मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश (9785)

प्रधानमंत्री मोदी ने 6 मई को ग्वालियर में कहा था- कांग्रेस न्याय योजना के नाम से फॉर्म भरवा रही
भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के आदर्शनगर में सामने आया मामला
भोपाल. आम चुनाव के बीच ही कांग्रेस की न्याय योजना के नाम पर गोविंदपुरा विधानसभा के आदर्श नगर में लोगों की रसीदें बनवाने का काम शुरू कर दिया गया। बुधवार को यहां के लोगों ने भाजपा पार्षद संजय वर्मा को जानकारी दी तो उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी सुदाम पी खाडे को सूचित किया। मौके पर प्रशासन की टीम पहुंची तो लोग भाग निकले। इससे पहले 6 मई को ग्वालियर में इस तरह के मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगाह भी किया था।
बताया गया कि न्याय योजना के फॉर्म के लिए एक हजार रसीदें छपवाई गई हैं। इसमें नाम, पिता और पति का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर लिखा है। कलेक्टर ने शिकायत की जांच के लिए एसडीएम एमपी नगर राजेश गुप्ता को निर्देश दिए थे। एसडीएम ने एसएसटी को मौके पर भेजा, जहां कोई नहीं मिला। हालांकि टीम को लोगों से भरवाई जा रही रसीदें मिली हैं।
स्थानीय रहवासियों ने जांच टीम को बताया कि कुछ लोग कॉले रंग की स्कॉर्पियों से आए थे और रसीदें भरवा रहे थे। एसडीएम गुप्ता ने बताया कि गुरुवार पूरे मामले की रिपोर्ट कलेक्टर के पास पेश की जाएगी। आगे क्या कार्रवाई होना है। इसके बाद तय होगा।
प्रधानमंत्री ने किया था आगाह: 6 मई को ग्वालियर में प्रधानमंत्री मोदी ग्वालियर में आयोजित सभा में इस तरह के फॉर्म कांग्रेस द्वारा भरवाए जाने की बात कही थी। मोदी ने कहा था कि राजस्थान और गुजरात में कांग्रेस के लोग फॉर्म भरवा रहे हैं, वे दावे के साथ कह रहे हैं कि कांग्रेस मध्यप्रदेश में भी इस तरह के फॉर्म जरूर भरवा रही होगी। बुधवार को भोपाल में मामला सामने आ गया।

कोर्ट ने कहा-ऐसे मामलों में समाज की भी यही अपेक्षा है कि आरोपी को अधिकतम सजा दी जाए
643 दिन में ट्रायल हुई पूरी, डीएनए समेत अन्य रिपोर्ट से हुई थी आरोपी की पहचान
ग्वालियर। 8 साल की चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या करने वाले मनोज प्रजापति को सत्र न्यायालय ने दोहरी फांसी की सजा सुनाई। दशम अपर सत्र न्यायाधीश अशोक शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय से समाज की भी यही अपेक्षा है कि जघन्य और घृणित अपराधों में अधिकतम दंड दिया जाए।
न्यायालय ने इस मामले को विरलतम से विरल मानते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 302 व धारा 376 (क) में फांसी की सजा सुनाई, साथ ही धारा 366 में 10 साल के सश्रम कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 201 में सात साल के कारावास और 2000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। 643 दिन में केस की ट्रायल पूरी हुई। यहां बता दें कि 10 माह के भीतर ये दूसरा मामला है, जब किसी आरोपी को दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोहरी फांसी की सजा सुनाई गई। इससे पहले जुलाई 2018 में 6 वर्षीय परी के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में जितेंद्र कुशवाह को दोहरी फांसी की सजा सुनाई गई थी।
नाक के पास चोट के निशान से हुआ खुलासा : जिला अभियोजन अधिकारी अब्दुल नसीम ने बताया कि घटना के बाद जब पुलिस ने आरोपी से पूछा कि उसकी नाक के पास चोट कैसे लगी है, तो वह सकपका गया। बताया कि गिर गया था, इसलिए चोट लग गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने जुर्म कबूल कर लिया। बाद में घटना स्थल से आरोपी की शर्ट का बटन भी बरामद किया गया। आरोपी ने बताया कि जब उसकी बहन स्कूल से लौट रही थी, तब उसने 10 रुपए का लालच दिया और पास ही में रामप्रकाश के खाली पाटोर में ले गया। यहां पहले उसने दुष्कर्म किया, फिर गला घोंटा और फिर पत्थर से हमला कर सिर फोड़ दिया।
ठंडे दिमाग से घटना को अंजाम दिया: अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने बहन के साथ इस घटना को अंजाम देकर रिश्तों को तार-तार किया। अपराध करने के बाद बिना किसी डर के वह चाचा व अन्य परिजनों के साथ मृतका को तलाशने का नाटक करता रहा, जो यह दर्शाता है कि उसे न तो अपने किए गए कृत्य का कोई पछतावा था, न ही मन और मस्तिष्क पर इतने गंभीर अपराध का कोई प्रभाव पड़ा था। आरोपी ने बेहद ठंडे दिमाग से गंभीर कृत्य को अंजाम दिया जिससे आस-पास के क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ समाज की आत्मा कांप गई। इसके चलते ही गांव वालों ने नयागांव तिराहे पर चक्काजाम कर जन आंदोलन किया था।
खून, बाल, कपड़े के नमूने की रिपोर्ट से हुई पुष्टि : अभियोजन पक्ष ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए घटनास्थल पर मिले सफेद बोरे को जब्त किया, जिस पर खून के धब्बे और बाल लगे मिले थे। पास ही में शर्ट का धागा और बटन भी पड़ा मिला था। इन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया, जिसमें खून और बाल के नमूने का आरोपी के नमूनों से मिलान हुआ।
क्या है मामला
4 जुलाई 2017 को पनिहार निवासी बच्ची स्कूल गई। देर शाम जब वह घर नहीं लौटी तो पिता ने उसके स्कूल जाकर देखा, जहां उसका बैग और बोतल रखी मिली।
काफी ढूंढने के बाद भी जब नहीं मिली तो देर रात पुलिस थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
5 जुलाई को सुबह 6 बजे नाबालिग बच्ची की लाश खंडहर में मिली।
6 जुलाई को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी बेलदारी का काम करता है।

शिवपुरी। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से अपराध बढ़े हैं, जबकि उत्तरप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से अपराध कम हुए हैं।
आदित्यनाथ ने कल देर शाम मध्यप्रदेश के गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी के पी यादव के पक्ष में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ये बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
उन्होंने कहा कि जहां-जहां जब भी कांग्रेस की सरकार बनती है तब अपराध बढ़ते हैं। यह सब वोटों की सांठगांठ की राजनीति के कारण होता है, जबकि भाजपा की सरकार जहां जहां बनती है वहां वहां जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करती है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, भ्रष्टाचार, अलगाववाद मुक्त एवं संगठित विकसित राष्ट्र के लिए एक बार फिर से केंद्र में मोदी सरकार लाना जरूरी है।

जवाब में साधु-संतों ने भी लगाए राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे
दिग्विजय के समर्थन में जुटे थे 1 हजार से अधिक साधु-संत
भोपाल. कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में बुधवार सुबह रोड शो कर रहे साधु-संतों के सामने चौक बाजार में कुछ लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए। इसका जवाब साधुओं ने भी राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाकर दिया। बस स्टैंड तक निकले रोड शो के दौरान साधु-संत कांग्रेस का झंडा थामे चले। बस स्टैंड पहुंचकर रोड शो समाप्त हुआ और साधु-संत उज्जैन के लिए रवाना हो गए।
दिग्विजय सिंह की जीत के लिए अनुष्ठान करने सोमवार दोपहर में करीब 1500 साधु-संत भोपाल आए थे। उन्होंने मंगलवार को सैफिया कॉलेज मैदान पर हठयोग किया था। बुधवार को बाबा की अगुवाई में साधु-संतों ने रोड शो किया। इस रोड शो में पहुंचे साधुओं ने कांग्रेस का झंडा थामा हुआ था। एक तरफ जहां साधु-संत कांग्रेस का झंडा थामकर राहुल गांधी के नाम के नारे लगाते हुए निकले, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग मोदी-मोदी के नारे लगाते नजर आए।

पुराने शहर में रोड शो के दौरान रास्ते में सभी प्रकार के आम वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा
भोपाल. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बुधवार शाम 6 बजे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के समर्थन में रोड शो करेंगे। शाह का रोड शो पुराने शहर के मुख्य इलाकों में करीब ढाई किलोमीटर का होगा। शहर के भवानी चौक से रोड शो की शुरुआत होगी, जो सुभाष चौक, लोहा बाजार, धोड़ा नक्कास होते हुए बस स्टैंड चौराहा तक तीन घंटे में पूरा होगा। यातायात पुलिस ने शहर का ट्रैफिक प्लान बनाया है। रोड शो के दौरान इस रास्ते पर सभी प्रकार के आम वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।
भोपाल हॉटशीट: प्रचार के लिए आ रहे दिग्गज
भोपाल में अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस और भाजपा पूरी ताकत लगा रहे हैं। दोनों दलों की ओर से कई बड़े चेहरे प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, भोपाल सीट पर भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का ऐलान देरी से हुआ। इसके अलावा, विवादित बयान के चलते प्रचार पर भी तीन दिन का बैन लगा। यहां भाजपा प्रचार के लिए दिग्गजों पर ज्यादा भरोसा जता रही है।
शिवराज, गडकरी और उमा कर चुकी प्रचार, याेगी और निर्मला पर विचार
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां कई सभाएं कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रबुद्धजनों से चर्चा और केंद्रीय मंत्री उमाभारती भी प्रचार कर चुकी हैं। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के भी यहां प्रचार के लिए यहां आने की संभावना है।
ये है प्लान
ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें पुराने भोपाल के रास्तों से निकलने पर बचने को कहा है। यहां रोड शो के दौरान सभी आमवाहन प्रतिबंधित रहेंगे।
लालघाटी चौराहे से सभी प्रकार की बड़ी बसें और वाहन रॉयल मार्केट की ओर न जाकर वीआईपी रोड से होकर रेतघाट के रास्ते आ-जा सकेंगे।
इसी प्रकार रेतघाट से मोती मस्जिद की ओर कोई भी बस एवं बड़े वाहन नहीं जा सकेंगे।
भवानी चौक पर कार्यक्रम के दौरान अन्य चार पहिया एवं दो पहिया वाहनों को जरूरत के अनुसार परिवर्तित मार्ग पर चलाया जाएगा।
एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए मार्ग पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होगा।
रोड शो के घोड़ा नक्कास से बस स्टैंड की ओर प्रस्थान के दौरान लगभग शाम 7 बजे से हमीदिया मार्ग पर अल्पना तिराहा से बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज से बस स्टैंड, हनुमानगंज समानांतर मार्ग से बस स्टैंड की ओर सभी तरह के वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा।
हमीदिया रोड पर ट्रैफिक के डायवर्सन के समय भोपाल टॉकीज से सिंधी कॉलोनी, कबाड़खाना, अग्रवाल धर्मशाला, पुट्ठा मिल रोड, समानांतर मार्ग और अल्पना तिराहा मार्ग आम नागरिकों के लिए दोनों ओर से आने जाने के लिए उपलब्ध रहेगा।

कम्प्यूटर बाबा शिवराज सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री थे, उपेक्षा का आरोप लगाकर इस्तीफा दिया था
भोपाल लोकसभा सीट पर दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा मैदान में, वोटिंग 12 मई को
कम्प्यूटर बाबा ने कहा- दिग्विजय की जीत तय, धर्म की जय होगी और अधर्म का नाश होगा
भोपाल. भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में कम्प्यूटर बाबा ने हठ योग किया और भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जीत का आशीर्वाद दिया।  प्रदेशभर से आए करीब 1000 साधुओं ने न्यू सैफिया कॉलेज स्थित मैदान पर धूनी रमाई। कम्प्यूटर बाबा का आशीर्वाद लेने दिग्विजय सिंह पत्नी के साथ पहुंचे। बाबा ने उन्हें हवन-पूजन और यज्ञ कराकर जीत का आशीर्वाद दिया। नामदेव शास्त्री उर्फ कम्प्यूटर बाबा ने कहा- धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। दिग्विजय के साथ पूरा संत समाज जुड़ चुका है। अब उनकी जीत तय है।
शिवराज सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री थे बाबा
कम्प्यूटर बाबा शिवराज सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री थे। पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में उन्होंने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। उन्हाेंने सरकार द्वारा गौ मंत्रालय बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए थे। साथ ही अलग नर्मदा मंत्रालय बनाने की मांग की थी।
कम्प्यूटर बाबा चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर कर चुके थे
कम्प्यूटर बाबा कई बार चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। बाबा ने हाल ही में भाजपा के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी जाहिर की थी, लेकिन पार्टी की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। 2014 में भी बाबा ने आम आदमी पार्टी या भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी।

देवेंद्र फडणवीस इंदौर में भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी के समर्थन में प्रचार करने आए थे
उज्जैन. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मंगलवार काे महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा महाकाल का अभिषेक किया और आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बाबा महाकाल से इस वर्ष महाराष्ट्र समेत देशभर में अच्छी बारिश की कामना की है। बाबा से देश में समृद्ध सरकार बनने के साथ ही खुशहाली कायम रहे, यही प्रार्थना की।
शिंदे, पवार और दिग्विजय ने वाेट बैंक की राजनीति के लिए दिया था हिंदू आतंकवाद नाम : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इंदाैर में मीडिया से चर्चा में कहा कि मालेगांव और समझाैता ब्लास्ट के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने वाेट बैंक की राजनीति के चलते हिंदू आतंकवाद नाम दिया था। हकीकत यह है कि आतंक का काेई धर्म नहीं हाेता, लेकिन वाेट बैंक की राजनीति के चलते साजिश के तहत यह नाम दिया गया था। उन्हाेंने कहा 2014 के मुकाबले इस बार भाजपा और ज्यादा सीटें जीतेगी।
साध्वी प्रज्ञा काे भाेपाल से उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि यह फैसला केंद्रीय नेतृत्व ने बेहद साेच-समझकर लिया है। भाजपा में संसदीय बाेर्ड ही इस तरह के बड़े निर्णय लेता है। वहीं लाेस स्पीकर सुमित्रा महाजन काे लेकर कहा - ताई इंदाैर का गाैरव हैं। उन्हाेंने 30 साल इस शहर की सेवा की। खूब काम किए। वही काम हमारी जीत का आधार बनेंगे।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने गलत दावे और भ्रामक विज्ञापन करने वाली कंपनियों पर नकेल कसने के लिए उत्पाद के साथ नेचुरल, शुद्ध, पारंपरिक आदि जैसे शब्दों की परिभाषा तय की है। अगर कोई कंपनी गलत दावे और भ्रामक विज्ञापन करती है तो उसे 10 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि 1 जुलाई 2019 से ये नए नियम लागू कर दिए जाएंगे।
 
बताया जा रहा है कि कंपनियां खाद्य पदार्थों को लेकर झूठे दावे करती आ रही हैं। कंपनी के लोक-लुभावन विज्ञापन को देखकर लोग उत्पाद खरीद लेते हैं, लेकिन विज्ञापन में जो बताया जाता है उत्पाद में ग्राहक को वो क्वालिटी नहीं मिलती। इन्हीं लोक-लुभावन विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए एफएसएसएआई पिछले एक साल से काम कर रही है। अब उसने हर तरह के खाद्य पदार्थ के लिए परिभाषा तय कर दी है। किसी भी तरह के खाने के उत्पाद से संबंधित हर कंपनी को इसका पालन करना अनिवार्य होगा। 

एफएसएसएआई की नई परिभाषा

नेचुरल- एफएसएसएआई की परिभाषा में कहा गया है कि अब सिर्फ उन खाद्य पदार्थों के साथ नैचुरल यानी प्राकृतिक शब्द का इस्तेमाल होगा जो सीधे तौर पर पौधे, मिनरल या जानवरों से प्राप्त होंगे। इन खाद्य पदार्थों में किसी तरह की मिलावट नहीं होनी चाहिए।

ओरिजनल- जिन खाद्य पदार्थों के स्रोत की जानकारी आसानी से ग्राहक को मिल सकती है उसी उत्पाद के साथ इस शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा उत्पाद की क्वालिटी और टेस्ट में वर्षों बाद भी कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। 

पारंपरिक- एफएसएसएआई की परिभाषा के अनुसार पारंपरिक उत्पाद बताकर बेचने वाली कंपनियों के लिए 30 साल की समय सीमा निर्धारित की गई है। जिन खाद्य पदार्थों को पारंपरिक कह कर बेचा गया है उसके लिए कंपनी को साबित करना होगा कि पिछले 30 वर्षों से उत्पाद को उसी फार्मूले और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बनाया जा रहा है।

जबलपुर के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह को कमलनाथ सरकार के मंत्री लखन घनघोरिया के साथ एक शादी में नाचना भारी पड़ गया। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। 

भाजपा ने मंत्री से एसपी की नजदीकी के आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से लिखित शिकायत की थी। जिसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीएल कांताराव ने इस मामले में रिपोर्ट भी तलब की थी। एसपी अमित सिंह की जगह निमिष अग्रवाल को जबलपुर एसपी बनाया गया है। जबकि, दीपक शुक्ला को सिंगरौली का एसपी बनाया गया है। 

यह था मामला

21 फरवरी को जबलपुर के एक मैरिज गार्डन में आईपीएस अधिकारी विवेकराज सिंह कुकरेले के भाई विनयराज की शादी थी। आमंत्रण पर जबलपुर एसपी अमित कुमार सिंह विवाह समारोह में पहुंचे थे। वहां मंत्री और अन्य अधिकारियों के साथ उन्होंने डांस किया था। उसी समारोह का वीडियो वायरल किया गया है।

भाजपा ने सीईसी को सौंपा था शिकायती पत्र

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लूणावत की अगुवाई में मंगलवार को भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा था। इस पत्र में लिखा गया था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जबलपुर एसपी अमित सिंह प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया के साथ नाच रहे हैं। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि इस तरह नृत्य करने से मंत्री के साथ एसपी साहब की नजदीकियां दिख रही हैं।

इसके अलावा इस पत्र में 2018 के विधानसभा चुनाल के दौरान प्रशासन द्वारा जबलपुर पूर्व से भाजपा प्रत्याशी और समर्थकों पर झूठे मुकदमें दर्ज करने के भी आरोप लगाए गए। भाजपा ने कहा कि यह कार्य कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव के दौरान लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। भाजपा ने तब एसपी के तबादले की मांग की थी।

आम चुनाव के शंखनाद के साथ ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार मध्य प्रदेश में अधिक से अधिक सीटें जीतने की कवायद तो कर रही है, मगर वह अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से उलझ गई है। किसानों की कर्जमाफी, युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, कर्मचारियों को डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी और अन्य मुद्दों के दम पर चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में विरोधी भाजपा ने घेर लिया है। सोशल मीडिया में कांग्रेस को वायदे न निभाने पर जमकर घेरा जा रहा है और उसे इसका जवाब नहीं सूझ रहा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के दो दिन पहले ही कमलनाथ सरकार को पिछड़ों के लिए आरक्षण का दायरा 14 से 27 प्रतिशत बढ़ाने का अध्यादेश लाना पड़ा, ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके। अपने अनुकूल वातावरण बनाने के लिए कमलनाथ सरकार ने प्रिंट और इलेक्टानिक मीडिया को सिर से पांव तक विज्ञापनों से लाद दिया, बावजूद इसके वह अपने खिलाफ पनपे एंटी इनकंबैंसी फैक्टर को कंट्रोल नहीं कर पा रही है।
10 दिनों में पूरा करना था वादा
 
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के मुताबिक सरकार बनते ही 10 दिनों के भीतर ही किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाना था मगर तीन महीने होने को हैं किसानों का कर्जा माफ नहीं किया जा सका है। सिर्फ कागजी कार्यवाही से किसान खुश नहीं हैं। बता दें कि किसानों को दो लाख रूपए तक कर्जा माफ किया जाना था। अभी तक सिर्फ बैंकों से डिफाल्टर किसानों की सूची ही जारी की गई है और जो किसान सूचियों में स्थान नहीं पा सके उनसे आवेदन भरवाए गए हैं। कई किसानों को कार्यक्रमों के जरिए कर्जमाफी के प्रमाणपत्र दिए तो गए हैं, मगर वास्तविकता इससे एकदम उलट है, क्योंकि कर्जमाफी की राशि किसानों के केसीसी खातों में स्थानांतरित नहीं की गई है। समय पर कर्जमाफी न होने से किसान खफा हैं। राजनीति विश्लेषक मानते हैं कि ये किसान भाजपा के पाले में जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को अत्यधिक नुकसान हो सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश में इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है और उसने प्रदेश स्तर पर धिक्कार दिवस का आयोजन करके कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है। हालांकि कमलनाथ ने किसानों को शांत करने के लिए लोकसभा चुनाव की घोषणा के दिन मोबाइल फोन पर मैसेज करके वादा किया है कि आदर्श आचार संहिता लगने के कारण कर्जमाफी चुनाव के तत्काल बाद की जाएगी, लेकिन कांग्रेस के हाथों से किसानों का बड़ा मुद्दा भाजपा ने एक तरह से लपक ही लिया है।
 
युवा और कर्मचारी भी रूठे
 
कमलनाथ और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं और कर्मचारियों को बेरोजगारी भत्ता और 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देना का वायदा किया था, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यह मुद्दा भी कमलनाथ सरकार के लिए गले की फांस की तरह बन गया है। अभी तक न तो बेरोजगार युवाओं को 4 हजार रूपए बेराजगारी भत्ता दिया गया है और न ही कर्मचारियों को 2 प्रतिशत डीए।
 
पिछड़ों को साधने की कोशिश
 
हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने किसानों की नाराजगी से बचने के लिए पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण की सौगात देकर साधने की कोशिश जरूर की है, लेकिन चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा कम ही मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। जिस तरह से किसानों के साथ कमलनाथ सरकार ने वादाखिलाफी की है उसका खामियाजा उसे भुगतने के लिए तैयार रहना ही होगा और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। मप्र में अभी तक पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है जिसे अब अध्यादेश लाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही मोदी सरकार द्वारा लाए गए गरीब सवर्ण आरक्षण के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण को भी मंजूरी दे गई है, इस पर भी कांग्रेस ने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।
 
ब्यूरोक्रेसी भी नाराज
 
अहम् बात यह भी है कि कमलनाथ सरकार ने जिस तरह से पदारूढ़ होते ही ताबड़तोड़ तबादलों की झड़ी लगा दी है, उससे भी ब्यूरोक्रेसी नाराज देखी जा रही है, जिसका नुकसान कांग्रेस को होगा। अफसरशाही इस बात को लेकर नाराज है कि बदले की भावना से तबादले किए जा रहे हैं। कमलनाथ को लगता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने हर जगह अपने आदमी बैठा रखे थे, जिन्हें चुन-चुनकर स्थानांतरित किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि वे तो सरकार के आदमी हैं, जैसा सरकार चाहेगी वैसा वे काम करेंगे, ऐसे में उनका क्या दोष। नतीजतन, कांग्रेस को तीन महीने के कार्यकाल में ही एंटीइनकंबैंसी का सामना करना पड़ रहा है। ऐन चुनाव के मौके पर और उस पर आदर्श आचार संहिता लग जाने की वजह से वह कोई निर्णय भी नहीं ले पा रही है जिससे वह धर्मसंकट में है कि किसानों व प्रदेश की जनता से किए गए वायदों को किस तरह निभाए।
 
-राजेन्द्र तिवारी

Ads

R.O.NO. 13954/94 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक