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पहली बार मेधावी विद्यार्थियों के लिए खुले कोरिया कलेक्टर निवास के द्वार

15 प्रतिभाशाली छात्रों ने कलेक्टर के साथ साझा किए अपने सपने, मिला सफलता का नया मंत्र

रायपुर,  जुलाई 2026/ कोरिया जिले में शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को नई दिशा देने की अनूठी पहल करते हुए कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने 25 जुलाई को जिले के मेधावी विद्यार्थियों के लिए द कलेक्टर्स-15 कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह पहल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को पहचानने, संवारने और उन्हें साकार करने की दिशा में उठाया गया एक प्रेरणादायी कदम है।

इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार कोरिया कलेक्टर निवास के द्वार विद्यार्थियों के लिए खोले गए, जहां सरकारी औपचारिकताओं की जगह आत्मीयता, विश्वास और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला। आकांक्षी विकासखंड बैकुंठपुर के सहयोग से जिले के 15 मेधावी छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के साथ आत्मीय संवाद करते हुए अपने करियर लक्ष्य, संघर्ष, जिज्ञासाएं और भविष्य की योजनाएं साझा कीं।

चुनौतियों को अपनी ताकत बनाएं - कलेक्टर रोक्तिमा यादव

कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा, हर सपना खास होता है और उसे सही मार्गदर्शन, मेहनत व आत्मविश्वास की जरूरत होती है। सपने वही पूरे करते हैं, जो चुनौतियों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लेते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़ी सोच रखने, निरंतर सीखते रहने, अनुशासन को जीवन का आधार बनाने और समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक लाना नहीं, बल्कि जीवन में नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और निर्णय लेने का साहस विकसित करना है।

प्रशासनिक सेवाओं और करियर गाइडेंस पर हुई चर्चा

संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक सेवाओं, उच्च शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, नवाचार, समय प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास से जुड़े अनेक सवाल पूछे। कलेक्टर ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर प्रयास करने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

कक्षा की चारदीवारी से बाहर शिक्षा का अभिनव प्रयास

द कलेक्टर्स-15 पहल शिक्षा को केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने का एक नवाचार है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशासन से सीधे जोड़ना, उनके सपनों को नई उड़ान देना, और उनमें नेतृत्व व सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि यदि युवा प्रतिभाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करेंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रखेंगे।

महिला स्व सहायता समूह बना ग्रामीण विकास की प्रेरक मिसाल

रायपुर. 26 जुलाई 2026. ’’बिहान योजना’’ एवं ’’राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)’’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बिलासपुर के विकासखण्ड मस्तुरी के ग्राम कछार स्थित ’’वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह’’ की महिलाएं आज अपने परिश्रम और सामूहिक प्रयास से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती अपूर्वा तिवारी के नेतृत्व में समूह की महिलाएं विभिन्न प्रकार के घरेलू उपयोग के उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इनमें क्लिनिकल तथा अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री शामिल है। समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की गुणवत्ता और स्वच्छता के कारण स्थानीय बाजार में इनकी अच्छी मांग है, जिससे महिलाओं को नियमित रूप से अच्छा मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

'बिहान' योजना के अंतर्गत समूह को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन तथा उद्यम विकास का मार्गदर्शन मिला। इससे महिलाओं ने अपने हुनर को व्यवसाय का रूप दिया और आज वे अपने उत्पादों को स्थानीय हाट-बाजारों, मेलों तथा विभिन्न प्रदर्शनियों में भी विक्रय कर रही हैं। इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

श्रीमती तिवारी ने बताया कि 'बिहान' योजना और एनआरएलएम के सहयोग से महिलाओं को रोजगार का नया अवसर मिला है। पहले महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अपने उत्पादों का निर्माण और विपणन स्वयं कर रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह की यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक आजीविका और सशक्त भविष्य की ओर भी अग्रसर कर रहा है।

माताओं, बहनों और बच्चों से 30 जुलाई तक हस्तनिर्मित राखी, शुभकामना संदेश और आंगन की पावन मिट्टी भेजने की अपील

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने अभियान को जन-आंदोलन बनाने का किया आह्वान

रायपुर, 26 जुलाई 2026/ रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्मीयता प्रकट करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में 'ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र अभियान-2026' का शुभारंभ किया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की सभी माताओं, बहनों और बच्चों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए इसे सैनिकों के प्रति सम्मान का एक बड़ा जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

वीर जवानों तक पहुंचेगा पूरे प्रदेश का स्नेह

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सीमाओं पर दिन-रात तैनात वीर सैनिकों के अदम्य साहस, समर्पण और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा, "रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। इस अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ की माताओं, बहनों और बच्चों का प्यार और स्नेह सीधे देश के वीर जवानों तक पहुंचेगा।"

हाथों से बनी राखी, संदेश और आंगन की माटी भेजने का आग्रह

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि वे अपने हाथों से सुंदर राखी तैयार करें, उसके साथ सैनिकों के नाम शुभकामना संदेश लिखें और विजय तिलक के लिए अपने आंगन की एक चुटकी पावन मिट्टी लिफाफे में रखें। यह मिट्टी मातृभूमि के आशीर्वाद और छत्तीसगढ़ की आत्मीय भावनाओं का प्रतीक बनेगी।

30 जुलाई तक जमा कर सकेंगे लिफाफा

मंत्री ने समय-सीमा की जानकारी देते हुए बताया कि हस्तनिर्मित राखी, शुभकामना संदेश एवं पावन मिट्टी का लिफाफा 30 जुलाई 2026 तक निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा कराया जाए। अभियान के तहत एकत्रित सभी रक्षा-सूत्र 'पूर्व सैनिक महासभा' के माध्यम से नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय भेजे जाएंगे, जहां से इन्हें देशभर के विभिन्न मोर्चों पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जाएगा।

सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है छत्तीसगढ़

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस अभियान को जनभागीदारी का एक प्रेरक उदाहरण बनाएं और अपने सैनिक भाइयों तक यह मजबूत संदेश पहुंचाएं कि पूरा छत्तीसगढ़ उनके सम्मान, सुरक्षा और गौरव के साथ मुस्तैदी से खड़ा है।

रायपुर, 26 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु योजना प्रदेश में नागरिक सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से आय, जाति, निवास सहित विभिन्न आवश्यक प्रमाण पत्रों और शासकीय सेवाओं की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो गई है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिल रही है।

सूरजपुर जिले के ग्राम कमलपुर निवासी श्री सुशील सिंह इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं। उन्होंने अपनी पुत्री अनीता सिंह के लिए आय प्रमाण पत्र बनवाने हेतु सेवा सेतु के माध्यम से आवेदन किया। पहले ऐसे कार्यों के लिए कई बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और श्रम दोनों की हानि होती थी। लेकिन सेवा सेतु के जरिए आवेदन की प्रक्रिया सरल होने से उनका आवेदन निर्धारित समय में निराकृत हुआ और उन्हें आय प्रमाण पत्र आसानी से प्राप्त हो गया।

श्री सुशील सिंह ने बताया कि समय पर प्रमाण पत्र मिलने से उनकी पुत्री के शैक्षणिक एवं अन्य शासकीय कार्य बिना किसी परेशानी के पूरे हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु योजना ने ग्रामीण नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है और अब बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

प्रदेश सरकार की यह पहल सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। सेवा सेतु योजना के माध्यम से लोगों का समय और संसाधन दोनों बच रहे हैं, वहीं सरकारी सेवाओं के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है

पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित ‘मुखी संवाद’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल

प्रदेशभर की 128 सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर हुए एकजुट

रायपुर, 26 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि सिंधी समाज स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। देश के विभाजन की विभीषिका और विस्थापन की पीड़ा सहने के बावजूद इस समाज ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से न केवल स्वयं को पुनः स्थापित किया, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्यपाल श्री डेका आज रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित ‘मुखी संवाद’ (विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा) कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

विस्थापन के दर्द को ताकत बनाकर रचा नया इतिहास

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विभाजन के समय अपनी मातृभूमि, संपत्ति और सांस्कृतिक धरोहरों को छोड़कर आए सिंधी समाज ने उस असीम वेदना को अपनी शक्ति बनाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है।

पंचायतें समाज की रीढ़, 128 पंचायतों की एकजुटता सराहनीय

श्री डेका ने कहा कि किसी भी समाज की रीढ़ उसकी पंचायतें होती हैं। सिंधी समाज की पंचायत व्यवस्था सामाजिक समरसता बनाए रखने के साथ-साथ प्रगतिशील सोच को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘मुखी संवाद’ में प्रदेशभर की 128 पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुए हैं, जो समाज की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है।

युवा पीढ़ी को भाषा और संस्कृति से जोड़ने का आह्वान

राज्यपाल ने समाज के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे सिंधी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा महिला विंग के माध्यम से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पंचायतों के मुखी, प्रतिनिधि, महिला विंग के सदस्य तथा बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

कारगिल के वीरों को नमन, आत्मनिर्भर भारत, युवा शक्ति और जनभागीदारी पर प्रधानमंत्री का विशेष जोर

रायपुर, 26 जुलाई 2026/ महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रविवार को नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें संस्करण का श्रवण किया।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के राष्ट्र निर्माण, जनभागीदारी, युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित प्रेरक संदेशों को देश के विकास के लिए मार्गदर्शक बताया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सर्वप्रथम कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि देश सदैव उनके शौर्य, पराक्रम और त्याग का ऋणी रहेगा।

अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने युवाओं की ऊर्जा, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और नवाचार की बढ़ती संस्कृति का उल्लेख करते हुए आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा तकनीकों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान को भारत की सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जनभागीदारी से किए जा रहे प्रेरणादायी प्रयासों का विशेष उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय सहभागिता से विकास के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं और ऐसे प्रयास पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।

कार्यक्रम के पश्चात मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि 'मन की बात' केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जन-जन को राष्ट्रहित, सेवा, कर्तव्य और सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाला जनआंदोलन बन चुका है। प्रधानमंत्री के विचार प्रत्येक नागरिक को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रधानमंत्री के "विकसित भारत" के संकल्प को साकार करने के लिए महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, सुपोषण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में जनभागीदारी आधारित योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कर रही है। प्रधानमंत्री के प्रेरक संदेश राज्य के विकास और जनकल्याण के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

‘मन की बात’ करोड़ों नागरिकों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन’अभियान का किया शुभारंभ

रायपुर, 26 जुलाई 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि मनुष्य, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के बीच संतुलन बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण आज गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को भी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से जल संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करने होंगे।

पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का देगा संदेश

राज्यपाल श्री डेका ने आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन’के लिए आयोजित राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अभियान में शामिल ब्रह्माकुमारी बहनों एवं भाइयों को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 26 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक रायपुर से जबलपुर की यात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देगा।

वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली के लिए प्रेरित करना

राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की यह पहल केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जन-जागृति का अभियान है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर

श्री डेका ने कहा कि प्रकृति हमारी मां के समान है और उसका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के निवासी सौभाग्यशाली हैं। यह प्राकृतिक संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां के घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर हैं। प्रदेश की जनजातीय संस्कृति भी सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। बदलते समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इसलिए यहां की हरियाली और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना आवश्यक है।

पर्यावरण प्रदूषण कम करने और इको फ्रेंडली तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन

राज्यपाल ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की उपलब्धता भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ वर्षा जल संचयन और परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए इको फ्रेंडली व्यवस्थाओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देना होगा।

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना

राज्यपाल ने माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव मां के दूध तक में दिखाई देना भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से समाज एवं समुदाय के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने पर जोर दिया।

आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम करना

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी, जागरूकता और प्रभावी आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धरती का बढ़ता तापमान, अनियमित मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं हमें प्रकृति के प्रति अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करने का संकेत दे रही हैं।

सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना

श्री डेका ने कहा कि यह अभियान विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय का भी संदेश देता है। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। भौतिक प्रगति के साथ नैतिक एवं आध्यात्मिक चेतना भी आवश्यक है।

प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए

राज्यपाल ने सभी नागरिकों से पानी की एक-एक बूंद बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करने और वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी संतान की तरह देखभाल करे। आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारी बहनें एवं भाई तथा अभियान से जुड़े सदस्य उपस्थित थे।

Chief Minister Listens to the 136th Episode of Mann Ki Baat and Pays Tribute to Kargil War Heroes

Raipur, July , 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai joined youth, public representatives and citizens at Daya Bhawan in Fafadih, Raipur, on July 26 to listen to the 136th episode of Prime Minister Shri Narendra Modi's monthly radio programme 'Mann Ki Baat'.

Speaking after the broadcast, the Chief Minister said Mann Ki Baat has become a powerful platform for connecting with people and recognising inspiring initiatives, innovations and individuals contributing to nation-building. He said the repeated mention of Chhattisgarh's achievements, cultural heritage and innovations in recent episodes is a matter of pride for every citizen of the state. He noted that the Prime Minister had earlier highlighted Malhar's archaeological heritage, the Bastar Olympics and Bastar Pandum, while in the latest episode he appreciated Korba's outstanding work under the 'Catch the Rain' campaign, bringing national recognition to the state's innovation and community-driven development model.

Referring to the Prime Minister's remarks, Shri Sai said the Catch the Rain campaign promotes rainwater harvesting, groundwater recharge, restoration of traditional water bodies and tree plantation. He noted that Korba is adopting scientific measures such as geospatial mapping, shallow-aquifer management, recharge wells, and other modern techniques to improve groundwater levels and ensure long-term water security. He said conserving every drop of rain is essential for human life, agriculture and environmental sustainability.

The Chief Minister said the state government is continuously promoting water conservation, rainwater harvesting, groundwater recharge, restoration of ponds and traditional water sources, and large-scale tree sapling plantation. He emphasised that these initiatives should evolve into a mass movement with active public participation rather than remain limited to government programmes. He also appealed to citizens to actively participate in the 'Ek Ped Maa Ke Naam' campaign.

Paying tribute to the martyrs of the Kargil War, Shri Sai said the Prime Minister began the programme by saluting the brave soldiers on the occasion of Kargil Vijay Diwas. He said the day symbolises the courage, determination and supreme sacrifice of the Indian Armed Forces, and the heroism of the martyrs will continue to inspire generations in the service of the nation.

The Chief Minister said the Prime Minister also called upon citizens to enthusiastically participate in the 'Har Ghar Tiranga' campaign ahead of Independence Day. He appealed to the people of Chhattisgarh to proudly hoist the National Flag at their homes and establishments.

Highlighting the Prime Minister's 'Vocal for Local' message, Shri Sai said that Chhattisgarh's tribal handicrafts, kosa silk, handloom products, bell metal crafts, bamboo handicrafts, terracotta, and forest produce possess immense potential. Referring to the Prime Minister's appeal, he also urged people to adopt eco-friendly clay Ganesh idols during the upcoming Ganesh Chaturthi celebrations, saying the initiative supports local artisans while protecting the environment and water bodies.

मुख्यमंत्री श्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की

जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

रायपुर, 26 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

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