ईश्वर दुबे
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Bhilai
सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका और पासबुक पूर्ण करने के निर्देश
रायपुर, सितम्बर 2026/ स्कूल शिक्षा विभाग ने लंबित पेंशन प्रकरणों के त्वरित निराकरण के साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका और पासबुक समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय द्वारा प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया गया है।
विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि विभिन्न स्तरों पर पेंशन प्रकरण लंबित रहने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इसे देखते हुए सभी लंबित पेंशन प्रकरणों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा कर 30 सितंबर 2026 तक उनका निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका तथा पासबुक को पहले से पूर्ण करने कहा गया है। सेवा पुस्तिका में वेतन निर्धारण की जांच एवं सत्यापन कोष एवं लेखा से करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि सेवानिवृत्ति के समय पेंशन एवं अन्य स्वत्वों के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो।
विभाग ने प्रत्येक सत्र में 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक विकासखंड स्तर पर विशेष कैम्प आयोजित कर सेवा पुस्तिका एवं पासबुक पूर्ण करवाने के निर्देश दिए हैं। वहीं न्यायालयीन कारणों से लंबे समय से लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए कोर्ट सेल बिलासपुर की सहायता लेकर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया है।
इसके अलावा अक्टूबर 2026 से सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पीपीओ उसी माह जारी कराने तथा अन्य देय स्वत्वों का भुगतान भी सेवानिवृत्ति वाले माह में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की इस पहल का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और अन्य देयकों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है।
ई-टेंडरिंग की नई व्यवस्था से पहले ठेकेदारों को प्रशिक्षण, 1 अक्टूबर से नए पोर्टल पर बनेंगी और प्रकाशित होंगी निविदाएं
रायपुर. सितम्बर 2026. लोक निर्माण विभाग में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2026 से सभी निविदाओं का सृजन और प्रकाशन GePNIC (Government e-Procurement System of National Informatics Centre) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। नई व्यवस्था में ठेकेदारों को किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो, इसके लिए विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर यूनियन के अध्यक्ष श्री बिरेश शुक्ला और बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, रायपुर (छत्तीसगढ़) के स्टेट प्रेसिडेंट श्री रूपेश सिंघल को पत्र भेजकर ठेकेदारों को प्रशिक्षण में शामिल कराने के लिए सूचित करने को कहा गया है। विभाग ने दोनों संगठनों से GePNIC पोर्टल के प्रचार-प्रसार में सहयोग करने का भी आग्रह किया है।
22 सितम्बर से 30 सितम्बर तक रोज दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक प्रशिक्षण
लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदारों को GePNIC पोर्टल की बुनियादी जानकारी और इसके उपयोग की प्रक्रिया समझाने के लिए 22 सितम्बर से 30 सितम्बर तक प्रत्येक कार्य दिवस दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण चिप्स के माध्यम से दिया जाएगा। विभाग ने दोनों संगठनों से सभी ठेकेदारों को प्रशिक्षण में शामिल कराने के लिए अपने स्तर से सूचना देने का अनुरोध किया है।
GePNIC पर नामांकन जरूरी
लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 अक्टूबर से निविदाओं का सृजन एवं प्रकाशन GePNIC पोर्टल के माध्यम से ही होगा। इसके लिए सभी ठेकेदारों का GePNIC पोर्टल पर नामांकन आवश्यक है। अक्टूबर से ठेकेदार इसी पोर्टल के माध्यम से निविदाओं में भाग ले सकेंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य ठेकेदारों को नई ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था से परिचित कराना और पोर्टल के उपयोग की बुनियादी प्रक्रिया को समझाना है।
विभाग की तैयारी पूरी
लोक निर्माण विभाग पहले ही यह व्यवस्था कर चुका है कि 1 अक्टूबर 2026 से सभी निविदाएं GePNIC के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी। ठेकेदारों को पहले से प्रशिक्षण देने का मकसद नई व्यवस्था लागू होने के साथ निविदा प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों को कम करना है।
स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सेवा भाव और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से आमजन को किया जागरूक
रायपुर, सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पेंड्रा में मल्टीपर्पस स्कूल के सामने विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक एवं रंगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डाइट के बालक-बालिकाओं ने प्रभावी अभिनय, संवाद और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सेवा भाव, सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश आमजन तक पहुंचाए।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को सहज एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से स्वच्छ गांव और स्वस्थ समाज की अवधारणा को सामने रखते हुए नागरिकों से स्वच्छता अपनाने, पानी और बिजली की बचत करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।
प्रस्तुति में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और मेहनत एवं लगन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए युवाओं से समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि युवा केवल अपने भविष्य के निर्माण तक सीमित न रहकर सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एकता, भाईचारे और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश
नुक्कड़ नाटक के दौरान एकता, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता से संभव है। सेवा भाव और सामाजिक सरोकारों को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए आमजन को प्रेरित किया गया।
रंगोली के रंगों से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में रंगोली भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। विद्यार्थियों ने रंगों और कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। रंगोली के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश सहज और प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया कि छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने बढ़ाया आयोजन का प्रभाव
पूरे आयोजन में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ सामाजिक विषयों के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी प्रदर्शित की। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूक युवा न केवल अपने भविष्य का निर्माण करते हैं, बल्कि समाज के विकास और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को सेवा भाव, स्वच्छता, सामाजिक एकजुटता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने सामाजिक जागरूकता के संदेशों को आमजन तक सहज तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, श्री राकेश चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं नगरवासी उपस्थित रहे।
जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने स्वच्छता अभियान में सहभागिता कर जल स्रोतों के संरक्षण का लिया संकल्प, आमजन को स्वच्छता और जल संवर्धन के प्रति किया जागरूक
रायपुर, सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आज जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा में अरपा उद्गम स्थल के समीप नदी घाट स्वच्छता अभियान एवं नगरीय जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण एवं जल संवर्धन के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा नागरिकों को जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना रहा।
अरपा नदी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है और इसका उद्गम क्षेत्र गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय पहचान से जुड़ा हुआ है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों की स्वच्छता को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता करते हुए नदी घाट और आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में मरवाही विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैंकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री राजा उपेन्द्र बहादुर, नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के उपाध्यक्ष श्री शरद गुप्ता, श्री लालजी यादव, श्री राकेश चतुर्वेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
स्वच्छ जल स्रोत स्वस्थ समाज का आधार
कार्यक्रम के दौरान जल स्रोतों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने कहा कि नदी, तालाब और अन्य जल स्रोत केवल पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण, जैव विविधता और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए शासन के प्रयासों के साथ-साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
नदी घाट की स्वच्छता के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों में कचरा न डालें और उनके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। स्थानीय स्तर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ने से जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी।
जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन पर भी जोर
कार्यक्रम में जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। वर्षा जल के संरक्षण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर नागरिकों को जागरूक किया गया। उपस्थित लोगों को दैनिक जीवन में पानी की बचत करने तथा उपलब्ध जल संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी भावना को मजबूत करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अरपा के संरक्षण से जुड़ा जनभागीदारी का संदेश
अरपा नदी क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। इसके उद्गम क्षेत्र की स्वच्छता और संरक्षण का महत्व और भी बढ़ जाता है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सहभागिता से स्थानीय नागरिकों को जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आने का संदेश मिला।
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को स्वच्छता को अपनी दैनिक आदतों में शामिल करने, नदी एवं अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन ने सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
निर्माण कार्यो की धीमी प्रगति पर उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री ने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के प्रति जताई नाराजगी
काॅरिडोर निमार्ण कार्य का 15-15 दिन की कार्ययोजना बनाकर तेजी लाने के दिए सख्त निर्देश
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने की समीक्षा
रायपुर, सितंबर 2026/ स्वदेश दर्शन योजना के तहत लगभग 146 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किए जा रहे भोरमदेव कॉरिडोर के सभी प्रोजेक्ट की प्रगति की आज उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कबीरधाम के जिला पंचायत सभाकक्ष में समीक्षा की। समीक्षा के दौरान कई निर्माण कार्य अपेक्षा के अनुरूप गति से नहीं चलने पर दोनों मंत्रियों ने संबंधित ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने हर 15 दिन के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति नहीं होने पर अब जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर 15 दिन में कार्य की प्रगति निर्माण स्थल पर दिखाई देनी चाहिए। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं होने पर जिम्मेदार ठेकेदारों को कार्य से पृथक करने के साथ अनुबंध की शर्तों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक परियोजना है। ठेकेदार एजेंसियों की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होगी, वहां संबंधित ठेकेदार को कार्य से पृथक कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अनुबंध की शर्तों के तहत ब्लैक लिस्ट सहित अन्य कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी प्रोजेक्ट के लिए 15-15 दिन की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कार्ययोजना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निर्धारित अवधि के बाद निर्माण स्थल पर उसका परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। पर्याप्त मशीनरी, मानव संसाधन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र का विकास आने वाले कई वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसलिए प्रत्येक निर्माण कार्य मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कार्य में किसी तरह की तकनीकी अथवा अन्य समस्या आने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। इसलिए सभी संबंधित एजेंसियां पूरी गंभीरता और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। आगामी भोरमदेव महोत्सव तक निर्माण कार्यों में स्पष्ट और दिखाई देने वाली प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पीएमसी, ठेकेदारों और भोरमदेव विकास समिति के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही पीएमसी की भूमिका एवं जिम्मेदारियों की समीक्षा कर तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाने को कहा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने भी भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई कार्यों के कार्यादेश जारी हुए 8 से 09 माह हो चुके हैं, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षा के अनुरूप गति से नहीं चल रहे हैं। मंत्री श्री अग्रवाल ने सभी ठेकेदारों को पूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा प्रत्येक 15 दिन में किए जाने वाले कार्यों का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पहले तक निर्धारित कार्यों को पूरा करने की समय-सीमा तय की जाए। प्रत्येक 15 दिन में कार्यों की प्रगति की समीक्षा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले ठेकेदार को कार्य से पृथक करने तथा अनुबंध की शर्तों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लोक कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन को मिलेगा नया संबल, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए निर्देश
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा प्रदेश के लोक कलाकारों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, छत्तीसगढ़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के कार्यशील लोक कला दलों को वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस पहल से पारंपरिक लोक कला से जुड़े कलाकारों और दलों को अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए आवश्यक वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
‘संगीत की दुर्लभ शैलियों व वाद्यों हेतु संचालित योजना’ के अंतर्गत लोक कला दलों को वाद्य यंत्र क्रय करने के लिए सहायक अनुदान उपलब्ध कराया जाना है। योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संगीत शैलियों, दुर्लभ वाद्य यंत्रों और लोक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से प्रदेश में सक्रिय लोक कला दलों को अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग मिल सकेगा।
प्रदेशभर के कार्यशील लोक कला दल कर सकेंगे आवेदन
योजना के तहत प्रदेश के पात्र एवं कार्यशील लोक कला दल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। लोक कला दलों को निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन संबंधित जनपद पंचायत अथवा नगरीय निकाय कार्यालय में जमा करना होगा।
आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक लोक कला दल समय-सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए निर्धारित तिथि तक अपना आवेदन संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।
जिला स्तर पर अधिकारियों को जारी किए गए निर्देश
संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुपालन में संबंधित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर दिया गया है।
अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत लोक कला दलों तक योजना की जानकारी पहुंचाने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोक कलाकारों और लोक कला दलों को योजना की जानकारी समय पर मिल सकेगी और वे निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
लोक कलाकारों को मिलेगा आवश्यक संसाधनों का सहयोग
लोक कला दलों के लिए वाद्य यंत्र केवल प्रस्तुति का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी कला और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा होते हैं। अनेक पारंपरिक लोक कलाओं में स्थानीय और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व है। समय के साथ इन वाद्यों की उपलब्धता और संरक्षण भी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बनकर सामने आई है।
वाद्य यंत्रों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध होने से लोक कला दलों को अपनी प्रस्तुतियों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इससे लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।
दुर्लभ लोक संगीत शैलियों और पारंपरिक वाद्यों के संरक्षण पर जोर
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में अनेक विशिष्ट लोक संगीत शैलियां, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्र शामिल हैं। इनका संरक्षण केवल कला के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने से भी जुड़ा है।
योजना के माध्यम से पारंपरिक लोक कला से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ दुर्लभ संगीत शैलियों और वाद्यों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। अनुभवी कलाकारों से नई पीढ़ी तक पारंपरिक कला और वाद्य संगीत की जानकारी पहुंचाने में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
रायपुर, सितम्बर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ अभियान का आयोजन छत्तीसगढ़ के सभी आश्रम एवं छात्रावासों में किया जाएगा। अभियान के तहत विद्यार्थियों के बीच चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपने सपनों के भारत की कल्पना को चित्रों और विचारों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करना है।
ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की संयुक्त कार्यशाला में किसानों को मिला वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ एवं ICAR-CIFRI, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 8 एवं 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान, रोकथाम और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों पर किसानों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में ICAR-CIFRI के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर एवं तालाबों में मछलियों में होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसानों, 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला में फील्ड स्तर पर रोगों की त्वरित जांच, डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार, मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य संबंधी डेटाबेस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया। एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था को राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन श्री एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्री आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान सुश्री बीना गड़पाले तथा सहायक मत्स्य अधिकारी श्री विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जलाशयों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण
कार्यशाला के उपरांत 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा एवं श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने राज्य के जलाशयों का मैदानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थापित केज कल्चर की स्थिति का जायजा लिया तथा मौके पर ही मत्स्य पालक किसानों को मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन एवं बेहतर उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। राज्य में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी
स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार
रायपुर, सितम्बर 2026/ कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है।
छोटी बचत से बड़े सपनों तक
ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया।
नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया।
छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता
अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं।
कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।
खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है।
मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई
उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है।