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20 करोड़ से दिव्य बनेगा रुद्रेश्वर धाम

​रायपुर, 04अगस्त 2026/

सावन के पहले सोमवार की संध्या धमतरी की चित्रोत्पला महानदी का तट केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और अध्यात्म का सजीव संगम बन गया। काशी की तर्ज पर जब 108 दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच पहली बार भव्य ‘महानदी गंगा आरती’ का शुभारंभ हुआ, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज से पूरा रुद्री घाट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। धमतरी युवा ब्रिगेड और श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के इस ऐतिहासिक प्रयास ने नगर की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। अब जनआस्था का यह पावन पर्व सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी के तट पर सजने जा रहा है।
​भक्ति के इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच धमतरी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी की शुरुआत हुई है। प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया है। इस परियोजना के माध्यम से रुद्रेश्वर धाम को एक ऐसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।

​तीन चरणों में बदलेगा रुद्रेश्वर धाम का स्वरूप

​यह मास्टर प्लान प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत करता है। मंदिर की पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, आकर्षक शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद व स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली की व्यवस्था होगी। परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एआई (AI) आधारित हेल्थ कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह परिसर में उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की 'मैरीन ड्राइव' की तर्ज पर एक सुरम्य तट विकसित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पार्किंग, ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाएगा।
​विधायक श्री ओंकार साहू, महापौर श्री जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू सहित कई गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह आयोजन धमतरी के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए युग का प्रतीक है। महानदी गंगा आरती की अविरल धारा और रुद्रेश्वर धाम का समग्र विकास मिलकर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और जनसहभागिता को भी एक नया आयाम देंगे।

Our Government is Committed to the Empowerment of Divyangjans: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Prime Minister Shri Narendra Modi Gave the Term 'Divyang' a New Meaning of Dignity and Self-Respect, Says Chief Minister

Assistive Devices Worth ₹3.58 Crore Distributed Under Project 'Sahara'; 1,739 Divyangjans Benefit

₹ 7 Crore Announced for Renovation, Repair and Beautification of Sardar Balbir Singh Juneja Indoor Stadium

Raipur, August 3, 2026/ Reaffirming the State Government's commitment to the dignity, inclusion and empowerment of Divyangjans, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said that the hallmark of a sensitive and progressive society lies in ensuring equal opportunities, respect and the right to progress for every individual. He said that Divyangjans are an integral part of society, and it is the responsibility of the government to provide them with opportunities that enable them to realise their talent, ability and confidence.

Addressing the assistive devices distribution programme organised today under Project 'Sahara' at Sardar Balbir Singh Juneja Indoor Stadium in Raipur, Chief Minister Shri Sai said that the State Government is continuously working towards the social, educational and economic empowerment of Divyangjans so that they become self-reliant and contribute to society with dignity.

Highlighting the transformative approach of the Central Government, Shri Sai said Prime Minister Shri Narendra Modi has brought about a historic change in the country's outlook towards persons with special needs. Besides expanding welfare initiatives, he said, the Prime Minister introduced the term 'Divyang', instilling a new sense of dignity and self-respect. "This is not merely a change in terminology, but a transformation in society's mindset and perspective," he remarked.

Chief Minister further said that inspired by the Prime Minister's vision of 'Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas aur Sabka Prayas', the Chhattisgarh Government remains firmly committed to making the lives of Divyangjans more accessible, secure and self-reliant.

On the occasion, Shri Sai announced ₹ 7 crore for the renovation, repair and beautification of Sardar Balbir Singh Juneja Indoor Stadium. He said strengthening sports infrastructure is essential not only for athletes but also for hosting important social and public welfare programmes.

On the occasion, Chief Minister distributed a wide range of assistive devices, including motorised tricycles, tricycles, wheelchairs, hearing aids, artificial limbs, crutches, walking sticks and other modern mobility aids to a large number of beneficiaries. Interacting warmly with the recipients, he said these devices represent much more than physical assistance. "They symbolise self-respect, confidence and the beginning of a more independent life," he said, adding that the equipment would enable Divyangjans to pursue education, employment, mobility and daily activities with greater independence while strengthening their participation in the social mainstream.

Beginning his address by extending greetings to the people of the State on the first Monday of the holy month of Shravan, Shri Sai prayed to Lord Shiva for prosperity, health and happiness of all the people of the state. He said Indian culture inspires service, compassion and humanity, and helping the weaker and underprivileged sections of society is a shared responsibility.

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर, 03 अगस्त 2026/ ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत

रायपुर, 03 अगस्त 2026 / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।

इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ

स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।

डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान

कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

Every life is precious and timely treatment remains our priority: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

 

प्रोजेक्ट 'सहारा' के तहत 3.58 करोड़ रुपये के सहायक उपकरणों का वितरण, 1739 दिव्यांगजन हुए लाभान्वित

बलबीर सिंह जुनेजा स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा

रायपुर 3 अगस्त 2026/ किसी भी संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने का अधिकार मिले। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी प्रतिभा, क्षमता तथा आत्मविश्वास को सही अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक अपना योगदान दे सकें।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रोजेक्ट 'सहारा' के अंतर्गत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति देश की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने केवल कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि उन्हें 'दिव्यांग' कहकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव भी दिया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि समाज की सोच और दृष्टिकोण का परिवर्तन है। प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक और जनहितकारी आयोजनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, हियरिंग एड, कृत्रिम हाथ-पैर, वैशाखी, वॉकिंग स्टिक तथा अन्य आधुनिक सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि ये उपकरण केवल सहायता सामग्री नहीं हैं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई शुरुआत हैं। इनकी सहायता से दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार, आवागमन और दैनिक जीवन के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ पाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेशवासियों को सावन माह के प्रथम सोमवार की शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, करुणा और मानवता का संदेश देती है तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सहायता करना हम सभी का दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर जिले में विशेष अभियान चलाकर दिव्यांगजनों की व्यापक स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 1600 से अधिक दिव्यांगजनों की पहचान की गई। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए भारत सरकार से 3 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पहले ही 500 से 600 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आज 1000 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 1739 दिव्यांगजन प्रोजेक्ट 'सहारा' के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को अधिक सम्मानजनक, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर 3 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक श्री अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक श्री अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी

बिजली बिल में राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा को मिल रहा बढ़ावा

रायपुर, 03 अगस्त 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से लोग अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित कर न केवल बिजली के बढ़ते खर्च से राहत पा रहे हैं, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

सोलर सिस्टम से घटी बिजली की लागत
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मोहला निवासी श्री हेमंत कुमार साहू इस योजना के सफल लाभार्थियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने घर में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित कर बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई है। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके घर की अधिकांश विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति अब सौर ऊर्जा से हो रही है, जिससे बिजली बिल में भारी कमी आई है और परिवार को हर महीने आर्थिक राहत मिल रही है।

10 हजार रुपए तक के बिजली बिल से मिली राहत
श्री हेमंत कुमार साहू बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल लगभग 10 हजार रूपए तक आता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे न केवल घरेलू खर्च कम हुआ है, बल्कि परिवार स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सका है।

आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी माध्यम
श्री साहू का कहना है कि सोलर प्रणाली स्थापित होने से घरेलू विद्युत आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति हो रही है, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है और बिजली खर्च में लगातार बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से लाभदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रभावी पहल है, क्योंकि इससे स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।

योजना का लाभ उठाने की अपील
श्री हेमंत कुमार साहू ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाकर प्रत्येक नागरिक अपने बिजली खर्च में कमी ला सकता है और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा सकता है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए शासन एवं प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

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उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए शासन का बड़ा निर्णय, खाद्य कारोबार संचालकों से नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील

रायपुर, 3 अगस्त 2026। उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एनालॉग पनीर तथा अन्य डेयरी एनालॉग उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने जिले के सभी खाद्य कारोबार संचालकों, डेयरी उत्पाद निर्माताओं, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं से शासन के निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार यह निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया गया है। विभागीय परीक्षण, प्रयोगशाला विश्लेषण एवं जोखिम मूल्यांकन में यह सामने आया कि कुछ उत्पाद वास्तविक दूध से निर्मित नहीं होने के बावजूद उन्हें पनीर, क्रीम, मक्खन अथवा अन्य दुग्ध उत्पादों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था। इससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई थी।
प्रतिबंध के दायरे में ऐसे सभी उत्पाद शामिल किए गए हैं, जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया गया हो, अथवा जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या प्रदर्शन इस प्रकार किया गया हो कि वे वास्तविक दुग्ध उत्पाद प्रतीत हों। शासन का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक उत्पादों से बचाना तथा खाद्य बाजार में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ तथा मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे वे उत्पाद, जिनके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मानक निर्धारित हैं और जिनकी विधिवत लेबलिंग की जाती है, इस प्रतिबंध के दायरे में शामिल नहीं होंगे।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि यह प्रतिबंध राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से एक वर्ष अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अंतिम नियम जारी किए जाने तक, जो भी पहले हो प्रभावी रहेगा। इस अवधि में विभाग द्वारा निरीक्षण एवं निगरानी की कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
विभाग ने जिले के सभी डेयरी उत्पाद निर्माताओं, वितरकों, थोक एवं फुटकर विक्रेताओं से उपभोक्ता हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए शासन के निर्देशों का पूर्णतः पालन करने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण अथवा विक्रय की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। शासन का यह निर्णय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की पहल से डुंडेरा की जीविका का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट, डोंगरगढ़ की आरबीएसके टीम बनी उम्मीद की कड़ी

रायपुर, 03 अगस्त 2026/अब तक जिस दुनिया को नन्हीं जीविका सिर्फ देखती थी, अब उसे वह सुन भी सकेगी। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुंडेरा की इस बच्ची के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) किसी नई जिंदगी की शुरुआत बनकर आया है। जन्मजात श्रवण बाधिता के कारण जीविका सामान्य बच्चों की तरह सुन और बोल नहीं पा रही थी। परिवार के लिए यह चिंता का विषय था, लेकिन समय पर हुई स्वास्थ्य जांच और शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था के सहयोग ने उनकी उम्मीदों को नया जीवन दे दिया।

आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1, डुंडेरा में नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान आरबीएसके टीम-ए, डोंगरगढ़ ने जीविका की समस्या को पहचाना। टीम ने बिना समय गंवाए आवश्यक चिकित्सकीय जांच कराई, विशेषज्ञों से परामर्श कराया और उसे एम्स रायपुर रेफर किया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसका सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया। अब नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास के साथ जीविका धीरे-धीरे आवाजों की दुनिया से परिचित हो सकेगी और सामान्य बच्चों की तरह बोलना भी सीख पाएगी।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ऐसे ही हजारों बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन रहा है। कार्यक्रम के तहत जन्मजात विकार, पोषण संबंधी समस्याएं, विकास में देरी और अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर बच्चों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

जीविका की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि बीमारी की समय पर पहचान हो और उपचार सही समय पर मिले, तो कई बच्चों का भविष्य बदला जा सकता है। डोंगरगढ़ की 'चिरायु' टीम की सतर्कता और समन्वित प्रयासों ने एक बच्ची के जीवन में सुनहरे कल की उम्मीद जगा दी है। अब उसके घर में सिर्फ मुस्कान ही नहीं, बल्कि आवाजों की नई दुनिया भी दस्तक दे रही है।

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