ईश्वर दुबे
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Bhilai
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो ने कचरा संग्रहण को बनाया रोजगार का जरिया, हर माह 12 से 15 हजार रुपये की आय
रायपुर , 23 सितंबर 2026/ स्वच्छता केवल शहरों को साफ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आज यह अनेक परिवारों के लिए सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन रही है। बलरामपुर की श्रीमती प्रतिमा टोप्पो की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है। स्वच्छाग्रही के रूप में कार्य करते हुए वे घर-घर से कचरा एकत्र करती हैं, उसका पृथक्करण करती हैं और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। स्वच्छता से जुड़ी इस सेवा ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो प्रतिदिन रिक्शे से घर-घर पहुंचकर कचरा संग्रहण करती हैं। एकत्रित कचरे को सेग्रीगेशन शेड तक पहुंचाने के बाद वे उपयोगी एवं पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करती हैं। इस सामग्री की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। उन्हें स्वच्छता कार्य के लिए लगभग 8 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जबकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की बिक्री से 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय हो जाती है। इस प्रकार वे हर माह लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक अर्जित कर रही हैं।
रोजगार से बढ़ा आत्मविश्वास, परिवार को मिला आर्थिक संबल
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो बताती हैं कि पहले परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई होती थी। स्वच्छता कार्य से जुड़ने के बाद अब वे परिवार के राशन और अन्य जरूरी खर्चों में आर्थिक सहयोग कर पा रही हैं। अपने श्रम से होने वाली आय ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है और उन्हें अपने परिवार के लिए आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाया है।
उनके लिए स्वच्छता का यह कार्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। वे जिस तरह नियमित रूप से अपने दायित्व का निर्वहन कर रही हैं, वह स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और श्रम की गरिमा का भी उदाहरण है।
स्वच्छता अभियान से आजीविका और आत्मनिर्भरता को नई दिशा
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो की यह कहानी बताती है कि स्वच्छता अभियान का प्रभाव केवल साफ-सुथरे शहर और मोहल्लों तक सीमित नहीं है। कचरे के उचित संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण से आजीविका के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। विशेष रूप से महिलाएं स्वच्छता गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारी
रायपुर. 23 सितम्बर 2026. राज्य शासन ने बीजापुर-आवापल्ली-बासागुड़ा-जगरगुंडा मार्ग के मजबूतीकरण के लिए 18 करोड़ 94 लाख 23 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से 37.10 किमी सड़क का मजबूतीकरण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति का पत्र प्रमुख अभियंता को जारी कर दिया है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। राज्य शासन ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने स्वीकृत की राशि
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का आदेश जारी
रायपुर. 23 सितम्बर 2026. खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने जिला मुख्यालय बेमेतरा में जिला स्तरीय बहुउद्देश्यीय स्टेडियम के निर्माण के लिए 6 करोड़ 47 लाख 67 हजार रुपए मंजूर किए हैं। छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत बेमेतरा में करीब दस एकड़ में इस बहुउद्देशीय स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से प्रशासकीय स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया है।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा स्वीकृत राशि से स्टेडियम में फुटबॉल मैदान, गैलरी, बाउंड्री-वॉल, चेंजिंग-रूम, जिम, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए टॉयलेट्स के साथ ही विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
धान उपार्जन व्यवस्था बनेगी और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़
रायपुर, 23 सितम्बर 2026/छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा।
इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद श्री कवीश्वर उपस्थित रहे।
बिहान से जुड़कर पशुपालन और सब्जी उत्पादन को बनाया आय का जरिया, सालाना आय ढाई लाख रुपये तक पहुंची
रायपुर 23 सितंबर 2026/ लगन, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की श्रीमती निधि तिवारी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। पशुपालन और सब्जी बाड़ी के जरिए उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।
श्रीमती निधि तिवारी जून 2023 से दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की अध्यक्ष हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। उनकी गाय से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला।
इसके छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी- बाड़ी का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
टमाटर की खेती से बढ़ी आमदनी
निधि तिवारी ने मार्च माह में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें लगभग 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बिक्री करने से अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को विविध बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की।
निधि बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं।
महिला स्व सहायता समूहों से आजीविका को मिल रहा आधार
निधि तिवारी का अनुभव उस व्यापक ग्रामीण आजीविका ढांचे से जुड़ा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित करता है। ‘लखपति दीदी’ पहल इसी मिशन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान से महिलाओं को मिल रहा मंच
छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया है। 2026 में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं के आगे बढ़ाने की बात कही थी।
परिवार के सपनों को पूरा करने की राह पर निधि
निधि तिवारी कहती हैं कि मेहनत के साथ यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी- बाड़ी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज दूध उत्पादन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
निधि तिवारी की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। पशुपालन से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब वे लखपति दीदी की पहचान के साथ अपने परिवार के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।
रायपुर, 23 सितम्बर 2026/छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा।
इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद श्री कवीश्वर उपस्थित रहे।
8 हजार से अधिक पदों पर मिलेंगे रोजगार के अवसर
अधिकाधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश
रायपुर 23 सितंबर 2026/ प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। यह आयोजन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक पदों की रिक्तियां में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ।
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों को शामिल कर अधिक से अधिक रिक्त पद युवाओं के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक युवा ई-रोजगार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं।
राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के करकमलों से ऑफर लेटर वितरित किए जाने की भी तैयारी है। इसके लिए जिलों से चयनित अभ्यर्थियों की सूची 01 अक्टूबर 2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। साथ ही जिला एवं राज्य स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित युवाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने तथा प्रदेश के अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर विशेष प्रयास करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा सुरक्षा और सम्मान
ग्राम पंचायत धनौली की शांति बाई को आवास के साथ विधवा पेंशन से मिला आर्थिक संबल
रायपुर, 23 सितंबर 2026/ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत धनौली निवासी श्रीमती शांति बाई के लिए पक्का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है। कभी मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों की चिंता के बीच जीवन बिताने वाली शांति बाई आज अपने पक्के और सुरक्षित आशियाने में सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत शांति बाई के परिवार को पक्का आवास उपलब्ध हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र और राज्य स्तर की योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
शांति बाई के लिए बदली जिंदगी की तस्वीर
शांति बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश का मौसम शुरू होते ही घर की सुरक्षा और परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। घर के आसपास कीचड़ और पानी जमा होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। कच्चे घर में रहने के दौरान हर बारिश एक नई परेशानी लेकर आती थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद उनकी जिंदगी में यह स्थिति बदल गई है। मजबूत दीवारों और सुरक्षित छत वाले नए घर ने परिवार को मौसम की चिंता से काफी राहत दी है। अपने नए आशियाने को देखकर शांति बाई के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन से जुड़ा प्रयास
शांति बाई के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र सरकार की ग्रामीण आवास संबंधी योजनाओं के उस व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। उनके मामले में आवास की सुविधा के साथ सामाजिक सुरक्षा के रूप में विधवा पेंशन का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उन्हें नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।
शांति बाई कहती हैं कि पक्का घर मिलने से परिवार को सुरक्षा और सुविधा मिली है। पेंशन की सहायता से घर के जरूरी खर्चों में भी मदद मिलती है। उनके अनुसार आवास और पेंशन, दोनों का लाभ उनके लिए जीवन को अधिक सुरक्षित बनाने वाला सहयोग साबित हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार केंद्र एवं राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ग्रामीण परिवारों के जीवन में आवास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इसी समग्र कल्याणकारी दृष्टिकोण का हिस्सा है। शांति बाई का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि किसी परिवार के लिए पक्का घर मिलने से केवल रहने की जगह नहीं बदलती, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और भविष्य को लेकर विश्वास भी मजबूत होता है।
अब बारिश में घर की चिंता नहीं रहती
शांति बाई अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि पहले बारिश के दिनों में कच्चे घर को लेकर चिंता बनी रहती थी। अब पक्का घर मिलने के बाद परिवार सुरक्षित महसूस करता है। वे आवास योजना का लाभ मिलने और पेंशन से आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
शांति बाई की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन में आने वाले बदलाव की एक व्यक्तिगत मिसाल है। पक्का आवास उनके परिवार को मौसम की कठिनाइयों से राहत देने के साथ सुरक्षित जीवन का आधार उपलब्ध करा रहा है, वहीं विधवा पेंशन उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। पक्का घर, सुरक्षित जीवन और सामाजिक सुरक्षा, शांति बाई के जीवन में इन सुविधाओं का साथ उनके लिए नई उम्मीद और संतोष का आधार बना है।
लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक संपन्न
लक्ष्य के 179 प्रतिशत महिलाएं लखपति दीदी बन हुईं आत्मनिर्भर
रायपुर, 23 सितम्बर 2026/ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा संचालित लखपति महिला पहल को प्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिली है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023-26 के लिए छत्तीसगढ़ को 7.82 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक प्रदेश की 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।
लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के 27 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन ने लखपति महिला पहल के अंतर्गत प्रदेश में संचालित गतिविधियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
विभागीय अभिसरण से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर
बैठक में विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों को और गति देने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
लखपति महिला पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। बैठक में इस दिशा में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।