बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई : वन मंत्री श्री केदार कश्यप

रायपुर,  अगस्त 2026/ खस की जड़ों से बनी अनोखी और पर्यावरण-कल अनुकूल राखियां पानी की एक बूंद पड़ते ही अपनी प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल होती हैं, जो त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।

इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि अपनी खुशबू से एक अनोखा एहसास भी कराएंगी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़ी स्थानीय प्रतिभा और हुनर को बढ़ावा देते हुए खस से विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन राखियों की खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ने, नमी आने या गीली होने पर इनमें से मनमोहक खुशबू निकलती है। यानी अब भाइयों की कलाई महकेगी बहन के प्यार से।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से परंपरा और नवाचार का संगम

वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं द्वारा 1000 तैयार की गई है। ये राखियां परंपरागत भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का सुंदर उदाहरण हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की वन संपदा, स्थानीय हुनर और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशबू एक साथ महसूस की जा सकती है।

पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी राखी

खस से बनी इन राखियों की सबसे खास विशेषता उनकी प्राकृतिक खुशबू है। सामान्य राखियां जहां केवल कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, वहीं ये विशेष राखियां नमी के संपर्क में आने पर अपनी सुगंध बिखेरती हैं। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठती खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।

वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह

इन राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

राखी में रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू

इस नवाचार के संदर्भ में वन मंत्री श्री केदार कश्यप कहते हैं कि सचमुच ! इस रक्षाबंधन में बहनों का प्यार बांधेगा राखी, और महकेगी भाइयों की कलाई। इस बार जब बहन अपने भाई की कलाई पर खस से बनी यह राखी बांधेगी, तो उसके साथ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी बंधेगा। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो भाई को बहन के प्यार और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू एक साथ महसूस होगी।

एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन एवं अन्य व्यवस्थाओं में एकरूपता पर जोर

रायपुर,  अगस्त 2026/ आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई के सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर टीआरटीआई द्वारा प्रकाशित गुमनाम जननायक पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने इस दौरान शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सह स्मारक में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रही सुश्री अंबिका ध्रुव का नगर सैनिक में चयनित होने पर सम्मानित भी किया।

मंत्री श्री नेताम ने एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में नेस्ट्स एवं राज्य सरकार के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले एकलव्य विद्यालयों के पूर्व अतिथि शिक्षकों को पुनः अवसर प्रदान करने के विषय पर भी सहमति बनी।

बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। साथ ही एकलव्य विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी गई। नवंबर 2025 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 466 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों ने 55 स्वर्ण पदक सहित कुल 126 पदक अर्जित किए। मंत्री श्री नेताम ने इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों की सराहना की।

इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, आयुक्त श्री डी राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक मंडल के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा पृथक्करण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करने के दिए निर्देश, स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने कहा

नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने कहा, पयर्टन एवं धार्मिक महत्व- के स्थ*लों में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश

रायपुर.  अगस्त 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के नए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन आज मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की मैराथन बैठक लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), नालंदा परिसर, अधोसरंचना एवं अन्यो विभागीय योजनाओं के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों में लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति, मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन तथा आगामी कार्ययोजना पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

निगम आयुक्तों और सीएमओ को टीम के साथ रोजाना वार्ड भ्रमण के दिए निर्देश

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बैठक में अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना जरूरी है। उन्होंने सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्यर नगर पालिका अधिकारियों को अपर आयुक्तों , उपायुक्तोंव, जोन आयुक्तों एवं अन्यध अधिकारियों के साथ रोजाना वार्डों का भ्रमण कर विभागीय वाट्स-अप ग्रुप में फोटोग्राफस साझा करने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत और पूर्ण आवासों की घटकवार प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आवासों के निर्माण की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों और शेष कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर उपलब्ध कराने तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति पर लगातार निगरानी रखते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

श्री बोरा ने अमृत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की वर्तमान स्थिति, प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की समीक्षा केवल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नहीं होनी चाहिए, अधिकारी नियमित रूप से मौके पर जाकर कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और उससे नागरिकों को मिल रहे लाभों का आकलन करें। उन्होंने निर्माण एवं विकास कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सभी कार्य समय-सीमा में पूरा करने को कहा।

प्रमुख बाजारों की नियमित साफ-सफाई और कचरा निष्पाूदन पर जोर

श्री बोरा ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत संचालित गतिविधियों और कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और नगरीय निकायों में चल रहे स्वच्छता संबंधी कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निकायों में चार डस्ट बिन व्यवस्था के व्यवस्थित क्रियान्वयन, नागरिकों में जागरूकता तथा कचरे के उचित संग्रहण एवं प्रबंधन की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करने और निकायों द्वारा इसकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया।

प्रमुख सचिव ने बाजार क्षेत्रों में नियमित सफाई, समय पर कचरा उठाव, व्यवस्थित कचरा संग्रहण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी नियमित और सतत व्यवस्था विकसित की जाए, जिसका सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने नगरीय निकायों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।

जमीनी स्तर पर तैयारियों को परखा गया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों ने लिया हिस्सा

रायपुर,  अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने और त्वरित, प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला प्रशासन के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।

विभिन्न विभागों और सुरक्षा बलों का दिखा तालमेल

मॉक ड्रिल के दौरान बाक़ायदे बाढ़ की अलग-अलग संभावित परिस्थितियां निर्मित की गईं। इसमें एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सेना, पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं के अलावा राजस्व, जल संसाधन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पशुपालन और दूरसंचार विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय की गति को परखा गया।

पूर्व चेतावनी से लेकर राहत शिविरों तक की कार्यप्रणाली का अभ्यास

इस अभ्यास में बाढ़ की पूर्व चेतावनी जारी करने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों के संचालन, बचाव नौकाओं व संसाधनों की तैनाती और मेडिकल टीमों की व्यवस्था का पूरा रिहर्सल किया गया। जिला स्तर पर त्वरित निर्णय लेने और मैदानी अमले की प्रतिक्रिया क्षमता की समीक्षा की गई।

गैप्स को पहचानकर दूर करने पर जोर

आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (छक्ड।) के अधिकारियों ने रायपुर जिले में अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी स्तर पर सामने आने वाले अंतर (गैप्स)कृजैसे सूचना में देरी या संसाधनों की कमीकृको समय रहते पहचानकर दूर करना है।

राज्य स्तरीय इस टेबल-टॉप और व्यावहारिक मॉक ड्रिल में एनडीएमए नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार श्री रविंद्र गुरुंग, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के डॉ. जीवन कुमार, राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव श्री गजेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न अंतर-विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।

हर-घर जल के लिए कलेक्टर व्यक्तिगत रूचि लें : मुख्य सचिव

पूर्ण योजनाओं को करायें भौतिक सत्यापन

रायपुर,  अगस्त 2026/मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुचांने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है। कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी

विभागीय कार्यों की समीक्षा की, अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन फील्ड में रहने के दिए निर्देश

ठेकेदारों के कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग कर निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित कराने कहा

रायपुर. 20 अगस्त 2026. लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर परिक्षेत्र के विभागीय एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने और सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित निर्माण भवन में आयोजित बैठक में विभागीय अभियंताओं से कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा में पूर्णता विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सड़कों और पुलों के नए प्रस्ताव तैयार करते समय भविष्य की जरूरतों और बढ़ते यातायात को ध्यान में रखने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी और अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव भी बैठक में मौजूद थे।

श्री बंसल ने अधिकारियों को प्रो-एक्टिव होकर काम करने तथा प्राक्कलन से लेकर निविदा की प्रक्रिया तक सभी कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यपालन अभियंताओं को अपने जिले के कलेक्टरों से बेहतर समन्वय रखने को कहा, ताकि निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों तथा कार्यस्थलों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो और काम की गति बनी रहे। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन फील्ड में रहकर निर्माण कार्यों की कड़ी मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों के कार्यों पर लगातार नजर रखने तथा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सड़कों और भवनों के निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की जांच करने को कहा, ताकि मजबूत और टिकाऊ निर्माण हो सके।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ऐसे नए कार्यों जिनकी निविदा हो चुकी है, उन्हें अक्टूबर तक शुरू करने को कहा। उन्होंने काम शुरू होने के बाद उसकी गति और गुणवत्ता दोनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों और पुलों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें साफ-सुथरी, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने बरसात में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और पुलों की तत्काल मरम्मत करने को कहा, ताकि लोगों की आवाजाही बाधित न हो।

श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को एसडीएम से मिलकर विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अधिग्रहित भूमि के नामांतरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने भू-अर्जन के नए और पुराने प्रकरणों के नामांतरण की कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने जमा पद के पूर्ण कार्यों को तत्काल संबंधित विभागों को हैंडओवर करने को कहा।

विभागीय सचिव ने बैठक में विश्रामगृहों और सर्किट-हाउसों के संचालन एवं रखरखाव की भी जानकारी ली। उन्होंने विभाग के भवनों में बेहतर साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ ही पूरे परिसर को व्यवस्थित रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग की उप सचिव सुश्री अंशिका पाण्डेय, छत्तीसगढ़ सड़क एवं अधोसंरचना विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक श्री शशांक पाण्डेय, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री आर.के. रात्रे और श्री जी.एस. मंडावी तथा अधीक्षण अभियंता श्री के.पी. संत सहित बिलासपुर परिक्षेत्र के सभी 9 संभागों के कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।


धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
• विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।
• एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।
• पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।
• कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
• दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
जागरूकता एवं परामर्श सत्र
केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:
• स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।
• ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
• अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।
• अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।
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200 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से हुई सकारात्मक चर्चा

बलौदाबाजार के औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का जल्द होगा विस्तार

रायपुर, 20 अगस्त 2026/ छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। इसी कड़ी में बलौदाबाजार के विशाल सीमेंट, पावर एंड स्टील प्लांटस, सहित अनेक लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र तथा अन्य संस्थानों में दिन-रात पसीना बहाने वाले हजारों मजदूरों की वर्षों पुरानी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा द्वारा एक बड़ी पहल हुई है।
सीमेंट, पावर एवं स्टील फैक्ट्रियों की बहुलता वाले बलौदाबाजार जिले में अब तक गंभीर बीमारियों और हादसों के वक्त श्रमिकों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े जिलों की ओर रुख करना पड़ता था और आपातकालीन स्थितियों में यह दूरी जानलेवा साबित होती थी। इस बड़ी व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की पहल पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से नई दिल्ली में आज चर्चा हुई।

मुलाकात के दौरान बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले सर्व सुविधायुक्त ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया। केंद्रीय मंत्री ने इस संवेदनशील जनहित मुद्दे पर बेहद गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है, जिससे जल्द ही क्षेत्र की जनता को एक आधुनिक अस्पताल की सौगात मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

आंकड़ों में दिख रहा सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा

बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में 17,942 पंजीकृत कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सामाजिक सुरक्षा के तहत 18,308 बीमित व्यक्तियों को सीधा लाभ मिल रहा है। बीमितों की यह अधिक संख्या स्पष्ट करती है कि इस सुरक्षा चक्र का लाभ न केवल श्रमिकों, बल्कि उनके पूरे परिवार तक पहुंच रहा है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 15,66,430 कर्मचारी ईएसआईसी में दर्ज हैं, जिनमें 6,27,260 बीमित पुरुष और 79,237 बीमित महिलाएं शामिल हैं। राज्य में ईएसआईसी के तहत कुल 37,283 नियोजक पंजीकृत हैं, जिनमें से 13,426 सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की यह व्यवस्था श्रमिकों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारी, मातृत्व और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान आर्थिक संबल भी प्रदान करती है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सार्थक पहल पर बलौदाबाजार में 200 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण से न केवल समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा, बल्कि पूरे प्रदेश के संगठित श्रमिक वर्ग में सुरक्षा और विश्वास की भावना और अधिक मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम में हुए शामिल

प्रदेश के सभी संभागों की टॉपर बेटियों को किया सम्मानित, प्रदान की स्कॉलरशिप

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय

बेमेतरा की प्रदेश टॉपर ओमनी वर्मा को एक लाख रुपए की स्कॉलरशिप, विद्यालय को भी मिला एक लाख रुपए का पुरस्कार

प्रदेश में बन रहे 34 नालंदा परिसर, नई दिल्ली के ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण की यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा

एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान, विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक के लिए किया जाएगा तैयार

नई उद्योग नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही गति, बारिश के बाद आयोजित किए जाएंगे रोजगार मेले

रायपुर 19 अगस्त 2026/ शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री श्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

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