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दशकों के अंधेरे से बाहर आया गारपा, नियद नेल्लानार योजना से पहली बार घर-घर पहुँची बिजली

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कभी नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र में अब तेज हुआ विकास

नक्सल मुक्त होने से गारपा के 48 परिवारों को मिला बिजली कनेक्शन

रायपुर , 17 मई 2026 // छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी "नियद नेल्लानार योजना" के तहत जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में विकास की मजबूत दस्तक सुनाई दे रही है। नारायणपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित अत्यंत दुर्गम ग्राम गारपा में अब पहली बार बिजली की रोशनी पहुँची है, जिससे वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे ग्रामीणों के जीवन में नया उजाला आया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब इन दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुँच रहे हैं। पहले जहाँ सुरक्षा कारणों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं पहुँच पाती थीं, वहीं अब शासन की प्राथमिकता में इन क्षेत्रों को शामिल कर तेजी से काम किया जा रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन के सतत मार्गदर्शन में प्रशासनिक और तकनीकी टीमों ने मिलकर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।
बिजली विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना में लगभग 55 लाख रुपये की लागत से 48 उपभोक्ताओं को पहली बार बिजली कनेक्शन प्रदान किया गया। कार्यपालन अभियंता कुमार लाल उइके ने बताया कि घने जंगल, कठिन रास्ते और सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने अदम्य साहस और कार्यकुशलता का परिचय देते हुए निर्धारित समय में लाइन विस्तार का कार्य पूर्ण किया।

बिजली पहुँचने से अब गारपा के बच्चों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के नए रास्ते खुलेंगे। दशकों बाद अपने घरों को रोशन देख ग्रामीणों में उत्साह और खुशी का माहौल है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत जिले के अन्य दूरस्थ गांवों में भी इसी तरह प्राथमिकता के आधार पर विद्युतीकरण कार्य तेजी से जारी रहेगा, जिससे विकास की रोशनी हर अंतिम छोर तक पहुँच सके।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कांकेर में सड़कों और पुलों का काम देखा, विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्यों में तेजी लाने कहा

रायपुर. 17 मई 2026. राज्य शासन वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पूरी सक्रियता से काम कर रही है। अंदरूनी इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व समय-सीमा सुनिश्चित करने लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज कांकेर जिले का दौरा कर भानुप्रतापपुर में विभाग के कांकेर और भानुप्रतापपुर संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बैठक में कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ फील्ड में उतरकर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन सड़कों, पुलों और भवनों को तेजी से पूर्ण करने को कहा। उन्होंने स्वीकृत कार्यों की निविदा प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा कर धरातल पर काम शुरू करने के निर्देश दिए। आगामी मानसून को देखते हुए उन्होंने निर्देशित किया कि बरसात की शुरुआत से पहले सभी सड़कों की मरम्मत अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाए। बारिश के दिनों में सड़कों या उनके किनारों पर गड्ढों की वजह से पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुलों पर रिफ्लेक्टर्स और रेलिंग लगाने के काम को भी तत्काल पूरा करने को कहा ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

श्री बंसल ने दूरस्थ अंचलों में सुगम यातायात को शासन की प्राथमिकता बताते हुए पहुंचविहीन गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए पुल निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पुल और सड़क के बीच का ज्वाइंट स्मूथ रखने को कहा, ताकि इसकी वजह से यातायात की रफ्तार धीमी न हो।

विभागीय सचिव ने नरहरपुर में कॉलेज भवन के निर्माण में अत्यधिक ढिलाई बरतने पर संबंधित ठेकेदार को तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि काम में देरी और गुणवत्ताहीन कार्य करने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाए, उन्हें डिग्रेड किया जाए और जरूरत पड़ने पर टर्मिनेशन की कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने अभियंताओं को ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का परीक्षण कर तत्परता से भुगतान करने के निर्देश दिए।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विभागीय कार्यों में कसावट लाने और सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालयों में निवास करने को कहा। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर चल रहे कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय-सीमा में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर शासन का जवाब दाखिल करने, सर्किट हाउसों व विश्राम गृहों का बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

निर्माणाधीन सड़कों और पुलों का किया निरीक्षण

लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने भानुप्रतापपुर सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेने के बाद निर्माणाधीन सड़कों और पुलों का निरीक्षण किया। उन्होंने भानुप्रतापपुर के पास छोटे नारायणपुर में खंडी नदी पर तथा जिला मुख्यालय नारायणपुर के पास राजनांदगांव-बैलाडीला मार्ग में मेढकी नदी पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल का निरीक्षण कर कार्य प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अंतागढ़ से नारायणपुर तक 46 किमी लंबे करीब 120 करोड़ की लागत के सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य का भी अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को समय-सीमा में इन कामों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता श्री संजय सूर्यवंशी और कांकेर के कार्यपालन अभियंता सहित भानुप्रतापपुर एवं कांकेर संभाग के सभी उप अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे।

दुब्बाटोटा की सावलम भीमे बनीं ‘लखपति दीदी’

जिला प्रशासन की पहल से बदली जिंदगी

रायपुर, 17 मई 2026/ कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किया जा रहा है। इसी प्रशासनिक पहल का परिणाम है कि अब तक जिले में 5860 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो आकांक्षी जिला सुकमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इसी सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं कोंटा विकासखंड के दुब्बाटोटा गांव की निवासी श्रीमती सावलम भीमे, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन गई हैं। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करते हुए उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

सावलम भीमे लगभग 6 वर्ष पूर्व लिंगेश्वरी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ीं, जिसमें 11 महिलाएं शामिल हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण सुविधा प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने आजीविका गतिविधियों में सही उपयोग किया। वर्तमान में वे पशुपालन, कृषि और वनोत्पाद आधारित व्यवसाय से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं, साथ ही इमली और महुआ की खरीदी-बिक्री कर नियमित आमदनी प्राप्त कर अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं।

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जिले में लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। स्व सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आजीविका के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह सुकमा जिले के लिए गर्व की बात है कि 5860 महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होकर लखपति दीदी बन गई हैं।

सावलम भीमे की यह सफलता कहानी बताती है कि सुकमा प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम केवल योजनाएं नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में बदलाव की मजबूत नींव हैं। आज वे न सिर्फ अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से सुकमा प्रशासन जिले में आत्मनिर्भरता, विकास और सामाजिक परिवर्तन की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है।

​आज़ादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के अति दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा में खुला नया प्राथमिक स्कूल

नदी-नाले और पहाड़ पार कर 5 घंटे पैदल चलकर अधिकारियों ने कराया दाखिला

रायपुर,17 मई 2026
​देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शिक्षा की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे सुखद और ऐतिहासिक परिणाम नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी स्कूल की स्थापना हुई है। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब बच्चों को बंदूक की जगह कलम और किताबें मिल रही हैं।

​जनसमस्या शिविर से खुला विकास का रास्ता

​हाल ही में अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में एक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग की थी। कलेक्टर ने मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए तत्परता दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

​5 घंटे की पैदल यात्रा और सर्वे

​कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का सर्वे किया, जिसमें 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के योग्य पाए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी,खंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक, सरपंच और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। यह टीम दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंची और नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक शुभारंभ किया।

​मुफ्त गणवेश और शिक्षण सामग्री का वितरण

​स्कूल के पहले ही दिन बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही सभी 20 बच्चों को ​निःशुल्क गणवेश,​पाठ्यपुस्तकें और स्लेट
​पेंसिल, श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं।
​ कारकाबेड़ा सरपंच रामूराम वड्डे ने कहा कि गांव में स्कूल खुलना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।

​अतिथि शिक्षक की व्यवस्था,पड़ोसी गांवों को भी मिलेगा लाभ

​वर्तमान में इस स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक स्थानीय अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में कारकाबेड़ा के इस स्कूल का लाभ आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों, जैसे मरकूड़ के बच्चों को भी मिलेगा।
​नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में स्कूल खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई सुबह, पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण से मिल रहा रोजगार का अवसर

रायपुर, 17 मई 2026।
कभी नक्सल हिंसा की छाया से प्रभावित रहा बीजापुर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। माओवाद के अंत के बाद जिला तेजी से मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के साहस, शासन की प्रभावी पुनर्वास नीति और प्रशासन की सतत पहल ने बीजापुर को शांति एवं विकास के नए दौर में प्रवेश कराया है।
राज्य शासन की पुनर्वास नीति केवल आत्मसमर्पण या पुनर्वास तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले की पुनर्वासित महिलाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में सिलाई प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से बदल रही जिंदगी

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्हें आधुनिक सिलाई तकनीक, मशीन संचालन और परिधान निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को उसी गारमेंट फैक्ट्री में रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल से महिलाओं को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात उन्हें प्रतिमाह लगभग 5 से 8 हजार रुपये तक का पारिश्रमिक दिया जाएगा। जिससे वे आर्थिक रूप से निरंतर सशक्त बनी रहें।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनर्वासित महिलाओं के चेहरे पर अब भविष्य को लेकर नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं कभी हिंसा और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रही थीं, वे आज रोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए महिलाओं को सम्मानजनक जीवन देने का सशक्त माध्यम बन रही है।

बीजापुर बन रहा विकास और विश्वास का प्रतीक

बीजापुर में चल रही पुनर्वास एवं कौशल विकास की यह पहल शासन की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नीति का उदाहरण है। जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वासित परिवारों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नक्सलवाद से मुक्त होकर अब बीजापुर विकास, शांति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रहा है। पुनर्वासित महिलाओं की सफलता यह संदेश दे रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

शून्य हुआ बिजली बिल

​रायपुर,17 मई 2026/ छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की एक नई और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। नारायणपुर जिले के एक जागरूक और प्रगतिशील विद्युत उपभोक्ता श्री राजमन नाग ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट (kW) क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर "पीएम सूर्य घर योजना" को अपनाते हुए क्षेत्र के लिए एक मिसाल पेश की है। उनकी इस पहल से न केवल उनका बिजली बिल नाममात्र का रह जाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी नारायणपुर ने एक मजबूत कदम आगे बढ़ाया है।

​विभाग और वेंडर के तालमेल से आसान हुई राह

​श्री राजमन नाग के घर पर इस सोलर सिस्टम की स्थापना नारायणपुर के अधिकृत वेंडर 'अरु सोलर सोलुसशन' द्वारा सफलतापूर्वक की गई। अपनी सफलता का अनुभव साझा करते हुए श्री नाग ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में सरकारी तंत्र और वेंडर की भूमिका बेहद सराहनीय रही।
​विद्युत विभाग नारायणपुर के सहायक अभियंता श्री बिरेंद्र कोसले और वेंडर की टीम ने उन्हें योजना के हर पहलू और मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी बेहद सरल भाषा में दी। आवेदन करने से लेकर छत पर पैनल स्थापित होने तक, हर चरण में उन्हें पूरा तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग मिला, जिससे यह पूरी प्रक्रिया उनके लिए बेहद आसान और बाधारहित रही।
​ पीएम सूर्य घर योजना आम नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे हर महीने होने वाले भारी-भरकम बिजली बिल के खर्च से मुक्ति मिलती है और हम अपने घर के लिए खुद बिजली बनाकर आत्मनिर्भर बनते हैं। साथ ही, यह देश को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर ले जाने का एक बेहतरीन जरिया है।

​'हर घर सोलर' के संकल्प को पूरा करने की अपील

​राजमन नाग की इस सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन और विद्युत विभाग ने इसे पूरे राज्य के लिए एक रोल मॉडल के रूप में पेश किया है। प्रशासन ने छत्तीसगढ़ के सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आगे आएं और इस सरकारी योजना का लाभ उठाएं।
​विभाग का कहना है कि अपनी छतों पर सोलर सिस्टम लगाकर उपभोक्ता न केवल आर्थिक बचत कर सकते हैं, बल्कि देश के "हर घर सोलर" के संकल्प को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी भी निभा सकते हैं। नारायणपुर के राजमन नाग की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही जानकारी और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो बस्तर का हर संभाग ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।

​छत्तीसगढ़ में 60% से अधिक मकान सूचीकरण का कार्य पूरा

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने रचा इतिहास, 100% लक्ष्य हासिल कर राज्य में बना नंबर-1 जिला

​मुख्यमंत्री ने मैदानी टीमों को दी बधाई; बड़े शहरों और नगर निगमों के सुस्त प्रदर्शन पर जताई चिंता, गति बढ़ाने के दिए कड़े निर्देश

​रायपुर, 17 मई 2026/

​छत्तीसगढ़ में आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। राज्य के सभी जिलों और नगर निगमों में मकान सूचीकरण ब्लॉकों (HLB) के गठन और सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 60.73% कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस महाअभियान में डिजिटल टेक्नोलॉजी के सटीक समन्वय से कुल 48,742 ब्लॉकों में से 29,602 ब्लॉकों का कार्य पूर्ण हो चुका है।

सटीक जनगणना से ही हर गरीब तक पहुंचेगा सुशासन —मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

​राज्य की इस प्रगति पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संतोष व्यक्त करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रशासन और प्रदेश भर के प्रगणकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे। डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है। जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द से जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें।

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मारी बाजी, कई जिले शत-प्रतिशत के करीब

​राज्य स्तर पर जिलों के प्रदर्शन को देखा जाए तो आदिवासी बहुल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला सूची में शीर्ष पर है, जिसने अपने सभी 528 मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य 100% पूरा कर लिया है। इसके बाद जशपुर (99.87%) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (99.84%) जिले भी पूर्णता के बेहद करीब हैं। इसके अलावा बेмеतरा (97.8%) और मुंगेली (96.52%) जिलों में भी काम लगभग खत्म होने की कगार पर है।

​कलेक्टर की रणनीति आई काम

GPM जिले के इस शानदार प्रदर्शन और 'शून्य पेंडेंसी' के मॉडल पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने अपनी टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह सफलता हमारे स्थानीय प्रगणकों (Enumerators), पर्यवेक्षकों (Supervisors) और जिला प्रशासन की बेहतरीन टीम भावना का परिणाम है। भौगोलिक रूप से दुर्गम और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हमने माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम किया। हर चार्ज नंबर की रोजाना डिजिटल मॉनिटरिंग की गई, जिससे 17 मई की मध्यरात्रि को डेटा पोर्टल पर सिंक होते ही हमने 100% पूर्णता का लक्ष्य हासिल कर लिया। अब हम अगले चरण के प्रशिक्षण और मैदानी सत्यापन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

​बड़े शहरों और नगर निगमों की रफ्तार सुस्त, रायपुर-भिलाई पिछड़े

​एक तरफ जहां ग्रामीण और दूरस्थ जिलों ने बाजी मारी है, वहीं राज्य के बड़े शहरों और नगर निगम (Municipal Corporation) क्षेत्रों में काम की रफ्तार चिंताजनक रूप से धीमी दर्ज की गई है। ​रायगढ़ नगर निगम सूची में सबसे निचले पायदान पर है, जहां महज 4.65% काम ही पूरा हो सका है। औद्योगिक हब भिलाई नगर में केवल 7.84% और रिसाली में 8.33% कार्य ही संपन्न हुआ है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां कुल 1,964 ब्लॉकों में से केवल 203 ही पूरे हो पाए हैं, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 10.34% है।
​प्रशासनिक मुस्तैदी का असर
राहत की बात यह है कि राज्य के अधिकांश जिलों में 'HLBs Not Started' (कार्य शुरू नहीं हुआ) का आंकड़ा शून्य है। इसका साफ मतलब है कि मैदानी स्तर पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कबीरधाम के महज 1 ब्लॉक को छोड़कर हर जगह काम शुरू हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए 'प्रगति पर' (In Progress) कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगर निगम आयुक्तों और जिला कलेक्टर्स को विशेष नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।

New facility expected to strengthen scientific investigation in Raigarh, Sakti and Sarangarh-Bilaigarh districts

Modern policing requires scientific investigation and forensic evidence: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Raipur May 17, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai inaugurated a regional Forensic Science Laboratory near Rajmahal in Raigarh during the ongoing Sushasan Tihar programme.

The new laboratory is expected to significantly strengthen scientific investigation and police examination systems in Raigarh, Sakti and Sarangarh-Bilaigarh districts by enabling faster and locally conducted forensic analysis in serious criminal cases. It is also equipped with a modern mobile forensic unit aimed at strengthening on-ground police investigation and evidence collection.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said the state government is continuously working to strengthen law and order through modern technology and scientific investigation systems.

“In today’s time, crimes cannot be investigated effectively through conventional methods alone. Scientific evidence and forensic examination have become among the most effective tools for reaching offenders. The new FSL in Raigarh will make criminal investigation more efficient and provide substantial support to police agencies,” he added.

Finance Minister Shri OP Choudhary described the inauguration of the regional FSL as a historic step for Raigarh district stating that the state government, under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, is strengthening policing systems through modern technology and scientific resources. The laboratory will help make criminal investigation faster, more transparent and more effective. Availability of scientific testing at the local level will help ensure timely investigation reports and quicker justice delivery for victims.

Meanwhile, until now, police departments in the region had to send blood samples, viscera, slides, narcotic substances, chemicals and alcohol-related samples to the forensic laboratory in Bilaspur for examination, often leading to delays in investigation and disposal of cases.

Lok Sabha MP Shri Radheshyam Rathiya, Rajya Sabha MP Shri Devendra Pratap Singh, Raigarh Mayor Shri Jivardhan Chouhan, Collector Shri Mayank Chaturvedi, Senior Superintendent of Police Shri Shashi Mohan Singh, public representatives, administrative officials and local residents were present on the occasion.

Chhattisgarh government allocates land to Azim Premji Foundation for free healthcare facility in tribal region

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai hands over land allotment letter for hospital during Raigarh visit

Quality healthcare must reach remote tribal regions: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Raipur, May 17, 2026/ A major healthcare facility is set to come up in the remote tribal belt of Dharamjaigarh block in Raigarh district, where a 100-bed multi-speciality hospital will be established at Gawarghutori village to provide free medical services to economically weaker and tribal communities. The initiative has been taken under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai as part of the state government’s efforts to expand healthcare access in remote forest regions.

According to an order issued by the Revenue and Disaster Management Department, two hectares of land in Gawarghutori village of Dharamjaigarh tehsil have been allotted to the Azim Premji Foundation on a 30-year temporary lease for construction of the hospital.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai handed over the land allotment order to the Azim Premji Foundation during his visit to Raigarh district under the ongoing Sushasan Tihar programme on Saturday post review meeting.

Speaking on the occasion, Shri Sai said the government’s objective is to ensure development and essential services reach the last person, particularly in remote tribal regions where access to quality healthcare remains limited.

The proposed facility is expected to serve thousands of villagers living in Dharamjaigarh and adjoining forest areas, many of whom currently travel to Raigarh, Bilaspur and other cities for specialized treatment and emergency care. Once operational, the facility will provide general medical care, maternal and child health services, emergency treatment, diagnostic facilities and other modern healthcare services at the local level.

Under conditions laid down by the state government, the allotted land can be used only for hospital and healthcare-related activities. Compliance with environmental protection laws and other statutory regulations will also be mandatory.

Residents of the tribal region have welcomed the decision, describing it as a major step towards improving healthcare access in the area. Many believe the project will not only strengthen medical services but also create employment opportunities and support local development.

Finance Minister Shri OP Choudhary, MP Shri Radheshyam Rathiya, Rajya Sabha MP Shri Devendra Pratap Singh and other public representatives were present during the programme.

अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस जांच व्यवस्था को मिलेगी बड़ी मजबूती

स्थानीय स्तर पर होगी वैज्ञानिक जांच, अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट से सशक्त होगी पुलिस विवेचना

रायपुर 17 मई 2026/सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ के राजामहल के पास क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल लैब) का विधिवत शुभारंभ किया। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस जांच व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी। अब हत्या, दुष्कर्म, आत्महत्या और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों की वैज्ञानिक जांच के लिए नमूनों को बिलासपुर भेजने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच प्रणाली से मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आज के समय में अपराधों की जांच केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। वैज्ञानिक साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच अपराधियों तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। रायगढ़ में इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से पुलिस को बड़ी सुविधा मिलेगी और अपराध अनुसंधान अधिक प्रभावी होगा।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी ने क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के शुभारंभ को रायगढ़ जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक संसाधनों से मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ में एफएसएल लैब शुरू होने से अपराध जांच की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। अब स्थानीय स्तर पर ही वैज्ञानिक परीक्षण होने से पुलिस को समय पर जांच रिपोर्ट मिलेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा।

उल्लेखनीय है कि अब तक पुलिस को ब्लड सैंपल, विसरा, स्लाइड, मादक पदार्थ, केमिकल और अल्कोहल जांच के लिए बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे जांच प्रक्रिया में समय लगता था और कई मामलों के निराकरण में देरी होती थी। लेकिन रायगढ़ में क्षेत्रीय एफएसएल शुरू होने के बाद अधिकांश परीक्षण स्थानीय स्तर पर ही संभव होंगे। इससे विवेचना की समय-सीमा घटेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह, नगर निगम रायगढ़ के महापौर श्री जीवर्धन चौहान, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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