में यह भी जताने की कोशिश की कि राजनीतिक समीकरणों का फायदा अक्सर कांग्रेस को मिलता रहा है, लेकिन हुड्डा इस बार उन मौकों को भुनाने में पूरी तरह नाकाम रहे। यह सिर्फ एक चुनावी हार-जीत का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेता की रणनीतिक चूक को उजागर करता है, जो उनकी दूरदर्शिता और राजनीतिक समझ पर सवालिया निशान लगाती है।