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​रायपुर, जुलाई 2026/अप्रवेशी और शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना एक जरूरी कदम है। इसके लिए घर-घर सर्वे कर बच्चों की पहचान करना, विशेष शिक्षण (ब्रिज कोर्स) चलाना और माता-पिता को जागरूक करना मुख्य उपाय हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील नेतृत्व में और वन एवं प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर ​जिले के सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लगभग 1,200 शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) और अप्रवेशी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक विशेष पहल शुरू की है।

​कलेक्टर बीजापुर श्री विश्वदीप और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे के निर्देशन में 9 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के इन बच्चों को पहचानकर आवासीय पोर्टा केबिनों में प्रवेश दिलाया गया है।

​शुरुआती जुड़ाव,मुख्य आकर्षण और कार्ययोजना

घरेलू परिस्थितियों या स्थानीय समस्याओं के कारण पढ़ाई छोड़ चुके इन बच्चों को स्कूल के वातावरण में ढालने के लिए पहले खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टीवी और शैक्षणिक भ्रमण जैसी मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की गई।

​3 महीने का ब्रिज कोर्स

बच्चों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन करने और बुनियादी भाषा एवं गणित (संख्या ज्ञान) को मजबूत करने के लिए 90 दिनों का विशेष ब्रिज कोर्स चलाया जा रहा है।

​स्तर अनुसार कक्षा का निर्धारण

ब्रिज कोर्स पूरा होने के बाद एक मूल्यांकन परीक्षा ली जाएगी, जिसके आधार पर बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार उचित कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ​वर्षों बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा पढ़ाई से जुड़ रहे हैं। प्रशासन की मंशा के अनुरूप इन बच्चों की देखभाल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

​जिला पंचायत बीजापुर के सीइओ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों (डीईओ, डीएमसी,बीईओ, बीआरसी और संकुल समन्वयकों) की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि ​बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। ​अध्यापन की गुणवत्ता और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि बच्चे सहजता से ढल सकें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क यात्रा के दौरान नागरिकों से किया संवाद

 

 

 

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना अंतर्गत 35 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 210 करोड़ राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना में पर्यटन बढ़ाने के लिए नदी पर बने अनोखे ग्लास फ्लोर और व्यू प्वाइंट का लोकार्पण किया
मुख्यमंत्री ने पन्ना में 184.83 करोड़ रुपए की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

 

गुरू पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होकर संतों का प्राप्त किया आशीर्वाद

 

320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

अशोक कुमार चंद्रवंशी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी

नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।

मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर

नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।

इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर

नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।

विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र

नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।

शाकाहारी सफारी

30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।

भालू सफारी

20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।

बाघ सफारी

20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।

सिंह सफारी

20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।

जू जोन

50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।

दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण

नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।

देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक

वनमंडलाधिकारी श्री थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

Chief Minister Discusses Expanding Cooperation in Education, Healthcare and Nutrition Services in Chhattisgarh

Raipur, July , 2026/Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai visited Sathya Sai Village, Muddenahalli, Karnataka, on July 24 and reviewed its integrated Sewa model based on education, healthcare, nutrition and human values. He met Sadguru Shri Madhusudan Sai, Founder of the One World One Family Mission, and held detailed discussions on expanding public welfare initiatives in Chhattisgarh, particularly in the areas of free healthcare services, maternal and child health, nutrition and value-based education.

He said that the foundation of a developed Chhattisgarh lies not only in economic progress but also in building a healthy, educated and value-based society. He said the state government is continuously working to ensure quality education, healthcare and nutrition services reach every person in society as part of its commitment to good governance. He added that the experience, innovation and service-oriented approach of social organisations can further strengthen public welfare initiatives.

He specially appreciated the work of Shri Sathya Sai Sanjeevani Hospital, Raipur, which has provided a new life to thousands of children through completely free paediatric cardiac surgeries. Describing it as an outstanding example of humanity and service, he discussed the expansion of the hospital, the establishment of a Mother and Child Hospital, and the future expansion of healthcare services.

He attended the concluding session of the International Conference on Value-Based Education as the Chief Guest. More than 100 teachers and educationists from around 25 countries participated in the conference. Shri Sai said modern education should not only impart knowledge but also promote character building, service, compassion, morality and social responsibility. He said value-based education is the foundation for creating responsible citizens and a strong nation.

He also visited the SaiSure Nutraceuticals unit operated by the Shri Sathya Sai Annapoorna Trust. Through the SaiSure Multi-Nutrient Health Mix, nutritional support is being provided to nearly one crore children across 25 states and four Union Territories. Appreciating the initiative, he discussed the possibility of adopting similar innovations to further improve nutrition levels among children in schools and Anganwadi centres in Chhattisgarh.

He noted that nearly 300 youths from Chhattisgarh have received nursing education and training at the institution. The Chief Minister said the initiative is making a significant contribution by creating employment opportunities for young people while developing skilled healthcare professionals with a spirit of service.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai expressed confidence that cooperation between the Government of Chhattisgarh and the One World One Family Mission would open new opportunities in healthcare, education and nutrition, enabling quality services to reach poor, deprived and needy sections of society. He said the state government welcomes all initiatives that bring positive change to people's lives through service, compassion and good governance.

शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई सार्थक चर्चा, छत्तीसगढ़ में सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर

रायपुर  जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु श्री मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने श्री सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने कहा

रायपुर. 24 जुलाई 2026/ लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आज आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न संभागों के कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार और जेल अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक में जुड़े।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में प्रदेश की विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन बैरकों, बाउंड्रीवॉल्स, शौचालयों और वॉच टॉवर्स के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ ही सभी जेलों के अधीक्षकों से निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने को कहा।

श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और जेल अधीक्षकों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्रियों के परिवहन की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षकों को श्रमिकों को रोज काम के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नए बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मैदानी अधिकारियों, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को तेज गति से काम कर कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने को कहा।

इन कार्यों की हुई समीक्षा

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर के नगोई में 1500 आवास क्षमता के विशेष जेल, जिला जेल धमतरी और गरियाबंद में बाउंड्रीवॉल, जिला जेल जांजगीर, रामानुजगंज, सूरजपुर, कांकेर, संजारी-बालोद तथा उप जेल सारंगढ़ में बैरक निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागीय सचिव ने कवर्धा उप जेल में मुख्य दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य, केन्द्रीय जेल अंबिकापुर और जगदलपुर में कैदियों के लिए बैरक एवं शौचालय निर्माण, जिला जेल दंतेवाड़ा में शौचालय निर्माण, जिला जेल सुकमा की मुख्य दीवारों के चारों ओर कंसर्टीना वायर फेंसिंग तथा वॉच टॉवर निर्माण एवं उप जेल बीजापुर में वॉच टॉवर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

A Policy That Creates Women Solar Entrepreneurs: Chhattisgarh's DWEEPTI Yojana

Raipur, July 24, 2026/ Chhattisgarh has introduced a first-of-its-kind policy framework that places women's self-help groups at the centre of rural rooftop solar expansion, not merely as beneficiaries, but as vendors, technicians, entrepreneurs and service providers. The DWEEPTI Yojana, or Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion, has been jointly developed by the state's Panchayat and Rural Development Department and its technical partner, Transform Rural India, under the Green Economy Transition Mission.

According to the Panchayat and Rural Development Department, Chhattisgarh has become the first state in the country to adopt “a women-led distributed renewable energy policy.” The initiative aims to establish 5,000 women-led energy enterprises over the next five years, generate 50,000 green jobs, and expand access to clean energy for five lakh families and 10,000 institutions across Chhattisgarh.

In collaboration with the Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited and district administrations, the department has registered 13 Cluster Level Federations from 12 districts as authorised vendors under the PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana. Women are being trained in rooftop solar installation, operation, maintenance and community awareness, creating a local cadre of trained "Solar Didis" capable of providing technical services within their own communities.

To improve affordability, families associated with self-help groups are being offered loans with flexible repayment options for rooftop solar systems. The financing model is designed not only to expand clean energy adoption but also to help women-led enterprises build sustainable businesses in rural areas, in line with the Prime Minister Shri Narendra Modi's Lakhpati Didi vision by creating skill-based livelihood opportunities beyond conventional self-help group activities.

The DWEEPTI Yojana reflects the Chhattisgarh Government's broader effort to link women's economic empowerment with the clean energy transition. Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has consistently emphasised expanding livelihood opportunities for women through self-help groups, while Panchayat and Rural Development Minister Shri Vijay Sharma has underscored the role of community institutions in driving sustainable rural development. The initiative brings these priorities together by enabling women to participate in the renewable energy value chain as entrepreneurs, vendors and skilled technicians.

Chhattisgarh Panchayat and Rural Development Secretary Bhim Singh said "Women's role in the renewable energy space has so far remained limited, seen merely as recipients rather than active stakeholders. The DWEEPTI Yojana marks a shift, positioning women at the heart of the Distributed Renewable Energy sector and enabling them to take on roles as vendors, technicians, managers and entrepreneurs. This initiative reinforces the Prime Minister's Lakhpati Didi vision, bringing rural women into the mainstream economy through self-reliance in the clean energy sector."

Kabirdham: Where the Policy Meets the Ground

Kabirdham has emerged as one of the first districts where the policy has moved from design to implementation. Working with CSPDCL-RAPM, Raipur, Zila Panchayat Kabirdham (Bihan) facilitated the registration of the Vande Mataram Cluster Level Federation, Kawardha, as an authorised solar vendor. With technical support from Tata, nearly 35 women from Bihan self-help groups received specialised training in rooftop solar installation, creating the district's first cadre of “Solar Didis.”

रायपुर, 24 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना, अर्थात डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion), के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया है।

छत्तीसगढ पहला राज्य महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित करने, 50,000 हरित रोजगार सृजित करने तथा राज्य के पांच लाख परिवारों और 10,000 संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' की जा रही है तैयार

योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघो (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और जनजागरूकता का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' तैयार की जा रही हैं, जो अपने ही क्षेत्रों में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।

प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर

सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह वित्तीय मॉडल जहां स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है, वहीं महिला संचालित उद्यमों को टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच

यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच को भी प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर बल देते रहे हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को सतत ग्रामीण विकास का आधार मानते हैं। द्वीप्ति योजना इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ते हुए महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा में ला रही है।

ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से है जोड़ना

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से लाभार्थी तक सीमित रही है। ड्वीप्टि योजना इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ती है।

कबीरधाम में नीति से धरातल तक पहुंची पहल

द्वीप्ति योजना का प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में शामिल है। सीएसपीडीसीएल- आरएपीएम, रायपुर के सहयोग से जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया। टाटा के तकनीकी सहयोग से बिहान के स्व-सहायता समूहों की लगभग 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली 'सोलर दीदी' टीम तैयार की गई।

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