ईश्वर दुबे
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धनंजय राठौर
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छत्तीसगढ़ी संस्कृति में लोक-त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति, कृषि और जीव-जंतुओं के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इन्हीं त्योहारों में सबसे पहला और प्रमुख त्यौहार है — हरेली तिहार। सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन, कृषि परंपरा और पर्यावरण-प्रेम का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी प्रकृति नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएँ भी हैं।
छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में पर्व और त्यौहारों की बहुलता है। प्रत्येक माह कोई न कोई त्यौहार यहाँ लोक मानस को अपने रंग में रंग लेता है। ये त्यौहार जहॉं लोक जीवन में हंसी-खुशी के अवसर उपलब्ध कराती हैं, वहीं खेल और मनोरंजन के अनुकूल साबित होते हैं। प्रकति का यह हरापन छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में भी पूरी समाहित है। हरेली, भोजली, जँवारा हो या बसंत पंचमी सभी पर्वों में प्रकृति का मनोरम और इसका अप्रतिम सौंदर्य झलकता है। इस रूप-सौंदर्य में जीवन की चारों अवस्थाओं का उल्लास और उत्साह विविध रंगों में बिखरा हुआ है।
शायद ‘हरेली’ का हरापन हमारी परंपराओं में हमारे संस्कारों में और हमारे लोक जीवन में प्राकृतिक हरीतिमा का ज्यादा एहसास कराता है। हरेली का यह हरापन सबके जीवन में बिखरे और निखरे यही कामना है। यह भी कामना है कि भौतिकता की चकाचौंध से परे हमारी खेल परंपराएँ जीवित रहे ताकि माटी से जुड़े ग्रामीणजन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से सुदृढ़ रहें। माटी की सोंधी-सोंधी महक हमारे लोक गीतो से आती रहे और खेल परंपरा की यह अविरल धारा निरंतर गतिमान रहे।
1. हरेली शब्द का अर्थ और महत्व
'हरेली' शब्द 'हरियाली' से बना है। सावन के महीने में जब चारों तरफ़ खेतों और मैदानों में हरी-भरी फसलें और हरियाली लहलहाने लगती है, तब किसान इस पर्व को उल्लासपूर्वक मनाते हैं। इसे छत्तीसगढ़ का पहला तिहार माना जाता है, जहाँ से राज्य के प्रमुख लोक-पर्वों की श्रृंखला शुरू होती है।
2. कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा
हरेली का दिन मुख्य रूप से कृषकों और कृषि से जुड़े साधनों का धन्यवाद ज्ञापित करने का दिन है:
• कृषि यंत्रों की पूजा:- हरेली की जड़ें छत्तीसगढ़ क्षेत्र की कृषि विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह एक उत्सव होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक भेंट भी है, लोगों के लिए प्रकृति, बारिश और अपने कृषि कार्य को सम्पन्न करने के बाद किसान अपने औजार, हल, फावड़ा, कुदाल, कुदाली, कुम्हड़ी, बिन्धना, बसुला, हथौड़ी, आरी,असिया, पैसुल, छूरा, खुर्पी आदि को धोकर स्वच्छ मिट्टी (मुरमी) का आसन से सजाकर किसान-किसानिन पूजा सामग्री रखकर धुले हुए चांवल आटे से हाथा लगाकर चन्दन, फूल, धुप-दीप व चीला रोटी से भोग लगाकर श्रीफल अर्पित करते हैं एवं भाव विभोर हो प्रार्थना करते हैं - ‘हे बलराम रूपी हल प्रचण्ड शक्ति के प्रतीक धारापति, आपने कंधा के रूप में माता को संवारा एवं सेवा करने में हमारी सहायता की कृषि कार्य बोनी ब्यासी रोपा के होते ही चहूओर हरियाली छाई इसके लिए कोटिशः धन्यवाद आपका कार्य सम्पन्न हुआ विश्राम करे। हमने आपको बड़ा कष्ट दिया, काम लिया, हमें क्षमा करें। आपकी दया हम पर सदैव बनी रहे, इसी प्रकार अन्य औजारों का कार्यानुसार निवेदन करते गेड़ी की पूजा कर शरीर के सामर्थ पैरो की रक्षा की कामना करते हैं।
• पशुधन का सत्कार: पशुधन किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में किसान मिश्रित कृषि प्रणाली अपनाते हैं, जिसमें फसल और पशुधन का संयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े-लिखे और अकुशल होने के कारण अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। बैल छत्तीसगढ़ कृषि की रीढ़ हैं। किसान, विशेषकर सीमांत और लघु किसान, जुताई, ढुलाई और उत्पादन और इनपुट दोनों के परिवहन के लिए बैलों पर निर्भर रहते हैं।
• खेती-किसानी के सच्चे साथी यानी गाय और बैलों की विशेष सेवा की जाती है। उन्हें नहला-धुलाकर आरती उतारी जाती है तथा 'गहूंता' (आटा, नमक और जड़ी-बूटी से बना पौष्टिक मिश्रण) खिलाया जाता है, ताकि वे रोगों से मुक्त रहें। जड़ी बुटियों से तैयार औषधि को गौठान में ले जाकर अन्डी एवं खम्हार के पत्तों में नमक, चावल या गेहूँ के गोला के साथ दवा डाल कर पशुओं को खिलाया जाता है। अरण्ड, खम्हार का पत्ता औषधि है, जो वायुजनित रोगों को दूर करता है। नमक उत्प्रेक्षण का कार्य करता है, चावल या गेहूँ के कारण दवा अधिक असरकारक बन जाती है। इससे पशु धन निरोग हो जाता है यह एक प्रकार टीकाकरण ही है।
3. परंपराएं एवं रीति-रिवाज
• गेड़ी चढ़ने का आनंद:- इस पर्व में गेंड़ी का काफी महत्व है बांस के मोटे डंडो एवं बांस के पहुये को विशेष विधि से कस कर बांधा जाता है। गेड़ी का उदारण हमें पुराणों में मिलता है। बलदाऊ-कृष्ण अपने सखाओं के साथ गेड़ी चढ़ा करते थे। कृष्ण लीला प्रसंग में इसका उदाहरण मिलता है तथा खेलों का आयोजन भी होते रहे हैं, जिसमें गेड़ी दौड़, पानी पिलाना, एक पैर में खड़े होना, एक पैर में कूदना आदि अनेक खेल का आयोजन प्राचीन काल से अब तक होते आ रहे हैं। बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी से भरे रास्तों पर चलने के साधन के रूप में शुरू हुई यह परंपरा आज एक मनोरंजक खेल बन चुकी है।
• विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन:-हरेली में गाँव व शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता भी होती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली जुटती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता का आयोजन की जाती है। नारियल हारने और जीतने का यह सिलसिला देर रात तक चलता है। गाँव-गाँव में गेड़ी दौड़ का आयोजन होता है। कहीं खो-खो तो कहीं फुगड़ी, कहीं बिल्लस, कहीं अत्ती-पत्ती, डंडा पचरंगा खेल का आयोजन होते आ रहे हैं। गाँव का गौठान हो या स्कूल का मैदान, गाँव के बाहर सड़क हो या चौबट्टा लगता है सारे लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजे रहते हैं।
• टोटका और सुरक्षा का विधान:- मान्यतानुसार, इस दिन गाँव को बुरी नज़र और रोगों से बचाने के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर नीम की पत्तियाँ बांधी जाती हैं। लोहार द्वारा घरों के चौखट पर नीम की शाखाएं और लोहे की कीलें लगाई जाती हैं। स्थानीय मान्यता है कि इससे घर को बुरी शक्तियों और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यह प्रथा नीम के ज्ञात औषधीय गुणों और ग्रामीण स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक मान्यताओं में इसकी भूमिका से प्रेरित है।
• हरेली तिहार में बनाए जाने वाले ब्यंजन:- मुख्य रूप से गुड़ के चीला, अईरसा, चौसेला और बोबरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाए और बांटे जाते हैं। गुलगुला भजिया, गुड़हा चीला, सोहारी, बड़ा, ठेठरी, खुरमी और बोबरा जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों का भोग कृषि औजारों और गोधन को लगाया जाता है। इस दिन छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का विशेष आनंद लिया जाता है।
4. सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश
हरेली तिहार केवल एक धार्मिक या लोक-अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव का प्रकृति के साथ अटूट संबंध दर्शाता है। यह पर्व सिखाता है कि जो प्रकृति और पशुधन हमें जीवन और भोजन देते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा परम कर्तव्य है।आज के समय में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर और 'छत्तीसगढ़िया क्रांति' के तहत पारंपरिक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को बढ़ावा देकर इस लोक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।
बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा
रायपुर, 10 अगस्त 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।
बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा सुश्री किरण कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
NDMA ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स
रायपुर,10 अगस्त 2026/ राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।
त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी (SOP) को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।
समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल (DRM), स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।
20 दिन में किये फेफड़े की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी और इस तरह दो महीने में फेफड़े की कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी
सर्जरी में 15 साल के बच्चे के फेफड़े की लोबेक्टोमी सर्जरी भी हुई जिसमें मरीज को बायें फेफड़े के ऊपरी लोब में था एस्परज़िलोमा नमक फंगस का संक्रमण
अब तक के सबसे कम उम्र का मरीज जिसके फेफड़े की लोबेक्टमी सर्जरी की गई
इस ऑपरेशन में शामिल मरीजों की उम्र 15 साल से लेकर 70 साल तक
रायपुर, 10 अगस्त 2026/पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 20 दिनों में 9 तथा इस संख्या को मिलाकर पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी (फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकालने की सर्जरी) सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया है। इनमें दो आपातकालीन सर्जरी ऐसे मरीजों की की गई, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों ने न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को सिद्ध किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में अम्बेडकर अस्पताल को अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है।
हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी का मतलब यह होता है कि इसमें मरीज के क्षतिग्रस्त फेफड़े के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है। यह सर्जरी इस संस्थान में अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है जिसमें एडवांस्ड लंग स्टैपलर का उपयोग किया जाता है, जिससे भविष्य में इस सर्जरी से होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल (Bronchopleural Fistula) फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। छत्तीसगढ़ के किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान की तुलना में इस संस्थान द्वारा इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी (फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी) किया जाना इस संस्थान के लिए एक कीर्तिमान है और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।
छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा (Aspergilloma) एवं ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस (Aspergillus niger) एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इन्फेक्शन फेफड़े के टी.बी. वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्युनिटी बहुत ही कम हो जाती है।
एस्परजिलोमा सामान्यतः दायें फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहाँ पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टी.बी. संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस
(Lung Abscess) में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने (Hemoptysis) का सबसे बड़ा कारण है।
वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। एवं ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से इस बीमारी (कैंसर) से पूर्णतः निजात पाया जा सकता है।
पूरे छ.ग. में फेफड़े की सर्वाधिक सर्जरी इसी हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होती है, जिसमें प्रमुख रूप से फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी (Lobectomy), सेगमेंटेक्टॉमी (Segmentectomy) एवं न्यूमोनेक्टॉमी (Pneumonectomy) जिसमें एक तरफ के दायें या बायें फेफड़े को पूर्णतः निकाल दिया जाता है, इत्यादि।
सामान्यतः इस संस्थान में साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहाँ पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ छ.ग. से ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, उड़ीस , म.प्र. एवं उ.प्र. के भी मरीज आते हैं। जो इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है।
ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। अभी भी हमारे विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।
इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पांडवानी ने बांधा समां
रायुपर 10 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पांडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।
छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी
इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पांडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।
तीजन बाई के योगदान को याद किया
इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पांडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।
सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी
तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।
देश की लोक परंपराओं का साझा मंच
आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।
इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
सोनाक्षी सिन्हा को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही
गोविंदा की फिल्म जोरू का गुलाम डायरेक्ट कर चुके 73 साल के शकील नूरानी को यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया है। 33 साल की एक्ट्रेस ने उन पर शोषण, ब्लैकमेलिंग समेत कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, ये मामला 2016 का है।
मुझे कभी-कभी लगता है कि आज की फिल्मों में जैसे दु:ख का कोई वजूद ही नहीं रह गया
नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ रिलीज से पहले ही ग्लोबल स्तर पर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। फिल्म को भारत में करीब 9 हजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 हजार स्क्रीन्स पर रिलीज करने की योजना है। यह किसी भारतीय फिल्म की अब तक की सबसे बड़ी ग्लोबल थिएट्रिकल रिलीज होगी।
अगले सीजन से खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली की व्यवस्था
लाड़ली बहना योजना की राशि जल्द ही जारी होगी
राज्य सरकार प्रदेश में लगभग 80 हजार पदों पर भर्ती करा रही हैं
अधिकारी-कर्मचारी प्रत्येक शुक्रवार को जनता के बीच जाकर करेंगे कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजगढ़ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर लगाया तिरंगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में टी.टी. नगर स्टेडियम से विशाल तिरंगा के साथ आरंभ हुई तिरंगा यात्रा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मोटरसाइकिल पर देख विद्यार्थी हुए आल्हादित
डॉ. यादव की फोटो लेने के लिए छात्र-छात्राओं के बीच लगी होड़
प्रदेशवासियों से अपने-अपने घरों पर तिरंगा लगाने का किया आहवान
प्रदेश में उत्साह और उमंग के साथ आरंभ हुई हर घर तिरंगा अभियान की गतिविधियां
भोपाल को कोलकाता और पटना से मिली एयर कनेक्टिविटी
प्रदेश में बनाए जाएंगे 10 नए एयरपोर्ट
अगले दस साल में देश में 100 नए एयरपोर्ट बनाएंगे : केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री नायडू
मध्यप्रदेश में जल्द ही बनेंगे पांच नए एयरपोर्ट्स, सबसे पहले सिंगरौली में बनेगा एयरपोर्ट
बीते तीन साल में मध्यप्रदेश को मिले तीन नए एयरपोर्ट, दो नए एयरपोर्ट का निर्माण जारी
दो साल में ही प्रदेश में दस से अधिक रूट पर प्रारंभ हुईं हवाई सेवा
मध्यप्रदेश के हवाई नेटवर्क को मिले नए पंख, चार नई सीधी उड़ानों का हुआ शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री नायडू ने चार सीधी हवाई सेवाओं को दिखाई हरी झंडी
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल भोपाल रीवा फ्लाईट में सवार होकर रीवा गए
केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू बिलासपुर, उपमुख्यमंत्री श्री अरूण साव दुर्ग और श्री विजय शर्मा बस्तर में फहराएंगे ध्वज
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव जिला मुख्यालय में करेंगे ध्वजारोहण
रायपुर, अगस्त 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आगामी 15 अगस्त, को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। वहीं मुख्यालय जिला बिलासपुर में केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, दुर्ग में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा बस्तर में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सरगुजा में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, महासमुंद में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कबीरधाम में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहपण करेंगे। इसी प्रकार रायगढ़ में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, कांकेर में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, जशपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, बालोद में श्री स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, बलौदाबाजार में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद श्री विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सांसद श्री संतोष पांडेय ध्वजारोहण करेंगे।
इसी प्रकार कोंडागांव में सांसद श्री भोजराज नाग, बलरामपुर में सांसद श्री चिंतामणि महाराज, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद श्री राधेश्याम राठिया, गरियाबंद में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सक्ती में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद श्री महेश कश्यप, सुकमा में राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ध्वजारोहण करेंगे।
जिला कोरबा में विधायक श्री अमर अग्रवाल, धमतरी में विधायक श्री अजय चंद्राकर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विधायक श्री धरमजीत सिंह, मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, कोरिया में विधायक श्री भैय्या लाल राजवाड़े और नारायणपुर जिला मुख्यालय में विधायक सुश्री लता उसेंडी स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर समस्त मुख्य अतिथि जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai Speaks to Assam Chief Minister Shri Himanta Biswa Sarma, Assures of Solidarity with People Amid Crisis
Raipur, August , 2026/ Amid the severe situation caused by floods in Assam, Chief Minister of Chhattisgarh Shri Vishnu Deo Sai has decided to provide ₹ 5 crore in assistance from the State Government to support people affected by the disaster. The financial assistance will contribute to the ongoing relief and rehabilitation efforts in Assam.
Chief Minister Shri Sai today spoke over the telephone with Assam Chief Minister Shri Himanta Biswa Sarma and took stock of the situation arising from the floods in the State. Expressing his deep concern for the families affected by the floods, Shri Sai said that in this difficult hour of natural calamity, the people of Chhattisgarh stand in complete solidarity with their brothers and sisters in Assam.
Reaffirming Chhattisgarh’s commitment to extending support during the crisis, Shri Sai said the financial support reflects the State’s spirit of humanitarian concern and inter-State cooperation and will help strengthen ongoing relief and rehabilitation efforts for the flood-affected people of Assam.