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राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डिजिटल विधायी प्रक्रियाओं और विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण

रायपुर, 06 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ विधानसभा को आधुनिक तकनीक से लैस करने तथा इसकी कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम, सुव्यवस्थित और पेपरलेस बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। इसी उद्देश्य के तहत राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA – National e-Vidhan Application) के प्रभावी क्रियान्वयन और सुचारू उपयोग को लेकर आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एवं कार्यप्रणाली

इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों को श्छमट।श् एप्लीकेशन की तकनीकी एवं व्यावहारिक बारीकियों से अवगत कराना था, ताकि विधायी कार्यों में डिजिटल संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके। इस पहल से विधानसभा के कामकाज में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय (MoPA) के NeVA समन्वयक श्री अमन गौतम और श्री श्रीधर स्वामी ने एप्लीकेशन के विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से एडमिन मॉड्यूल, प्रश्न मॉड्यूल और समिति मॉड्यूल के उपयोग एवं संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण उपस्थित प्रतिभागियों को प्रदान किया।

डिजिटल माध्यम से संचालित होंगी संसदीय प्रक्रियाएं

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को निम्नडिजिटल कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया। डिजिटल माध्यम से विधानसभा के प्रश्न और सूचनाएं प्रस्तुत करना, विधायी दस्तावेजों का ऑनलाइन प्रबंधन एवं सुरक्षित रख-रखाव, सदन की कार्यवाही से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, विभिन्न संसदीय और विधायी प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित करना शामिल है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस एप्लीकेशन के माध्यम से कामकाज न केवल बेहद सरल और त्वरित होगा, बल्कि इससे कार्य निष्पादन में भी उच्च स्तर की प्रभावशीलता आएगी।

सहभागिता और भविष्य के लाभ

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी से जोड़कर उन्हें पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और कागज रहित (पेपरलेस) स्वरूप देना है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में (NeVA) के इस प्रभावी क्रियान्वयन से विधायी दस्तावेजों के प्रबंधन और सूचनाओं के आदान-प्रदान में क्रांति आएगी। यह कदम न केवल विधानसभा की कार्यक्षमता में वृद्धि करेगा, बल्कि बहुमूल्य समय और कागजी संसाधनों की बचत में भी अत्यंत मददगार साबित होगा।

धान खरीदी पोर्टल, एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे को किया जाएगा एकीकृत, किसानों को नहीं देनी होगी बार-बार जानकारी

एग्रीस्टैक में पंजीयन और डिजिटल सर्वे में फसल का अंकन अनिवार्य, भौतिक सत्यापन के भी निर्देश

रायपुर, 06 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में किसानों को कृषि के क्षेत्र में और अधिक संबल प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में कृषक उन्नति योजना खरीफ-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना के तहत किसानों को आदान सहायता (अनुदान) राशि प्रदान करने की प्रक्रिया, पात्रता के दिशा-निर्देशों और डेटाबेस एकीकरण पर विस्तार से मंथन किया गया।

डेटाबेस का एकीकरण और डिजिटल व्यवस्था

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह पारदर्शी, सरल और त्रुटिरहित होना चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग के विभिन्न पोर्टलों और धान खरीदी डेटाबेस को आपस में एकीकृत करने पर जोर दिया, जिससे किसानों से बार-बार दस्तावेज या जानकारी मांगने की आवश्यकता न पड़े। डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे, किसान आईडी, फार्म आईडी और गिरदावरी के आंकड़ों को आपस में जोड़कर किसानों की कुल भूमि और फसल के रकबे की जानकारी का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि किसानों को अपनी विशिष्ट फार्म आईडी की पुष्टि करने तथा योजना के तहत अनुदान हेतु आवेदन करने की सहज सुविधा दी जाए। योजना के सुचारू संचालन हेतु योजना का लाभ लेने के लिए एग्रीस्टैक में पंजीयन अनिवार्य होगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे में संबंधित भूमि पर धान की फसल दर्ज होना आवश्यक है। धान खरीदी प्रक्रिया के अंतर्गत कम से कम एक सफल खरीदी का लेन-देन होना जरूरी है, जिसके लिए खाद्य विभाग के धान खरीदी पोर्टल की जानकारी का उपयोग किया जाएगा।

सत्यापन और अन्य फसल प्रोत्साहन पर जोर

कसानों के हितों की रक्षा और वास्तविक पात्रता सुनिश्चित करने के लिए धान खरीदी के दौरान टोकन जारी करते समय अनुदानित रकबे का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष तौर पर, पिछले वर्ष धान न बेचने वाले किसानों के मामलों में भौतिक सत्यापन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, बैठक में दलहन, तिलहन और मिलेट्स (कोदो-कुटकी-रागी) की खरीदी व्यवस्था तथा इन फसलों के उत्पादक किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहन के संबंध में भी स्पष्ट जानकारी प्रसारित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने ग्रामीण अंचलों में योजना की शर्तों और आवेदन प्रक्रिया का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया ताकि किसी भी किसान को असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक कृषि श्री राहुल देव, संचालक भू-अभिलेख श्री विनीत नंदवार और प्रबंध संचालक मार्कफेड श्री जितेन्द्र शुक्ला सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

 

दिवाली से पहले छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिला सुनहरा अवसर

छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल पहली बार आयोजित करेगा भर्ती परीक्षा

रायपुर, नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं को रोजगार का बड़ा अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर), उपसमूह-02 के अंतर्गत विभिन्न विभागों के 1,703 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। मंडल द्वारा इन पदों के लिए पहली बार लिखित भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी।

भर्ती में सहायक ग्रेड-3 के 1,206 पद, सहायक उप निरीक्षक (जिला इकाई संवर्ग) के 279 पद, शीघ्रलेखक (हिंदी) के 30, उप निरीक्षक-अ (शीघ्रलेखक, सामान्य शाखा) के 34, स्टेनो टाइपिस्ट के 23, डाटा एंट्री ऑपरेटर के 25, शीघ्रलेखक (द्विभाषी) के 13, पंजीयक लिपिक के 50, सहायक उप निरीक्षक-अ (सामान्य शाखा) के 40 और शीघ्रलेखक (अंग्रेजी) के 3 पद शामिल हैं।

ऑनलाइन आवेदन 5 नवम्बर से शुरू हो गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 27 नवम्बर 2026, शाम 5 बजे तक है। आवेदन में त्रुटि सुधार 28 से 30 नवम्बर तक शाम 5 बजे तक किया जा सकेगा।

लिखित परीक्षा 10 जनवरी 2027 को सुबह 10 से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। प्रवेश पत्र 4 जनवरी 2027 से मंडल की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। परीक्षा पांच संभागीय मुख्यालयों में होगी।

छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों, जो परीक्षा में उपस्थित होंगे, को परीक्षा शुल्क नियमानुसार उसी बैंक खाते में वापस किया जाएगा, जिससे शुल्क का भुगतान किया गया है। भर्ती से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवेदन के लिए अभ्यर्थी मंडल की वेबसाइट https://cgssb.cgstate.gov.in पर जा सकते हैं।

 

अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा

समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा गुरुजी का जीवन : मुख्यमंत्री श्री साय

स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा का सरल व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और सामाजिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर  नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अहिवारा के दिवंगत विधायक स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक सरल, सहज, मृदुभाषी और मिलनसार जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। विशेष रूप से अनुसूचित जाति समाज के विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और क्षेत्र की प्रगति में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा को लोग आत्मीयता के साथ 'गुरुजी' कहकर संबोधित करते थे। यह संबोधन उनके प्रति समाज के गहरे सम्मान और विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। जनसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा के साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि जब वे उपचार के लिए हैदराबाद में भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी हैदराबाद जाकर उनका हाल-चाल जानने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके स्वस्थ होकर लौटने की हम सभी को आशा थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनका जाना हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव क्षेत्र के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। उनकी स्मृतियों और जनसेवा की विरासत को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा। यह उनके प्रति प्रदेश सरकार और क्षेत्र की जनता की ओर से सम्मानपूर्ण श्रद्धांजलि होगी।

श्रद्धांजलि सभा में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और जगदलपुर विधायक श्री किरण देव ने भी स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के बीएलसी एवं एएचपी घटकों में अब तक 76,086 हितग्राहियों के आवासों को केंद्र की मंजूरी

27 जिलों के 84 नगरीय निकायों में नए आवास स्वीकृत, हजारों परिवारों के अपने आशियाने के सपने को मिली नई उड़ान

रायपुर.  नवम्बर 2026. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता से प्रदेश के शहरी जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। दीपावली के शुभ अवसर पर भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत 4670 नए आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश के 27 जिलों के 84 नगरीय निकायों में यह मंजूरी दीपावली की सौगात बनकर आई है।

बीएलसी में 60,623 और एएचपी में 15,463 आवासों को स्वीकृति

इस नवीन स्वीकृति से पूर्व भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत 55 हजार 953 हितग्राहियों तथा भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटक के अंतर्गत 15 हजार 463 हितग्राहियों के आवास स्वीकृत किए जा चुके थे। इस प्रकार दोनों घटकों में पहले ही कुल 71 हजार 416 आवासों को मंजूरी मिल चुकी थी।

अब 4670 नए आवासों की स्वीकृति के साथ बीएलसी घटक में स्वीकृत आवासों की संख्या बढ़कर 60 हजार 623 हो गई है। एएचपी घटक के 15 हजार 463 आवासों को मिलाकर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के इन दोनों घटकों के अंतर्गत अब तक कुल 76 हजार 086 हितग्राहियों के आवासों को भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है।

संवेदनशीलता के साथ शहरी गरीब परिवारों के लिए इन आवासों की मंजूरी गरीब कल्याण को प्राथमिकता देने वाली डबल इंजन सरकार के संकल्प को रेखांकित करती है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अपने पक्के घर की उम्मीद संजोए हजारों परिवारों के सपनों को नई मजबूती मिल रही है।

हर पात्र परिवार को पक्का आवास दिलाने प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नवीन आवासों की स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ में तेजी से साकार किया जा रहा है। उन्होंने सभी नए लाभार्थी परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि 4670 नए आवासों की स्वीकृति से हजारों शहरी गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना पूरा होगा। राज्य सरकार हर पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
दीपावली पर मिली यह सौगात उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है, जो अपने घर के आंगन में खुशियों के दीप जलाने का सपना संजोए हुए हैं। आवास की स्वीकृति उनके लिए केवल मकान निर्माण का अवसर नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में बढ़ता कदम है।

हर शहरी गरीब को अपना घर मिले, यही हमारा लक्ष्य : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने इस स्वीकृति को नगरीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए सभी हितग्राही परिवारों को बधाई दी है। उन्होंने संबंधित सभी 84 नगरीय निकायों को हितग्राहियों के आवास निर्माण में हर संभव सहयोग प्रदान करने और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के हर शहरी गरीब को अपना घर मिले, यही राज्य सरकार का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के प्रयास, प्रदेश के जरूरतमंद परिवारों के अपने आशियाने की उम्मीद को आगे बढ़ा रहे हैं। दीपावली पर बड़ी संख्या में नए आवासों की स्वीकृति इसी प्रतिबद्धता का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है—ताकि आने वाले समय में इन परिवारों के अपने पक्के घरों में भी खुशियों के दीप जगमगाएं।

रायपुर,  नवंबर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के अंतर्गत गठित कार्यकारी समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित किए जा रहें सुधार प्रस्तावों, जोखिम-आधारित वर्गीकरण तथा ईओडीबी नियमों के चरणबद्ध क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार उद्योगों एवं व्यवसायों को उनके संचालन के लिए भवनों के स्वरूप, ऊंचाई और निर्मित क्षेत्र के आधार पर कम जोखिम, स्व-प्रमाणीकरण और स्व-घोषणा के आधार पर तुरंत स्वीकृति व निरीक्षण से राहत, मध्यम जोखिम, थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन एवं अधिकृत विशेषज्ञों के प्रमाणीकरण के माध्यम से समयबद्ध मंजूरी के लिए नियमों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में उच्च जोखिम, निर्धारित सुरक्षा मानकों, अग्निशमन नियमों और जन-सुरक्षा के आधार पर विभागीय भौतिक निरीक्षण के पश्चात त्वरित स्वीकृति, विभागीय समीक्षा और सिंगल विंडो सिस्टम एकीकरण, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गठित जिला सशक्त समिति, कार्यकारी परिषद और कार्यकारी समिति की प्रक्रियाओं को समयबद्ध सीमा के भीतर अधिसूचित कर दिया गया है।

बैठक में नगरीय प्रशासन, आबकारी, आवास एवं पर्यावरण, उद्योग, गृह-अग्निशमन, संस्कृति, जल संसाधन तथा लोक निर्माण विभाग के व्यावसायिक सेवाओं के जोखिम वर्गीकरण, लोक सेवा गारंटी समय-सीमा और सिंगल विंडो पोर्टल एकीकरण की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी संबंधित विभाग ईओडीबी नियमों के प्रारूप पर अपने अंतिम सुझाव त्वरित रूप से प्रेषित करें, जिससे निवेशकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से मुक्ति मिले और प्रदेश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों को पारदर्शी, डिजिटल और सुगम वातावरण प्राप्त हो सके।

बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष कुमार ठाकुर, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे

16 से 19 नवम्बर तक फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण हेतु दूसरे बैच का आयोजन

राज्य में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगा जनगणना का मैदानी कार्य

रायपुर, 05 नवम्बर 2026/ भारत की जनगणना-2027 के प्रथम चरण अर्थात् मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य छत्तीसगढ़ में 01 से 30 मई 2026 तक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अब दूसरे चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य में इस चरण का मैदानी कार्य 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार के सदस्यों की गणना करेंगे।

जनगणना जैसे व्यापक राष्ट्रीय कार्य की सफलता के लिए प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन महत्वपूर्ण है। दूसरे चरण में राज्यभर में लगभग 66 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक मैदानी स्तर पर कार्य करेंगे। इनके प्रशिक्षण के लिए जिलों द्वारा 1,120 फील्ड ट्रेनर्स नामित किए गए हैं। फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने के लिए जिलों से 47 और जनगणना कार्य निदेशालय से 13, कुल 60 मास्टर ट्रेनर्स नामित किए गए हैं।

भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के मार्गदर्शन तथा जनगणना के नोडल एवं गृह विभाग की राज्य नोडल अधिकारी श्रीमती निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव और जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निदेशक श्री कार्तिकेया गोयल के दिशा-निर्देशों में मास्टर ट्रेनर्स का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण नवा रायपुर अटल नगर स्थित प्रशासन अकादमी में आयोजित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण दो बैचों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम बैच का चार दिवसीय प्रशिक्षण 02 नवम्बर से शुरू होकर 05 नवम्बर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। छत्तीसगढ़ के लिए नामित राष्ट्रीय प्रशिक्षक श्री अशोक मिश्र और श्री प्रदीप कुमार साव, दोनों संयुक्त निदेशक, ने प्रशिक्षण प्रदान किया।

प्रथम बैच में 16 जिलों में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर- रामानुजगंज, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा और खैरागढ़-छुईखदान- गंडई के मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को जनगणना के दूसरे चरण की प्रक्रिया, प्रश्नावली, प्रगणना की तकनीकी बारीकियों, मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग, आंकड़ों के संकलन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने सहित विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई। व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आगे फील्ड ट्रेनर्स को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए तैयार किया गया।

प्रशिक्षण श्रृंखला का दूसरा बैच 16 से 19 नवम्बर 2026

प्रशिक्षण श्रृंखला का दूसरा बैच 16 से 19 नवम्बर 2026 तक प्रशासन अकादमी, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित होगा। इस बैच को भी दोनों राष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण देंगे। मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के बाद वे जिला स्तर पर फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद फील्ड ट्रेनर्स प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। इस बहुस्तरीय व्यवस्था के माध्यम से राज्य के सभी जनगणना कार्यकर्ताओं को दूसरे चरण के लिए तैयार किया जाएगा।

जनगणना-2027 का दूसरा चरण राज्य के प्रत्येक व्यक्ति की गणना सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है। प्रशिक्षण के सभी स्तरों पर तकनीकी दक्षता, कार्य की शुद्धता, समयबद्धता और उत्तरदायित्व पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ में जनगणना का कार्य व्यवस्थित और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न हो सके।

खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, बस्तर में विकास कार्यों पर विशेष जोर

रायपुर, 05 नवंबर 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए।

राज्यपाल श्री डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।

वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन

राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।

जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना

राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।

खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं

राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान

राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

 

9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

बुनकरों और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता : मंत्री श्री गजेन्द्र यादव

रायपुर, 05 नवंबर 2026/ दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के विशेष निर्देशों के तहत, राज्य सरकार ने बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके श्रम का पारिश्रमिक जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। समय पर भुगतान होने से इन परिवारों में दीवाली की खुशियां और अधिक दोगुनी हो गई हैं।

समय पर भुगतान से मजबूत हो रहा स्थानीय हुनर- मंत्री श्री गजेन्द्र यादव

ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने इस संबंध में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के कठिन परिश्रम का समय पर पारिश्रमिक भुगतान हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़कर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। दीपावली से पहले पारिश्रमिक मिलने से उनके परिवारों के जीवन में उत्साह और समृद्धि का संचार होगा।

मंत्री श्री यादव ने आगे जोर देते हुए कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना को आत्मसात करते हुए बुनाई और गणवेश (यूनिफॉर्म) सिलाई के जरिए जमीनी स्तर पर सतत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार के दायरे को बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का मुख्य ध्येय है।

9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष और त्योहारी सीजन के दौरान पारिश्रमिक का यह वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे खातों में किया गया है। प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान अक्टूबर 2026 में किया गया। 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का पारिश्रमिक 3 नवंबर को अतिरिक्त भुगतान किया गया।

चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) की कुल उपलब्धियां

राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है, जिसमें शामिल हैं। बुनकर सहकारी समितियों को 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये, 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 21 करोड़ 17 लाख रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

बुनकरों को कल्याणकारी सहायता

बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु पर 29 आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान और हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर में पुनर्वासित महिलाओं के लिए नए अवसर

पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ सुदूर और आकांक्षी जिलों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अनूठी पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत सुकमा, बस्तर, कोरबा एवं जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस वस्त्रों का सदुपयोग करते हुए इनसे आकर्षक खिलौने, थैले (बैग) और वाटर बैग जैसे उत्पाद तैयार करवाने के कार्यादेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, इन महिलाओं को घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उनके लिए आय के नए और स्थायी अवसर विकसित किए जा रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक संपन्न

रायपुर, 5 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में प्रस्तावित विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा भविष्य की योजनाओं को लेकर रूपरेखा तैयार की गई।

लागत के स्पष्ट आकलन और समयबद्ध तैयारी पर जोर

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लागत तुलनात्मक विश्लेषण में पूरी स्पष्टता रखी जाए, जिससे प्रत्येक परियोजना की लागत का उचित और यथार्थवादी आकलन संभव हो सके। उन्होंने आगामी बजट में शामिल किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की समय रहते पहचान करने और उनकी आवश्यक प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियां पहले से ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रमुख सड़क एवं बुनियादी परियोजनाओं पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। मुख्य रूप से इन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कांकेर जिला में भानुप्रतापपुर-कांकेर-पंखाजूर मार्ग पर पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण कार्य। बिलासपुर क्षेत्र में बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण तथा बिलासपुर जिले में फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण का कार्य शामिल है। दुर्ग एवं अन्य परिक्षेत्र में नगरी-कांकेर-भानुप्रतापपुर-मानपुर-राजनांदगांव-कवर्धा-फास्टरपुर कुंडा मार्गों तथा कुम्हारी, अहिवारा-धमधा-गंडई-साल्हेवारा मार्गों का उन्नयन एवं चौड़ीकरण कार्य।

बैठक में शासन के कई वरिष्ठ विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश कुमार टोप्पो, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर सहित विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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