ईश्वर दुबे
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रायपुर, अगस्त 2026/ बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में घोटुल परंपरा आदिवासी संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक शिक्षा का एक अनूठा और जीवंत केंद्र है। अब अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों (जैसे झारावाही) में ग्रामीण अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय लकड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से दोबारा पारंपरिक घोटुल तैयार कर रहे हैं। बुजुर्गों द्वारा युवाओं को समाज के नियम, परंपराएं, संगीत, नृत्य और जीवनोपयोगी दायित्व सिखाए जाते हैं।
'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं
अबूझमाड़ की शाम अब भय के साये से मुक्त होकर अपनी पौराणिक और सांस्कृतिक लय में लौटने लगी हैं। जिस अंचल में कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और सन्नाटे का खौफ हुआ करता था, वहां अब सूर्य ढलते ही मांदर की थाप और 'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं। सुरक्षा वातावरण में आए सकारात्मक बदलाव के साथ ही आदिवासी समाज की ऐतिहासिक धरोहर 'घोटुल' की रौनक फिर से लौट आई है।
युवा बेझिझक घोटुल पहुंच रहे हैं
घोटुल केवल एक सामाजिक केंद्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, अनुशासन, लोककला और सामुदायिक मूल्यों की महत्वपूर्ण जीवन-पाठशाला है। नक्सली हिंसा और अनिश्चितता के दौर में गांव वाले शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे, जिससे घोटुल की गतिविधियां लगभग थम सी गई थीं। सुरक्षा बलों के प्रभावी अभियानों और नक्सल प्रभाव में आई कमी के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है। अब युवा बेझिझक घोटुल पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने बुजुर्गों से लोक परंपराएं, नृत्य और गीत सीखकर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
घोटुलों से आती मांदर की थाप परंपराएं और सामूहिक उल्लास जीवंत गवाही दे रही है
घोटुलों का पुनर्जीवन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के सांस्कृतिक अस्तित्व और आत्मसम्मान की वापसी का प्रतीक है। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने से ग्रामीणों की आवाजाही, खेती-किसानी, हाट-बाजार और त्योहारों का उत्साह फिर से लौट आया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस शांति को स्थायी बनाने के लिए अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क कनेक्टिविटी, रोजगार और संचार सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। घोटुलों से आती मांदर की थाप इस बात की जीवंत गवाही दे रही है कि जब डर का अंधेरा छंटता है, तो परंपराएं और सामूहिक उल्लास अपने आप मुस्कुरा उठते हैं।
रक्षाबंधन पर ‘विष्णु भैया’ ने 50 बहनों को दिया आत्मनिर्भरता का उपहार, सौंपे ई-रिक्शा
बहनों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने साड़ी और मिठाई भेंट कर दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री ने लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बगिया विश्राम गृह सहित विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
जशपुर, अगस्त 2026/ रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बगिया कैम्प कार्यालय में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले की 50 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उन्हें आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ा।
रक्षाबंधन के आत्मीय वातावरण में स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें साड़ी और मिठाई उपहार स्वरूप भेंट की। बहनों के बीच मुख्यमंत्री का आत्मीय अंदाज कार्यक्रम को विशेष बना गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की बुनियाद है। हमारी बहनें आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। ई-रिक्शा उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि नियमित आय और सम्मानजनक स्वरोजगार का माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी आजीविका गतिविधियों से भी जोड़ा जाए, जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकें।
पिछले रक्षाबंधन पर 14, इस बार 50 बहनों को ई-रिक्शा की सौगात
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बहनों को स्वरोजगार से जोड़ने की यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले रक्षाबंधन पर्व पर भी स्व-सहायता समूहों की 14 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। इस वर्ष ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से 50 और बहनों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 92 ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। ई-रिक्शा चला रही महिलाएं आज प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय बढ़ने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता भी बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी बहन के हाथ में स्वयं की कमाई आती है तो उसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य के लिए बचत जैसे अनेक कार्यों में यह आय सहारा बनती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की अधिक से अधिक महिलाओं को इसी तरह आयमूलक गतिविधियों से जोड़ना है।
किराना, सब्जी व्यवसाय से लेकर ई-रिक्शा तक, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं दीदियां
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारी दीदियां किराना दुकान, सब्जी व्यवसाय और विभिन्न छोटे उद्यमों सहित अनेक आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अब ई-रिक्शा जैसी सेवाओं में भी महिलाएं आगे आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य कर रही है, ताकि उनके उद्यम टिकाऊ हों और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार प्रारंभ करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मुद्रा ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। महिलाओं को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप उद्यम शुरू करना चाहिए।
‘जशपुर एक्सप्रेस’ से स्वावलंबन की राह होगी आसान
‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे एक ओर महिलाओं को नियमित आमदनी का माध्यम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।
‘विष्णु भैया’ ने बहनों के बीच केरसई को दी विकास की नई सौगातें
घासीमुंडा में नया प्राथमिक शाला भवन, केरसई में मिनी स्टेडियम और तालाब सौंदर्यीकरण सहित अनेक विकास कार्यों की घोषणा
केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन
महिला सशक्तिकरण से लेकर गांवों के विकास तक सरकार की योजनाओं की दी जानकारी
रायपुर अगस्त 2026/ रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम केरसई में आज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। यहां आयोजित ‘रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के पहुंचने पर क्षेत्र की बहनों ने बड़े उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों के स्नेह से अभिभूत मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद किया, उनकी बातें सुनीं और सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है। जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह धागा जीवन भर उसके सम्मान और सुख-दुःख में साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी से जोड़ देता है। प्रदेश की माताओं और बहनों का स्नेह तथा आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री ने बहनों से कहा कि “आपने मुझे जो स्नेह और विश्वास दिया है, उसे बनाए रखना मेरा दायित्व है। मेरा फर्ज है कि आपका और क्षेत्र की जनता का सिर हमेशा ऊंचा रहे तथा विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से ही परिवार मजबूत होगा और मजबूत परिवारों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।
केरसई को मिली विकास की अनेक सौगातें
रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्रवासियों की मांगों को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने घासीमुंडा में जर्जर प्राथमिक शाला के स्थान पर नया शाला भवन, केरसई तालाब का सौंदर्यीकरण, केरसई में मिनी स्टेडियम, केरसई एवं घासीमुंडा के बजरंग बली मंदिरों का जीर्णोद्धार, मुख्य मार्ग से अरुण के घर तक सीसी सड़क, ग्राम पंचायत कोहपानी के गढ़वामुड़ा यादव बस्ती में सामुदायिक भवन, घासीमुंडा में सामुदायिक भवन तथा ग्राम ऊपरकछार में महतारी सदन बनाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, सामुदायिक भवन सहित सभी आवश्यक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। विकास कार्यों में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आने वाले समय में भी क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य निरंतर स्वीकृत किए जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की नीतियों के केंद्र में माताओं और बहनों का सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और खुशहाली है। आज प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई शक्ति दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख बहनों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई तथा सिलाई-कढ़ाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए कर रही हैं। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदियों का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से भी जुड़ रही हैं और इसके माध्यम से आय के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं। जशपुर जिले की बहनों को 50 ई-रिक्शा प्रदान किए जाने से उनके लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खुलेगी।
रायपुर, अगस्त 2026। रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास, अपनत्व और आत्मीयता का पावन पर्व है। यह पर्व परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान तथा आपसी विश्वास के रिश्तों को और अधिक मजबूत करने का संदेश देता है। पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी एवं पंथी गायिका डॉ. उषा बारले ने पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल को राखी बांधी और भाई-बहन के स्नेह के इस पवित्र रिश्ते को आत्मीयता के साथ मनाया।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि यह भाई-बहन के बीच अटूट स्नेह, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। राखी का यह पवित्र धागा हमें अपने रिश्तों की गरिमा बनाए रखने और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत में भी भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक रिश्तों को विशेष स्थान प्राप्त है। हमारी संस्कृति पर्व-त्योहारों के माध्यम से समाज को जोड़ने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देती है। रक्षाबंधन भी इसी आत्मीय परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है।
मंत्री श्री अग्रवाल ने पद्मश्री डॉ. उषा बारले द्वारा राखी बांधे जाने को आत्मीय क्षण बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को अपनी प्रतिभा से देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाली डॉ. उषा बारले का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए विशेष सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि यह राखी उनके लिए केवल एक पर्व की रस्म नहीं, बल्कि स्नेह, सम्मान और विश्वास की खूबसूरत डोर है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, लोककला, परंपराओं और आपसी भाईचारे से है। हमारी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने और देश-दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
पर्यटन मंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की माताओं, बहनों और भाइयों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में प्रेम, सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। भाई-बहन का स्नेह सदैव बना रहे और परिवारों में खुशियों का संचार हो।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर हम सभी अपने रिश्तों को और मजबूत करने, परिवार एवं समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ाने तथा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
किराना दुकान से सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय
स्व-सहायता समूह से जुड़कर सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’
रायपुर, अगस्त 2026/ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर गांवों में दिखाई दे रहा है। इसकी प्रेरणादायी मिसाल मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सुमन लता वाकरे हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और मेहनत व लगन से आज ‘लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया है।
सुमन लता माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और समूह में सचिव की जिम्मेदारी निभा रही हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे समय में स्व-सहायता समूह उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बना और आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह खुली।
15 हजार रुपये की आरएफ राशि बनी नई शुरुआत का आधार
सुमन लता को स्व-सहायता समूह के माध्यम से 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद समूह को प्राप्त 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से उन्होंने 20 हजार रुपये का उपयोग अपनी किराना दुकान शुरू करने के लिए किया।
छोटे स्तर से शुरू हुआ यह व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। सुमन लता ने दुकान का संचालन पूरी मेहनत और लगन से किया। व्यवसाय को बेहतर तरीके से चलाने के बाद उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान का विस्तार किया।
आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी बड़ी हो चुकी है और इसी व्यवसाय से उन्हें हर वर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है।
मेहनत और अवसर ने बदली आर्थिक तस्वीर
सुमन लता की कहानी बताती है कि आर्थिक सहयोग के साथ यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिले तो वे अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए अपना व्यवसाय खड़ा किया और धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ाया।
कभी आर्थिक परेशानियों से जूझ रही सुमन लता आज न केवल अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि छोटे प्रयास भी निरंतर मेहनत और सही दिशा मिलने पर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
समूह ने दिया आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास
सुमन लता का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। समूह ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला भी दिया।
किराना दुकान के विस्तार से उनकी आय बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिली। आज वह स्वयं व्यवसाय संचालित कर रही हैं और अपनी मेहनत से आगे बढ़ रही हैं।
महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों का भी मिला लाभ
सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं और स्व-सहायता समूहों से मिलने वाले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उनके लिए ‘विष्णु भैया’ की सरकार की योजनाएं आर्थिक संबल के साथ आगे बढ़ने का भरोसा भी देती हैं।
‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा
सुमन लता वाकरे की सफलता केवल एक किराना दुकान के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिला के आत्मनिर्भर बनने की कहानी है। स्व-सहायता समूह से मिली आर्थिक मदद, बैंक ऋण का उपयोग, व्यवसाय के प्रति समर्पण और निरंतर मेहनत ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ की पहचान दिलाई।
‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजनाओं से मिल रहे अवसरों को अपनाकर सुमन लता ने साबित किया है कि जब अवसर मिलता है, तो ग्रामीण महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं रहतीं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति की मजबूत भागीदार बन जाती हैं।
आज सुमन लता की किराना दुकान उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी है। उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने छोटे से प्रयास को रोजगार और आर्थिक मजबूती का माध्यम बनाना चाहती हैं।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों ने दिए सुझाव
रायपुर, अगस्त 2026/समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस द्वय श्री शत्रुघ्न सिंह और श्री एम.के.राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े के समक्ष आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित कर समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव लिए गए। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक और सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है। पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है। इसके तहत मौखिक तलाक और कुछ अन्य धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए उपस्थित रहे।
समान नागरिक संहिता के लिए विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में सुझाव देने वालों में उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के श्री जान राजेश पॉल, अध्यक्ष मुस्लिम समाज श्री सलाम रिजवी, अध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी श्री इंद्रजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण श्री ललित चंद्राकर, राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा शामिलथे स इसी प्रकार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया तथा दीपिका सोरी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग श्री विशेषर पटेल, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग श्री अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री लखन लाल धीवर, जैतू साव मठ के महंत श्री राम सुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
एक समान विधिक ढाँचा तैयार करने की दिशा में बढ़ाया कदम
छत्तीसगढ़ में सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान व न्यायसंगत अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाये जाने का सुझाव दिया। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम में सर्व समावेशी समानता को शामिल किया गया है। धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक ढाँचा तैयार करना के दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसमें उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना और असमानता पैदा करने वाले नियमों को समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है।
जनजातीय परंपराओं का संरक्षण
राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। प्रदेशव्यापी जन-संवाद से समावेशी प्रारूप की तैयारी के लिए गठित यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक- धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से राज्य में एक पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।
जशपुर के 10 हजार विद्यार्थियों की होगी स्क्रीनिंग, चयनित विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण
कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने की अभिनव पहल
चयनित विद्यार्थियों को बेंगलुरु भ्रमण और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलने का मिलेगा अवसर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा - छत्तीसगढ़ के बच्चों की प्रतिभा को विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के मिलेंगे नए अवसर
रायपुर अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पहल का शुभारंभ किया। जिला प्रशासन जशपुर एवं IDYM Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभिनव कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जशपुर के विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। जिले के बच्चों में प्रतिभा और सीखने की अपार क्षमता है। उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और आधुनिक वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध कराकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘अंतरिक्ष संगवारी’ जैसी पहल विद्यार्थियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान को केवल पुस्तकों में पढ़ने का विषय न रखकर उसे प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी और उन्हें भविष्य में विज्ञान, अनुसंधान तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
यह पहल भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला द्वारा समर्थित है। कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के साथ अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों के लिए बेंगलुरु यात्रा भी प्रस्तावित है, जहां उन्हें अंतरिक्ष एवं विज्ञान से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों को करीब से समझने के साथ अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला से संवाद का अवसर मिलेगा।
10 हजार विद्यार्थियों की होगी स्क्रीनिंग
‘अंतरिक्ष संगवारी’ कार्यक्रम में जिले के सभी 8 विकासखंडों को शामिल किया गया है। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। विभिन्न चरणों में परीक्षा, मूल्यांकन और साक्षात्कार के माध्यम से प्रतिभाशाली एवं अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
कार्यक्रम की घोषणा 27 अगस्त को की गई है। पंजीयन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद 26 सितंबर को परीक्षा आयोजित होगी तथा 27 से 29 सितंबर के बीच मूल्यांकन एवं साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चयनित विद्यार्थियों के लिए 1 से 7 अक्टूबर तक रायपुर में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात 15 अक्टूबर से बेंगलुरु यात्रा का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला से मिलने और उनके अनुभवों को जानने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का समापन 26 अक्टूबर 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ और जनजातीय अंचलों के बच्चों को भी आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। जशपुर के विद्यार्थी बड़े सपने देखें, वैज्ञानिक सोच विकसित करें और भविष्य में देश के विज्ञान एवं अंतरिक्ष अभियानों में अपना योगदान दें, इस दिशा में ‘अंतरिक्ष संगवारी’ महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सतत विकास और जल निस्पंदन जैसे विषयों को प्रयोगों और मॉडलों के जरिए समझेंगे विद्यार्थी
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा - बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने में उपयोगी होगी पहल
आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष लाभ
रायपुर 27 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में ‘साइंस ऑन व्हील्स’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विज्ञान को स्कूलों और विद्यार्थियों के और करीब ले जाने वाली यह चलती-फिरती विज्ञानशाला बच्चों को रोचक प्रयोगों, वैज्ञानिक मॉडलों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दुनिया से परिचित कराएगी। विशेष रूप से आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में स्वाभाविक रूप से अपने आसपास की दुनिया को जानने और समझने की जिज्ञासा होती है। इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक सोच, प्रयोग और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ बच्चों को किताबों में पढ़े विज्ञान को प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे उनमें सवाल पूछने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाला समय नई तकनीकों और नवाचार का है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराना उनके भविष्य के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस प्रकार की पहल बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें विज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
‘साइंस ऑन व्हील्स’ की विशेषता यह है कि इसमें विज्ञान को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने और गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। वाहन के माध्यम से स्कूलों तक वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग और प्रदर्शनियां पहुंचाई जाएंगी। इससे विद्यार्थी विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्हें ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान की रोचक दुनिया से परिचित कराया जाएगा। रोबोटिक्स के माध्यम से नई तकनीकों, नवाचार और भविष्य के तकनीकी कौशल की समझ विकसित की जाएगी। सतत विकास मॉड्यूल विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और बेहतर भविष्य के निर्माण के प्रति जागरूक करेगा। वहीं जल निस्पंदन के माध्यम से स्वच्छ जल, जल संरक्षण तथा इससे जुड़े वैज्ञानिक समाधानों को प्रयोगों के जरिए समझाया जाएगा।
एक बार की गतिविधि नहीं, विज्ञान से निरंतर जुड़ाव है उद्देश्य
‘साइंस ऑन व्हील्स’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल एक बार विज्ञान के प्रयोग दिखाना नहीं, बल्कि विज्ञान, नवाचार और तकनीक के प्रति उनमें स्थायी रुचि विकसित करना है। विभिन्न गतिविधियों, प्रयोगों, मॉडलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों को ऐसा सीखने का अनुभव दिया जाएगा, जो उन्हें स्वयं सवाल पूछने, उनके उत्तर तलाशने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करे।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समस्या-समाधान, तार्किक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य की तकनीकों से विद्यार्थियों का प्रारंभिक परिचय उन्हें बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में भी सहायक होगा।
तीन राज्यों में संचालित हो रहा ‘साइंस ऑन व्हील्स’
उल्लेखनीय है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल के अंतर्गत इस परियोजना को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में प्लक्ष विश्वविद्यालय, IDYM फाउंडेशन और IIT मंडी के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
खेल सुविधाओं के विस्तार, वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभा विकास, नशामुक्ति, युवा नेतृत्व, शासन में युवाओं की भागीदारी तथा युवा सशक्तीकरण पर युवाओं ने रखे अपने विचार और सुझाव
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ को वर्चुअली संबोधित किया
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा और यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा भी कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर. 27 अगस्त 2026. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव आज रायपुर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर आयोजित देशव्यापी ‘खेलो इंडिया संवाद’ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय युवा मामले व खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने देश के विभिन्न शहरों से लगभग 1600 स्थानों से जुड़े 8 लाख से अधिक युवाओं को संबोधित किया। देशभर के एथलीट्स और खेल जगत की प्रसिद्ध हस्तियां भी इसमें वर्चुअली शामिल हुए। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा और यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा भी मौजूद थीं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया संवाद’ में देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम खेल की बात करते हैं, तो ये केवल मेडल जीतने तक सीमित नहीं है। ये विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेलशक्ति और भारत की युवाशक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। उन्होंने कहा, “जो खेले, वो खिले। और खेल में खिलना सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है, खेल में खिलना मतलब व्यक्तित्व का खिलना, परिवार का खिलना और देश का गौरव बढ़ाना।“
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज से लेकर आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स तक देश में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें प्रतिभा को पहचानने से लेकर उसे दुनिया के मंच तक पहुंचाने तक हर स्तर पर सहयोग मिले। हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ भी स्पोर्ट्स साइंस, प्रशिक्षण, कोचिंग और अनुभव साझा करने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि ‘खेलो इंडिया संवाद’ सिर्फ खेल की बात करने का कार्यक्रम नहीं है। ये एक ऐसे संवाद का मंच है जिसका एक-एक विचार देश के स्पोर्ट्स विजन को एक नई दिशा दे सकता है। इसके साथ जो युवा संवाद हो रहा है, वो युवाओं के विचारों और महत्वाकांक्षाओं को देश के सपनों से जोड़ने का बहुत बड़ा माध्यम है। इस कार्यक्रम में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, टैलेंट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और विकसित भारत को लेकर युवा क्या सोचते हैं, उनके सुझाव क्या हैं, इन बातों को सुनकर उन्हें नीतियों के निर्माण में शामिल किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने एनआईटी में आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की सफलता के पीछे कठोर परिश्रम होता है। बुराईयों को त्याग कर, अपनी कमियों और खामियों को दूर कर जब मेहनत करते हैं, तब हमें बड़ी सफलता मिलती है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत का निर्माण कर सकता है। नशामुक्त होना अपने आप में देश को ताकत और मजबूती देना है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कई बार हमें थोड़ी असफलता मिलती है, पर इससे निराश और हताश नहीं होना है, न ही नशे की ओर प्रवृत्त होना है। नशा आपको कमजोर करता है, नुकसान पहुंचाता है। नशे से कभी किसी को कोई लाभ नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। आपके सामर्थ्य और आपके दम पर यह देश विकसित भारत बनेगा। हमारे प्रधानमंत्री आप लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, युवाओं की क्षमता का उपयोग कर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
रायपुर, 27 अगस्त 2026/ रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचने से प्रदेशभर में त्योहार की खुशियां और बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से महिलाओं को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित आर्थिक सहारे का माध्यम बन रही है। ‘विष्णु के सुशासन’ में योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचने से महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है।
मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी निवासी श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम के लिए भी रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन योजना की किस्त किसी सौगात से कम नहीं है। राशि खाते में पहुंचने की जानकारी मिलते ही उनके चेहरे पर खुशी झलक उठी। उन्होंने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहा।
राखी, मिठाई और जरूरी सामान की खरीदारी में मिलेगी मदद
श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद करती है। रक्षाबंधन जैसे विशेष अवसर पर यह राशि और भी उपयोगी साबित हुई है।
उन्होंने कहा कि राखी से पहले खाते में राशि आने से राखी, मिठाई और परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने में काफी सहूलियत होगी। त्योहार के समय मिलने वाली यह आर्थिक सहायता उनके लिए खुशी के साथ-साथ राहत भी लेकर आई है।
प्रेम कुंवर ने भावुक होकर कहा, “विष्णु भैया की इस सौगात से हमारी राखी की खुशियां बढ़ गई हैं। महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहारा मिल रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”
‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को मिल रहा नियमित आर्थिक संबल
प्रेम कुंवर का कहना है कि महतारी वंदन योजना की राशि जरूरत के समय परिवार के खर्च में उपयोगी साबित होती है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही है।
उन्होंने बताया कि योजना की राशि से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होती है और महिलाओं के भीतर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।
त्योहार की खुशियों के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे अवसर पर महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की किस्त पहुंचना उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ भावनात्मक खुशी का भी कारण बना है। प्रेम कुंवर जैसी अनेक महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘विष्णु के सुशासन’ की भावना के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंच रहा है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है।
रक्षाबंधन से ठीक पहले मिली 31वीं किस्त ने प्रेम कुंवर श्याम के परिवार की खुशियों में एक और रंग भर दिया है। उनके लिए यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि ‘विष्णु भैया’ की ओर से राखी की सौगात बनकर आई है।