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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टाइल का खादी 'कुर्ता-जैकेट' युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खादी ग्रामोद्योग की खादी की सात दुकानों से रोजाना 1,400 कुर्ता-जैकेट बिक रहे हैं। खादी इंडिया ने प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर 17 सितंबर को कनॉट प्लेस स्थित अपने स्टोर में 'मोदी जैकेट' और 'मोदी कुर्ता' की एक श्रृंखला पेश की थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन वी के सक्सेना ने पीटीआई-भाषा से कहा कि हमारी 'मोदी कुर्ता-जैकेट' श्रृंखला को धीरे-धीरे देश भर के और भी दुकानों में पेश करने की योजना है। कनॉट प्लेस स्थित दुकान की अक्टूबर 2018 में कुल बिक्री रिकॉर्ड 14.76 करोड़ रुपये रही। यह पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 34.71 प्रतिशत अधिक है। 
 
सक्सेना ने कहा, "खादी इंडिया के दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, जोधपुर, भोपाल, मुंबई और एर्नाकुलम में हर केंद्र पर 'मोदी कुर्ता-जैकेट' के रोजाना दो सौ पीस बिक रहे हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खादी को अपनाने के आह्वान के चलते स्वदेशी कपड़ों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इससे लोगों खासकर युवाओं में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है।
हमारा देश प्रतिमाओं के दीवानों की धरती है। हाल ही में देश की एकता को पुनः समाहित करने के लिए लगभग तेईस सौ करोड़ रुपए खर्च कर विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया गया। एक और विशाल प्रतिमा मुंबई के समंदर में निकट भविष्य में प्रस्तुत होने वाली है। प्रतिमा, प्रतिमान शब्द का ही एक रूप है। प्रतिमान का अर्थ परछाई, प्रतिमा, प्रतिमूर्ति, चित्र भी है। ‘वह वस्तु या रचना जिसे आदर्श या मानक मानकर उसके अनुरूप और वस्तुएँ बनाई जाएं’। हमारा देश व समाज प्रतिमा पूजक भी है और व्यक्ति पूजक भी। प्रतिमा का मुक़ाबला आदमी नहीं कर सकता हां वह नए मानक गढ़ सकता है। हमारे यहां वह प्रतिमा से बड़ा, महत्वपूर्ण, महान, महंगा नहीं हो सकता।
 
प्रतिमाओं को बनाने में तकनीक का बारीकी से ध्यान रखा जाता है। वह तेज़ चलने वाली हवाएँ झेल सकती है, भूकंप का सामना कर सकती है, बाढ़ में खड़ी रह सकती है। इनके सामने आम आदमी की क्या औकात। उसे तो स्वतन्त्रता के सात दशक बाद भी जीवन की आधारभूत सुविधाएं जुटाने के लिए जूझना पड़ता है। खैर यहाँ बात इन्सानों की नहीं हो रही।
 
हमारे यहां ज़्यादातर प्रतिमाएं राजनीतिक व धार्मिक आधार पर लगाई जाती हैं। यह दिलचस्प है कि दुनिया में सबसे अधिक मूर्तियां महात्मा बुद्ध और बाबा अंबेडकर की हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाएं दुनिया के 71 से अधिक देशों में हैं। राजनीतिक दलों द्वारा अपनी अवसरवादी व स्वार्थी सोच के आधार पर पार्क बनाने और उसमें मूर्तियां स्थापित करने का अपना इतिहास है। इनमें देश के पैसे का खूब सदुपयोग होता है। मूर्तियां तोड़ने व कालिख पोतने के कितने ही किस्से हैं जिनमें नए किस्से जुड़ते जाते हैं। यह किस्से न्यायालयों के आँगन में बरसों पढ़े जाते हैं। वैसे देखने में आया है कि आम तौर पर प्रतिमाएं श्रद्धा, भक्ति, ईमानदारी के साथ साथ उत्कृष्ट सामग्री से बनाई जाती हैं और बनते बनते ढह जाने वाले पुलों जैसी नहीं होतीं।
 
यह भी सत्य है कि लगभग सभी प्रतिमाओं की देख रेख का अच्छा रिकार्ड नहीं है। गांधीजी की मूर्ति लगभग साल भर पूरी तरह से उपेक्षित रहती है। उनका जन्मदिन आने से पहले ही प्रशासन या गांधी प्रेमियों में उनके बुत को साफ कर रंग रोगन करने या उनका चश्मा ठीक करवाने का विचार जन्म लेता है। कितनी ही प्रतिमाएँ तो स्थापित होने के बाद वस्तुतः विस्थापित कर दी जाती हैं। देश के कोने-कोने में नई प्रतिमाएं स्थापित होती रहती हैं इस बहाने रोजगार ज़रूर मिलता रहता है।
 
बीबीसी ने लिखा है कि इतनी बड़ी प्रतिमा पर धन खर्च करने की बजाय सरकार को यह पैसा राज्य के किसानों के कल्याण के लिए लगाना चाहिए था। गरीब परिवार यहाँ भूखे पेट जिंदगी गुज़ार रहे हैं। बीबीसी इस बात को नहीं समझती कि हमारे यहाँ महापुरुषों को याद करना, उनकी विश्व स्तरीय प्रतिमाएं बनाना, उनकी याद में ख़र्चीले आयोजन करना राष्ट्रभक्ति का एक अहम हिस्सा है। क्या राष्ट्रभक्ति और राजनीति एक ही वस्तु होती है। किसी भी देश में अपनी मातृभूमि के लिए अथक काम करने वालों की कमी नहीं होती, सैंकड़ों लोग राष्ट्र व समाज के लिए निस्वार्थ बिना किसी लालच, द्वेष या मान्यता के निरंतर जुटे रहते हैं। क्या प्रतिमा स्थापित होने से ही देश के स्वाभिमान व गौरव के बारे में दुनिया को पता चलता है। क्या सभी की वस्तुस्थिति से दूसरे सब परिचित नहीं है। कोई देश अपनी लाख शेख़ी बखार ले दूसरे देश भी तो समझने की बुद्धि रखते हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक दल जीत के लिए दिन रात एक कर रहे हैं। ऐसे में बसपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दावा किया है कि राज्य में इस बार उनकी पार्टी अपने 34 साल के इतिहास का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए कम से कम 32 सीटें जीतेगी और सत्ता की चाबी बसपा के पास रहेगी। मध्यप्रदेश बसपा अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने ‘भाषा’ के साथ बातचीत में राज्य में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने की भविष्यवाणी के साथ ही अपनी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘‘हम कम से कम 32 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे और सत्ता की चाबी बसपा के पास रहेगी। कुल मिलाकर 75 सीटों पर हमारी स्थिति पहले से बहुत अच्छी है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2003 में बसपा ने राज्य विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीती थीं, 2008 में सात और 2013 में चार सीटें जीती थीं। इस बार प्रदेश में 15 साल से सत्ता पर काबित भाजपा के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर एवं दलित एकता के चलते हम अच्छी जीत की स्थिति में हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में एक सीट लेने वाला निर्दलीय भी कभी-कभी मुख्यमंत्री बन जाता है। मैं तो कम से कम 32 सीटों पर बसपा की जीत की उम्मीद के साथ आपको यह बता रहा हूं। हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश की सत्ता की धुरी बहनजी :बसपा सुप्रीमो मायावती: के आजू-बाजू रहे, लेकिन यह तय है कि खंडित जनादेश आने पर हम भाजपा को समर्थन नहीं करेंगे।’’ 
 
उन्होंने बताया, ‘‘पिछले चुनाव में प्रदेश के पांच जिलों मुरैना, रीवा, सतना, दतिया एवं ग्वालियर में बसपा का दबदबा था। इस बार भी इन जिलों की कुछ सीटों से हम जीतेंगे। इसके अलावा छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, श्योपुर, दमोह, कटनी, बालाघाट एवं सिंगरौली जिलों में भी पार्टी का खाता खुलने की पूरी उम्मीद है।’’ वर्ष 2008 के राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 8.97 प्रतिशत रहा था, जो 2013 में करीब ढाई प्रतिशत गिरकर 6.29 प्रतिशत रह गया। अहिरवार ने इस बार पार्टी को 10 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने का दावा किया। 
 
इसकी वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया, ‘‘फिलहाल माहौल अलग है। दलित वर्ग अपने अधिकारों के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक है और अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए वह बसपा पर भरोसा करेंगे। राज्य में पिछले वर्ष के किसान आंदोलन के खिलाफ भाजपा सरकार ने जो कदम उठाए थे, उसकी वजह से किसान भी इस सरकार के खिलाफ हैं।’’ 
 
प्रदेश में जबर्दस्त सत्ता विरोधी लहर का दावा करते हुए अहिरवार ने कहा कि पिछले 13 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सरकार की हालत खराब है। चौहान दो सीटों से चुनाव लड़ने वाले हैं। चौहान जिस बुधनी विधानसभा सीट से जीतते हैं, वहां वह मतदाताओं की नाराजगी के चलते चुनाव सभा तक नहीं कर पा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि हम पहली बार मध्य प्रदेश में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ना ही पार्टी का इतिहास रहा है।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि विपक्षी दल जहां अपनी-अपनी मिल्कियत बचाने के लिए आपस में हाथ मिला रहे हैं, वहीं भाजपा ने देश की तकदीर बदलने के लिए काम किया है। उन्होंने कुछ विपक्षी नेताओं को ‘‘झूठ की मशीन’’ करार दिया और कहा कि "वे एके-47 के फायर की तरह झूठ दागते हैं।" मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे विपक्षी दलों के गठबंधन से चिंतित न हों क्योंकि लोग उन्हें स्वीकार नहीं करते और यहां तक कि उनके नकारात्मक कार्यों, देश के अच्छे कार्यों को नकारने और सेना के लिए ‘‘अपशब्द तथा अपमानजनक शब्दों’’ के चलते उनसे "नफरत" करते हैं।

प्रधानमंत्री ने हालांकि किसी विपक्षी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन भाजपा अकसर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल सौदे पर उनके कथित झूठ को लेकर हमला बोलती रही है। पार्टी गांधी पर प्राय: देश तथा सेना का अपमान करने का आरोप भी लगाती रही है।विपक्षी दलों को निशाना बनाने वाली मोदी की यह टिप्पणी तब आई जब एक भाजपा कार्यकर्ता ने वीडियो वार्ता के दौरान वामपंथी और कांग्रेस जैसे ‘‘राष्ट्र विरोधी’’ दलों के एकजुट होने पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछा था।पांच लोकसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं से बातचीत में एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने विपक्षी दलों पर अपनी सरकार के खिलाफ झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों के पास अब सही सूचना पाने के लिए अनेक साधन हैं।
 
मोदी ने कहा, ‘‘कुछ नेता झूठ की मशीन की तरह हैं। वे जब भी अपना मुंह खोलते हैं, एके-47 के फायर की तरह झूठ दागते हैं।’’ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों तक सही सूचना पहुंचाकर उनके (विपक्षी नेताओं) झूठ का खुलासा करें।कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की ऊंची छलांग और अपने द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए कुछ कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि ‘‘एक अच्छे’’ समय की शुरुआत हुई है और प्रदर्शन तथा प्रगति के मामले में भारत की क्षमता अब बढ़ रही है।प्रधानमंत्री ने कहा कि करोबार सुगमता में भारत की रैंकिंग 142वें स्थान से 77वें स्थान पर आ गई है और यह देश के विकास और सुधारों को एक मान्यता है।

लखनऊ। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने अयोध्‍या में राम मंदिर के निर्माण के लिये वर्ष 1992 जैसा ही आंदोलन शुरू करने के राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के इरादे को मुल्‍क के लिये बेहद खतरनाक बताते हुए आज कहा कि मंदिर को लेकर अचानक तेज हुई गतिविधियां पूरी तरह राजनीतिक हैं। एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने बातचीत में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर हिन्‍दूवादी संगठनों द्वारा अचानक तेज की गयी गतिविधियों के बारे में कहा कि जहां तक मंदिर निर्माण को लेकर तथाकथित हिन्‍दूवादी संगठनों में बेचैनी का सवाल है, तो साफ जाहिर है कि यह सियासी है। आगामी लोकसभा चुनाव को सामने रखकर यह दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन वे संगठन दरअसल क्‍या करेंगे, अभी तक इसका सही अंदाजा नहीं है।

 
मंदिर निर्माण के लिये वर्ष 1992 जैसा व्‍यापक आंदोलन छेड़ने के संघ के इशारे के बारे में रहमानी ने कहा कि संघ अगर आंदोलन शुरू करता है तो यह बहुत खतरनाक होगा। इससे मुल्‍क में अफरातफरी का माहौल पैदा हो जाएगा। इस आशंका का कारण पूछे जाने पर उन्‍होंने बताया कि वर्ष 1992 में हिन्‍दुओं और मुसलमानों के बीच नफरत इतनी ज्‍यादा नहीं थी। हाल के सालों में दोनों के बीच खाई बहुत गहरी हो गयी है।
 
विश्‍व हिन्‍दू परिषद, अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दू परिषद समेत तमाम हिन्‍दूवादी संगठनों और साधु-संतों द्वारा मंदिर निर्माण के लिये अध्‍यादेश लाने या कानून बनाने को लेकर सरकार पर दबाव बनाये जाने के बारे में पूछे गये सवाल पर मौलाना रहमानी ने कहा कि कुछ कानूनविदों के मुताबिक इस मसले पर अभी कोई अध्‍यादेश या संसद का कानून नहीं आ सकता। अब सरकार क्‍या करेगी और उसके क्‍या नतीजे होंगे, यह नहीं कहा जा सकता।
 
हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि हाल में सेवानिवृत्‍त हुए न्‍यायमूर्ति जे. चेलमेश्‍वर ने चंद दिन पहले मुम्‍बई में एक कार्यक्रम में कहा था कि मंदिर निर्माण को लेकर अध्‍यादेश लाना या संसद से कानून पारित कराया जाना नामुमकिन नहीं है। बोर्ड का शुरू से ही स्‍पष्‍ट नजरिया है कि आपसी सहमति से मसला हल करने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद वह अयोध्‍या विवाद पर उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय को ही मानेगा।
 
इस बीच, देश में मुसलमानों के सबसे बड़े सामाजिक संगठन माने जाने वाले जमीयत उलमा-ए-हिन्‍द की उत्‍तर प्रदेश इकाई के अध्‍यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने कहा कि अयोध्‍या मामले को लेकर तेज हुई गतिविधियों पर उनका एक ही जवाब है कि मामला अदालत में है इसलिये सभी को सब्र से काम लेते हुए अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिये। उसका जो भी निर्णय हो, उसे कुबूल करना चाहिये। मुल्‍क में अमन और सलामती इसी तरह रहेगी। उन्‍होंने कहा कि हठधर्मिता से देश को नुकसान होगा। हमारी अपील है कि इस मामले में जज्‍बात से काम न लेकर हालात की नजाकत को समझते हुए काम किया जाए।
  • छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार एक नागा साधु बन रहे प्रत्याशी
  • रायपुर पश्चिम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर आजमाएंगे भाग्य 

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पहली बार नागा साधु भी चुनावी अखाड़े में दांव अजमाने के लिए उतरे। गुरुवार को जूना अखाड़े के नागा साधु दिगंबर जनकपुरी महाराज रायपुर पश्चिम से नामांकन दाखिल करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ साधुओं की टोली थी। वे भगवान के नाम की जयकारा लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। 

 नागा साधु रायपुर पश्चिम से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इस सीट पर भाजपा से परिवहन मंत्री राजेश मूणत, कांग्रेस से विकास उपाध्याय, जनता कांग्रेस छग और बसपा गठबंधन से भोजराज गौरखड़े और आम आदमी पार्टी से उत्तम जायसवाल चुनावी मैदान में हैं। 

 जनकपुरी महाराज ने कहा कि वे समाज से भ्रष्टाचार मिटाने और लोगों की भलाई के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। नागा साधु का नामांकन दाखिल करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है।  

  • लगातार कीमत कम होने के बाद पेट्रोल-डीजल 80 के नीचे, गाड़ियों की बुकिंग हो रही कम

रायपुर . कई दशकों के बाद ऐसा हो रहा है जब पेट्रोल-डीजल की कीमत एक बराबर हो गई। पेट्रोल पंप संचालकों का दावा है कि जब से ये कारोबार शुरू हुआ दोनों की कीमत में बड़ा अंतर रहता था, लेकिन अब दोनों की कीमत एक बराबर हो गई। 

 

शुक्रवार को राजधानी में पेट्रोल 77.17 और डीजल 77.05 रुपए में बिका। यानी दोनों की कीमत 77 रुपए हो गई। पंप मालिकों का अनुमान  है कि कीमतें लगातार गिरी तो पहली बार ऐसा होगा कि डीजल महंगा और पेट्रोल सस्ता हो जाएगा। पिछले महीने की शुरुआत में लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी, लेकिन उसके बाद अभी करीब 12 दिनों से दोनों की कीमतें घट रही हैं।

महीने के दूसरे दिन भी पेट्रोल में 19 और डीजल में 15 पैसे की कमी की गई। अफसरों का दावा है कि  केंद्र सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार की ओर से टैक्स में कमी के बाद छत्तीसगढ़ में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत दूसरे राज्यों की अपेक्षा ज्यादा कम हो रही है। डीजल की कीमत कम होने के बाद मालभाड़ा में बढ़ोतरी भी रुक गई है। डीजल 80 रुपए पार होने के बाद भाड़ा 10 फीसदी बढ़ाने पर अड़े ट्रांसपोर्टर अब किसी भी तरह का किराया नहीं बढ़ा रहे हैं। इस वजह से त्योहार में लोगों को बाहर से आने वाली चीजें महंगे दामों में नहीं मिल रही है।

 

3 साल पहले 16 रुपए का फर्क था : पेट्रोल और डीजल की कीमत में तीन साल पहले तक 2015 में 16.26 रुपए का अंतर था। यह अंतर सबसे ज्यादा था। उस समय डीजल की कीमत 57 रुपए थी और पेट्रोल भी सस्ता था। सितंबर 2018 में यह घटकर 2.49 रुपए हो गया। इसके बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ती रही और फर्क भी बढ़ता रहा। लेकिन अचानक ही कीमतें कम होने लगी। इसी के असर दोनों की कीमत बराबर हो गई। इसका असर गाड़ियों के बाजार पर भी पड़ रहा है। डीजल वाली गाड़ियों की बुकिंग कम हो रही है। इस दिवाली में अभी तक सबसे ज्यादा बुकिंग पेट्रोल वाली गाड़ियों की ही हो रही है।

 

कमीशन पर असर नहीं  : पेट्रोल-डीजल की कीमत कम होने का असर पेट्रोल पंप संचालकों के कमीशन पर नहीं हो रहा है। कुछ महीने पहले ही बढ़े हुए कमीशन को कीमत कम होने के बाद भी बरकरार रखा गया है। पंप संचालकों को अभी एक लीटर पेट्रोल की बिक्री पर 3.31 और डीजल की बिक्री पर 2.22 रुपए कमीशन मिल रहा है। हालांकि पंप संचालकों ने इस कमीशन को और बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि पंप चलाने का खर्चा बढ़ गया है। इसलिए कमीशन भी बढ़ना ही चाहिए।

  • स्मिथ ने कहा-कोहली ने आईपीएल वाले देश में टेस्ट को प्रासंगिक बनाए रखा
  • ‘जगमोहम डालमिया एनुअल कॉन्क्लेव’ में स्मिथ ने अपने विचार साझा किए

खेल डेस्क. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की तारीफ की है। उन्होंने कहा, "कोहली क्रिकेट के सुपरस्टार हैं। वे टेस्ट को जिंदा रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। क्रिकेट में अभी सुपरस्टार खिलाड़ियों की कमी है। इंग्लैंड में ऐसे एक या दो खिलाड़ी हैं, लेकिन सबसे आगे कोहली हैं।"

दक्षिण अफ्रीका के लिए 109 टेस्ट में कप्तानी कर चुके स्मिथ

  1.  

    ‘जगमोहम डालमिया एनुअल कॉन्क्लेव’ में शुक्रवार को स्मिथ ने कहा, ‘‘कोहली को टेस्ट क्रिकेट पसंद है और वे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने उस देश में टेस्ट को प्रासंगिक बनाए रखा है, जहां आईपीएल और टी-20 को पसंद किया जाता है।’’

     

    स्मिथ ने कहा, ‘‘विराट जब तक टेस्ट क्रिकेट को एक आइकन और सुपरस्टार के तौर पर बढ़ावा देते रहेंगे, तब तक हमारे पास इस खेल को प्रासंगिक बनाए रखने का मौका है।’’ स्मिथ ने 117 टेस्ट खेले हैं। इनमें से 109 मैचों में वे दक्षिण अफ्रीका के कप्तान थे।

     

  2.  

    इस मौके पर स्मिथ ने कूकाबुरा गेंद की बुराई की और कहा कि इसके इस्तेमाल से टेस्ट क्रिकेट बोरिंग हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह गेंद काफी सॉफ्ट होती है, जिससे गेंदबाज ज्यादा समय तक स्विंग नहीं करा पाता। प्रशंसक ड्रॉ मैच की जगह रोमांचक खेल देखने आते हैं।’’

     

  3.  

    स्मिथ ने कहा, ‘‘टेस्ट में गेंद स्पिन और स्विंग होनी चाहिए। साथ ही हवा में भी मूवमेंट चाहिए। जब पिच से बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को बराबर मदद मिलेगी, तभी टेस्ट क्रिकेट को भविष्य में बचाया जा सकेगा।’’

     

  4.  

    उन्होंने बोरिंग टेस्ट के लिए क्वालिटी टीम की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया। स्मिथ ने कहा, ‘‘कई टीमें बदलाव के साथ गुजर रहीं है। इससे मैच में बराबरी का टक्कर नहीं हो पा रहा है। अगर मैच बराबरी के होंगे तो दर्शक निश्चित तौर पर टेस्ट देखने आएंगे।’

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को 177 उम्मीदवारों ने नाम की घोषणा कर दी। इस सूची में भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं के नाम गायब हैं। जिसके बाद भाजपा में टिकट बटवारे को लेकर विरोध शुरू हो गया है। मनचाही सीट नहीं मिलने और सीट कटने से नेता नाराज हैं और उनके समर्थक बिफर गए हैं। राज्यभर में सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुए हंगामे का शोर राजधानी में मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गया है। 

 

बाबूलाल गौर समर्थकों का हंगामा

बाबूलाल गौर की सीट गोविंदपुरा को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। जिसके बाद गौर के समर्थकों ने भी जमकर हंगामा काटा। बाबूलाल गौर के समर्थक को आशंका है कि उनका टिकट काटा जा सकता है। गौर के समर्थकों ने बड़ी संख्या में गोविंदपुरा में हंगामा किया। साथ ही उन्होंने बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को टिकट देने की मांग। समर्थक हर हाल में कृष्णा गौर को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। समर्थकों का दावा है कि अगर यह सीट कृष्णा गौर को नहीं दी गई तो यह सीट भाजपा के हाथ से निकल सकती है। 

कैलाश जोशी ने गौर से जताई सहानुभूति 

पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने भी बाबूलाल गौर की सीट होल्ड होने पर दबी जुबान में इसे गलत बताया। जोशी ने कहा, "मैं कुछ कह भी दूं कि गलत हो रहा है तो इससे क्या होगा। पार्टी तय करती है मेरे कहने से कुछ नहीं होगा।" 

विधायकों और पूर्व मंत्रियों के टिकट काटे जाने पर जोशी ने कहा, "कोई ना कोई कारण होगा जिसकी वजह से इनके टिकट काटे गए हैं।" कैलाश जोशी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन के मुद्दे पर कहा कि इससे भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान झेलना पड़ सकता है। 

वेल सिंह भूरिया का हंगामा 

भाजपा नेता वेल सिंह भूरिया सरदारपुर से विधायक हैं। इस बार उनका टिकट संजय बघेल को दे दिया गया है। टिकट कटने से नाराज भूरिया अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। भूरिया अपने समर्थकों की फौज के साथ करीब 25 गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे थे। 

कुसुम मेहदेल भी शिवराज से मिलीं 

पन्ना विधानसभा सीट के लिए भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। कुसुम मेहदेले यहां से विधायक हैं। इस बार उनका टिकट कटने की भी आशंका है। मेहदले मुख्यमंत्री आवास पहुंचीं और शिवराज सिंह से मुलाकात कर उन्होंने टिकट बंटवारे पर अपनी नाराजगी जताई। 

चुनाव की तारीख सामने आते ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में उठापटक शुरू हो गई है। मौजूदा विधायक दोबारा जीत के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं। इन्हीं नेताओं में से एक हैं कांग्रेस के बाबा जो अंबिकापुर विधानसभा से विधायक हैं। इन्हें सिर्फ प्यार से टीएस बाबा बुलाया जाता है, असल में ये सरगुजा रियासत के राजा हैं, इनका नाम है- त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव। 

 

टी एस सिंहदेव का रुतबा पूरे छत्तीसगढ़ में है। वे इतने लोकप्रिय हैं कि लोग उन्हें राजा जी या राजा साहब बुलाने की बजाय टीएस बाबा कहकर पुकारते हैं। टीएस सिंहदेव राज्य के सबसे अमीर विधायक हैं। 2013 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मिजोरम के सभी विधायकों की संपत्ति को मिला दिया जाए तो उनकी कुल संपत्ति होती है।

 2013 में उनकी कुल संपत्ति लगभग 551 करोड़ थी, तो वहीं इस बार उनकी संपत्ति 504 करोड़ के आस-पास है। अंबिकापुर इलाके में कई मकान, सरकारी इमारतें, यात्रियों के लिए बनाए गए सराय, हॉस्पिटल, स्कूल या खेतों पर इन्हीं के परिवार का मालिकाना हक है। इस बार अंबिकापुर सीट से उनके सामने BJP के अनुराग सिंहदेव चुनाव लड़ रहे हैं। टीएस सिंहदेव पिछले दो बार से अंबिकापुर में चुनाव जीतते आए हैं, इस बार उनकी नजर हैट्रिक पर है।

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