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प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

रायपुर,  जुलाई 2026। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में 'वसुंधरा परियोजना' के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1 और ऋण पुस्तिका जैसे भूमि दस्तावेज कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यमों से सुरक्षित व पारदर्शी रूप से नागरिकों को मिल रहे हैं।

​दंतेवाड़ा का सफल मॉडल बना प्रेरणा

​इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए गए मॉडल पर रखी गई है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का विशाल लक्ष्य

​दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

​मजबूत वित्तीय संरचना और चरणबद्ध समयसीमा

​इस विशाल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रूपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

आधुनिकतम तकनीक से लैस और पूरी तरह सुरक्षित

​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी। दस्तावेजों के ऑनलाइन होने से रिकॉर्ड में किसी भी तरह के अवैध बदलाव या छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म होना।

​नागरिकों को मिलेगी दफ्तरों के चक्करों से आजादी

​इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। घर बैठे कुछ ही पलों में जमीन के जरूरी दस्तावेज प्राप्त किया जा सकेगा । नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

कोरबा का मानव-हाथी प्रबंधन मॉडल
प्रकृति और जनसुरक्षा के बीच संतुलन की नई सोच

तकनीक बनी हाथी प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत,गजसंकेत ऐप और रियल टाइम अलर्ट से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

वन संरक्षण के साथ ग्रामीणों की आजीविका को भी संबल

मुआवजा व्यवस्था होगी और तेज, पारदर्शी एवं डिजिटल

कोरबा मॉडल: देश के हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रेरणा

लेख-कमलज्योति, अशोक कुमार चंद्रवंशी
रायपुर,  जुलाई 2026 तकनीक बनी हाथी प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत,गजसंकेत ऐप और रियल टाइम अलर्ट से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

तकनीक बनी हाथी प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत,गजसंकेत ऐप और रियल टाइम अलर्ट से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला आज मानव-हाथी द्वंद प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जहां एक ओर हाथियों के प्राकृतिक आवास और विचरण मार्गों के संरक्षण पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आमजन की सुरक्षा, त्वरित राहत और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और कटघोरा वनमंडल के डीएफओ श्री कुमार निशांत के नेतृत्व में जिला प्रशासन और वन विभाग ने समन्वित प्रयासों का ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी सराहना प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय पहल के रूप में की जा सकती है।

तकनीक बनी हाथी प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत,गजसंकेत ऐप और रियल टाइम अलर्ट से बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

कोरबा जिले का लेमरू हाथी रिजर्व लगभग 1 लाख 99 हजार 548 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कटघोरा, कोरबा, धरमजयगढ़ और सरगुजा वनमंडलों के 11 वन परिक्षेत्र शामिल हैं। इस विशाल क्षेत्र में हाथियों के प्राकृतिक आवास, पारंपरिक विचरण मार्गों तथा संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान कर उनके संरक्षण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीआईएस आधारित योजना, डिजिटल मैपिंग और वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से हाथियों के कॉरिडोर की निगरानी की जा रही है, ताकि हाथियों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित बना रहे और उनका रिहायशी क्षेत्रों की ओर रुख कम हो।

कोरबा मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग है। डीएफओ श्री कुमार निशांत के नेतृत्व में कटघोरा वनमंडल में 24×7 हाथी नियंत्रण केंद्र, टोल-फ्री हेल्पलाइन, थर्मल ड्रोन, गजसंकेत मोबाइल ऐप, सीसीटीवी निगरानी तथा प्रशिक्षित हाथी मित्र दलों के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाथियों की वास्तविक समय की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है, जिससे लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें और संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब आंकड़ों में भी स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। सितंबर 2023 से जून 2026 तक गजसंकेत ऐप पर 1,097 हाथी मूवमेंट एंट्री दर्ज की गई हैं, जबकि इसी अवधि में 2,68,782 से अधिक अलर्ट हाथी प्रभावित गांवों के लोगों तक भेजे गए। यह दर्शाता है कि जिले में सूचना तंत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त और प्रभावी हुआ है।

मानव-हाथी संघर्ष से जुड़े आंकड़े भी सकारात्मक बदलाव की कहानी बयां करते हैं। प्रस्तुतीकरण के अनुसार वर्ष 2020-21 में जहां 9 जनहानि के मामले सामने आए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल 3 रह गई है। इसी प्रकार वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मानव घायल होने के मामले शून्य दर्ज किए गए हैं। यह उपलब्धि समय पर अलर्ट, सतत निगरानी, हाथी मित्र दलों की सक्रियता तथा प्रशासन और वन विभाग के बेहतर समन्वय का परिणाम है।

संपत्ति और फसल क्षति के मामलों में भी सुधार का रुझान देखने को मिला है। वर्ष 2020-21 में 513 मकानों को क्षति पहुंची थी, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 33 रह गई। फसल और संपत्ति नुकसान के ग्राफ भी लगातार सुधार की ओर संकेत करते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने और प्रभावी प्रबंधन के कारण नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका है।

कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में मानव-हाथी द्वंद को केवल नियंत्रण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, हाथी मित्र दलों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई गई है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर निगरानी रखी जा रही है। लोगों को हाथियों के व्यवहार, सुरक्षा उपायों और आपात स्थिति में अपनाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी नियमित रूप से दी जा रही है।

वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। किसान वृक्ष मित्र योजना, लाख उत्पादन, दोना-पत्तल निर्माण, महुआ एवं कोदो प्रसंस्करण, अगरबत्ती निर्माण, सिलाई कार्य और इको-टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इससे वन संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है और वनों पर निर्भरता का स्वरूप अधिक टिकाऊ बन रहा है।

मानव-हाथी द्वंद से प्रभावित लोगों को समय पर राहत उपलब्ध कराना भी जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से जिले में ऑनलाइन मुआवजा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की पहल की जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद जनहानि, पशुहानि, फसल क्षति और संपत्ति नुकसान के प्रकरणों का ऑनलाइन पंजीयन, दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन, आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग तथा समयबद्ध निराकरण संभव होगा। इससे प्रभावित लोगों को मुआवजा राशि पहले की तुलना में अधिक शीघ्र और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकेगी।

कोरबा का यह मॉडल यह साबित करता है कि यदि प्रशासनिक दूरदर्शिता, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक योजना और जनसहभागिता का प्रभावी समन्वय हो, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी जटिल चुनौती का भी सफल समाधान संभव है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और डीएफओ श्री कुमार निशांत के नेतृत्व में विकसित यह मॉडल न केवल हाथियों के संरक्षण और आमजन की सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि संवेदनशील प्रशासन, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के बल पर विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। आने वाले समय में ऑनलाइन मुआवजा प्रणाली, डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित प्रबंधन इस मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाएंगे तथा कोरबा को देश के अग्रणी मानव-हाथी प्रबंधन जिलों में स्थापित करेंगे।

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बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐसा वैभव देखने को मिला : केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह

राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुँचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

रायपुर 30 जुलाई 2026/ बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।

प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।

बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।

उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव - केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।

राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को 'खोड़िया राजा' तथा मिटकी को 'गप्पा देई' के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त श्री डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Veteran Cartoonists to Mentor Young Talent in Jagdalpur, Celebrating Bastar's Culture, Tourism and Development Through Art

Raipur, July 30, 2026/ In a unique initiative to creatively showcase the rich cultural heritage and positive transformation of Bastar, Cartoon Watch, the country's only monthly cartoon magazine, will organise a special cartoon workshop for school students in Jagdalpur on the theme 'Muskurata Bastar' (Smiling Bastar) with the support of the Chhattisgarh Department of Public Relations.

The workshop will train students in the art of cartoons and caricatures while encouraging them to creatively depict Bastar's vibrant culture, tourism and way of life through artistic expression.

Under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, Bastar is emerging as a symbol of development, tourism and cultural resurgence. Renowned for its breathtaking natural beauty, rich tribal traditions and iconic tourist destinations, the region is steadily gaining national and international recognition. Attractions such as the Chitrakote and Tirathgarh waterfalls, Kanger Valley National Park, the world-famous Bastar Dussehra, and several other traditional festivals stand as enduring symbols of Bastar's rich heritage.

Cartoon Watch Editor Shri Tryambak Sharma said the theme 'Muskurata Bastar' has been conceptualised to present these positive facets of Bastar through the creative medium of cartoon art, reflecting the vision of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai for a progressive and culturally vibrant Bastar.

The workshop will feature live demonstrations by noted Delhi-based cartoonist Shri Madhav Joshi and acclaimed Pune caricature artist Shri Shubham Jinde, who will provide hands-on training in creating cartoons and caricatures. Participants will also be introduced to the social relevance, creative possibilities and career opportunities associated with cartoon art.

The initiative is expected to provide a valuable platform for local talent while taking Bastar's positive identity to audiences across the country through the universal language of art. The 'Muskurata Bastar' campaign is envisioned as a creative effort to inspire the younger generation to reconnect with the region's cultural traditions, folk heritage and priceless natural legacy.

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'मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की सकारात्मक तस्वीर को कार्टून कला के माध्यम से मिलेगी नई अभिव्यक्ति

रायपुर, 30 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।
इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट श्री माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।
कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।

Raipur, July , 2026/On the auspicious occasion of Guru Purnima, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai visited Aghor Guru Peeth at village Banora during his Raigarh tour. He offered prayers before the statue of Aghoreshwar Avadhoot Bhagwan Ram Ji and prayed for the happiness, prosperity, and well-being of the people of Chhattisgarh. He also sought blessings and guidance from Pujya Baba Priyadarshi Ram Ji. Finance Minister Shri O. P. Choudhary was also present on the occasion.

Chief Minister Shri Sai said that gurus are the foundation of knowledge, values, and spiritual consciousness in Indian culture. He said that Guru Purnima is an occasion to express reverence, respect, and gratitude towards one's guru. Extending his greetings on the occasion, he wished all the people of the state a happy, prosperous, and auspicious life and conveyed his best wishes to everyone on Guru Purnima.

रिकॉर्ड खाद-बीज और ऋण वितरण से मिली नई रफ्तार

​जिले में कुल 96 समितियां सक्रिय: 370 ग्राम पंचायतों के 653 गांवों तक सीधी पहुँच

​खाद और बीज का रिकॉर्ड वितरण: 29,060 MT उर्वरक और 12,432 क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

​रायपुर, जुलाई 2026/खरीफ सीजन 2026-27 में छत्तीसगढ के धमतरी जिले के किसानों को कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने और शासन की योजनाओं का पारदर्शी लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। किसानों की सुविधा और पहुंच को सुगम बनाने के लिए जिले में 22 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का संचालन शुरू किया गया है। इसके साथ ही अब जिले में कुल 96 सक्रिय समितियां 370 ग्राम पंचायतों के 653 गांवों के किसानों को खाद, बीज, ऋण और फसल बीमा जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध करा रही हैं।

उर्वरक एवं प्रमाणित बीज वितरण में बना नया कीर्तिमान

​जिले में कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 29,060 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1,500 मीट्रिक टन अधिक है। मांग को देखते हुए गत वर्ष से 5,000 मीट्रिक टन अधिक उर्वरक का भंडारण भी सुनिश्चित किया गया है। ​इसी तरह, गुणवत्तायुक्त उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समितियों के माध्यम से 12,432 क्विंटल प्रमाणित बीज बांटे गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1,400 क्विंटल अधिक हैं।

​वित्तीय सहयोग में बड़ी छलांग: 350 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 317 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित

​किसानों को खेती- किसानी के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के मामले में भी धमतरी जिला आगे रहा है। कुल 350 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक 317 करोड़ रुपये का कृषि ऋण बांटा जा चुका है। पिछले वर्ष की इसी अवधि (265 करोड़ रुपये) की तुलना में इस बार किसानों को लगभग 57 करोड़ रुपये अधिक का वित्तीय सहयोग मिला है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन जारी

​प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन जारी है। इसके तहत ​पात्र फसलों में धान (सिंचित/असिंचित), मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी, रागी और मूंगफली शामिल है। किसान अपनी निकटतम प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, बैंक शाखा, सीएससी (CSC), बीमा कंपनी के पोर्टल/ऐप या पटवारी/कृषि अधिकारियों से संपर्क कर बीमा करा सकते हैं।

टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर: 14447

​ जिला प्रशासन धमतरी का स्पष्ट उद्देश्य है कि सहकारी समितियों के विस्तार, खाद-बीज की निर्बाध आपूर्ति, रिकॉर्ड ऋण वितरण और फसल बीमा के जरिए जिले के हर किसान को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जाए।


बच्चों को वितरित होगी साइकिल, गणवेश और किट

​रायपुर, जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ के नवीन शैक्षणिक सत्र का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आगाज करने के उद्देश्य से कल, 30 जुलाई को धमतरी स्थित मराठा मंगल भवन में सुबह 11 बजे जिला स्तरीय ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का गरिमामय आयोजन किया जा रहा है। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें एवं शाला गणवेश (यूनिफॉर्म) वितरित की जाएगी। ​सरस्वती साइकिल योजना के तहत पात्र छात्राओं को आत्मनिर्भरता और सुगम आवागमन के लिए निःशुल्क साइकिलें सौंपी जाएंगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री और धमतरी जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा होंगे।

​वृक्षारोपण से शुरुआत, आत्मीय स्वागत के साथ बटेंगी सामग्री

​प्रवेशोत्सव का शुभारंभ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले वृक्षारोपण अभियान से होगा। इसके बाद स्कूल की चौखट पर कदम रख रहे नवप्रवेशी नन्हें-मुन्नों का तिलक लगाकर और आत्मीय अभिनंदन कर स्वागत किया जाएगा। ​इस दौरान बच्चों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत कई सौगातें दी जाएंगी। इसी तरह विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी सुविधानुसार सहायक उपकरण/सामग्री वितरित होगी।

​प्रतिभाओं का सम्मान, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और ‘न्योता भोज’

​कार्यक्रम में शैक्षणिक, खेलकूद, सांस्कृतिक व अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली जिले की होनहार प्रतिभाओं को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कृत कर सम्मानित किया जाएगा। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम समारोह में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगे।

बच्चों के लिए विशेष रूप न्योता भोज का आयोजन

​बच्चों के लिए विशेष रूप से आयोजित ‘न्योता भोज’ उनके नए स्कूली जीवन को यादगार बनाएगा। इससे बच्चों के भीतर विद्यालय के प्रति अपनत्व, उल्लास और नए आत्मविश्वास का संचार होगा। जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग ने सभी सम्पादकों, जनप्रतिनिधियों, पालकों, शिक्षकों, गणमान्य नागरिकों तथा आम जनता से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर बच्चों का उत्साहवर्धन करें।

​हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने का संकल्प

​शाला प्रवेशोत्सव का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे का गरिमापूर्ण स्वागत करना, समाज में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना तथा स्कूलों में तनावमुक्त व आनंददायी माहौल तैयार करना है। यह आयोजन राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य हर बच्चे के उज्ज्वल एवं स्वर्णिम भविष्य की मजबूत नींव रखना है।

रायपुर,  जुलाई 2026। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ प्रवास के दौरान ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ पहुंचकर अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी की प्रतिमा के दर्शन किए। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की तथा पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति के ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना के आधार हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

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