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पुलिस ने शनिवार को अभियान चलाकर लाइसेंस सीमा से अधिक पटाखे का भंडारण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 (ख), 1 (ख) के तहत आरोपियों को गिरफ्तार कर अतिरिक्त पाए गए माल को जब्त किया है।

पुलिस के मुताबिक सूचना मिली थी कि पटाखा दुकानों में लाइसेंस सीमा से अधिक माल का भंडारण किया गया है। जिस पर शनिवार शाम अभियान के तहत शहर की बहुत से पटाखा दुकानों में दबिश दी गई। जिनके पास लाइसेंस के अतिरिक्त स्टॉक मिला उसकी जब्ती कार्रवाई की है। दुर्ग के सदर बाजार मस्जिद के पास स्थित मिलन पटाखा के संचालक अंजुम अशरफी के पास 5 लाख की सीमा से अतिरिक्त पटाखे जब्त किए। पंचशील नगर स्थित इशार ब्रदर्स के संचालक जहीरुद्दीन के पास से साढ़े तीन लाख के पटाखे जब्त किए हैं। दोनो ने ही दुकान के अलावा दूसरे कमरो में अतिरिक्त पटाखे रखे थे।

पटाखा दुकान में दस्तावेजों की जांच करते पुलिस अधिकारी।

  • ट्रेनर ने एटीएम से ठगी का तरीबा वीडियो पर दिखाया और एटीएम सेंटल जाकर प्रैक्टिकल भी करावाया
  • बिना गार्ड वाले एटीएम को निशाना बनाते थे आरोपी

रायपुर . एटीएम के जरिये बैंकों को ही ठगने वाले हरियाणा के दो शातिरों ने इसकी ट्रेनिंग गांव के ही एक युवक से ली थी। युवक ने ट्रेनिंग के एवज में दोनों से 5 हजार रुपए भी लिए। ठगों के ट्रेनर ने पूरा तरीका वीडियो पर दिखाया। फिर एटीएम सेंटर जाकर प्रैक्टिकल भी करवाया।

 

जैसे-स्विच कहां होता है, इसे कब और कैसे बंद करना है वगैरह। ट्रेनर ने ही दोनों को दूसरे राज्यों में जाकर खुद एटीएम में पैसे निकाले और स्विच ऑफ करके दिखाया। फिर यह भी बताया कि बैंकों में पैसे किस तरह से क्लेम करने हैं।  पुलिस की पूछताछ में ठगों ने बताया कि दोनों ने गृह राज्य हरियाणा में कोई वारदात नहीं की। दूसरे राज्य जाकर ही पैसे निकालते थे। इसके बाद पलवल और फरीदाबाद के अपने गांवों में लौटकर वहां से पैसे क्लेम करते थे। 
रायपुर पुलिस ने दोनों ठगों जुनैद खान और जमशेद खान को शनिवार को जेल भेज दिया है। दोनों के गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश चल रही है। अफसरों ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने ज्यादा जानकारियां नहीं दीं, इसलिए रिमांड नहीं ली गई।

ठगों के संबंध में हरियाणा, दिल्ली के अलावा कुछ राज्यों की पुलिस संपर्क किया है। इस गिरोह के वारदात के तरीकों की जानकारी भी ली गई है। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि दोनों ठगों और गिरोह ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और आंध्रप्रदेश में वारदातें की हैं। 

बचाव की भी ट्रेनिंग


मौदहापारा पुलिस के अनुसार हरियाणा के दो-तीन गांवों में ऐसे गिरोहों की सूचना मिली है, जो एटीएम के जरिये सीधे बैंकों को ठग रहे हैं। इन गांवों में ठगी के तरीके सिखाने वाले ट्रेनर भी हैं, जो इससे पहले अलग-अलग राज्यों में वारदातें कर चुके हैं।

ये ट्रेन गांव के युवकों को वारदात के तरीके बताने के साथ-साथ बचने के उपाय भी बता रहे हैं। ठगों को साफ बताया गया है कि एक एटीएम में दो बार से ज्यादा नहीं जाना है और जिस शहर में वारदात की, वहां सालभर नहीं जाना है। 
दूसरे बैंकों के एटीएम का उपयोग
पुलिस की पड़ताल में पता चला कि आरोपी हरियाणा से निकलने से पहले उन सभी खातों में पैसे जमा करते थे, जिनके एटीएम कार्ड उनके पास हों। इसके बाद दूसरे राज्यों में जाकर पैसे निकालते थे। जिस बैंक का एटीएम कार्ड रहता है, उस बैंक के एटीएम में वारदातें नहीं करते थे क्योंकि स्विच ऑफ करने तक सेम बैंक में जानकारी पहुंच जाती थी। दूसरे बैंक के कार्ड को अलग बैंक के एटीएम में स्वाइप करने पर जानकारी देर से जाती थी। 

 रायपुर के एटीएम गार्ड कम कैमरे खराब, इसलिए चुना


पूछताछ में जुनैद ने पुलिस को बताया कि रायपुर के ज्यादातर एटीएम में गार्ड नहीं हैं। एटीएम में ज्यादा भीड़ भी नहीं रहती, इसलिए यहां वारदात आसान है। यहां के अधिकांश एटीएम में कैमरे खराब हैं और स्विच आसानी से बंद हो जाता है, इसलिए यहां वारदातें कीं। ठगों से मिली जानकारी की पुष्टि के लिए पुलिस टीम जल्दी हरियाणा जाने वाली है।

  • पाइलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए, इसलिए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस कम स्पीड से ऊपर से गुजरी, बचीं पर गंभीर

रायपुर . नया रायपुर इलाके के रीको गांव की तीन युवतियां शनिवार को शाम 4 बजे डब्ल्यूआरएस और उरकुरा स्टेशन के बीच छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के सामने पटरी पर लेट गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धीमी गति से ट्रेन नजदीक आने लगी तो तीनों ने एक-दूसरे को गले लगाया था। ट्रेन की रफ्तार पहले ही कम थे, ड्राइवर ने पटरी पर तीन लड़कियां देखकर इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए।

 

फिर भी, हादसे में एक युवती का पांव कट गया और दो छिटटकर किनारें जा गिरीं। तीनों की हालत गंभीर है। पुलिस के मुताबिक भागवती बंजारे के दोनों पैर कट गए हैं। वह विवाहित है तथा पति से अलग रहती है। साथ में उसकी सगी बहन निशा बंजारे तथा भांजी सीमा बंजारे थी जो गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें भागवती को अंबेडकर और निशा तथा सीमा को डीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रेलवे एसपी मेलिना कुर्रे के मुताबिक यह खुदकुशी की कोशिश थी लेकिन कारणों का पता नहीं चला।
हादसे के बाद देर रात कुछ रिश्तेदार अंबेडकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वे युवतियों के इस कदम के बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं। युवतियां भी बोलने की हालत में नहीं हैं। उनके भाई ने पुलिस को बताया कि तीनों घर से घूमने की बात कहकर दोपहर 2 बजे निकली थीं। हादसा शाम 4 बजे उरकुरा और डब्ल्यूआरएस स्टेशन के बीच हुआ।

ट्रेन रुकने के बाद रेलवे स्टाफ ने इंजन और पटरी के बीच फंसी लड़की को निकाला। जिस ट्रेन में हादसा हुआ, उसमें डीआरएम तथा बाकी अफसर भी सफर कर रहे थे। इसलिए ट्रेन के गार्ड समेत स्टाफ ने हादसे के बाद जबर्दस्त तेजी दिखाई।

घायलों को ट्रेन के पार्सल वैन में डालकर रायपुर लाया गया।

यहां से अंबेडकर अस्पताल भी तुरंत पहुंचा दिया गया। भागवती के दोनों पैर कट गए, लेकिन रेलवे पुलिस के जवान केवल एक पैर ही लेकर अस्पताल आए। महिला की स्थिति देखकर किसी का ध्यान नहीं गया कि उसका एक ही पैर आया है। देर शाम सबका ध्यान गया। उसके बाद आरपीएफ के अफसरों को खबर दी गई। रात में ही टीम रवाना की गई, लेकिन दूसरे पैर का पता नहीं चला था।

 

बैग में सिटी बस का टिकट :  तीनों युवतियां मंदिरहसौद से सिटी बस से राजधानी आईं। उनके पर्स से मंदिरहसौद से घड़ी चौक तक का टिकट मिला है। इस पर दोपहर ढाई बजे का समय दर्ज है। पर्स से 300 रुपए और कुछ टैबलेट मिली हैं। आरपीएफ अफसरों के अनुसार तीनों युवतियां संभवत: खुदकुशी के इरादे से ही नगरघड़ी चौक से डब्ल्यूआरएस स्टेशन गईं। हो सकता है कि तीनों ट्रेन से ही वहां पहुंची होंगी। पुलिस बयान के लिए तीनों के होश में आने का इंतजार कर रही है। 

  • भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का आज चुनावी दौरा 
  • स्टार कैंपेनर्स ने पहले चरण के मतदान के लिए 80 सभाएं ली

रायपुर . विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भी अपने स्टार कैंपेनर्स को झोंक दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के स्टार प्रचारक हैं। केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को भी अभियान में लगाया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी ने प्रदेश के कोने-कोने में जाकर सभाएं ले रहें। दीवाली के बाद पूरे राज्य को मथने और भाजपामय करने की रणनीति है।

 

भाजपा के स्टार कैंपेनर्स ने पहले चरण में 12 नवंबर को 18 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अब तक 80 सभाएं ली हैं। दूसरे चरण का चुनाव 20 नवंबर को इसमें भाजपा ने 100 जनसभाएं करने की रणनीति बनाई है।  सीएम डॉ. सिंह, स्मृति ईरानी, रघुवर दास । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के डुप्लीकेट को भी प्रचार में लगाया गया है। सिने स्टार हेमामालिनी और मनोज तिवारी भी यहां आएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर को जगदलपुर आएंगे। वे 14 और 17 को भी आएंगे। शाह रविवार चार नवंबर के बाद 10, 12 13 और 17 नवंबर को भी प्रचार करने पहुंचेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह 15 से 18 नवंबर तक लगातार चार दिन सूबे में धुआंधार प्रचार करेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 10 और 13 नवंबर को महाराष्ट्र बहुल इलाकों में चुनावी कमान थामेंगे। वे धमतरी और कुरुद में सभाएं ले सकते हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी भी सोमवार के बाद 17 व 18 नवंबर को सभाएं लेंगी। इसी तरह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10, 11 14 और 15 नवंबर को भाजपा उम्मीदवारों को जिताने कई सभाएं लेंगे।

 

ये भी करेंगे प्रचार  : सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, राज्यसभा सांसद व प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री सौदान सिंह, सांसद व राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय, अर्जुन मुंडा, मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, सांसद अभिषेक सिंह व दिनेश कश्यप, चंदूलाल साहू, लखनलाल साहू, रामविचार नेताम, प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पवन साय, रामप्रताप सिंह, कमल भंजदेव, कमलभान सिंह मरावी, सुरेंद्र दुबे आ

  • एक दिन पहले पाटन में हुई दोस्ती की ये दूसरी कोशिश भी फेल

रायपुर. विधानसभा चुनाव के मझधार में ही कांग्रेस प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के बीच विवाद गरमाया गया है। एक दिन पहले पुनिया भूपेश के घर खाना खाने गए जरूर थे, लेकिन उससे कोई बात न बन सकी। पर्दे के पीछे की जंग अब सतह पर आनी शुरू हो गई है।

टिकट बंटवारे के असंतोष को लेकर दिल्ली में शुरू हुए विवाद का असर अब छत्तीसगढ़ में भी दिखने लगा है। शनिवार को दोनों एक साथ बस्तर दौरे पर जाने वाले थे, लेकिन पुनिया नहीं गए आैर बघेल अकेले रवाना हो गए। पर बीच में ही हेलीकाॅप्टर में खराबी का कारण बताकर आपात लैंडिंग कराई गई। बघेल वापस लौटे, कुछ देर राजीव भवन में रुकने के बाद अपने क्षेत्र के लिए रवाना हाे गए।

 

इन सीटों को लेकर विवाद : दिल्ली में पुनिया आैर बघेल के बीच टिकट वितरण को लेकर जमकर विवाद हुआ था। जिन सीटों को लेकर विवाद की बात सामने आ रही है उनमें बिलासपुर, कोटा, डोंगरगांव, रायपुर दक्षिण, रायपुर उत्तर, कुरूद, धमतरी, दुर्ग-ग्रामीण जैसी सीटें प्रमुख हैं। इनमें से कुछ सीटों पर पुनिया अपनी पसंद के प्रत्याशी उतारना चाह रहे थे, जिसका बघेल विरोध कर रहे थे। जबकि कुछ सीटों पर बघेल अपनी पसंद के नेताआें को टिकट दिलाना चाह रहे थे जिसका पुनिया विरोध कर रहे थे।

 

एेसे बढ़ती गई बघेल आैर पुनिया के बीच दूरियां : जब भी पुनिया दिल्ली से रायपुर आते बघेल साथ होते थे। पर टिकट वितरण के बाद दो दिन पहले जब पुनिया दिल्ली से आए तो न तो बघेल ने उनसे मुलाकात की आैर न ही उन्हें लेने गए। यहां तक कि रायपुर होने के बाद भी वे राजनांदगांव दौरे पर निकल गए। शुक्रवार भी कांग्रेस भवन में जब जोगी कांग्रेस के नेताआें का कांग्रेस प्रवेश हुअा तब भी दोनों के बीच तनाव देखा जा सकता था। कांग्रेस ने रविवार को फिर दोनों के साथ दौरे की जानकारी दी है।

 

दिनभर कांग्रेस नेताआें की बैठक लेते रहे पुनिया : इस बीच प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया राजीव भवन में कांग्रेस नेताआें की बैठक लेते रहे। दिल्ली से आए नेताआें के अलावा राज बब्बर से भी उन्होंने मुलाकात की। इस दौरान चुनाव अभियान समिति के प्रमुख डा.चरणदास महंत भी बैठक में पहुंचे। बताया गया है कि हेलीकाप्टर की आपात लैंडिंग के बाद बघेल भी राजीव भवन पहुंचे। कुछ देर पुनिया आैर महंत के साथ बैठने के बाद वे अपने क्षेत्र के लिए रवाना हो गए।

 

दो दिन पहले जारी हुआ था दोनों का दौरा कार्यक्रम, अभनपुर के पास आपात लैंडिंग
{ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया आैर प्रदेेश अध्यक्ष भूपेश बघेल दो दिन बस्तर दौरे पर रहेंगे।
{ शनिवार को जब बस्तर जाने की बारी आई तो पुनिया ने बस्तर जाने से मना कर दिया। इसके बाद बघेल हेलीकॉप्टर से अकेले बस्तर के लिए उड़ गए।
{ बघेल बस्तर पहुंचते इसके पहले ही हेलीकाॅप्टर के डगमगाने की खबर आई। और आनन-फानन में उनका हेलीकॉप्टर अभनपुर के पास उतारा गया। फिर सड़क मार्ग से बघेल रायपुर लौट आए। कुछ देर राजीव भवन में रुके और सीधे अपने क्षेत्र के लिए रवाना हो गए।

 

कांग्रेस की नीयत में खोट है : ^कांग्रेस नेतृत्व की नीयत में ही खोट है। सीडी के माध्यम से जिस तरह की बातें सामने आईं, उससे प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के बीच जिस तरह के रिश्ते दिख रहे हैं वह स्वाभाविक है। पर कांग्रेस इसे स्वीकार न कर एकता का संदेश देने का प्रयास कर रही है।’  -शिवरतन शर्मा, भाजपा प्रवक्ता

  • भोपाल में गोविंदपुरा और उत्तर सीट को लेकर कलह, महापौर आलोक ने की सुहास से मुलाकात, संघ खेमे में घूमे वीडी शर्मा

भोपाल . उम्मीदवारों का ऐलान होते ही भाजपा में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। दस बार के विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने अपनी बहू कृष्णा को टिकट दिलवाने के लिए संगठन से लेकर दिल्ली तक जोर लगा दिया है। भाजपा बाबूलाल गौर का टिकट काट चुकी है और उनकी बहू को भी टिकट देने में आना-कानी कर रही है।

 

गौर इससे नाराज हैं। बहू ने साफ कर दिया है कि पार्टी उन्हें टिकट दे या नहीं, वे इस्तीफा देकर हर हाल में गोविंदपुरा से ही चुनाव लड़ेंगी। टिकट कटने की संभावनाओं के मद्देनजर गौर समर्थकों ने आनन-फानन में शनिवार को गोविंदपुरा में बैठक की। इसके बाद गौर के निवास पर विधानसभा प्रभारी बारेलाल अहिरवार समेत क्षेत्र के तमाम पार्षदों ने कृष्णा से मुलाकात कर चुनाव लड़ने के लिए कहा। इस बीच, कृष्णा ने परिवारवाद को लेकर सवाल उठाए और कहा कि उनके मन में पीड़ा है।  

संगठन में काम किया। बरसों से परिवार का गोविंदपुरा से नाता है। कई दूसरे नेताओं के बेटे-बेटी को टिकट मिला है तो मेरे साथ ऐसा क्यों? उन्होंने आशा व्यक्त की कि आरएसएस और संगठन का उनपर भरोसा है। यह भी इस बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गौर परिवार से संपर्क कर लिया है।

कांग्रेस नेता गोविंद गोयल भी गौर से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। देर शाम को गौर ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से कृष्णा के लिए बात की।  दूसरी ओर गोविंदपुरा सीट से दावेदारी कर रहे महापौर आलोक शर्मा ने संगठन महामंत्री सुहास भगत से मिलकर अपना पक्ष रखा। भाजपा के प्रदेश महामंत्री व दावेदार वीडी शर्मा भी लगातार संघ के संपर्क में हैं। 
 इधर, गौर के घर पहुंचे पार्षदों में सीमा यादव, नारायणी अहिरवार, रामबाबू पाटीदार, अर्चना परमार, रश्मि द्विवेदी, लक्ष्मी ठाकुर और संजय वर्मा समेत अन्य शामिल थे। कृष्णा गौर ने मुख्यमंत्री से मिलकर यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब वरिष्ठ नेताओं के सीट छोड़ने पर बेटों, पत्नियों और भाइयों को टिकट मिल सकती है तो उन्हें क्यों नहीं। सुदीप, विक्रम तो वर्तमान में और कई पूर्व उदाहरण हैं।
पार्टी दफ्तर में सहस्त्रबुद्धे को घेरा
मुंगावली में भाजपा प्रत्याशी केपी यादव के विरोध में बाईसाहब यादव के पुत्र ने समर्थकों के साथ भोपाल में पार्टी दफ्तर में शक्ति प्रदर्शन कर दिया। साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे की गाड़ी को घेर लिया। दोनों नेता कार से नहीं निकले तो समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि-‘क्या कार्यकर्ताओं की भी नहीं सुनी जाएगी’।
25 गाड़ियों के साथ सीएम हाउस पहुंचे वेल सिंह
धार की सरदारपुर सीट से भाजपा विधायक वेलसिंह भूरिया का टिकट कट गया। वे शनिवार को 25 गाड़ियों में समर्थक लेकर सीएम हाउस पहुंचे और मुख्यमंत्री से बात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। भूरिया ने अभी अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

अब इतना तय हो गया है कि लोकसभा चुनाव के पहले अयोध्या के विवादित स्थल पर राममंदिर का निर्माण शुरू नहीं हो सकता। अब जनवरी महीने में इस विवाद से जुड़े मुकदमे की सुनवाई की रूपरेखा तय की जाएगी। इस मुकदमे में एक से ज्यादा पक्ष हैं और अनेक किस्म की सत्य और काल्पनिक उलझनें हैं, जिनके कारण इस पर सुनवाई तुरंत समाप्त नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मसले पर अविलंब सुनवाई शुरू करने की अपील अस्वीकार करने के बाद मंदिर समर्थकों की नींद हराम हो रही हैं और उनमें हताशा का भाव बढ़ता जा रहा है। और जब हताशा बढ़ती है, तो उसका शिकार विवेक हो जाता है, जिसके कारण विवेकहीन बातें शुरू हो जाती हैं।
 
वैसी ही एक विवेकहीन बात यह है कि कानून बनाकर या अध्यादेश लाकर केन्द्र सरकार या राज्य सरकार उस विवादित भूमि का अधिग्रहण कर सकती है और उस अधिगृहित जमीन को राम मंदिर बनाने के लिए हिन्दू संगठनों को सौंपा जा सकता है। इस तरह की मांग जोर पकड़ रही है। भारतीय जनता पार्टी के अनेक नेता इस तरह की मांग कर रहे हैं। विश्व हिन्दू परिषद ने तो औपचारिक रूप से इस तरह की मांग कर दी है कि राममंदिर के निर्माण को शुरू करने के लिए सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं करे, बल्कि कानून बनाकर उस भूखंड को मंदिर निर्माण के लिए तैयार संगठन को सुपुर्द कर दे।
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी सरकार से कानून बनाने की मांग कर चुके हैं। सच तो यह है कि मंदिर निर्माण के लिए तैयार बैठे लोगों को लग रहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कुछ भी हो मंदिर बनकर रहेगा। इसके पीछे उनकी सोच यह थी कि मंदिर के पक्षधर मुकदमा हार जाने के बावजूद कानून की सहायता से वह भूखंड पा लेंगे। केन्द्र ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है और सरकार के पास यह अधिकार होता है कि उचित मुआवजा देकर वह कोई भी भूखंड अधिकृत कर ले। अब वहां मस्जिद तो है नहीं, इसलिए उसे अधिगृहित करने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होगी।
 
लेकिन इस तरह के विचार रखने वाले यह भूल जाते हैं कि विवादित भूखंड पहले से ही तकनीकी रूप से केन्द्र सरकार द्वारा अधिगृहित संपत्ति है। यह अधिग्रहण नरसिंह राव सरकार ने 1993 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद किया था। विवादित 2 दशमलव 7 एकड़ जमीन के साथ-साथ आसपास के 66 दशमलव 7 एकड़ जमीन नरसिंह राव सरकार ने एक अध्यादेश के द्वारा अधिगृहित कर ली थी। बाद में अध्यादेश का स्थान एक अधिनियम ने ले लिया। उस अधिनियम के तहत विवादित भूमि पर दाखिल सारी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया गया था।
 
लेकिन भूमि अधिग्रहण के उस निर्णय को अदालत में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट को सरकार ने बताया कि अधिग्रहण यह भूमि किसी को देने के लिए नहीं किया गया है, बल्कि केन्द्र सरकार अपनी कस्टडी में उसे रखना चाहती है, ताकि उसके कारण सांप्रदायिक तनाव को नियंत्रण में रखा जा सके। केन्द्र की उस दलील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण से संबंधित उस कानून को निरस्त नहीं किया। उसका सिर्फ एक हिस्सा, जिसमें सभी याचिकाओं को समाप्त माना गया था, उसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया और आदेश जारी किया कि केन्द्र उस भूमि की कस्टडी अपने पास रखे और याचिकाओं का निस्तारण होने के बाद जिसकी जीत होती है, भूमि उसे सौंप दे। 
 
यानी कानून बनने और उस पर कोर्ट के दिए गए फैसले के अनुसार वह विवादित भूखंड अभी भी अधिगृहित भूखंड है, जो केन्द्र सरकार की कस्टडी में है। उसे केन्द्र को तब तक अपनी कस्टडी में रखना है, जब तक अदालत उस पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना दे। उसके पहले केन्द्र को यथास्थिति बनाए रखनी है। वह किसी को वह भूखंड नहीं दे सकता और जहां तक अधिग्रहण करने के लिए अध्यादेश और अधिनियम बनाने का सवाल है, तो जो जमीन एक बार अधिगृहित हो चुकी है, उसका अधिग्रहण वही सरकार दुबारा कैसे कर सकती है?
 
लिहाजा केन्द्र सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मंदिर बनाने के लिए उतावले हो रहे लोग मोदी सरकार पर दबाव बनाते हुए कह रहे हैं कि जब तीन तलाक और एससी/एसटी एक्ट पर सरकार अध्यादेश और विधेयक ला सकती है, तो फिर राममंदिर के निर्माण के लिए वैसा क्यो नहीं कर सकती। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि तीन तलाक का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ही उस पर अध्यादेश लाया गया है और एससी/एसटी एक्ट में पुनर्विचार याचिका तो केन्द्र ने ही कर रखी थी और सुप्रीम कोर्ट ने उस पर कोई वैधानिक कार्रवाई आगे करने के लिए रोक नहीं लगा रखी है। 
 
विवादित भूखंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का केन्द्र सरकार को आदेश है कि वह वहां यथास्थिति बनाए रखे और वह अपने आपको उस जमीन को कस्टोडियन समझे न कि मालिक। अब जब सरकार उस जमीन की मालिक ही नहीं है, तो फिर वह उसे किसी को कैसे दे सकती है और वह भी तब, जब उस जमीन के एक से ज्यादा दावेदार मौजूद हैं और उनके दावों की जांच सुप्रीम कोर्ट कर रहा है।
 
यही नहीं भारतीय राज्य एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान का बेसिक स्ट्रक्चर है, इसके साथ सरकार क्या संसद भी छेड़छाड़ नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अनेक फैसले में स्पष्ट किया है कि सेक्युलर होने के कारण सरकार अपने आपको किसी धर्म विशेष से जोड़कर फैसला नहीं ले सकती। भारतीय धर्मनिरपेक्षता को कोर्ट ने पारिभाषित करते हुए कहा है कि यह सर्वधर्म समभाव पर आधारित है और सरकार को निर्णय लेते समय सर्वधर्म समभाव की भावना से ही काम करना होगा। इस भावना से विचलित होकर किया गया कोई फैसला या कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया जाएगा। जाहिर है, सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे भाजपा सांसदों की कानून बनाकर मंदिर निर्माण का सपना, एक ऐसा दिवास्वप्न है, जो पूरा होता दिखाई नहीं पड़ता। इसका निर्माण तभी होगा, जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसके पक्ष में हो या विपक्ष में फैसला आने के बाद भूखंड का मालिक अपनी मर्जी से उसे मंदिर निर्माण के लिए दे दे।
 
-उपेन्द्र प्रसाद

यी दिल्ली। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर देश की जनता अब अपना मन बनाने लगी है। इसी को लेकर एक सर्वे सामने आया है। बता दें कि यह सर्वे राजनैतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक (I-PAC) द्वारा कराया गया है। इस सर्वे में बताया गया है कि देश की पहली पसंद आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जबकि दूसरे पायदान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, तीसरे पायदान पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं।

 
I-PAC ने चुनावी माहौल जानने के लिए 57 लाख लोगों को साथ लेकर एक ऑनलाइन सर्वे किया, इस सर्वे को पूरा करने में प्रशांत किशोर की संस्था को 55 दिनों का वक्त लगा। जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे ज्यादा 48 फीसदी लोगों ने पसंद किया है, वहीं सबसे कम पसंद किए जाने वालों में दलित नेता मायावती हैं, जिन्हें महज 3 फीसदी लोग प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं।
 
जब बात प्रधानमंत्री बनने की हो और राहुल गांधी का नाम न आए, ऐसा भला कहां हुआ है। इस सर्वे के मुताबिक दूसरे सबसे लोकप्रिय नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हैं, जिन्हें महज 11 फीसदी लोग प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी से अगर राहुल गांधी की तुलना की जाए तो इस आंकड़े में 400 फीसदी ज्यादा आगे हैं प्रधानमंत्री मोदी।
 
वहीं, केजरीवाल को 9 फीसदी, अखिलेश को 7 फीसदी और 4 फीसदी लोगों ने ममता बनर्जी को अपना वोट दिया है। इसके पहले भी आए सर्वे में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही जनता की पहली पसंद थे, सर्वे ने तो अपना मूड बना लिया है- अबकी बार फिर से मोदी सरकार... अब देखना यह दिलचस्प होगा कि चुनावों के जब नतीजे आते हैं तो यह सर्वे कितना सटीक साबित होता है।  
बात अगर सोशल मीडिया की हो तो ये जागरूकता के मामले में तो अव्वल है लेकिन प्राइवेसी के लिए दिन पर दिन खतरा बनती जा रही है। बॉलीवुड के कई सितारों के साथ ऐसा हो चुका है जब उनकी प्राइवेट चीजें सोशल मीडिया पर लीक हो चुकी है। इसी नाम में एक और नाम शामिल हो गया है कमल हासन की बेटी अक्षरा हासन का । जी हां सोशल मीडिया पर अक्षरा हासन की कुछ प्राइवेट तस्वीरें लीक हुई है। इन तस्वीरों में अक्षरा हासन बिकनी में नजर आ रही है और अंडरगारमेंट्स में सेल्फी लेती दिखाई दे रही हैं। अक्षरा को इनर-वेअर में देखकर उनके फैंस शॉक में हैं। ये बेहर ही प्राइवेट तस्वीरें है जिसे अक्षरा हासन ने सोशल मीडिया पर शेयर नही किया लेकिन अक्षरा हासन की ये तस्वीरें वायरल हो गई हैं। मामला काफी पेंचीदा हैं। अब अक्षरा साइबर क्राइम की विक्टिम बन गई हैं। 
अभी पूरी तरह से ये नहीं कहा जा सकता की तस्वीरें अक्षरा की ही हैं या किसी ने फोटोज से छेड़छाड़ की है। लेकिन सोशल मीडिया पर इन्हें कमल हासन की बेटी अक्षरा हासन की प्राइवेट तस्वीरें कहकर लीक किया जा रहा हैं। बता दें कि वह पहली ऐक्ट्रेस नहीं हैं जिनकी प्राइवेट तस्वीरें इस तरह से वायरल हो रही हैं। कुछ दिनों पहले एमी जैक्सन का फोन भी हैक कर लिया गया था और उनकी पर्सनल तस्वीरें भी इंटरनेट पर वायरल हुई थीं। 

अक्षय कुमार और रजनीकांत की मोस्ट अवेटेड फिल्म 2.0 का दमदार ट्रेलर रिलीज हो चुका है। फिल्म 2.0 काफी धमाकेदार है और फिल्म का कॉनसेप्ट एक दम नया। जी हा सिनेमा जगत की सबसे मंहगी फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका हैं। 

ट्रेलर देखने के लिए यहां क्लिक करें-

 
ट्रेलर के हिसाब से फिल्म के हर सीन को जबरदस्त तरीके से दिखाया गया है फिल्म के लिए गहरी रिसर्च की गई हैं। फिल्म में रजनीकांत के साथ अक्षय कुमार नजर आएंगे। फिल्म अक्षय कुमार ने खुंखार सेल फोन से बने शैतान का नेगेटिव रोल निभाया हैं। ट्रेलर में रजनीकांत से ज्यादा अक्षय ही नदर आ रहे है अक्षय का लुक काफी बेहतरीन है जाहिर से ये फिल्म अक्षय कुमार के फैंस को काफी पसंद आयेगी। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि 2.0 के साथ अक्षय कुमार ने 2018 अपने नाम कर लिया है। वहीं अक्षय के अलावा इस फिल्म में पहले ही तरह ही रजनीकांत का भी धमाकेदार अंदाज देखने को मिलेगा। 
 
फिल्म के प्रोड्यूसर का दावा है कि ये भारतीय सिनेमा जगत की सबसे महंगी फिल्म है रिपोर्स की माने तो फिल्म का बजट 400 करोड़ के आस-पास जाकर बैठा है। वो भी VFX के मंहगे खर्चे मिला कर। बता दें कि फिल्म का बजट इतना तगड़ा इसलिए है क्योंकि इसे 3D फॉर्मेट में शूट किया गया है। बताया जा रहा है कि फिल्म में ऐसे कई सीन्स देखने को मिलेंगे जो ऑडिएंस के होश उड़ा देंगे। इस फिल्म का टीजर रिलीज के बाद इस फिल्म को जबरदस्त क्रेज देखने को मिला थी लेकिन फैंस को ये शिकायत थी अक्षय कुमार बहुत कम दिखे हालांकि ट्रेलर में फैंस की सारी शिकायतें दूर हो गईं। 
 
फिल्म का ट्रेलर इतना शानदार है कि हो सकता है ये फिल्म अबतक की सबसे हिट फिल्म साबित हो। अभी तक सबसे हिट फिल्म का खिताब प्रभास की फिल्म बाहुबली2 के नाम है। 

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