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जगदलपुर वन वृत्त में जिला यूनियन अव्वल

संग्राहकों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी, 54 लाख रुपये से अधिक का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

रायपुर, 14 मई 2026/ छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आदिवासियों की आय का प्रमुख स्रोत तेंदूपत्ता संग्रहण सुकमा जिले में इस वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित सुकमा ने संग्रहण कार्य में तेज गति दिखाते हुए जगदलपुर वन वृत्त के अन्य जिलों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार न केवल तेंदूपत्ता संग्रहण बढ़ा है, बल्कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

संग्रहण के प्रमुख आंकड़े

वर्ष 2026 के सीजन में 12 मई तक के प्राप्त आंकड़े सुकमा जिला यूनियन की सफलता को दर्शाते हैं। अब तक 84 हजार 038 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 77.53 प्रतिशत है। (पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा मात्र 65 प्रतिशत था)। वर्ष 2025 के 41 हजार 021 संग्राहकों के मुकाबले इस वर्ष 46 हजार 620 संग्राहक इस कार्य से जुड़कर लाभान्वित हो रहे हैं।

समितियों ने लक्ष्य को पछाड़ा

कोंटा क्षेत्र की कई प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों ने निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक संग्रहण कर मिसाल पेश की है। गोलापल्ली 129.11, किस्टाराम 126.11 प्रतिशत, पालाचलमा 122.79 प्रतिशत, पोलमपल्ली 107.31 प्रतिशत और कोण्डरे 101.02 प्रतिशत तेंदूपत्ता संग्रहण कर मिसाल पेश किए हैं।

दुर्गम क्षेत्रों में पहुँचा रोजगार

प्रशासन की सक्रियता से इस वर्ष गोगुंडा जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक संग्रहण कार्य शुरू किया गया है। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जहाँ पिछले वर्षों में किन्हीं कारणों से संग्रहण नहीं हो सका था।

पारदर्शी भुगतान और अवैध परिवहन पर नकेल

संग्राहकों के हितों को सर्वाेपरि रखते हुए अब तक 54 लाख 48 हजार 619 रुपये की पारिश्रमिक राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। ओडिशा के मलकानगिरी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में तेंदूपत्ता के अवैध परिवहन को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा रात्रिकालीन गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुकमा जिला यूनियन की यह उपलब्धि न केवल बेहतर प्रबंधन का परिणाम है, बल्कि वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

Detailed Discussion on Bastar Development Model in Delhi: Chief Minister Vishnu Deo Sai Meets Union Home Minister Amit Shah

Former Security Camps Being Transformed into Public Service Centres

Raipur May 14, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai today met Union Home Minister Shri Amit Shah in New Delhi and briefed him in detail about the rapid transformation and ongoing development initiatives in Bastar. Deputy Chief Minister Vijay Sharma was also present during the meeting.

The discussion focused extensively on the “Mukhyamantri Swasth Bastar Abhiyan” being implemented in Bastar. Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai informed the Union Home Minister that in areas where even ambulance access was once considered impossible, doctors, medicines and healthcare teams are now reaching villages regularly. Medical teams are walking to remote habitations, conducting health screenings, identifying serious illnesses at an early stage and ensuring free treatment for patients.

Chief Minister Shri Sai informed that within just one month, more than 21.86 lakh people have undergone health screening and their digital health profiles have been prepared. Thousands of patients have received timely treatment and several critical cases have been referred to higher medical institutions for advanced care.

Chief Minister Shri Sai said that former security camps in Bastar are no longer limited to security-related activities. These camps are gradually being developed as “Jan Suvidha Kendras” (Public Service Centres), where villagers are getting access to healthcare, education, banking services and information related to various government welfare schemes under one roof.

Chief Minister Shri Sai said these centres are ensuring that people living in remote forest regions receive essential services closer to their homes. Villagers no longer have to travel long distances for treatment, banking services, official documents or information related to government schemes.

It is noteworthy that the Mukhyamantri Swasth Bastar Abhiyan was launched from Sukma on April 13, 2026. The campaign aims to cover nearly 36 lakh people across Bastar region. Alongside this, the “Bastar Munne (Agrani Bastar) Abhiyan” is being implemented to ensure saturation-level delivery of 31 important government schemes to the last beneficiary.

Chief Minister Shri Sai also informed the Union Home Minister that a new super-speciality hospital has become operational in Jagdalpur, reducing the need for people of Bastar to travel to Raipur or Bilaspur for advanced treatment. Expansion of next-generation Dial-112 emergency services and the plan to transform former security camps into permanent public service centres are also emerging as major steps towards sustainable development in Bastar.

Chief Minister Shri Sai said that areas once disconnected from the mainstream due to Maoist influence are now witnessing the steady reach of government welfare schemes and basic public services. Referring to a recent incident from Sukma, he said a critically ill patient from an extremely remote village was successfully transported across hundreds of kilometres for treatment, which reflects the changing realities of Bastar.

Chief Minister Shri Sai also briefed Amit Shah on the development roadmap prepared for Bastar, with special focus on roads, education, employment generation, skill development and investment promotion. He said Bastar is witnessing rapid positive change under the guidance of Prime Minister Narendra Modi and Union Home Minister Amit Shah.

Union Home Minister Amit Shah appreciated the development initiatives and expansion of healthcare services in Bastar. He said the Central and State Governments are working together to ensure that the benefits of development reach the last person.

It is noteworthy that Union Home Minister Amit Shah is likely to visit Bastar on May 18 and 19.

दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

रायपुर 14 मई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास संभावित है।

रायपुर, 14 मई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें रोजगार के सुलभ अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से ई-श्रम साथी (eShram Sathi) मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल विजन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का मुख्य ध्येय निर्माण श्रमिक न हो हताश, ई-श्रम साथी ऐप में करे काम की तलाश के संकल्प को चरितार्थ करना है।

यह ऐप विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए बनाया गया है जो अपने कौशल के अनुरूप उपयुक्त कार्य की तलाश में रहते हैं, ताकि वे बिचौलियों के बिना सीधे काम पा सकें। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे, जिसमें वे अपने निवास स्थान के निकटतम उपलब्ध कार्यों की त्वरित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क और उपयोग में सरल रखी गई है, जिससे श्रमिक स्वयं अपना डेटा दर्ज कर सकते हैं और अपनी दक्षता के अनुसार कार्य का चयन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह ऐप श्रमिकों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी और उनका सीधा लाभ दिलाने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

नियोक्ताओं के लिए भी यह ऐप एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है, जहाँ वे अपनी आवश्यकतानुसार कुशल और अकुशल श्रमिकों की खोज कर सकते हैं। यह एक तेज़ और भरोसेमंद डिजिटल माध्यम है जो पंजीकृत एवं विभाग द्वारा सत्यापित श्रमिकों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, जिससे नियोक्ताओं के समय और भर्ती प्रक्रिया की लागत में महत्वपूर्ण बचत होगी। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (श्रम विभाग) ने सभी पात्र नागरिकों से इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने की अपील की है। किसी भी तकनीकी समस्या या विस्तृत जानकारी हेतु विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0771-3505050 और निकटतम श्रम कार्यालय से संपर्क करने का परामर्श दिया है।

Good governance, stronger connectivity and public welfare schemes driving positive change: Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai

Improved roads, transport infrastructure and faster clearances to benefit trade, farmers and employment

Raipur, May 14, 2026/ Chhattisgarh has been recognized as a ‘High Performer’ in the LEADS 2025 report released by the Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), marking another milestone in the state’s push towards infrastructure-led growth and good governance. The ranking reflects improvements in logistics, transport systems, road connectivity and ease of doing business, with growing impact on trade, agriculture, investment and employment generation across the state.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said the government’s focus is not limited to industrial expansion alone, but also on improving everyday life for people across the state. Better roads and transport connectivity are helping farmers move produce to markets faster, strengthening trade activity and creating new employment opportunities for youth.

He added that good governance, transparency and faster decision making have also contributed to rising investor interest in the state. He said the government is continuing it's efforts to strengthen connectivity from villages to urban centres, expand warehousing facilities and create a more industry-friendly environment.

Industry Minister Shri Lakhan Lal Dewangan said logistics and transportation systems in the state are being modernized, benefiting not only industries but also small traders, farmers and local entrepreneurs.

Meanwhile, under the state’s Logistics Policy 2025, several measures have been introduced to reduce transportation costs, improve freight movement and attract investment. The government has also granted industry status to the logistics and warehousing sector, a move expected to create fresh opportunities for employment and investment.

A city logistics plan prepared for Raipur is aimed at reducing traffic congestion and streamlining movement of goods within the city. At the same time, industrial approvals are being facilitated through the OneClick Single Window Portal, designed to simplify and speed up clearances for investors.

Commerce and Industry Department Secretary Shri Rajat Kumar said Chhattisgarh is rapidly building a modern and technology-driven logistics ecosystem that is expected to accelerate trade, industry and employment growth in the state. This achievement reflects Chhattisgarh’s growing position as an emerging centre for industry and investment.

The ‘High Performer’ recognition in the LEADS 2025 report is being seen as more than just a ranking for Chhattisgarh. It reflects growing national recognition for the state’s expanding infrastructure, good governance and development-focused policy approach. With improvements in road connectivity, transport systems, investment flow and employment opportunities, Chhattisgarh is steadily shaping a growth model centred on public convenience and economic progress.

अंतिम छोर के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के निर्देश

आंगनबाड़ी और स्कूल भवनों के बुनियादी ढांचे में सुधार की प्राथमिकता

रायपुर, 14 मई 2026/छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों की जनोन्मुखी और महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने पांचवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की अनुशंसाओं पर हुई कार्रवाई की जानकारी ली और अधिकारियों को विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए।

डेटा आधारित निगरानी और सुशासन

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने डेटा आधारित निगरानी प्रणाली (Data-driven Monitoring System) को और मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में सुशासन और प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्षमता विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रस्तुतिकरण भी दिया गया।

शिक्षा और आंगनबाड़ी बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

शिक्षा और बच्चों के पोषण को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों की समस्या है, वहां प्राथमिक शालाओं के अतिरिक्त कक्षों में आंगनबाड़ी संचालित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कलेक्टरों के साथ समन्वय करने को कहा। समग्र शिक्षा के तहत जिन स्कूलों में कमरों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

विभागीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा

बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं युवा कल्याण, तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, आदिम जाति विकास, पर्यटन, ऊर्जा और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार सहित स्कूल शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक

अशोक कुमार चंद्रवंशी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।

छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।

वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी

वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।

बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल

कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।

अरूना के घर अब सूरज की रोशनी से रोशन, बिजली बिल की चिंता से मिली मुक्ति

3 किलोवाट के सोलर प्लांट ने बदली राजपुर निवासी अरूना की जिंदगी, बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश

रायपुर, 14 मई 2026/ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित करना और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है। इस योजना का लाभ उठाकर कोई भी अपने घर में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित कर सकता है। बढ़ती महंगाई के दौर में बिजली का भारी-भरकम बिल किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए चिंता का विषय हो सकता है। लेकिन बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड की श्रीमती अरूना कश्यप ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को अपनाकर अरूना न केवल अपना बिजली बिल शून्य करने की ओर बढ़ रही हैं, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए भी एक मिसाल बन गई हैं।

बढ़ते खर्चों के बीच सोलर बना सहारा

अरूनाकश्यप साझा करती हैं कि बढ़ती जरूरतों के साथ हर महीने आने वाला भारी बिजली बिल उनके घरेलू बजट को बिगाड़ देता था। वे कहती हैं, पहले बिजली का खर्च लगातार बढ़ रहा था, जिससे घर का तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब मुझे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और उस पर मिलने वाली केंद्र व राज्य सरकार की सब्सिडी के बारे में पता चला, तो लगा कि यह हमारे लिए सबसे अच्छा समाधान है।

3 किलोवाट का प्लांट राहत की नई किरण

अरूना ने विभागीय सहयोग से अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगवाया है। शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह प्रक्रिया जटिल होगी, लेकिन शासन की सहायता और मार्गदर्शन से यह काम आसान हो गया। लगने के बाद बिजली बिल में भारी गिरावट आई है। अब घर के सभी जरूरी उपकरण बिना किसी तनाव के सौर ऊर्जा से चल रहे हैं। अरूना का मानना है कि सौर ऊर्जा न केवल पैसों की बचत है, बल्कि यह पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक बड़ा योगदान है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

श्रीमती अरूना ने शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम परिवारों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम है। सब्सिडी के प्रावधान ने इस तकनीक को आम आदमी की पहुँच में ला दिया है। श्रीमती अरूना कश्यप कहती हैं कि अगर हर घर सौर ऊर्जा अपनाए, तो न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि हमारा पर्यावरण भी प्रदूषण मुक्त रहेगा।

योजना का लाभ

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को सोलर प्लांट की स्थापना पर आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। इससे आम नागरिक अपनी छत का उपयोग कर स्वयं बिजली पैदा कर सकते हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।

LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ

सुशासन, मजबूत कनेक्टिविटी और जनहितकारी योजनाओं का दिख रहा सकारात्मक असर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 13 मई 2026/छत्तीसगढ़ ने विकास और सुशासन की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी LEADS 2025 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य में बेहतर सड़क, परिवहन, व्यापार सुविधा और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण मिली है, जिसका सीधा लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और युवाओं को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल उद्योगों का विकास नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंच रही है, व्यापार को गति मिल रही है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और तेज़ निर्णय प्रक्रिया के कारण निवेश बढ़ रहा है। राज्य सरकार गांव से शहर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने, वेयरहाउसिंग सुविधाएं बढ़ाने और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को सुविधा मिलने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों को भी लाभ मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई लॉजिस्टिक्स नीति 2025 के तहत परिवहन लागत कम करने, माल परिवहन को तेज़ बनाने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिए जाने से रोजगार और निवेश की नई
संभावनाएं तैयार हो रही हैं।

रायपुर के लिए तैयार किए गए सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और माल परिवहन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। वहीं OneClick Single Window Portal के माध्यम से उद्योगों को अनुमति प्रक्रिया आसान बनाई गई है, जिससे निवेशकों को तेजी से सुविधाएं मिल रही हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आधुनिक और तकनीक-सक्षम लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित कर रहा है। इससे प्रदेश में व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के उभरते औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में नई पहचान दिला रही है।

कुल मिलाकर LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य के रूप में मिली यह पहचान केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में तेज़ी से विकसित हो रही अधोसंरचना, सुशासन और जनहितकारी विकास मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति है। बेहतर सड़क, मजबूत परिवहन व्यवस्था, बढ़ते निवेश और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब आमजन की सुविधाओं और आर्थिक समृद्धि को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान सेरीखेड़ी में अजा परियोजना और पिंक दीदी नवाचारों का किया निरीक्षण

महिला समूहों के आर्थिक स्वावलंबन की सराहना

रायपुर, 14 मई 2026/ केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज रायपुर जिले के सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का दौरा किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित इस केंद्र में उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और आजीविका गतिविधियों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित अजा (AJA) परियोजना और बेहतर बाजार लिंकेज की प्रशंसा करते हुए इसे देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।

अजा परियोजना वैज्ञानिक पशुपालन और सशक्त बाजार लिंकेज

मंत्री श्री पासवान ने एकीकृत बकरी पालन मॉडल अजा के क्रियान्वयन को बारीकी से देखा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन को भी नई दिशा दे रही है। आधुनिक शेड, नियमित टीकाकरण, पशु बीमा, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जैविक खाद निर्माण जैसी व्यवस्थाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार की सुलभ उपलब्धता को अन्य राज्यों के लिए भी सीखने योग्य बताया।

पिंक दीदी और बिजनेस दीदी आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने नवा रायपुर में संचालित ई-ऑटो सेवा “प्रोजेक्ट पिंक दीदी” की सराहना की। उन्होंने हितग्राही महिलाओं से संवाद कर उनके अनुभव जाने और कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है। एकीकृत बकरी पालन परियोजना, कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों, आजीविका सेवा केंद्र, के अलावा उन्होंने बिजनेस दीदी, मशरूम उत्पादन और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों का भी अवलोकन किया।

घर संभालने वाली महिलाएं अब बनीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर

मंत्री श्री पासवान ने कृषक उत्पादक समूह की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर महिलाओं से आत्मीय चर्चा की। इस दौरान दीदियों ने साझा किया कि कैसे वे घर की चारदीवारी से निकलकर आज एक संगठित व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। मंत्री ने महुआ कुकीज का स्वाद लिया और समूह की दीदियों के कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्र को संगठित कर लाभ अर्जित करना ही वास्तविक सशक्तिकरण है।

अधिकारियों को योजनाओं के विस्तार के निर्देश

केंद्रीय राज्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ के आजीविका मॉडल को अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अधिकारियों को इन योजनाओं के और अधिक विस्तार पर जोर देने को कहा। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आजीविका मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं महिला समूहों को बेहतर कार्य के लिए बधाई देते हुए योजनाओं के और विस्तार पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान पंचायत सचिव श्री भीम सिंह, कलेक्टर श्री गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिस्वरांजन सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने मल्टी यूटिलिटी सेंटर, सेरीखेड़ी (रायपुर) अजा परियोजना, पिंक दीदी ई-ऑटो, बिजनेस दीदी, एफपीओ से संवाद की और कहा कि छत्तीसगढ़ का ग्रामीण आजीविका मॉडल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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