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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज  मंत्रालय, महानदी भवन में मंत्री परिषद की बैठक प्रारम्भ

 

  •   विष्णु प्रसाद वर्मा 

     सहायक संचालक

रायपुर,  अगस्त 2026 राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण और रजिस्ट्री जैसे कार्य ऑनलाइन और पारदर्शी बनाए गए हैं। इसके मुख्य लाभों में ऑटो म्यूटेशन, मोबाइल ऐप से रिकॉर्ड डाउनलोड और डिजिटल भुगतान शामिल हैं। 

          आम जनता के लिए राजस्व विभाग से जुड़े काम हमेशा से पेचीदा और समय लेने वाले माने जाते रहे हैं। जमीन के नामांतरण से लेकर कोर्ट के चक्कर काटने और नामांतरण-सीमांकन में होने वाली देरी से आम नागरिक अक्सर परेशान रहता था। इसी प्रशासनिक जटिलता को समाप्त कर प्रक्रिया को पारदर्शी, सुलभ और जन-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में कई युगांतरकारी और जनोन्मुख संशोधन किए हैं। यह सुधार न केवल आधुनिक दौर की डिजिटल जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि राज्य में सुशासन की नींव को और अधिक मजबूत करते हैं।

            इन संशोधनों की सबसे बड़ी खासियत राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण है। अब धारा 33 के तहत नोटिस और आधिकारिक सूचना प्रेषित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानूनी मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही, धारा 30 में संशोधन करते हुए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण को अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़ी विवादित स्थितियों से निपटने के लिए धारा 107 के तहत अधिसूचित जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को अधिमान्यता दी गई है, जिससे जमीन से जुड़े सटीक आंकड़े और सीमांकन पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगे।

             जमीनों के अनावश्यक विखंडन और भू-अर्जन के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। धारा 70 में किए गए संशोधन के अनुसार अब 05 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक लगा दी गई है, ताकि कृषि जोत का आकार व्यावहारिक बना रहे। वहीं धारा 165, 172 और 178 में बदलाव कर यह सुनिश्चित किया गया है कि भू-अर्जन (Land Acquisition) की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना या आशय पत्र जारी होते ही संबंधित भूमि के अंतरण, व्यपवर्तन (Divergent) और खाता विभाजन पर तुरंत रोक लग जाए, जिससे किसी भी तरह के अवैध लाभ या धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।

             आम जनता को सबसे बड़ी राहत जमीन के नामांतरण (Mutation) और पारिवारिक उत्तराधिकार के नियमों में मिली है। धारा 110 में किए गए क्रांतिकारी संशोधनों के तहत अब 'स्वतः नामांतरण' (Auto e-Mutation) की व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग को ही नामांतरण का वैधानिक अधिकार दे दिया गया है। यानी अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया भी सुगम हो जाएगी। इसके अलावा, राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध विधिक वारिसानों के पक्ष में स्वतः ई-नामांतरण का प्रावधान किया गया है। अब भूमि स्वामी को यह अधिकार भी मिल गया है कि वह अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध करा सके, जिससे भावी पीढ़ी को पारिवारिक विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकेगी।

              संक्षेप में कहें तो, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए ये संशोधन केवल नियमों का बदलाव भर नहीं हैं, बल्कि यह आम जनता के समय, धन और मानसिक तनाव को बचाते हुए एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और जन-हितैषी राजस्व व्यवस्था की स्थापना की दिशा में राज्य सरकार का एक मील का पत्थर है।

संत रविदास ने समरसता, समानता और भक्ति का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर आयोजित कलश वंदन महाअभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय

संत रविदास जयंती पर अगले वर्ष माघी पूर्णिमा को रहेगा सार्वजनिक अवकाश, मांस एवं मदिरा बिक्री होगी प्रतिबंधित

संत रविदास के नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार और नवा रायपुर में प्रमुख चौक का होगा नामकरण

जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से आए पवित्र कलश का किया वंदन, जिलों के प्रतिनिधियों को सौंपे कलश, गांव-गांव तक अभियान के लिए वाहनों को दिखाई हरी झंडी

रायपुर  अगस्त 2026/ संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर संत रविदास को नमन किया तथा इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

संत रविदास के सम्मान में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रम में अगले वर्ष 2027 में उनकी जयंती (माघी पूर्णिमा) को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन प्रदेशभर में मांस एवं मदिरा का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदान किए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश -
"ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।" - का अंकन कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।

जब-जब समाज में अन्याय बढ़ा, तब-तब संतों और महापुरुषों ने नई दिशा दी

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार, ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा प्रदान की। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने समाज को नई चेतना प्रदान की।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने संत रविदास से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया और कहा कि उनकी अटूट भक्ति और तपस्या के प्रभाव से कठौती में गंगा प्रकट होने की घटना केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से ईश्वर की प्राप्ति संभव है।

 

'किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम' विषयक संवाद कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों का किया सम्मान

धान की रिकॉर्ड खरीदी, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर, सिंचाई परियोजनाओं को नई गति और कृषि आधारित रोजगार पर दिया जोर

रायपुर  अगस्त 2026/खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का आधार है। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि और किसानों की समृद्धि को प्राथमिकता देते हुए खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग, कृषि यंत्रीकरण तथा कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम' विषयक संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट खेती, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

किसान परिवार से जुड़ाव ने खेती की चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया - मुख्यमंत्री श्री साय

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनका जीवन स्वयं खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। किसान परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने बचपन से खेतों में काम किया और खेती की कठिनाइयों तथा किसानों की आवश्यकताओं को निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान भी वे नियमित रूप से अपने गांव और खेत की जानकारी लेते थे तथा गांव पहुंचने पर खेत अवश्य जाते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। पहले किसान पूंजी के अभाव में साहूकारों या कर्ज पर निर्भर रहते थे, जबकि आज किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड योजना प्रारंभ किए जाने को किसानों के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खेती करना पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों से किए गए वादों को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी कर रही है। इसके साथ ही पूर्व में लंबित दो वर्ष के बोनस का भी भुगतान किसानों को किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ विपणन सीजन में राज्य के लगभग 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है और राज्य सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, उत्पादन लागत कम करना तथा खेती के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराना है ताकि खेती लाभ का व्यवसाय बन सके।

उन्होंने कहा कि केवल धान आधारित खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को विविध फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।

 

Chief Minister Participates in Kalash Vandan Maha Abhiyan Marking the 650th Birth Anniversary Year of Saint Guru Ravidas


Raipur, August , 2026/

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai participated in the Kalash Vandan Maha Abhiyan organised at Deendayal Upadhyay Auditorium, Raipur, on the occasion of the 650th birth anniversary year of Saint Guru Ravidas Maharaj. On the occasion, he announced that Saint Ravidas Jayanti (Maghi Purnima) will be observed as a public holiday across Chhattisgarh from 2027 and that the sale of meat and liquor will remain prohibited across the state on the day.

The Chief Minister also announced that a Rajya Alankaran Award in the name of Saint Guru Ravidas would be instituted among the honours conferred on Chhattisgarh State Foundation Day. He further announced that a major junction in Nava Raipur would be named after the saint. He added that, in consultation with the Speaker of the Chhattisgarh Legislative Assembly, efforts would be made to inscribe Saint Ravidas' famous message—

"Aisa Chahun Raj Main, Jahan Mile Saban Ko Ann.
Chhot-Bado Sab Sam Basain, Ravidas Rahain Prasann."

—within the Assembly premises.

Addressing the gathering, Shri Sai said that the life of Saint Shiromani Guru Ravidas Maharaj is an eternal message of social harmony, equality, devotion, dignity of labour, and social justice. He said the saint's teachings remain as relevant today as they were centuries ago, inspiring society to rise above discrimination, untouchability, and social divisions while embracing humanity, equal rights, and spiritual consciousness. He said these ideals form the foundation of a developed, harmonious, and strong India.

The Chief Minister said that India has always been the sacred land of saints and sages who guided society whenever it faced injustice, discrimination, oppression, and social inequality. He said Saint Ravidas courageously opposed social evils and inspired people through his message of equality, devotion, and righteous conduct. Referring to the saint's famous saying, "Man Changa To Kathauti Mein Ganga," he said it continues to inspire people towards inner purity and spirituality.

Highlighting the significance of the campaign, Shri Sai reverentially carried a sacred Kalash containing holy soil and water brought from Seer Govardhanpur, Varanasi, the birthplace of Saint Ravidas, and offered it before the saint's portrait after traditional prayers. He described the Kalash as a symbol of social harmony and national unity.

The Chief Minister said that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, the country is progressing with the vision of "Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas, Sabka Prayas." He added that the Prime Minister's guiding principle of "Vikas Bhi, Virasat Bhi" reflects the commitment to preserving India's cultural and spiritual heritage while pursuing development.

He said that the sacred soil and water brought from the birthplace of Saint Ravidas are being carried to monasteries, temples, and centres of faith across the country, transforming the Kalash Vandan Abhiyan into a national movement for social harmony. Appreciating the 11-member delegation led by Dr. Sanam Jangde that brought the sacred Kalash from Seer Govardhanpur, he said the initiative would play a significant role in taking Saint Ravidas' teachings to every section of society.

 

Chief Minister Honours Progressive Farmers at Dialogue on 'Kisan Aur Kisani – Protsahan Aur Parinam'

Raipur, August , 2026/

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said that agriculture is not merely a means of livelihood but the foundation of Chhattisgarh's culture, economy, and social life. He said the State Government is committed to making farming more profitable, modern, and sustainable by expanding irrigation facilities, promoting crop diversification, encouraging modern agricultural technologies and mechanisation, and supporting agriculture-based enterprises to increase farmers' income. The Chief Minister made these remarks while addressing the dialogue programme on "Kisan Aur Kisani – Protsahan Aur Parinam" in Raipur, where he also honoured progressive farmers from different districts for excellence in farming, innovation, and their contribution to the agricultural sector.

Addressing the gathering, Shri Sai said that growing up in a farming family gave him first-hand experience of the challenges faced by farmers. He said that even while serving as a Union Minister of State, he remained closely connected with agriculture and regularly visited his village and fields.

The Chief Minister said that after assuming office, the State Government fulfilled its promises to farmers by ensuring better returns for their produce. He said Chhattisgarh is procuring paddy at Rs. 3,100 per quintal, with procurement up to 21 quintals per acre, and has also paid the pending paddy bonus of the previous two years. During the last Kharif marketing season, the State procured a record 141 lakh metric tonnes of paddy from nearly 25 lakh farmers, strengthening the rural economy.

He said the government is working in line with Prime Minister Shri Narendra Modi's vision of doubling farmers' income by ensuring remunerative prices, reducing production costs, and making essential agricultural resources available. He added that farmers are being encouraged to diversify beyond paddy cultivation, and suitable amendments have been made to the Krishak Unnati Yojana to support this objective.

To promote crop diversification, Shri Sai said that farmers cultivating pulses, oilseeds, maize, kodo, and kutki instead of paddy will receive Rs. 15,000 per acre as input assistance. He added that horticulture, vegetable cultivation, fisheries, animal husbandry, dairy farming, and minor forest produce-based livelihoods are also being promoted to create multiple sources of income for farmers.

Emphasising the importance of irrigation, the Chief Minister said the State Government is implementing new irrigation projects, barrages, anicuts, and canal expansion works to bring more agricultural land under irrigation. He said solar irrigation pumps are being provided to farmers, while drip and sprinkler irrigation systems and subsidies for modern agricultural machinery are being promoted to encourage mechanisation.

He announced that barrages worth nearly Rs. 2,000 crore will be constructed at Matnar and Deurgaon on the Indravati River in Bastar, benefiting thousands of farmers. Administrative approval of nearly Rs. 3,000 crore has also been granted for the Sikasar–Kodar Canal Linking Project, while nearly Rs. 2,800 crore has been sanctioned for the reconstruction and modernisation of various irrigation projects across the state.

 

15 अक्टूबर तक दे सकेंगे राय

रायपुर,04 अगस्त 2026/

​ छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों को संविधान के एक ही दायरे में लाने के उद्देश्य से गठित विशेष समिति ने अब आम जनता और विभिन्न संगठनों से उनके सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। राज्य के नागरिक यह बता सकते हैं कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।
​राज्य सरकार द्वारा गठित यह 5-सदस्यीय समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता और उसकी रूपरेखा का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही समिति व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों व व्यवस्थाओं की भी व्यापक समीक्षा करेगी।
​समिति ने शासकीय, गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार, राय और अभ्यावेदन अनिवार्य रूप से जमा करा दें।

​UCC लागू करने वाला देश का 5वां राज्य बनेगा छत्तीसगढ़

​ यूसीसी लागू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड के अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जा चुका है।
​ राज्य में यूसीसी के क्रियान्वयन व सुझावों के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
राज्य के नागरिक ​ और संगठन 15 अक्टूबर तक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं:

​ई-मेल (E-mail): *This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

​वेब पोर्टल (Web Portal):
[https://ucc.cgstate.gov.in/](https://ucc.cgstate.gov.in/)

​डाक द्वारा (Postal Address):

​कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति,न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-201,रायपुर, छत्तीसगढ़ - 492001

​छत्तीसगढ़ी कला को मिलेगी ग्लोबल पहचान: 21 अगस्त को धमतरी में सजेगा ‘जनजातीय कारीगर एम्पैनलमेंट मेला’

​ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन की पहल: वोकल फॉर लोकल के तहत स्थानीय हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार

रायपुर,04 अगस्त 2026/

जनजातीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और वनोपज संग्राहकों की किस्मत बदलने और उनकी पारंपरिक कला को वैश्विक मंच देने के उद्देश्य से धमतरी जिले में आगामी 21 अगस्त 2026 को विशाल ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्ध (एम्पैनलमेंट) मेला’ आयोजित होने जा रहा है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन संचालित ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन धमतरी के संयुक्त तत्वावधान में यह विशेष आयोजन किया जा रहा है।
​इस मेले का मुख्य उद्देश्य जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी जनजातीय प्रतिभाओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे ट्राइफेड नेटवर्क से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए बड़े बाजार उपलब्ध कराना है।
ट्राइफेड से जुड़ने पर पंजीकृत कारीगरों के उत्पाद देशभर में फैले ट्राइफेड के विशाल 'Tribes India' आउटलेट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इसी तरह कारीगरों को देश के बड़े व्यापार मेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने हुनर का प्रदर्शन करने का सीधा मौका मिलेगा। ट्राइफेड के विशेषज्ञ कारीगरों को उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग का विशेष प्रशिक्षण देंगे, जिससे उन्हें अपने सामान का सही और बेहतर मूल्य मिल सके।
​ ​मेले में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक एवं प्राकृतिक उत्पादों के कारीगर हिस्सा ले सकते हैं। जिसमें हाथ से बने पारंपरिक परिधान व कलाकृतियां,ढोकरा आर्ट, धातु शिल्प, बांस व बेंत के उत्पाद, प्राकृतिक जड़ी-बूटियां, जैविक खाद्य पदार्थ एवं शहद, पारंपरिक जनजातीय पेंटिंग्स एवं मण्मूर्ति कला,पारंपरिक जनजातीय गहने एवं हस्तनिर्मित सजावटी सामान शामिल है।

हुनरमंद उठाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम

​ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिले के सभी जनजातीय उद्यमियों और कारीगरों से इस मेले में बढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम है। हमारा लक्ष्य केवल स्थानीय कला को सहेजना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों की आय में सतत वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

 

एसआईआरडी निमोरा में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, पंचायत प्रतिनिधियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

रायपुर, 04 अगस्त 2026/ विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी जीरामजी) अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी), निमोरा, रायपुर में राज्य के सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के लिए 3 से 5 अगस्त तक तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, उनकी जिम्मेदारियों तथा प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रियाओं से अवगत कराते हुए उनकी क्षमता का विकास करना है।

कार्यशाला में जिला पंचायतों के विभिन्न स्थायी समितियों के सभापतियों भी उपस्थित थे। इस अवसर पर विकसित भारत–जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विजन@2047 के अनुरूप ग्रामीण भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से वीबी जीरामजी अधिनियम, 2025 लागू किया गया है, जिसमें ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार, आजीविका और समग्र विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

125 दिनों के रोजगार की गारंटी और 300 रुपए प्रतिदिन मजदूरी
श्री सिन्हा ने बताया कि अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की गई है। साथ ही मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत किए जाने वाले सभी विकास कार्यों का चयन एवं अनुमोदन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा, जिससे विकास प्रक्रिया में जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

जिला पंचायत सदस्यों को दिए जा रहे व्यवहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दूसरे दिन सरगुजा, रायपुर एवं बस्तर संभाग के जिला पंचायत सदस्यों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया। इस दौरान संयुक्त आयुक्त श्री रामधन श्रीवास, एसआईआरडी के संकाय सदस्य श्री आनंद रघुवंशी तथा अन्य मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभागियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और उनके व्यवहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

ग्रामीण विकास के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित प्रशिक्षण
प्रशिक्षण सत्रों में वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 की अवधारणा एवं उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका एवं जिम्मेदारियां, विकसित ग्राम पंचायत योजना का निर्माण, योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने वाले कार्य, पात्र परिवारों का पंजीयन, ग्रामीण रोजगार कार्ड, निगरानी एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था, शिकायत निवारण प्रणाली, ग्रामीण विकास की अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण, वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक अंकेक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा आजीविका संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सहभागी एवं सतत ग्रामीण विकास को मिलेगी गति
कार्यशाला का उद्देश्य जिला पंचायत प्रतिनिधियों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यवहारिक समझ से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें। इससे ग्राम सभाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी तथा सहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और सतत ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

 

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी

रायपुर, 04 अगस्त 2026/
हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

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