ईश्वर दुबे
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लोकवाद्यों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने बिखेरा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग, लोक कलाकारों और बच्चों का हुआ उत्साहवर्धन
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकवाद्यों और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन ‘रंग-तरंग’ का दूसरा दिन जीवंत हो उठा। लोकवाद्य गुदुम बाजा और मोहरी की पारंपरिक धुनों ने आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की विशिष्ट छटा बिखेरी और उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में पूर्व संस्कृति आयुक्त श्री अनिल कुमार साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों और बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने लोक कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी साहित्य से जुड़े श्री विजय मिश्रा, समाजसेवी श्री उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
‘रंग-तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत और कला को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन में पारंपरिक लोकवाद्यों की मधुर धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। लोक संस्कृति से जुड़े इस आयोजन को संस्कृति प्रेमियों और दर्शकों की सराहना मिल रही है।
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण पर आधारित रही है। अब राज्य इस पहचान को बदलते हुए कच्चे संसाधनों की बजाय वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंगका केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। इस नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है।
करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
औद्योगिक नीति लागू होने के बाद से राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावप्राप्त हुए हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा है।
नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं। इसी क्रम में राजनांदगांव मेंइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0)को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार आने की उम्मीद है।
स्टील से आगे ग्रीन स्टील की ओर
स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन पर जोर दे रहा है। देश में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने के बीचग्रीन स्टीलराज्य के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। पिछले महीने आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल उच्च मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।
फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएं
फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावआए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर देती है।
संसाधन से उत्पाद तक
बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की रणनीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।
निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है।
छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़करउच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माणकरना है। इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील और फार्मा से एआई तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश संकेत दे रहा है कि राज्य अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है।
खम्हरिया और उदयपुर में महतारी सदन निर्माण का भूमिपूजन, मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दी सौगात
महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का बनेगा सशक्त मंच - श्री राजेश अग्रवाल
रायपुर, सितंबर 2026। नारी सशक्तीकरण के संकल्प के साथ सुशासन की सरकार प्रदेश की माताओं-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सशक्त नेतृत्व में प्रदेशभर में महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में आज अंबिकापुर के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन निर्माण कार्य का भूमिपूजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने किया।
इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन हमारी माताओं-बहनों के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का केंद्र होगा। यह महिलाओं को एक ऐसा सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा, जहां वे बैठकें, प्रशिक्षण तथा विभिन्न सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
महिलाओं को संगठित कर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाएगा महतारी सदन
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन गांव की मातृशक्ति को संगठित करने और उनकी प्रतिभा एवं हुनर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में अनेक पारंपरिक कौशल और प्रतिभाएं मौजूद हैं। उन्हें उचित मंच और अवसर मिलने पर वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि महतारी सदन में महिलाओं के लिए बैठक, प्रशिक्षण, कौशल विकास तथा विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के संचालन की सुविधा मिलेगी। इससे महिलाओं के बीच आपसी सहभागिता और समन्वय बढ़ेगा तथा उन्हें सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
महिला सशक्तीकरण से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना परिवार और समाज की मजबूती का आधार है। जब महिलाएं अपने हुनर और क्षमता के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। महतारी सदन महिलाओं के सामाजिक सशक्तीकरण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनेगा। इसके जरिए मातृशक्ति को अपनी क्षमताओं को पहचानने, उन्हें निखारने और नए अवसरों से जुड़ने का मंच मिलेगा।
नारी सम्मान और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता
श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नारी सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तीकरण को विकास की प्राथमिकता से जोड़कर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी विकास के समान अवसर मिलें और वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महतारी सदनों का निर्माण इसी सोच का हिस्सा है। यह पहल महिलाओं को एकजुट करने, उनके कौशल को प्रोत्साहित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
खम्हरिया और उदयपुर की मातृशक्ति को मिली सौगात
अंबिकापुर क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन के निर्माण का भूमिपूजन क्षेत्र की मातृशक्ति के लिए महत्वपूर्ण सौगात है। इन सदनों के निर्माण से स्थानीय महिलाओं को अपनी गतिविधियों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा और वे सामूहिक रूप से सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस अवसर पर दोनों ग्रामों के समस्त क्षेत्रवासियों एवं मातृशक्ति को महतारी सदन की महत्वपूर्ण सौगात के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खम्हरिया और उदयपुर के महतारी सदन आने वाले समय में महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, सशक्तीकरण, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित होंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के चेन्नई रोड शो में टूर ऑपरेटर्स से सीधा संवाद, छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए पर्यटकों को जोड़ने पर जोर
130 से अधिक टूर ऑपरेटरों ने दिखाई गहरी रुचि
तमिल भाषा में पहली बार हुआ पर्यटन स्थलों का प्रभावी प्रस्तुतीकरण
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजार से जोड़ने और राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने चेन्नई में “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” का भव्य आयोजन किया। फिक्की के सहयोग से आयोजित इस रोड शो में चेन्नई के 130 से अधिक ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकों में छत्तीसगढ़ और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के बीच सार्थक संवाद हुआ, जिससे भविष्य में पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ भ्रमण पर भेजने तथा कारोबारी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुईं।
दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार से छत्तीसगढ़ को जोड़ने की पहल
चेन्नई में आयोजित यह रोड शो छत्तीसगढ़ को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की रणनीतिक पहल के रूप में सामने आया। रोड शो में छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और निवेश की संभावनाओं को चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। B2B बैठकों के माध्यम से दोनों राज्यों के स्टेकहोल्डर्स को सीधे संवाद और संभावित व्यावसायिक सहयोग का अवसर मिला। कार्यक्रम में हुई चर्चा में पर्यटन व्यवसायियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके संबोधन ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन से जोड़ने और राज्य की पर्यटन संभावनाओं के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (IAS) तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे (IAS) भी उपस्थित रहे। श्री चौबे ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन उत्पादों तथा राज्य में उपलब्ध निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
तमिल भाषा में पहली बार छत्तीसगढ़ पर्यटन का प्रस्तुतीकरण
रोड शो का सबसे खास आकर्षण रहा—छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और संभावनाओं को पहली बार तमिल भाषा में स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के समक्ष प्रस्तुत किया जाना। इस पहल ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय पर्यटकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने अपने संबोधन में तमिल और अंग्रेजी भाषा में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विरासत संपदा की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य की पर्यटन संपदा को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
तमिलनाडु के पर्यटन क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी
रोड शो में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सहायक निदेशक सुश्री एस. पद्मावती, फिक्की छत्तीसगढ़ टूरिज्म कमेटी के चेयरपर्सन एवं फिक्की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री जसप्रीत सिंह भाटिया, फिक्की तमिलनाडु स्टेट काउंसिल के को-कन्वीनर श्री श्रीहरन बालन तथा तमिलनाडु पर्यटन के निदेशक डॉ. वी.पी. जयसीलन (IAS) सहित पर्यटन क्षेत्र के अनेक प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।
चेन्नई में पदस्थ छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किया आत्मीय जुड़ाव
रोड शो की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री के.सी. देवासेनापति एवं श्री एलेक्स पॉल मेनन, जो वर्तमान में चेन्नई में पदस्थ हैं, विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ से अपने आत्मीय जुड़ाव और राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर सारगर्भित विचार साझा किए। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम को एक अलग भावनात्मक आयाम प्रदान किया।
व्यापारिक साझेदारी के साथ दिखी सांस्कृतिक निकटता
चेन्नई रोड शो में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच पर्यटन क्षेत्र में व्यावसायिक साझेदारी के साथ-साथ आत्मीय जुड़ाव और सांस्कृतिक निकटता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ के पर्यटन कारोबारियों और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बनाया।
मितानिन बहनें छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी: श्री राजेश अग्रवाल
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मितानिन बहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे स्वास्थ्य तंत्र और ग्रामीण समुदाय के बीच मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करते हुए लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। मितानिन बहनें हमारे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। यह बात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कही।
विधानसभा अंबिकापुर अंतर्गत विकासखंड उदयपुर के रामगढ़ में आज मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मितानिन बहनों से आत्मीय चर्चा कर उनके कार्यों, अनुभवों, समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान को सराहा।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में मितानिनों की अहम भूमिका
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मितानिन बहनें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे गांव-गांव में लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहती हैं और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समुदाय के बीच जागरूकता का कार्य करती हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत बनाने में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली मितानिन बहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी सक्रियता और सेवाभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच रहा है।
आत्मीय संवाद में सुनी समस्याएं और आवश्यकताएं
रामगढ़ में आयोजित संवाद के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने मितानिन बहनों से सीधे बातचीत की और उनके कार्यों से जुड़े अनुभवों को जाना। उन्होंने उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उनके कार्यों और सेवाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर सेवा देने वाली मितानिन बहनों के अनुभव और सुझाव महत्वपूर्ण हैं। उनके साथ संवाद के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वास्तविक अनुभवों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।
सेवा, समर्पण और योगदान को किया नमन
श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी ग्रामीण समुदाय के साथ निरंतर जुड़ी रहती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका सेवा भाव, समर्पण और जमीनी योगदान सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि मितानिन बहनों का कार्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण परिवारों के बीच विश्वास और जागरूकता का माध्यम भी बनती हैं। मंत्री ने उनके सेवा और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि स्वस्थ और जागरूक छत्तीसगढ़ के निर्माण में मितानिन बहनों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की समीक्षा की
नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवम्बर तक पूरी कर जनवरी तक कार्यारंभ करने कहा
अधिकारियों को बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ने के दिए निर्देश, निर्माण स्थलों की समस्याओं को तत्परता से निराकृत करने कहा
रायपुर. सितम्बर 2026. लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बरसात के समाप्त होते ही निर्माणाधीन पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी निर्माणाधीन कार्यों का एक सप्ताह के भीतर ठेकेदारों के साथ स्थल निरीक्षण कर काम आगे बढ़ाने की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करते हुए बरसात के तुरंत बाद निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में सभी निर्माण स्थलों पर काम होते हुए दिखना चाहिए।
श्री बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन 20 सितम्बर तक जमा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत के साथ रेलिंग और दीवारों की पेंटिंग का काम 30 नवम्बर तक पूरा करने को कहा।
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में सेतु परिक्षेत्र के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंताओं को अपने-अपने संभागों में भ्रमण कर पुल-पुलियों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर लोगों की जरूरतों के अनुरूप नए पुल-पुलियों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने और क्षतिग्रस्त पुलों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखने और जहां आवश्यकता हो, वहां नए पुलों के निर्माण के प्रस्ताव भेजने को कहा।
सप्ताह में दो दिन साइट पर जाएं
श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को सप्ताह में दो दिन अनिवार्य रूप से निर्माण स्थलों पर जाकर कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने काम में लापरवाही बरतने या कार्य की गति धीमी रखने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहते हुए निर्माण स्थलों की समस्याओं को तत्परता से निराकृत करने को कहा।
नए कार्यों की नवम्बर तक हो निविदा, जनवरी तक शुरू हों काम
श्री बंसल ने नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवम्बर तक पूरी करने और जनवरी तक सभी कार्य हर हाल में शुरू करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को समय पर ले-आउट, ड्राइंग-डिजाइन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों पर आने वाली समस्याओं का तत्परता से समाधान करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की गंभीरता से मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
हर महीने करें भुगतान, काम पूरा होने के तीन माह में अनुबंध क्लोज करें
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ठेकेदारों को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। उन्होंने कार्य पूर्ण होने के बाद तीन माह के भीतर सभी दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान पूरा कर अनुबंध क्लोज करने को कहा।
गतिशक्ति पोर्टल पर 10 सितम्बर तक जानकारी अपलोड करें
श्री बंसल ने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर प्रदेश के सभी पुल-पुलियों की जानकारी 10 सितम्बर तक अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में जानकारी अपलोड नहीं करने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा। उन्होंने सीपीग्राम्स (CPGRAMS) और सीएम-हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों और मांगों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालयीन मामलों, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन से जुड़े प्रकरणों के निपटारे की हर महीने समीक्षा करने को कहा
प्रदेशभर में मदिरा दुकानें, बार, होटल-बार और क्लब रहेंगे बंद
अवैध मदिरा के परिवहन और विक्रय पर कड़ी निगरानी, जांच दल करेंगे कार्रवाई
रायपुर सितंबर 2026/ राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।
जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।
शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बल पर समाप्त किया गया - उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन
छत्तीसगढ़ अतीत के अंधकार से निकलकर विकास और प्रगति के नए युग की ओर अग्रसर - उपराष्ट्रपति
ज्ञान के साथ करूणा और नैतिक मूल्य को अपनाएं युवा चिकित्स- राज्यपाल श्री रमेन डेका
एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री मिली
रायपुर, सितंबर 2026/ उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होकर कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि “आज युवाओं को जो डिग्रियां मिल रही हैं और कल इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी- भारत की जनता का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन।” एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री प्रदाय की गई। उपराष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।
एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों से चली आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, आवागमन की खराब सुविधा और वामपंथी उग्रवाद ने विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा ने सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के विकास को बाधित कर दिया, जिससे समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था।
छत्तीसगढ़ समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर
उपराष्ट्रपति ने अपने उदबोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया। दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हो गया है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, उन्हें अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, रोड़ कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए जाना जाने लगा है। उन्होंने कहा, यह परिवर्तन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता हैं।
उन्नत चिकित्सा तेजी से सुलभ हो रही है
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया, जो भय और अभाव के युग से शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य सेवा और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया, जो यह दर्शाती हैं कि इस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा कितनी तेजी से सुलभ हो रही है। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल
खेत का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए देने की किसानों की अनूठी पहल बनी मिसाल
जल संचय जन भागीदारी के तीन चरणों में प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन
सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल
मुख्यमंत्री श्री साय ने हर राज्य के लिए ‘कैच द रेन’ प्लान, स्टेट वाटर अवार्ड्स और त्रैमासिक समीक्षा का दिया सुझाव
रायपुर सितंबर 2026/ बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।
सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।
उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।
कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन
मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।
इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।
इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
रायपुर, सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, उद्योग एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानदी भवन, नवा रायपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव ने राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर तकनीकी वस्त्र सम्मेलन, कानक्लेव आयोजित करने के निर्देश दिए। सम्मेलन में तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के अंतर्गत उपलब्ध योजनाओं तथा उद्योगों की आवश्यकताओं पर जानकारी एवं संवाद किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय स्थापित कर उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।
प्रारंभिक रूप से प्रत्येक तकनीकी संस्थान से 10-10 विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी वस्त्रों के वास्तविक औद्योगिक उपयोग का अनुभव मिलेगा तथा उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।
हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्रों में विकसित होंगे
वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हथकरघा एवं वस्त्र गतिविधियों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को चरणबद्ध रूप से वस्त्र प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। प्रथम चरण में कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा एवं बिलासपुर जिलों के संस्थानों को स्थानीय वस्त्र उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
राज्य के विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों को तकनीकी वस्त्रों से संबंधित अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान, उत्पाद विकास, परीक्षण, नवाचार एवं प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि, अधोसंरचना, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण, पैकेजिंग एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मिशन की योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन, विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वय तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। यह इकाई तकनीकी संस्थानों एवं उद्योगों से परियोजना प्रस्ताव प्राप्त कर उन्हें मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार कराने, भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने तथा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इकाई के गठन तक ग्रामोद्योग विभाग में राज्य स्तरीय समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
बैठक में उद्योग विभाग, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर तथा हथकरघा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।