ईश्वर दुबे
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आधुनिक और प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर बन रहे वनवासी किसान
रायपुर,24 मई 2026/छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और नारायणपुर के दूरस्थ वनांचलों में कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ा अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) नारायणपुर और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के विभिन्न विकासखंडों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में 5 मई से 20 मई 2026 तक 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का व्यापक आयोजन किया गया। इस 15 दिवसीय अभियान के तहत जिले के बावड़ी, करलाखा, कोडोली, कोखमेड़ा, बेनूर, इराकभट्टी, देवगांव, रेमावंड, कंदाड़ी, कुदला, महिमागवाड़ी, झारावाही, धनोरा, नेदनार, बरेहबेड़ा, नेलांगुर, पदमकोट, कुरुसनार, बासिंग, कच्चापाल, अकाबेड़ा, बोरान्ड, बोरपाल, पालकी, कस्तूरमेटा और गढ़बेंगाल सहित कुल 48 गांवों में विशेष शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।
कृषक-वैज्ञानिक चर्चा: आगामी खरीफ की तैयारी और तकनीकी गुरुमंत्र
अभियान के दौरान आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए 'कृषक-वैज्ञानिक चर्चा' आयोजित की गई, जिसमें कृषि वैज्ञानिकों ने सीधे खेतों और चौपालों पर पहुंचकर किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखाए। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र तोन्डेय ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी और जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाने पर विशेष जोर दिया।
महंगे रसायनों पर किसानों की निर्भरता कम करने के लिए कीट वैज्ञानिक डॉ. आलिया अफरोज ने स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले प्राकृतिक कीटनाशकों—नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और आग्नेयास्त्र की निर्माण विधि और उनके उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी, ताकि किसान कम लागत में प्रभावी तरीके से कीट नियंत्रण कर सकें। वहीं, उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार वर्मा ने किसानों को फल, सब्जी और औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती के तरीके बताए, साथ ही उन्नत किस्मों के चयन और फसलों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) के जरिए आय बढ़ाने की तकनीकें साझा कीं।
शासकीय योजनाओं और डिजिटल एग्रीकल्चर का समन्वय
वैज्ञानिकों के साथ-साथ इस महा-अभियान में विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए, जिन्होंने शासन की महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीणों को रूबरू कराया। कृषि विभाग द्वारा डिजिटल एग्रीकल्चर के तहत एग्रीस्टैक, पीएम किसान सम्मान निधि और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने किसानों को मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अनुशंसित मात्रा में खाद उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण, प्रमुख बीमारियों के लक्षण और उनके उचित उपचार के प्रति पशुपालकों को जागरूक किया। इसके साथ ही, मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली पालन से जुड़ी विभिन्न शासकीय अनुदान योजनाओं, आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों और बेहतर तालाब प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई, ताकि किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकें।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस पूरे 15 दिवसीय सघन अभियान का मुख्य उद्देश्य नारायणपुर जिले के ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाना रहा। किसानों को नई कृषि पद्धतियों, उन्नत तकनीकों, मृदा प्रबंधन, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और उत्पादन लागत को कम करने के उपायों से विस्तार से अवगत कराया गया। पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन के जुड़ाव से अब क्षेत्र के किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता लाकर आर्थिक स्वावलंबन की एक नई इबारत लिख रहे हैं।