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9.54 करोड़ रुपये के टैक्स फ्रॉड का खुलासा, 3 अगस्त तक न्यायिक रिमांड

रायपुर,  जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य GST विभाग ने फर्जी बिलिंग एवं बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग के माध्यम से 9.54 करोड़ रुपये के टैक्स फ्रॉड के मामले में मुख्य आरोपी एवं मास्टरमाइंड विजय कुमार यादव को 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद 3 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी बिलिंग के उद्देश्य से मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज तथा मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज नाम से दो फर्मों का संचालन किया। इन दोनों फर्मों के माध्यम से लगभग 53 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग कर 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विभिन्न फर्मों को हस्तांतरित किया गया।

विस्तृत जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी ने बंद एवं फर्जी फर्मों से प्राप्त फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर उसका उपयोग अपनी कर देनदारियों के भुगतान में किया।

जांच में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएं

* 10 ऐसी फर्मों से, जिनका GST पंजीयन निरस्त हो चुका था अथवा जो आपस में संबंधित पक्ष थीं, जबकि उनके बीच वास्तविक रूप से विलय, डी-मर्जर अथवा अमलगमेशन नहीं हुआ था, फॉर्म ITC-02 के माध्यम से 6.13 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा एवं उपयोग किया गया।

* पंजाब सहित अन्य राज्यों की 9 ऐसी फर्मों से, जिनका GST पंजीयन निरस्त था अथवा जो अस्तित्वहीन थीं तथा जिनसे वास्तविक रूप से किसी प्रकार की माल आपूर्ति नहीं हुई, 1.99 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा एवं उपयोग किया गया।

* बिना किसी वास्तविक खरीद के, GSTR-2B की तुलना में GSTR-3B में 1.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा कर उसका लाभ लिया गया।

जांच के अनुसार आरोपी ने न केवल 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट अन्य फर्मों को हस्तांतरित किया, बल्कि स्वयं भी समान राशि के फर्जी ITC का दावा एवं उपयोग किया। बिना वास्तविक माल की खरीदी-बिक्री किए केवल बिलों के आधार पर लेन-देन दर्शाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे शासन को राजस्व की हानि हुई।

शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

रायपुर.  जुलाई 2026. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं।

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

Departments to prepare a coordinated action plan with UNICEF's technical support

"Healthy Mothers and Healthy Children Are the Strongest Foundation of a Developed Chhattisgarh," Says Chief Minister Vishnu Deo Sai

Raipur, July 22, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai on Tuesday emphasized the need for a coordinated, multi-sectoral strategy to strengthen maternal and child health and eliminate malnutrition in Chhattisgarh. During a courtesy meeting with UNICEF India Representative Ms Cynthia McCaffrey at Mantralaya, Mahanadi Bhawan, Chief Minister Shri Sai held detailed discussions on maternal and child health, nutrition, and the holistic development of children.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said the State Government has accorded the highest priority to maternal and child health as well as child nutrition, stressing that lasting improvements in these sectors would require close coordination among all concerned departments.

Emphasising that "healthy mothers and healthy children are the strongest foundation of a developed Chhattisgarh," Shri Sai directed the Departments of Health and Family Welfare, Women and Child Development, Panchayat and Rural Development, Tribal Development, and other related departments to jointly prepare an integrated, result-oriented action plan with UNICEF's technical support. The initiative aims to bring down the Infant Mortality Rate (IMR), Maternal Mortality Ratio (MMR), and malnutrition across the State.

Chief Minister Shri Sai observed that the impact of government schemes would increase significantly only when departments work with shared objectives and a coordinated implementation mechanism. He instructed officials to formulate a comprehensive multi-sectoral strategy to ensure that health and nutrition programmes effectively reach the last mile and bring about measurable improvements in children's nutritional status.

On the occasion, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai warmly welcomed Ms Cynthia McCaffrey by presenting her with a traditional shawl and a symbolic 'Nandi', representing the rich cultural heritage of Chhattisgarh. In return, Ms McCaffrey presented the Chief Minister with a special commemorative postage stamp issued by the Department of Posts to mark 75 years of UNICEF's presence in India.

Greeting the Chief Minister with "Jai Johar," Ms Cynthia McCaffrey described Chhattisgarh as a State known for its natural beauty, rich cultural heritage, and warm, simple people. She noted that UNICEF has been working closely with the State Government for many years in the areas of maternal and child health, nutrition, and child protection. Expressing confidence in the partnership, she said the joint efforts of the State Government and UNICEF would help create a safer, healthier, and more prosperous future for the children of Chhattisgarh.

The meeting was attended by members of the Council of Ministers, Chief Secretary Shri Vikas Sheel, Principal Secretary to the Chief Minister Shri Subodh Kumar Singh, UNICEF Chhattisgarh Chief Ms Seema Kumar, Shri Anil Gulati, and Dr Bal Paritosh Das.

यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 22 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, श्री अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -श्री डेका

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।

राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक श्री टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

"National Industrial Fair will Boost MSMEs, Investment and Employment in Chhattisgarh": Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Raipur, July 22, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai today met a delegation of Laghu Udyog Bharati at his official residence in Raipur. During the courtesy meeting, the delegation shared with Chief Minister the detailed information regarding preparations, objectives and detailed roadmap for the 14th India Industrial Fair (IIF), scheduled to be held in Raipur from September 18 to 20.

Appreciating the initiative, Chief Minister Shri Sai said that national-level industrial events of this scale provide a significant boost to the growth of the Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) sector, thereby accelerating investment, innovation and employment generation. He further said that the State Government is committed to establish an industry-friendly ecosystem by simplifying procedures and creating better opportunities for entrepreneurs. He observed that hosting such a large-scale national industrial conclave in Raipur for the first time would open new avenues for Chhattisgarh's industrial growth and economic development.

The delegation informed the Chief Minister that Laghu Udyog Bharati, the country's largest organisation representing small-scale entrepreneurs, has been consistently working to strengthen the MSME sector and promote Business-to-Business (B2B) collaboration among industries. The 14th India Industrial Fair in Raipur will bring together entrepreneurs, investors, industry experts and technical institutions from across the country on a common platform, creating new opportunities for technology adoption, investment, marketing, industrial collaboration and business expansion.

The delegation further stated that the event would give a fresh momentum into Chhattisgarh's MSME sector while strengthening the state's position on the national industrial map. Expressing confidence in the initiative, Chief Minister Shri Sai said that the fair would enable local entrepreneurs to connect with national markets, adopt modern technologies and explore wider avenues for business growth.

On the occasion, Laghu Udyog Bharati National Organisation Secretary Shri Prakash Chandra Gupta, Joint General Secretary Shri Naresh Parakh, National Vice President Shri Sameer, Regional President Smt. C. P. Dubey, Shri Purushottam Patel, Shri Anil Bakliwal, Smt. Tulika Pandey and Shri Pranjal Singh Thakur were also present.

Cabinet Meeting

July 22, 2026

Raipur, July 22, 2026/ At the Cabinet Meeting chaired by Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai today at Mantralaya (Mahanadi Bhavan), following significant decisions were taken:

1. Cabinet has approved the proposal to constitute a Ministerial Sub-Committee to ensure the timely and seamless availability of fertilisers to farmers during the Kharif and Rabi cropping seasons. The committee will also provide recommendation, guidance and inputs on matters relating to fertiliser supply, distribution and overall management.

The Deputy Chief Minister, who also holds the portfolios of Public Works, Public Health Engineering, Urban Administration and Development, and Sports and Youth Welfare, has been appointed as the Chairperson of the sub-committee. The Cabinet Minister for Agriculture Development and Farmers' Welfare, the Cabinet Minister for Cooperatives, and the Cabinet Minister for Finance will serve as its members.

The Agriculture Production Commissioner will function as the Convener of the sub-committee. The panel will have the authority to invite officials of concerned departments, subject experts and representatives of other institutions, whenever required, and will advise the State Government on issues related to the availability and supply of fertilisers.

2. In another landmark decision aimed at ensuring the rehabilitation and dignified employment of Agniveer soldiers, the Cabinet has approved the proposal to frame the Reservation of Vacancies in Class III Posts of State Civil Services for Agniveer Soldiers of Chhattisgarh Rules, 2026.

Under the new rules, 10 per cent reservation will be provided to eligible Agniveer soldiers in direct recruitment to Class III posts, including Police Constable in the Police Department, Forest Guard in the Forest and Climate Change Department, and Jail Warder in the Prison Department.

The decision has been taken in compliance with the announcement made by Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai in the State Legislative Assembly on July 26, 2024. The reservation will be available to Agniveer soldiers who have successfully completed four years of service in the Indian Armed Forces and have been discharged with a valid service certificate.

The Cabinet noted that the decision will not only create enhanced employment opportunities for Agniveers in State services but will also enable the Police, Forest and Prison Departments to benefit from their discipline, training and valuable experience.

जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक

अशोक कुमार चंद्रवंशी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी

सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।

बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।

नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग

बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय

ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।

राज्य में 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी पूर्ण

रायपुर, 22 जुलाई 2026/ प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य जोरों पर हैं। राज्य में 22 जुलाई की स्थिति में राज्य के 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।

किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 69 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।

प्रदेश में अब तक 389.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी.

अधिकारियों ने बताया कि 22 जुलाई सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 389.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 421.5 मिमी. है। वहीं प्रतिवेदित समय तक आज हुई वर्षा 33.5 मिमी. है।

किसानों को 4.12 लाख क्विंटल बीज वितरित

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.70 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.12 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 83 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 4.11 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था।

इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 14.57 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 59 प्रतिशत है।

जरूरतमंद किसानों को 6633.71 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण

अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 21 जुलाई की स्थिति में 6633.71 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 5560.34 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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